एजेण्डा या कार्य सूची पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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कार्यक्रम या कार्य सूची का आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Agenda)

जब किसी सभा का आयोजन किया जाता है तो यह आवश्यक होता है कि सदस्यों को इस बार की जानकारी दी जाये कि उस सभा में किन-किन विषयों पर विचार-विमर्श किया जायेगा। इस कार्ड के लिए सभा की कार्य सूची या कार्यक्रम तैयार किया जाता है। कार्यक्रम से आशय, ऐसे विवरण पत्र से है जिसमें सचिव संचालक मण्डल की सहमति से उ कार्यों की सूची बनाता है, जिन पर सभा में विचार किया जाना है। दूसरे शब्दों में, कार्यक्रम किसी कम्पनी की सभा में विचारणीय बातों का क्रमबद्ध विवरण होता है।

एस. ए. शार्लेकर के अनुसार, कार्य सूची या कार्यक्रम एक व्यावसायिक विवरण सभा में वाद-विवाद तथा व्यवहार करना होता है।

ली एण्ड बार के अनुसार, कार्य सूची या कार्यक्रम निश्चित समय पर होने वाली सभा के पश्चात् तैयार किय जाने वाले सूक्ष्म का आधार है।

कार्यक्रम या कार्य सूची के उद्देश्य (Objects of Agenda)

कार्यक्रम या कार्य सूची का निर्माण निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है–

(1) सभा आयोजित करने से पूर्व सदस्यों को इस बात की जानकारी प्रदान करना कि सभा में किन-किन विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना है।

(2) सभा के समय समस्त विषयों पर क्रम से विचार-विमर्श करने के लिए रखा जा सके।

(3) सभा के पश्चात् सचिव को सूक्ष्म तैयार करने में सहायता मिल सके।

कार्यक्रम या कार्य सूची तैयार करते समय ध्यान देने योग्य बातें कार्यक्रम या कार्य सूची तैयार करते समय सचिव को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए–

(1) संक्षिप्त एवं स्पष्ट कार्यक्रम संक्षिप्त एवं स्पष्ट होना चाहिए साथ ही साथ सदस्यों को कार्यक्रम से इस बात की पूरी जानकारी प्राप्त हो सके कि सभा में किन-किन विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना है।

(2) विषयों का क्रम कार्यक्रम में विषयों का क्रम सावधानीपूर्वक निर्धारित किया जाना चाहिए। प्रायः महत्वपूर्ण एवं ऐसे विषय जो सामान्य चलन के हैं तथा जिनमें विवाद उत्पन्न होने की आशा नही है, पहले रखे जाने चाहिए। कम महत्वपूर्ण एवं विवादास्पद मामले उसके बाद रखे जाने चाहिए क्योंकि विवादास्पद विचार-विमर्श करने पर काफी समय व्यय होता है। अधिक समय लगने पर प्रायः कुछ सदस्य सभा छोड़कर चले जाते हैं, फलस्वरूप कम्पनी के मुख्य विषयों पर विचार-विमर्श नहीं हो पाता।

(3) अध्यक्ष के लिए कार्यक्रम अध्यक्ष तथा सचिव को दिया जाने वाला कार्यक्रम सदस्यों के कार्यक्रम से भिन्न होता है अर्थात् सचिव व अध्यक्ष को दिया जाने वाला कार्यक्रम अधिक विस्तृत होता है। क्योंकि इसमें न केवल प्रस्तावों के शब्द बल्कि उनके प्रस्तुतकर्ताओं व समर्थकों के नाम भी दिये जाते हैं तथा नोट्स लेने के लिए भी स्थान छोड़ दिया जाता है।

(4) कार्य का प्रस्तुतीकरण-अंशधारियों की सभा में कार्यक्रम जिल्द बंधी पुस्तक के रूप में अध्यक्ष के सामने रखा जाता है तथा संचालकों की सभा में कार्यसूची को खुले पत्र के रूप में रखा जाता है।

(5) कार्यक्रम तैयार करने का ढंग-कार्यक्रम बनाने के दो ढंग हैं-संक्षेप में एवं विस्तार में जब कार्यक्रम संक्षेप में तैयार किया जाता है तो विषय का केवल शीर्षक लिख दिया जाता है। जैसे-सूक्ष्म पढ़ना, अंकेक्षक की नियुक्ति, संचालकों का चुनाव करना, लाभांश की घोषणा करना आदि। जब कार्यक्रम विस्तार से लिखा जाता है तो निम्न प्रकार का होता है–

(1) गत सभा के सूक्ष्म पढ़ना, सत्यापित करना और इनकी शुद्धता की स्वीकृति स्वरूप अध्यक्ष से हस्ताक्षरित कराना।

(2) यह प्रस्ताव रखना कि श्री नेमीचन्द्र अग्रवाल को वर्ष 2018-19 के लिए कम्पनी का अंकेक्षक नियुक्त किया जायेगा तथा उनको ₹50,000 वार्षिक पारिश्रमिक दिया जायेगा।

(3) चूँकि कम्पनी को लगातार दो वर्षों से हानि हो रही है अतः कोई लाभांश घोषित न किया जाये।

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