सभा की सूचना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

0
41

सूचना का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Notice)

किसी भी सभा को वैधानिक रूप से होने के लिए आवश्यक है कि जो व्यक्ति सभा में उपस्थित होने से सम्बन्धित हैं उन्हें सभा की तिथि, समय, स्थान व उस सभा में किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में जानकारी हो। जैसे जानकारी कराने के सम्बन्ध में जो सूचना सदस्यों को भेजी जाती है उसे ही सभा की सूचना कहा जाता है। एफ. पोर्टर तथा जे. विलयन के शब्दों में-“कम्पनी की सभा में उपस्थित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सभा की तिथि, समय, स्थान व सभा में विचारणीय बातों के बारे में भेजा गया संदेश सभा की सूचना के नाम से जाना जाता है। ”

एफ. पोर्टर तथा जे. विलयन के शब्दों में-“कम्पनी की सभा में उपस्थित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सभा की तिथि, समय, स्थान व सभा में विचारणीय बातों के बारे में भेजा गया संदेश सभा की सूचना के नाम से जाना जाता है।

सूचना कौन भेजता है–सामान्यतः सभाओं का आयोजन संचालकों द्वारा किया जाता है। अतः सभा की सूचना संचालकों के अधिकारों के अधीन भेजी जाती है। यदि वार्षिक साधारण सभा के आयोजन में संचालकों द्वारा त्रुटि की जाती है तो केन्द्रीय सरकार कम्पनी सरकार को सभा बुलाने का पत्र प्रस्तुत करने पर भी असामान्य साधारण सभा का आयोजन नहीं किया जाता तो माँग करने वाले सदस्य स्वयं उस सभा को बुला सकते हैं।

सूचना किनको भेजनी चाहिए-कम्पनी अधिनियम के अनुसार सभा की सूचना निम्नांकित व्यक्तियों को भेजी जानी चाहिए।

(i) कम्पनी के प्रत्येक सदस्य को (उन सदस्यों को छोड़कर जिन्होंने अपना पता न तो रजिस्टर्ड है और न नोटिस भिजवाने के लिए कोई पता दिया है) कराया

(ii) प्रत्येक ऐसे व्यक्ति को जो कानूनी प्रतिनिधि की तरह मृत व्यक्ति के अंशों का अधिकारी हो (यदि मृत व्यक्ति स्वयं इस नोटिस को पाने का अधिकारी या) या दिवालिया होने की दशा में उसके निस्तारक को।

(iii) अंकेक्षक सभा का नोटसि पाने का अधिकारी होता है।

सभा की सूचना से सम्बन्धित नियम (Rules Regarding the Notice of the Meeting)

(1) सूचना की अवधि कम्पनी की प्रत्येक सभा कम से कम 21 दिनों की स्पष्ट सूचना देकर बुलायी जा सकती है। ऐसी सूचना लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से निर्धारित की गयी रीति से दी जा सकती है। सभा की सूचना भेजने का दिन निर्धारित करने हेतु इन 21 दिनों में निम्न दिनों को जोड़ना चाहिए

(i) एक दिन सभा की सूचना डाक में डालने का दिन।

(ii) दो दिन डाक से सूचना पहुँचने के दिन |

(iii) एक दिन सभा का दिन।

इस प्रकार स्पष्ट है कि सभा की सूचना कम से कम 25 दिन पूर्व भेजी जाती है तो पच्चीसवें दिन सभा की जा सकती है। इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात यह है कि सभा की सूचना सही समय पर भेजी जाये न कि सभा की सूचना की सही समय पर सुपुर्दगी हो। अतः सही समय पर भेजी गयी सूचना देरी से पहुँचती है तो भी सूचना की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

(2) सभा बुलाने का अधिकार-साधारणतः सभाओं का आयोजन संचालकों द्वारा किया जाता है। यदि संचालकों द्वारा सभा के आयोजन में त्रुटि की जाती है तो अंशधारियों को संचालकों की सभा बुलाने के लिए आग्रह करना चाहिए। यदि अंशधारियों की माँग के बावजूद भी संचालकों द्वारा सभा नहीं बुलायी जाती है तो अंशधारियों द्वारा माँग तिथि 45 दिन के बाद ऐसी सभा; माँग करने के तीन माह के अन्दर बुलायी जा सकती है। यदि संचालकों द्वारा वार्षिक साधारण सभा के आयोजन में त्रुटि की जाये तो केन्द्रीय सरकार स्वयं भी ऐसी सभा को आयोजित कर सकती है।

(3) सूचना देने की कार्यविधि-सभा आयोजित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभा की सूचना व्यक्तियों को ठीक समय पर मिल जाये। सूचना देने के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान है–

(i) सदस्यों को सूचना या तो व्यक्तिगत रूप से या डाक द्वारा रजिस्टर्ड पते पर भेजनी चाहिए।

(ii) यदि किसी सदस्य ने कम्पनी को पहले से यह सूचित कर दिया है कि उसको सूचना रजिस्टर्ड डाक द्वारा या सर्टीफिकेट ऑफ पोस्टिंग द्वारा भेजी जाय और इस सम्बन्ध में खर्चा भी जमा करा दिया हो तो निर्दिष्ट तरीके से सूचना देनी चाहिए। नोटिस डाक में डालने के 48 घण्टे बाद यह समझा जाता है कि नोटिस सदस्य के पास पहुँच गया है।

(iii) यदि संयुक्त अंशधारियों को नोटिस देना ही हो तो उस व्यक्ति को देना चाहिए जिसका नाम अंश रजिस्टर में पहले लिखा हो।

(iv) यदि सभा की सूचना समाचार पत्र में प्रकाशित करवाई जाती है तो यह सूचना उन सदस्यों के पास जिनके रजिस्टर्ड पते कम्पनी के पास नहीं है, उसी दिन प्राप्त हुई समझी जायेगी जिस दिन यह सूचना प्रकाशित हुई है।

(v) निर्धारित किये गये इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना भेजना एम. सी. ए. ने इलेक्ट्रॉनिक • माध्यम से सूचना भेजने के नियम निर्धारित कर दिये हैं। इन नियमों को MGT-18 में एम. सी. ए. की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

(4) सूचना की विषय सामग्री-सूचना में सभी प्रकार, समय, स्थान व तिथि का सही उल्लेख होना चाहिए साथ ही सभा में की जाने वाली कार्यवाही का ब्यौरा भी देना चाहिये। सभा में दो प्रकार के कार्य हो सकते हैं

(a) साधारण कार्यवाही-साधारण कार्यवाही के अन्तर्गत अन्तिम लेखों, संचालकों व अंकेक्षकों की रिपोर्ट, लाभांश की घोषणा, संचालकों की नियुक्ति व अंकेक्षकों की नियुक्ति और उनके पारिश्रमिक के निर्धारण पर विचार किया जाता है।

(b) विशिष्ट कार्यवाही- यदि सभा में कार्य विशिष्ट कार्य करना है तो इसके लिये नोटिस में एक विस्तृत विवरण नत्यी कर देना चाहिए। यद्यपि संचालक मण्डल की सभा के लिए कार्यसूची सूचना के साथ भेजना आवश्यक नहीं है परन्तु साधारणतः कार्यसूची की सूचना के साथ ही प्रेषित कर दिया जा है जिससे सदस्यों को कार्यवाही के विषय में सोचने का अवसर मिल सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here