योग की शक्ति पाठ का मूल्यांकन अपने शब्दों में कीजिए ? Evaluate the power lesson of yoga in your own words?

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उत्तर- मनुष्य हमेशा खुश रहना चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति यह सोचता है कि काश उसके पास भी कोई जादू या चमत्कारिक शक्ति हो जिससे वह जान सके कि उसके जीवन का उद्देश्य क्या है और कैसे हर समय खुश रह सके। हम लोग शायद विश्वास नहीं करते लेकिन योग ही वह ‘विज्ञान’, ‘शक्ति’ या ‘चमत्कार’ है जो हमारे जीवन को बदल सकता है।

शरीर, मन और आत्मा-हमारे शरीर मन और आत्मा भी कुछ और है, जो शरीर और मन को नियंत्रित करता है जिसे हम “अंतरात्मा” या “चेतना” कहते हैं।

हम केवल शरीर या मन नहीं हो सकते क्योंकि अगर ऐसा होता तो शायद हममें और कम्प्यूटर रोबोट में कोई फर्क नहीं होता। इस बात को हम धर्म से न जोड़ें और खुद चिंतन करें तो हमें यह अनुभव होता है कि कुछ तो है जो हमारे शरीर और मन को नियंत्रित करता है जो एक “शक्ति” या “चेतना” या “आत्मा” है।

यही वह शक्ति है जो हमें कुछ बुरा करने या किसी को दुःख पहुँचाने से रोकती है और यह हमेशा हर परिस्थिति में सही होती है। लेकिन जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज को अनसुना कर देते हैं; तो हमारे मन और शरीर का उस “अंतरात्मा” या शक्ति से संपर्क कमजोर पड़ने लगता है और हम दुःखी रहने लगते हैं।

“योग” संस्कृत शब्द “युज” से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ “जोड़ना” है। योग हमारे शरीर, मन और आत्मा के बीच संयम स्थापित करता है जिसके हमारी सुप्त शक्तियाँ जाग्रत होने लगती है। जैसे-जैसे हम योग करते जाते हैं वैसे हमारे मन, शरीर और आत्मा का संपर्क मजबूत होता जाता है और हमारा जीवन सरल व सकारात्मक हो जाता है।

योग केवल रोगों को दूर करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि शरीर के समस्त रोगों को दूर कर, मस्तिष्क को तनाव मुक्त कर, मन को पवित्र बनाकर आत्मा का ईश्वर से संबंध स्थापित करना है। शरीर का मन पर और मन का शरीर पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए योग ही एक मात्र ऐसी संपूर्ण पद्धति है जो मनुष्य को शरीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बनाती है। जीवन की समस्याओं में हम उलझे रहते हैं जिसके कारण धीरे-धीरे हमारा स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता लेकिन योग एक ऐसा साधन है जिससे हमारा मन और शरीर पर संपूर्ण नियंत्रण होने लगता है और सबसे बड़ी बात यह है, “योग” मनुष्य को आत्म संतुष्टि प्रदान करता है।


Man always wants to be happy. Every person thinks that if he also has some magic or miraculous power so that he can know what is the purpose of his life and how to be happy all the time. We may not believe but Yoga is that ‘Science’, ‘Shakti’ or ‘Miracle’ which can change our life.

Body, Mind and Soul—Our body, mind and soul, is also something else, which controls the body and mind that we call “conscience” or “consciousness”.

We can’t just be body or mind because if that were the case then maybe there would be no difference between us and computer robots. If we do not connect this thing with religion and contemplate ourselves, then we realize that there is something that controls our body and mind which is a “power” or “consciousness” or “spirit”.

This is the power that stops us from doing something bad or hurting someone and it is always right in every situation. But when we ignore our conscience; So the contact of our mind and body with that “antarman” or energy starts to weaken and we start living in unhappiness.

“Yoga” is derived from the Sanskrit word “yuj”, which means “to join”. Yoga establishes restraint between our body, mind and soul, due to which our dormant energies start awakening. As we go on doing yoga, the connection between our mind, body and soul becomes stronger and our life becomes simple and positive.

Yoga is not only the process of removing diseases, but by removing all the diseases of the body, by making the mind free from stress, by making the mind pure and establishing the relation of the soul with God. The body has an effect on the mind and the mind has an effect on the body. Therefore, yoga is the only complete system that makes a man physically, mentally and spiritually strong. We are entangled in the problems of life, due to which gradually we do not have control over ourselves, but yoga is such a means that we start having complete control over our mind and body and the biggest thing is, “Yoga” gives self-satisfaction to man. provides.

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