कम्पनी की सदस्यता से क्या अभिप्राय है ? सदस्य और अंशधारी में अन्तर समझाइए। What is meant by membership of the company? Explain the difference between member and shareholder.

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सदस्य का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Member)

कम्पनी के सदस्य से आशय किसी भी ऐसे व्यक्ति से है जिसका नाम कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में सदस्य के रूप में या डिपोजिटरी के अभिलेखों में किसी कम्पनी के समता अंशों के हितधारी स्वामी के रूप में लिखा हुआ है। इसके अतिरिक्त जिसने कम्पनी का संचालक बनने एवं योग्यता अंश लेने की लिखित सहमति दे दी है तो वह भी कम्पनी का सदस्य ही माना जाता है।

धारा 2(55) के अनुसार सदस्य से तात्पर्य निम्नानुसार है–

1. कम्पनी के सीमानियम का अभिदान करने वाले अर्थात् उस पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों के सम्बन्ध में यह माना जायेगा कि वे कम्पनी के सदस्य बनने को सहमत हो गये हैं तथा कम्पनी के समामेलन पर उनका नाम कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में सदस्यों के रूप में लिखा जायेगा, वह कम्पनी का सदस्य होगा।

2. प्रत्येक अन्य व्यक्ति जो कम्पनी का सदस्य बनने का लिखित ठहराव करता है तथा जिसका नाम सदस्यों के रजिस्टर में लिखा जाता है, कम्पनी का सदस्य होगा।

3. प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किसी कम्पनी की अंशपूँजी का धारक है और जिसका नाम निक्षेपागार के अभिलेखों में हितधारी स्वामी के रूप में लिखा हुआ है, वह उस कम्पनी का सदस्य माना जायेगा।

इस प्रकार कोई भी व्यक्ति किसी कम्पनी का सदस्य हो सकता है यदि वह निम्न में से किसी भी शर्त को पूरा करता है

(i) यदि वह किसी कम्पनी के सीमानियम का अभिदाता हो और उसका नाम उस कम्पनी के सदस्यों के रिजस्टर में अंकित हो।

(ii) यदि वह किसी कम्पनी का सदस्य बनने का लिखित ठहराव करता हो और उसका नाम उस कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में अंकित हो।

(iii) यदि वह किसी कम्पनी का अंशधारी हो और उसका नाम किसी निक्षेपागार के अभिलेख में उन अंशों के लाभदायक स्वामी के रूप में लिखा हो।

अंशधारी सदस्य हो सकता है, सदस्य का अंशधारी होना आवश्यक नहीं है (Shareholder may be Member, need not be a Shareholder)

सामान्यतः यह कहा जाता है कि “प्रत्येक पंजीकृत अंशधारी कम्पनी का सदस्य होता है किन्तु कम्पनी के प्रत्येक सदस्य का अंशधारी होना आवश्यक नहीं है।” यह कथन निम्नलिखित तथ्यों की ओर संकेत करता है–

1. प्रत्येक पंजीकृत अंशधारी कम्पनी का सदस्य होता है-यह सही है कि प्रत्येक पंजीकृत कम्पनी का सदस्य होता है। इसका कारण यह है कि उस अंशधारी का नाम उस कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में लिखा जाता है। अंशों द्वारा सीमित कम्पनी एवं गारण्टी द्वारा सीमित अंशपूँजी वाली कम्पनी में सदस्य एवं अंशधारी शब्द समानार्थ अर्थों में प्रयोग किया जाता है। इन कम्पनियों का कोई भी व्यक्ति सदस्य तब तक नहीं बनता है जब तक कि उसके नाम अंशों का पंजीयन नहीं हो जाता है।

2. प्रत्येक अंशधारी का कम्पनी का सदस्य होना आवश्यक नहीं है (Every shareholders need not be member of the company) कम्पनी का प्रत्येक अंशधारी कम्पनी का सदस्य हो यह भी आवश्यक नहीं है। ऐसा इसलिए कि कई ऐसे अंशधारी होते हैं जो अपना नाम कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में अंकित नहीं करवा पाते हैं। ऐसा निम्नलिखित दशाओं में होता है–

(i) अंशों का क्रेता जिसने अंश अपने नाम पंजीकृत नहीं कराये हैं-कई व्यक्ति अंश खरीद लेते हैं किन्तु उन्हें अपने नाम पंजीकृत नहीं करवा पाते हैं। ऐसे व्यक्ति तब तक केवल अंशधारी ही रहते हैं जब तक वे अंश उनके नाम पंजीकृत नहीं हो जाते हैं।

(ii) नामांकिती या वैधानिक प्रतिनिधि नामांकिती सदस्य की मृत्यु के बाद अंशधारी तो बन जाता है किन्तु सदस्य तब तक नहीं बनता है जबकि उसका नाम सदस्यों के रजिस्टर में अंकित नहीं कर दिया जाता है। यही स्थिति वैधानिक प्रतिनिधि की होती है।

3. प्रत्येक पंजीकृत सदस्य का अंशधारी होना आवश्यक नहीं है (Every registered member need not necessarily be a shareholder) – दशाओं में निम्नलिखित एक पंजीकृत सदस्य का अंशधारी होना आवश्यक नहीं होता है–

(i) सीमानियम का अभिदाता-जो व्यक्ति सीमानियम के अभिदाता होते हैं, अर्थात् जो उस पर हस्ताक्षर करते हैं वे कम्पनी के प्रथम सदस्य कहलाते हैं। वे कम्पनी का समामेलन होते ही कम्पनी के सदस्य बन जाते हैं या सदस्य माने जाते हैं। उन्हें सदस्य बनने के लिए अंशों का पृथक् से आवेदन भी नहीं करना पड़ता है। समामेलन के बाद जब कम्पनी अंशों का आबंटन करती है तो उन्हें उतने ही अंश स्वतः आबंटित कर दिये जाते हैं जितने अंश लेने की सहमति उन्होंने सीमानियम पर हस्ताक्षर करते समय दी थी। इस प्रकार सीमानियम के अभिदाता अंशों के आबंटन से पूर्व ही कम्पनी के सदस्य बन जाते हैं।

(ii) बिना अंशपूँजी वाली कम्पनी कम्पनियाँ बिना अंश पूँजी के भी पंजीकृत की जा सकती हैं। सामान्यतः कला, वाणिज्य, विज्ञान, दान-पुण्य को प्रोत्साहित करने के लिए बनायी गई कम्पनियों में अंशपूँजी नहीं होती है। ऐसी कम्पनियों के सदस्य अंशधारी नहीं होते हैं।

(iii) पूर्व सदस्य- पूर्व सदस्य न तो कम्पनी का अंशधारी होता है और न सदस्य ही। किन्तु किसी भी पूर्व सदस्य को सदस्य के रूप में उत्तरदायी ठहराया जा सकता है यदि कम्पनी का समापन उसकी सदस्यता समाप्त होने के एक वर्ष में प्रारम्भ हो जाता है।

(iv) प्रदर्शन द्वारा सदस्यता-कभी-कभी कोई व्यक्ति अपने आपको कम्पनी का सदस्य प्रदर्शित करता है अथवा दूसरों का सदस्य प्रदर्शित करने की मौन सहमति प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, ऐसा तब हो सकता है जबकि वह जान-बूझकर अपना नाम सदस्यों के रजिस्टर में लिखा रहने देता है जबकि वह अपने सभी अंश अन्तरित कर चुका है। ऐसी दशा में वह कम्पनी के सदस्य के रूप में उत्तरदायी होता है यद्यपि वह कम्पनी का वास्तव में अंशधारी नहीं होता है।

(v) अंतरण से पूर्व अंशों का विक्रेता-यदि किसी पंजीकृत अंशधारी ने अपने अंश बेच दिये हैं तो वह अंशधारी तब तक कम्पनी का सदस्य बना रहता है जब तक कि उस विक्रेता का नाम कम्पनी के सदस्यों के रजिस्टर में बना रहता है। जब अंश क्रेता के नाम पंजीकृत हो जायेंगे, तभी उसकी सदस्यता समाप्त होगी यद्यपि वह अंशधारी नहीं रहता है।

(vi) दिवालिया-जब कोई सदस्य दिवालिया हो जाता है तो उसके अंश एवं अन्य सम्पत्तियाँ राजकीय प्रापक के अधीन हो जाती हैं। फलतः दिवालिया सदस्य कम्पनी का अंशधारी नहीं रहता है किन्तु तब तक सदस्य अवश्य बना रहता है जब तक कि उन अंशों का पंजीयन किसी अन्य व्यक्ति के नाम नहीं हो जाता है।


Meaning and Definition of Member

Member of a company means any person whose name is mentioned in the register of members of the company as a member or as a beneficial owner of equity shares of a company in the records of the depository. Apart from this, the person who has given written consent to become the director of the company and take the qualifying share, then he is also considered to be a member of the company.

According to section 2(55), the meaning of the member is as under:-

1. Persons subscribing to the memorandum of the company, i.e. signing thereon, shall be deemed to have agreed to become members of the company and on the amalgamation of the company their names in the register of members of the company shall be deemed to be members. shall be written, he shall be a member of the company.

2. Every other person who makes an agreement in writing to become a member of the company and whose name is entered in the register of members, shall be a member of the company.

3. Every person who is a holder of the share capital of a company and whose name is mentioned in the records of the depository as the beneficial owner, shall be deemed to be a member of that company.

Thus, any person can be a member of a company if he fulfills any of the following conditions:

(i) if he is a subscriber to the Memorandum of Association of a company and his name appears in the register of members of that company.

(ii) if he makes an agreement in writing to become a member of a company and his name is entered in the register of members of that company.

(iii) if he is a shareholder of a company and his name is mentioned in the records of any depository as the beneficial owner of those shares.

Shareholder may be member, need not be a Shareholder

It is generally said that “every registered shareholder is a member of the company but every member of the company need not be a shareholder.” This statement refers to the following facts-

1. Every registered shareholder is a member of the company – It is true that every registered shareholder is a member of the company. The reason for this is that the name of that shareholder is written in the register of members of that company. The words member and shareholder are used synonymously in a company limited by shares and in a company with limited share capital by guarantee. No person becomes a member of these companies until the shares are registered in his name.

2. It is not necessary for every shareholder to be a member of the company. This is because there are many such shareholders who are unable to get their names entered in the register of members of the company. This happens in the following cases-

(i) Buyer of shares who have not got the shares registered in their names – Many persons buy shares but are unable to get them registered in their names. Such persons remain only shareholders till those shares are registered in their names.

(ii) The nominee or statutory representative becomes a shareholder after the death of the nominee member but does not become a member until his name is entered in the register of members. The same is the case with the legal representative.

3. Every registered member need not necessarily be a shareholder – In the following cases, it is not necessary for a registered member to be a shareholder-

(i) Subscriber to the memorandum – The person who is a subscriber to the memorandum, that is, the one who signs it, is called the first member of the company. They become members of the company or are considered as members as soon as the company is amalgamated. They do not even have to apply for shares separately to become a member. After the amalgamation, when the company makes allotment of shares, they are automatically allotted the same number of shares as they had agreed to take at the time of signing the memorandum. Thus the subscribers of the memorandum become members of the company even before the allotment of shares.

(ii) Companies without share capital Companies can also be registered without share capital. Generally, there is no share capital in the companies created to promote arts, commerce, science, charity. The members of such companies are not shareholders.

(iii) Ex-member – The former member is neither a shareholder nor a member of the company. But any former member can be held liable as a member if the winding up of the company starts within one year of the expiry of his membership.

(iv) Membership by Display – Sometimes a person represents himself as a member of the company or gives tacit consent to appear as a member of others. For example, this may happen if he knowingly allows his name to be written in the register of members after he has transferred all his shares. In such case he is liable as a member of the company though he is not actually a shareholder of the company.

(v) Seller of shares before transfer – If a registered shareholder has sold his shares, that shareholder continues to be a member of the company so long as the name of the seller remains in the register of members of the company. Only when the shares are registered in the name of the buyer, his membership will be terminated or Although he is not a shareholder.

(vi) Bankruptcy – When a member becomes insolvent, his shares and other properties become subject to the state recipient. As a result, the insolvent member ceases to be a shareholder of the company but must continue to be a member until those shares are registered in the name of some other person.

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