वन्य जीवों के संरक्षण हेतु भारत सरकार ने कौन-कौन से अधिनियम पारित किये है ? किन्हीं दो का संक्षिप्त विवरण दीजिए। Which Acts have been passed by the Government of India for the protection of wildlife? Give a brief description of any two.

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(a) इण्डियन बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ (Indian Board of Wildlife : IBWL)

यह भारत सरकार का मुख्य सलाहकार है। इसे सर्वप्रथम 1952 में एक सलाहकार (advisory body) के रूप में सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ (Central Board of Wildlife) के नाम से बनाया गया। बाद में इसे दोबारा नाम IBWL दिया गया। अपनी पहली सभा के दौरान, बोर्ड ने भारत में वन्यजीवन संरक्षण के लिए कानून बनाने की सिफारिश की। वन्य जीव (अधिनियम) संरक्षण (Wildlife Protection Act) 1972 में लागू की गई, जो सभी राज्यों द्वारा कार्य में लायी गयी।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड स्पिशीज (Convention of International Trade in Endangered Species) (CITES) का विधान और भारत की आयात एवं निर्यात पद्धति, वन्यजीव रक्षण के क्षेत्रीय डिप्टी डायरेक्टर (Deputy Director) के दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई स्थित कार्यालयों द्वारा राज्य वन्य जीवन शाखा (state wildlife wings) और सीमा शुल्क विभाग (custom departments) की सहायता से सतत् दृढ़ होती है। वन्यजीव (रक्षण) संशोधन बिल, 1991 में संसद (parliament) द्वारा पारित हुआ और इसे 2.10.1991 को भारत के राष्ट्रपति के आरोहांक (concept) प्राप्त होने के पश्चात 1991 के बीच अधिनियम संख्या 44 (Act no. 44 of 1991) की तरह प्रचारित हुआ। चिड़ियाघर अधिकारी (200 authority) बनाने, दुर्लभ और संकटापन्न (endangered) जातियों के रक्षण के नये विधान की धारा इस धारा के अन्तर्गत लागू की गई है।

इण्डियन बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ (Indian Board of Wildlife) को जनवरी, 1991 में फिर से प्रधानमन्त्री के सभापतित्व के अन्तर्गत निर्मित किया गया। IBWL के कार्य निम्नांकित हैं

(1) संरक्षण की उन्नति और वन्यजीवन के शिकार के प्रभावी नियन्त्रण के लिए केन्द्रीय और राज्य सरकार को सलाह देना।

(2) राष्ट्रीय उद्यान (national parks), अभयारण्य और चिड़ियाघर (zoological gardens) के बनाने पर सलाह देना।

(3) सरकार को जीवित प्राणियों नये स्मारकों (trophies) चमड़ा, फर, पंख और अन्य वन्यजीवी उत्पादों के निर्यात सम्बन्धित पद्धति पर सलाह देना।

(4) वन्यजीवन और प्राकृतिक एवं मानव पर्यावरण की लयबद्धता में रक्षण की आवश्यकताओं

पर लोक रुचि को बढ़ावा देना। (5) वन्य जीवन समितियों के निर्माण को बढ़ावा देना और इस प्रकार की समितियों के लिए केन्द्रीय एकीकरण कार्यालय (central coordinating agencies) के रूप में कार्य करना

(b) वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Conservation Act, 1972)

वन्य जीव भी पर्यावरण के अंग हैं, इसलिए पारिस्थितिकीय तंत्र में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। पहले वन्य जीव मनुष्य के हस्तक्षेप से मुक्त था लेकिन पिछले कुछ दशकों में वर्गों के साथ-साथ वन्य जीवों का विनाश होने लगा। विनाश इतना हुआ कि कुछ प्राणियों की संख्या एकदम ही कम हो गई और उनकी जातियाँ समाप्ति के कगार में पहुँच गईं। इसलिए आज इनका संरक्षण अत्यावश्यक हो गया है।

वन्य जीव संरक्षण के कई उपाय किये गये जिसमें से शासकीय स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कार्य अधिनियम बनाना है। हमारे देश में सन 1972 को एक व्यापक और विशद अधिनियम पारित किया गया जिसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का नाम दिया गया। इस अधिनियम का उद्देश्य केवल वन्य जीवों का संरक्षण करना है। इसके अतिरिक्त शासकीय स्तर पर वन्य जीव संरक्षण के लिए एक और प्रयास किया गया, वह है भारत का 42वाँ संविधान संशोधन, 1976 ने वन के साथ वन्य जीवों को भी राज्य-सूची से समवर्ती सूची में अन्तर्विष्ट कर दिया। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के द्वारा वन्य जीवों के संरक्षण के लिए क्षेत्रों को सृजित करना एवं इसके अतिरिक्त वन्य जीवों से सम्बन्धित सभी व्यवसायों को नियन्त्रित करना जिससे इनकी संख्या बढ़ती रहे।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में निहित कुछ वन्य प्राणियों को हमारे यहाँ पूर्ण रूप से संरक्षित प्राणी घोषित कर रखा है। कुछ वन्य प्राणियों का शिकार कुछ विशेष प्रतिबन्धों के साथ ही अनुमति द्वारा किया जा सकता है। कुछ वन्य प्राणी को पीड़क प्राणी के रूप में घोषित किया गया है और इनके शिकार की अनुमति है। हमारे देश में लगभग पहली ईस्वी से अब तक 200 जन्तु तथा पक्षी जातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और आज लगभग 250 जातियाँ विनाश की ओर हैं। इनमें प्रमुख हैं—कृष्ण सार, चीतल, भेड़िया, अनूपमृग, नीलगाय, भारतीय कुरंग, बारहसिंगा, चीता, गेंडा, गिर सिंह, मगर, हसावर, सारंग, श्वेत सारस, पर्वतीय बटेर इत्यादि।

अधिनियम में यह प्रावधान है कि वन्य प्राणियों का संरक्षण अच्छी तरह हो, इसलिए राष्ट्रीय पार्कों एवं अभयारण्यों की स्थापना की जाये। इस अधिनियम में यह उपबन्ध है कि वन्य प्राणियों का विनाश एवं शोषण नहीं किया जा सकता, इनको पार्कों से भी नहीं हटाया जा सकता, इनके प्राकृतिक आवास का नाश, विनाश नहीं किया जा सकता, यदि इन सभी की आवश्यकता होगी तो वन्य प्राणी प्राधिकारी (जो इसके लिए सक्षम हॉ) से प्राप्त परमिट के पश्चात् ही करेंगे। यह परमिट भी तभी प्रदान किया जायेगा जब उनका कार्य पार्क के वन्य प्राणियों की उन्नति और अच्छे प्रबन्धन के लिए आवश्यक है। इस अधिनियम के तहत मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक अभयारण्यों तथा राष्ट्रीय पार्क में आवश्यकतानुसार कुछ क्रिया-कलापों के लिए अनुमति दे सकता है, जैसे–चराई, मत्स्य आखेट इत्यादि। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार अनुमोदित आज्ञा-पत्र के द्वारा पार्कों और अभयारण्यों में शिकार प्राधिकृत कर सकती है।


(a) Indian Board of Wildlife : IBWL

It is the Chief Adviser to the Government of India. It was first created in 1952 as an advisory body under the name Central Board of Wildlife. Later it was renamed as IBWL. During its first meeting, the board recommended enactment of legislation for wildlife conservation in India. The Wildlife Protection Act was enacted in 1972, which was implemented by all the states.

The Wildlife (Protection) Act, 1972 and the Convention on International Trade in Endangered Species (CITES) legislation and import and export practices of India, Regional Deputy Director of Wildlife Protection, Delhi, The state wildlife wings and customs departments are continuously strengthened by the offices located in Mumbai, Kolkata and Chennai. The Wildlife (Protection) Amendment Bill, 1991 was passed by the Parliament and was adopted as Act No. 44 of 1991 between 1991, after receiving the concept of the President of India on 2.10.1991. Promoted. The section of the new legislation to create zoo officers (200 authority), protection of rare and endangered species has been implemented under this section.

The Indian Board of Wildlife was again created in January 1991 under the chairmanship of the Prime Minister. Following are the functions of IBWL

(1) To advise the Central and State Governments for the promotion of conservation and the effective control of poaching of wildlife.

(2) To advise on the creation of national parks, sanctuaries and zoos.

(3) To advise the Government on the method of export of living creatures, new trophies, leather, fur, feathers and other wildlife products.

(4) Conservation needs in harmony with wildlife and natural and human environment

To promote public interest. (5) To promote the formation of wildlife societies and to act as central coordinating agencies for such committees.

(b) Wildlife Conservation Act, 1972 (Wildlife Conservation Act, 1972)

Wildlife is also a part of the environment, so they have an important place in the ecosystem. Earlier the wildlife was free from human intervention but in the last few decades, along with the species, the destruction of wildlife started happening. The destruction was so much that the number of some creatures was reduced completely and their species reached the verge of extinction. That is why today their protection has become imperative.

Many measures have been taken for the protection of wildlife, out of which the most important task at the government level is to make an act. In our country in the year 1972, a comprehensive and comprehensive Act was passed which was named as Wildlife Protection Act, 1972. The purpose of this act is only to protect the wildlife. Apart from this, another effort was made for the protection of wildlife at the government level, that is, the 42nd Constitutional Amendment of India, 1976, included wild animals along with the forest in the concurrent list from the state list. Creating areas for the protection of wildlife through the Wildlife Protection Act and in addition to controlling all the businesses related to wildlife so that their numbers continue to grow.

Some of the wild animals contained in the Wildlife Protection Act, 1972 have been declared as fully protected animals here. Hunting of some wild animals can be done only by permission with certain restrictions. Some wild animals have been declared as pest animals and hunting is permitted. 200 species of animals and birds have become extinct in our country from about 1st AD till now and today about 250 species are on the verge of destruction. Prominent among them are-Krishna Saar, Chital, Wolf, Anoop Deer, Nilgai, Indian Kurang, Reindeer, Cheetah, Unicorn, Gir Singh, Magar, Hasawar, Sarang, White Crane, Mountain Quail etc.

There is a provision in the Act that the protection of wild animals should be done well, so national parks and sanctuaries should be established. There is a provision in this act that wild animals cannot be destroyed and exploited, they cannot be removed from the parks, their natural habitat cannot be destroyed, destroyed, if all these are required then the wildlife authority ( Those who are competent for this) will do so only after obtaining a permit. This permit will also be granted only if their work is necessary for the progress and good management of the wildlife of the park. Under this Act, the Chief Wildlife Warden can give permission for certain activities in sanctuaries and national parks, such as grazing, fishing, etc. In addition, the state government can authorize hunting in parks and sanctuaries with an approved permit.

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