बाल अधिकार अधिनियम 1989 पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Write a short note on Child Rights Act 1989.

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मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 25 के परिच्छेद 2 के अन्तर्गत यह प्रावधान किया गया था कि शैशवावस्था में विशेष देखभाल एवं सहायता की आवश्यकता होती है। शिशु के सम्बन्ध में सार्वभौमिक घोषणा के अन्य सिद्धान्तों के साथ उपर्युक्त सिद्धान्त महासभा द्वारा दिनाँक 20 नवंबर, 1959 को अंगीकार किये गये अधिकारों की घोषणा (Declaration on the Rights of the Child) में शामिल किये गये थे। सिविल एवं राजनैतिक अधिकारों पर अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनुच्छेद 23 एवं 24 तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनुच्छेद 10 के अन्तर्गत शिशुओं की देखभाल के लिए प्रावधान किये गये हैं। कई अन्य अन्तर्राष्ट्रीय दस्तावेजों में भी यह कहा गया है कि किसी शिशु की देखभाल पारिवारिक स्नेह और प्रसन्नता के वातावरण एवं प्यार एवं समझ से होनी चाहिए। यद्यपि शिशुओं की देखभाल एवं विकास के सिद्धान्तों की उद्घोषणा की गयी, किन्तु ये सिद्धान्त राज्यों पर बाध्यकारी नहीं थे। अतः यह महसूस किया गया था कि एक ऐसा अभिसमय तैयार किया जाय जो राज्यों पर विधिक रूप से बाध्यकारी हो।

शिशुओं के अधिकार पर अभिसमय (Convention on Rights of the Child) महासभा द्वारा दिनाँक 20 नवम्बर, 1989 को शिशुओं की घोषणा की 30वीं वर्षगांठ पर सर्वसम्मति से अंगीकार किया गया, जो दिनाँक 2 सितम्बर, 1990 को लागू हुआ। 30 अप्रैल, 2011 तक अभिसमय के 193 राज्य पक्षकार बन चुके हैं। अभिसमय 54 अनुच्छेद हैं और यह तीन खण्डों में विभाजित है। अभिसमय शिशुओं के सिविल, राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान प्रदान करने के लिये विश्व की पहली सन्धि है। अभिसूचना को सही मायने में शिशुओं के अधिकारों का बिल (Bill of Rights for Children) कहा जा सकता है। अभिसमय के अनुच्छेद 1 के अन्तर्गत यह कहा गया है कि शिशु ऐसे प्रत्येक मानव को कहा जायेगा जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो, यदि शिशुओं पर लागू किसी विधि के अन्तर्गत वयस्कता इससे पूर्व नहीं प्राप्त हो जाती।

शिशु के अधिकार (Rights of the Child) — अभिसमय में शिशुओं के बहुत से अधिकार निर्दिष्ट किये गये हैं, जिनमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं

1. प्राण का अधिकार (अनुच्छेद 6, परिच्छेद 1)

2. राष्ट्रीयता अर्जित करने का अधिकार (अनुच्छेद 7)

3. अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार (अनुच्छेद 13, परिच्छेद 1)

4. विचार, अंतःकरण एवं धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार (अनुच्छेद 14, परिच्छेद 1)

5. संगम की स्वतन्त्रता एवं शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार (अनुच्छेद 15, परिच्छेद 1)

6. शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 28, परिच्छेद 1)

7. सामाजिक सुरक्षा से लाभ का अधिकार (अनुच्छेद 26, परिच्छेद 1)

8. शिशु के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास हेतु पर्याप्त जीवन स्तर का अधिकार (अनुच्छेद 27, परिच्छेद)।

9. स्वास्थ्य के उत्तम व उच्चतम प्राप्त स्तर के उपभोग तथा बीमारी के उपचार एवं स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना हेतु सुविधाओं का अधिकार (अनुच्छेद 24, परिच्छेद 1) 10. शिशु की एकान्तता, परिवार गृह या पत्राचार में मनमाना एवं विधि विरुद्ध हस्तक्षेप के विरुद्ध संरक्षण का अधिकार (अनुच्छेद 16, परिच्छेद 1)

क्रियान्वयन प्रक्रिया (Implementation Procedure)

शिशुओं के अधिकार पर एक समिति (CRC) अभिसमय का अनुश्रवण 1991 से कर रही है। समिति का अभिसमय के अनुच्छेद 43 के अनुसार उच्च नैतिक स्थिति एवं अन्य क्षमता वाले दस विशेषज्ञों से मिलकर गठन होता है। समिति के सदस्यों का निर्वाचन चार वर्षों के लिए होता है और वे पुनः निर्वाचन के लिए अर्ह होते हैं। अभिसमय के राज्य पक्षकारों का सम्मेलन 12 दिसम्बर, 1995 को हुआ और उसने अनुच्छेद 43 के एक संशोधन को अंगीकार किया जिसके अनुसार समिति की सदस्यता 18 विशेषज्ञों तक बढ़ा दी गयी। संशोधन को महासभा द्वारा दिनांक 21 दिसम्बर, 1995 को स्वीकृति दी गयी। समिति के सदस्यों का निर्वाचन गुप्त मतदान द्वारा राज्य पक्षकारों द्वारा नामित सदस्यों की सूची से किया जायेगा। प्रत्येक राज्य पक्षकार अपने स्वयं के राष्ट्र के बीच एक व्यक्ति को नामांकित कर सकता है।


Under paragraph 2 of Article 25 of the Universal Declaration of Human Rights, it was provided that infancy requires special care and support. The above principles, along with other principles of the Universal Declaration regarding the Child, were included in the Declaration on the Rights of the Child adopted by the General Assembly on 20 November 1959. Provisions have been made for the care of infants under Article 23 and 24 of the International Covenant on Civil and Political Rights and Article 10 of the International Covenant on Economic, Social and Cultural Rights. It has also been said in many other international documents that the care of a child should be done in an atmosphere of family affection and happiness and with love and understanding. Although the principles of child care and development were announced, these principles were not binding on the states. Therefore, it was felt that a convention should be prepared which would be legally binding on the states.

The Convention on the Rights of the Child was unanimously adopted by the General Assembly on 20 November 1989, the 30th anniversary of the Declaration of the Child, which entered into force on 2 September 1990. As of 30 April 2011, 193 States have become parties to the Convention. The convention has 54 articles and is divided into three sections. The Convention is the first treaty in the world to protect the civil, political, economic, social and cultural rights of children. The notification can rightly be called the Bill of Rights for Children. Article 1 of the Convention states that an infant shall be called every human being who is under the age of 18, unless he has attained the age of majority under any law applicable to infants.

Rights of the Child — Many rights of children have been specified in the Convention, including the following

1. Right to Life (Article 6, Article 1)

2. Right to acquire nationality (Article 7)

3. Right to freedom of expression (Article 13, Article 1)

4. Right to freedom of thought, conscience and religion (Article 14, Section 1)

5. Freedom of association and right to peaceful assembly (Article 15, section 1)

6. Right to Education (Article 28, Section 1)

7. The right to benefits from social security (Article 26, paragraph 1)

8. Right to an adequate standard of living for the physical, mental, spiritual and social development of the child (Article 27, paragraph).

9. Right to enjoyment of the best and highest achievable standard of health and to facilities for the treatment of disease and restoration of health (Article 24, section 1) 10. Protection of the privacy of the child, against arbitrary and unlawful interference in the family home or correspondence Rights (Article 16, Section 1)

Implementation Procedure

A Committee on the Rights of the Child (CRC) has been monitoring the Convention since 1991. The Committee is constituted in accordance with Article 43 of the Convention, consisting of ten experts of high moral standing and other competence. The members of the committee are elected for four years and are eligible for re-election. The Conference of the States Parties to the Convention took place on 12 December 1995 and adopted an amendment to Article 43 according to which the membership of the Committee was increased to 18 experts. The amendment was approved by the General Assembly on December 21, 1995. The members of the Committee shall be elected by secret ballot from the list of members nominated by the State Parties. Each State Party may nominate one person from among its own nations.

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