प्रबन्ध संचालक कौन है ? इसकी नियुक्ति कैसे की जाती है ? इसकी नियुक्ति के सम्बन्ध में विभिन्न प्रतिबन्धों की विवेचना कीजिए। Who is the Managing Director? How is it appointed? Discuss the various restrictions regarding its appointment.

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प्रबन्ध संचालक का आशय (Meaning of Managing Director)

प्रबन्ध संचालक कम्पनी का एक मुख्य कर्मचारी अधिकारी माना जाता है जो संचालक मण्डल के निर्देशानुसार कार्य को करता है।

कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 2(54) के अनुसार, “प्रबन्ध संचालक का आशय एक ऐसे संचालक से है, जिसे कम्पनी के समझौते के आधार पर या कम्पनी की साधारण सभा में पारित प्रस्ताव द्वारा या सीमानियम या अन्तनियमों के अन्तर्गत संचालक मण्डल द्वारा प्रबन्ध के पर्याप्त अधिकार दिये जाते हैं, जिन्हें वह प्राप्त न होने पर प्रयोग नहीं कर सकता है। इसमें ऐसा संचालक भी शामिल है जो कि प्रबन्ध संचालक का पद ग्रहण किये हुए हैं चाहे वह किसी भी नाम से पुकारा जाता हो।”

प्रबन्ध संचालक के लक्षण (Characteristics of Managing Director)

प्रबन्ध संचालक के प्रमुख लक्षण निम्न है–

1. कम्पनी का कोई संचालक ही प्रबन्ध संचालक हो सकता है।

2 कम्पनी के प्रबन्ध संचालक को कम्पनी के प्रबन्ध से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण अधिकार दिये।

3. कम्पनी के प्रबन्ध-संचालक को अधिकार किसी समझौते प्रस्ताव अथवा पार्षद सीमानियम पार्षद अन्तनियमों के अधीन दिये जाते हैं।

4. प्रबन्ध संचालक, संचालक मण्डल के निरीक्षण, नियन्त्रण एवं निर्देशन में कार्य करता है।

5. जब किसी व्यक्ति को कम्पनी के संचालक पद से हटा दिया जाता है, अथवा उसका संचालक पद का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो उसका प्रबन्ध संचालक पद भी स्वतः समाप्त हो जाता है।

प्रबन्ध संचालकों के सम्बन्ध में प्रावधान (Provisions Regarding Managing Directors)

प्रबन्ध संचालकों के सम्बन्ध में कम्पनी अधिनियम में निम्न प्रावधान दिये गये हैं–

(I) प्रबन्ध संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Managing Directors)

कम्पनी के प्रबन्ध संचालकों की नियुक्ति के सम्बन्ध में अग्र प्रावधान है–

(1) प्रबन्ध संचालक की नियुक्ति के लिए केन्द्रीय सरकार की अनुमति प्राप्त करना ।

(2) पब्लिक कम्पनी में प्रवन्ध संचालक की नियुक्ति एवं पुनर्नियुक्ति की शर्तों में परिवर्तन पर केन्द्रीय सरकार की अनुमति प्राप्त करना।

(3) केन्द्रीय सरकार परामर्श समिति की सलाह पर प्रबन्ध संचालक की नियुक्ति का आदेश दे सकती है।

(4) प्रत्येक ऐसी पब्लिक कम्पनी या ऐसी प्राइवेट कम्पनी जो पब्लिक कम्पनी की सहायक हो या मानी जाने वाली पब्लिक कम्पनी में प्रबन्ध संचालक या पूर्णकालिक संचालक नियुक्त करना अनिवार्य है, यदि इसकी चुकता अंश पूँजी ₹5 करोड़।

(5) प्रबन्ध संचालक की नियुक्ति निम्न में से किसी भी रीति द्वारा की जा सकती है–

(i) कम्पनी की साधारण सभा में प्रस्ताव द्वारा।

(ii) कम्पनी के साथ किये गये व्हराव द्वारा

(iii) संचालक मण्डल के प्रस्ताव द्वारा।

(iv) पार्षद सीमानियम व अन्तनियम की व्यवस्था द्वारा।

(II) प्रबन्ध संचालक का कार्यकाल (Period of Managing Director)

प्रबन्ध संचालक की नियुक्ति एक बार में 5 वर्ष से अधिक के लिए नहीं की जा सकती तथा प्रबन्ध संचालक के 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने से 2 वर्ष पूर्व उनकी पुनर्नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की जा सकती है। साधारणतः एक व्यक्ति एक ही कम्पनी का प्रबन्ध संचालक बन सकता है।

(III) प्रबन्ध संचालक की अयोग्यताएँ (Disqualifications of Managing Director)

कम्पनी अधिनियम के अनुसार निम्नलिखित व्यक्तियों को प्रबन्ध संचालक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता–

(1) ऐसा व्यक्ति जो दिवालिया घोषित हो चुका हो अथवा ऐसा दिवालिया जिसे मुक्ति प्राप्त न हुई हो।

(2) ऐसा व्यक्ति जिसने अपने ऋणदाताओं का भुगतान न किया हो अथवा रोक दिया हो अथवा समझौता किया हो।

(3) ऐसा व्यक्ति जिसे किसी नैतिक अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दण्डित किया गया हो।

(4) ऐसा व्यक्ति जिसकी आयु 21 वर्ष से कम हो या 70 वर्ष से अधिक हो।

(IV) प्रबन्ध संचालक का पारिश्रमिक (Remuneration of Managing Director) प्रबन्ध संचालक को पारिश्रमिक मासिक भुगतान के रूप में या शुद्ध लाभ के एक निर्धारित प्रतिशत के रूप में या दोनों ही रूप में दिया जा सकता है परन्तु ये पारिश्रमिक बिना केन्द्रीय सरकार की स्वीकृति के एक प्रवन्ध संचालक की दशा में शुद्ध लाभ पर 5% से अधिक तथा एक से अधिक कों की दशा में सब प्रबन्ध संचालकों का कुल पारिश्रमिक शुद्ध लाभ के 10% से अधिक नहीं हो सकता।

(V) पद से मुक्ति (Vocation from Office)

पारा 283 में वर्णित परिस्थितिथी, संचालकों के ऊपर तथा प्रबन्ध संचालकों पर भी लागू होती है। इन परिस्थितियों के लागू होने पर प्रबन्ध संचालक अपने पद से मुक्त हो जाता है। कुछ विशेष आरोपी वैसे-लापरवाही का कारोबार को व्यावसायिक नीतियों के अनुसार न चलाना, कम्पनी के हितों के प्रति कार्य करना सदस्यों या लेनदारों को धोखा देना आदि का दोषी पाये जाने पर केन्द्रीय सरकार प्रबन्ध संचालक को उसके पद से हटा सकती है।

(VI) प्रबन्ध संचालक एवं कम्पनियों की संख्या (Number of Managing Director and Companies)

1. केवल एक ही कम्पनी का प्रवन्ध संचालक होना-कोई भी सार्वजनिक कम्पनी और कोई भी निजी कम्पनी, जो सार्वजनिक कम्पनी की सहायक हो, इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के बाद किसी भी ऐसे व्यक्ति को प्रबन्ध संचालक की तरह नियुक्त नहीं कर सकती है जो किसी दूसरी कम्पनी में प्रबन्ध संचालक के पद पर कार्य कर रहा है।

2. केन्द्रीय सरकार की अनुमति से दो से अधिक कम्पनियों का प्रवन्ध संचालक होना-केन्द्रीय सरकार किसी भी व्यक्ति को दो से अधिक कम्पनियों का प्रबन्ध संचालक नियुक्त किये जाने की अनुमति दे सकती है, यदि ढंग से चलाने के लिए यह आवश्यक है कि सभी कम्पनियों का एक ही प्रबन्ध संचालक रहे।

(VII) प्रबन्ध संचालक का निष्कासन (Vacation of Managing Director)

केन्द्रीय सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह कपट, लापरवाही और कर्तव्य भंग से सम्बन्धित प्रवन्धकों के विरुद्ध मामलों को उच्च न्यायालय को जाँच सौंप सकती है और इस न्यायालय के निर्णय के आधार पर केन्द्रीय सरकार किसी भी व्यक्ति (प्रबन्ध संचालक) को उसके पद से हटा सकती है।

प्रबन्धक का अर्थ (Meaning of Manager)

धारा 2(53) के अनुसार, प्रबन्धक का अर्थ उस व्यक्ति से है जो संचालक मण्डल के निरीक्षण, नियन्त्रण एवं निर्देश के अन्तर्गत कम्पनी के व्यापार का सम्पूर्ण या लगभग सम्पूर्ण प्रबन्ध करता है। इसके आत प्रवन्धक के रूप में कार्य करने वाला संचालक या कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है, चाहे यह किसी अन्य नाम से पुकारा जाता हो। किसी व्यक्ति को प्रबन्धक मानने से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि उसका सम्पूर्ण व्यवसाय पर नियन्त्रण है या नहीं। कम्पनी के किसी एक विभाग या शाखा के प्रबन्धक को प्रबन्धक नहीं कहा जा सकता बल्कि वह मात्र शाखा प्रबन्धक कहलाया जा सकता है।

प्रबन्धक के सम्बन्ध में प्रावधान (Provision Regarding the a Manager)

एक कम्पनी के प्रबन्धक से सम्बन्धित निम्नलिखित प्रावधान महत्वपूर्ण है–

(I) प्रबन्धक की नियुक्ति (Appointment of Manager)—-(1) केवल एक व्यक्ति को मैनेजर नियुक्त किया जा सकता है फर्म अथवा किसी संस्था को नहीं।

(2) मैनेजर के पद के लिए अयोग्य व्यक्ति, जैसे–

(a) दिवालिया व्यक्ति,

(b) नैतिक अपराधी व्यक्ति,

(c) अणदाताओं को भुगतान रोकने वाला व्यक्ति आदि हैं।

(3) प्रथम प्रवन्धक की नियुक्ति के लिए केन्द्रीय सरकार की अनुमति प्राप्त कर लेना आवश्यक होता है।

(4) प्रबन्धक की आयु 21 वर्ष एवं 70 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।

(II) प्रबन्धक की नियुक्ति पर प्रतिबन्ध (Restriction on Appointment of Manager)–

(1) एक व्यक्ति एक ही कम्पनी का मैनेजर नियुक्त किया जा सकता है।

(2) यदि कोई व्यक्ति दो से अधिक कम्पनी का मैनेजर है तो उसे उस तिथि के 1 वर्ष के अन्दर यह निश्चय करना होगा कि वह किस कम्पनी का मैनेजर रहना चाहता है इसकी सूचना केन्द्रीय सरकार को भेजना आवश्यक है।

(III) प्रबन्धक का कार्यकाल (Term of the Office of the Manager) एक कम्पनी किसी भी व्यक्ति को जो प्रबन्धक बनने के लिए योग्य हो, एक समय में 5 वर्ष के लिए नियुक्त कर सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को 5 वर्ष तक और बढ़ाया जा सकता है बशर्ते यह पुनर्नियुक्ति 5 वर्ष समाप्त होने से 2 वर्ष पूर्व ही कर दी गयी हो और केन्द्रीय सरकार की अनुमति प्राप्त कर ली गयी हो।

(IV) प्रबन्धक का पारिमिक (Remuneration of Manager)—प्रबन्धक के पारिश्रमिक के भुगतान के सम्बन्ध में अग्रलिखित प्रमुख प्रावधान है

1. प्रबन्धक के पारिश्रमिक का भुगतान मासिक वेतन के आधार पर अथवा कम्पनी के शुद्ध लाभों के किसी निश्चित प्रतिशत के आधार पर अथवा दोनों ही आधारों पर किया जा सकता है।

2. किसी भी प्रवन्धक का कुल पारिश्रमिक किसी भी दशा में कम्पनी के वार्षिक शुद्ध लाभों के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।

(V) प्रबन्ध के अधिकार, कर्तव्य एवं दायित्व (Powers, Duties and Liabilities of Manager)—प्रवन्धक को जो भी अधिकार एवं कर्त्तव्य प्राप्त होते हैं वे सभी संचालक मण्डल द्वारा ही प्राप्त होते हैं क्योंकि इसे (प्रबन्धक संचालक माल के निर्देशन में) कार्य करना पड़ता है। प्रबन्धक को अपने कार्यों को सावधानीपूर्वक करना चाहिए।

यदि एक असीमित दायित्व वाली कम्पनी में प्रबन्धक का दायित्व असीमित है तो इसका उल्लेख उसकी नियुक्ति की शर्तों में होना आवश्यक है। साथ ही एक कम्पनी मैनेजर के दायित्व को उसी समय असीमित कर सकती है जबकि विशेष प्रस्ताव पास कर लिया गया हो और प्रबन्धक क लिखित सहमति प्राप्त कर ली हो । कम्पनी का प्रबन्धक अपने कार्यों के प्रति स्वयं उत्तरदायित् होता है। कम्पनी के प्रबन्धक को कपट या लापरवाही से किये गये कार्यों से होने वाली हानि लिए कम्पनी से क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है परन्तु वह संरक्षण के लिए न्यायालय आवेदन कर सकता है बशर्ते कि वह यह सिद्ध कर दे कि उसने कार्य ईमानदारी तथा ठीक प्रकार किया है और किसी प्रकार का कोई कपट या कर्त्तव्य भंग नहीं किया है।

(VI) प्रबन्धक को हटाना Removal of Manager) केन्द्रीय सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह एक प्रबन्धक के विरुद्ध मामलों के आधार पर पद से हटाने का आदेश दे सकती है।

(VII) प्रवन्धको का रजिस्टर (Register of Manager)- प्रत्येक कम्पनी को अपने प्रबन्धको से सम्बन्धित एक रजिस्टर अलग से रखना आवश्यक होता है जिसमें प्रायः निम्नलिखित बातों का वर्णन दिया हुआ होता है–

(1) प्रबन्धक का नाम तथा उपनाम,

(2) पिता का नाम,

(3) यदि प्रबन्धक स्त्री है तो उसके पति का नाम,

(4) रहने का पता,

(5) राष्ट्रीयता,

(6) व्यवसाय यदि कोई हो,

(7) उसके द्वारा किसी दूसरी कम्पनी में धारण किये गये पद का उल्लेख,

(8) जन्म तिथि का उल्लेख

(VIII) रजिस्टर का निरीक्षण (Inspection of Register)–धारा 304 के अनुसार, उपरोक्त रखे गये रजिस्टर का निरीक्षण कम्पनी का कोई भी सदस्य बिना फीस के कर सकता है। अन्य व्यक्ति एक रुपया फीस जमा करके प्रबन्धक रजिस्टर को देख सकता है। यदि रजिस्टर के निरीक्षण में कोई कठिनाई होती है तो कम्पनी तथा प्रत्येक दोषी अधिकारी को ₹50 प्रतिदिन के हिसाब से दण्डित किया जा सकता है। न्यायालय को आवेदन करने पर रजिस्टर का निरीक्षण आदेश मिलने पर ही किया जा सकता है।


Meaning of Managing Director

The Managing Director is considered to be a chief employee officer of the company who performs the work as per the directions of the Board of Directors.

According to Section 2(54) of the Companies Act 2013, “Managing Director means a director who has been appointed by the Board of Directors under the memorandum or Articles of Management by agreement of the company or by a resolution passed in the general meeting of the company. are given adequate powers, which he cannot exercise if he does not receive it. This includes a director who holds the office of a managing director, by whatever name he is called.”

Characteristics of Managing Director

The main characteristics of a managing director are as follows-

1. Only a director of the company can be a managing director.

2 Gave many important rights related to the management of the company to the managing director of the company.

3. The rights to the managing director of the company are given under any settlement proposal or councilor’s memorandum, councilor’s articles.

4. The Managing Director works under the supervision, control and direction of the Board of Directors.

5. When a person is removed from the post of director of the company, or the term of his directorship ends, then his managing director post also automatically ends.

Provisions Regarding Managing Directors

The following provisions have been given in the Companies Act in relation to the managing directors –

(I) Appointment of Managing Directors

In relation to the appointment of managing directors of the company, the following provisions are there-

(1) To obtain the permission of the Central Government for the appointment of the Managing Director.

(2) To obtain the approval of the Central Government on the change in the conditions of appointment and reappointment of the Managing Director in a public company.

(3) The Central Government may, on the advice of the Consultative Committee, order the appointment of a Managing Director.

(4) It is mandatory for every public company or such private company which is a subsidiary of a public company or deemed to be a public company to appoint a managing director or a whole-time director, if its paid-up share capital is ₹ 5 crore.

(5) The Managing Director may be appointed by any of the following methods-

(i) By resolution in the general meeting of the company.

(ii) by transaction with the company

(iii) By resolution of the Board of Directors.

(iv) By the provision of council memorandum and articles.

(II) Period of Managing Director

The Managing Director cannot be appointed for more than 5 years at a time and he can be re-appointed for 5 years 2 years before the expiry of the term of 5 years of the Managing Director. Generally, one person can be the Managing Director of only one company.

(III) Disqualifications of Managing Director

According to the Companies Act, the following persons cannot be appointed to the post of Managing Director-

(1) A person who has been declared insolvent or an insolvent who has not been discharged.

(2) A person who has not paid or withheld or settled his creditors.

(3) A person who has been punished by a court of law for a moral offence.

(4) A person who is less than 21 years of age or more than 70 years.

(IV) Remuneration of Managing Director: The remuneration of the managing director may be paid by way of monthly payment or by a prescribed percentage of the net profit, or by both, but without the sanction of the Central Government. The total remuneration of all the managing directors cannot exceed 10% of the net profit in the case of one managing director and 5% of the net profit in case of more than one operator.

(V) Vacation from Office

The situation described in Para 283 is applicable to the operators and also to the managing directors. In the event of these circumstances, the Managing Director is relieved of his post. The Central Government can remove the Managing Director from his post if he is found guilty of some special accused, such as negligent business not running according to business policies, working towards the interests of the company, defrauding the members or creditors, etc.

(VI) Number of Managing Director and Companies

1. Only one company to be managing director.—No public company and any private company which is a subsidiary of a public company, may, after the commencement of this Act, appoint any person to be a managing director who Working as Managing Director in another company.

2. More than two companies to be managing director with the permission of the Central Government.- The Central Government may permit any person to be appointed as the managing director of more than two companies, if it is necessary for the proper functioning of all the companies. Had only one Managing Director.

(VII) Vacation of Managing Director

The Central Government is empowered to entrust the investigation to the High Court in cases against the managers relating to fraud, negligence and breach of duty and on the basis of the decision of this Court, the Central Government may refer any person (management Luck) from his post.

Meaning of Manager

According to section 2(53), “manager” means a person who under the supervision, control and direction of the Board of Directors manages the whole or almost the whole of the business of the company. This includes the operator or any other person acting as a manager, by whatever other name he may be called. Before considering a person as a manager, it is necessary to know whether he has control over the whole business or not. The manager of any one department or branch of the company cannot be called a manager but he can only be called a branch manager.

Provision Regarding the a Manager

The following provisions are important related to the management of a company-

(I) Appointment of Manager—- (1) Only one person can be appointed manager, not a firm or an organization.

(2) Persons ineligible for the post of Manager, such as-

(a) the insolvent person,

(b) a moral delinquent person,

(c) A person withholding payment to the creditors etc.

(3) For the appointment of the first manager, it is necessary to obtain the permission of the Central Government.

(4) The age of the manager should be between 21 years and 70 years.

(II) Restriction on Appointment of Manager–

(1) One person can be appointed as the manager of only one company.

(2) If a person is the manager of more than two companies, he must decide within one year from the date on which he wants to be the manager of the company, it is necessary to send the information to the Central Government.

(III) Term of the Office of the Manager A company can appoint any person who is qualified to be a manager for a period of 5 years at a time. If necessary, this period can be extended for a further period of 5 years, provided this reappointment has been made two years before the expiry of 5 years and the permission of the Central Government has been obtained.

(IV) Remuneration of Manager – The following are the main provisions regarding the payment of manager’s remuneration.

1. Manager’s remuneration may be paid on the basis of monthly salary or on the basis of a certain percentage of the net profits of the company or on both basis.

2. The total remuneration of any manager shall not in any case exceed five per cent of the annual net profits of the company.

(V) Powers, Duties and Liabilities of Manager – All the rights and duties that the manager receives are received only by the Board of Directors because it is (under the direction of the manager, director of goods). ) has to work. The manager should do his work carefully.

If the liability of the manager is unlimited in a company with unlimited liability, it must be mentioned in the conditions of his appointment. Also, a company can limit the liability of the manager only if a special resolution has been passed and the written consent of the manager has been obtained. The manager of the company is responsible for his own actions. The manager of the company does not have the right to receive compensation from the company for the loss caused by fraud or negligence, but he can apply for protection to the court, provided he proves that he did the work honestly and properly. and has not committed any fraud or breach of duty.

(VI) REMOVAL OF MANAGER REMOVAL OF MANAGER The Central Government is empowered to order the removal of a manager on the basis of cases against him.

(VII) Register of Managers – Every company is required to keep a separate register related to its managers, in which the following things are often described-

(1) the name and surname of the manager,

(2) Father’s name,

(3) If the manager is a woman, the name of her husband,

(4) residence address,

(5) Nationality,

(6) Business, if any,

(7) a reference to the office held by him in any other company,

(8) Mention of date of birth

(VIII) Inspection of Register – According to section 304, any member of the company can inspect the above kept register without fee. Another person can view the manager’s register by paying a fee of Re. If there is any difficulty in the inspection of the register, then the company and every guilty officer can be punished on the basis of ₹ 50 per day. The inspection of the register can be done only after receiving the order on application to the court.

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