अंशों पर माँग क्या है ? कम्पनी अधिनियम में माँग किये जाने की विधि तथा वैध माँगों के सम्बन्ध में व्यवस्थाओं की विवेचना कीजिए। What is the demand for shares? Discuss the method of making demands in the Companies Act and the provisions regarding valid demands.

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माँग अथवा याचनाओं का अर्थ (Meaning of Calls)

सामान्यतः अंशपूँजी वाली कम्पनियों अंशों के अंकित मूल्य को एक साथ न लेकर अपनी आवश्यकता के अनुसार थोड़ी-थोड़ी राशि माँगती रहती हैं। कम्पनियाँ कुछ राशि आवेदन पर (जो कि अंशों के अंकित मूल्य से 5 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए), कुछ राशि आवण्टन पर तथा शेष राशि पहले से निर्धारित किश्तों में विभिन्न समयों पर माँगती है। आबण्टन के बाद पूँजी की जो धनराशि अंशधारियों से मांगी जाती है, उन्हें माँग अथवा याचना कहते हैं। इन याचनाओं के लिये संचालक सभा द्वारा प्रस्ताव पास किये जाते हैं और प्रत्येक अंशधारी को याचना करने के बाद याचना की धनराशि के भुगतान के लिये कुछ समय दिया जाता है जिसके अन्दर अंशधारी इस धनराशि का भुगतान करते हैं।

माँग सम्बन्धी वैधानिक व्यवस्थायें या प्रावधान (Legal Provisions Regarding Calls)

कम्पनी अधिनियम, पार्षद अन्तर्नियमों अथवा सारणी ‘एफ’ (Table F) की व्यवस्थाओं एवं व्यायालयों के निर्णयों के आधार पर एक वैध माँग के लिये निम्नलिखित वैधानिक व्यवस्थायें हैं–

(1) याचना का अंशो के अंकित मूल्य के 25 प्रतिशत से अधिक न होना-संचालक मण्डल समय-समय पर सदस्यों पर उनके अंशों की राशियों के लिये याचनायें कर सकते हैं परन्तु कोई भी याचना अंश के अंकित मूल्यों के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(2) याचनाओं में समयान्तर-दो याचनाओं के बीच कम से कम 1 माह का अन्तर अवश्य होना चाहिए।

(3) पार्षद अन्तर्नियमों के अनुसार याचनाये-यदि कम्पनी ने अपने पार्षद अन्तर्नियम बनाये है तो याचनायें पार्षद अन्तर्नियमों की व्यवस्थाओं और रीति के अनुसार की जानी चाहिए।

(4) भुगतान के लिये 14 दिन की सूचना देना-याचना पर माँगी हुई धनराशि के भुगतान के लिये कम से कम 14 दिन पूर्व सूचना देनी आवश्यक है।

(5) याचना स्थगित करने का अधिकार संचालक सभा को याचना को स्थगित करने का अधिकार होता है।

(6) संचालक मण्डल द्वारा प्रस्ताव पास किया जाना एक याचना उस समय की हुई मानी जायेगी जबकि संचालक मण्डल उस याचना के लिये प्रस्ताव पास करते हैं। ऐसे प्रस्ताव पास होने की तिथि याचना-पत्र की तिथि मानी जाती है।

(7) संयुक्त स्वामी का संयुक्त रूप से उत्तरदायी होना-अंशों के संयुक्त स्वामी याचनाओं का भुगतान करने के लिए संयुक्त एवं पृथक् रूप से उत्तरदायी होते हैं।

(8) उचित अवधि में भुगतान न करने पर 5% वार्षिक ब्याज देना-यदि याचना पर माँगी गयी धनराशि का भुगतान किसी अंशधारी द्वारा उस दिन तक नहीं किया जाता, जो भुगतान के लिये निश्चित है, तो अंशधारी को इस दिन से उस समय तक के लिये जबकि इन याचनाओं का भुगतान किया जाता है 5% वार्षिक दर से (या ऐसी कम दर से जिसे संचालक निर्धारित करें) ब्याज देना पड़ता है।

(9) ब्याज माफ करने का अधिकार-संचालक-मण्डल को यह अधिकार होता है कि याचनाओं पर ब्याज को पूर्णतः या अंशतः माफ कर दे।

(10) अग्रिम लेने का अधिकार संचालक मण्डल को यह अधिकार होता है कि वह ऐसे किसी भी सदस्य से, जो याचनाओं की अग्रिम राशि देना चाहे, याचनाओं पर अग्रिम राशि ले सकता है।

(11) अग्रिम राशि पर 6% तक ब्याज देने का अधिकार-याचनाओं की इस अग्रिम राशि पर 6% तक ब्याज दिया जा सकता है।

(12) याचना का भुगतान नकदी अथवा अन्य प्रकार से होना-याचना का भुगतान नकदी में या अन्य प्रकार से किया जा सकता है। यदि इसका आशय कम्पनी द्वारा रोकड़ प्राप्त करने के बराबर माना जाये।

याचना करने की विधि (Procedure for Making a Call)

याचना करने के लिए प्रायः निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाती है —

1. जब कभी कम्पनी को अंशों के आवण्टन के बाद धन की आवश्यकता पड़ती है तो याचना करने के लिए एक संचालक सभा बुलाई जाती है। इस सभा में याचना के लिये प्रस्ताव पास किया जाता है।

2. संचालकों द्वारा याचना का प्रस्ताव पास होने के बाद कम्पनी का सचिव एक याचना सूची तैयार करता है जिसमें अंशधारियों के नाम तथा पते, याचना की अवधि आदि का वर्णन होता है।

3. याचना-पत्र (Call-Letter) कम्पनी के सचिव के द्वारा याचना-पत्र बनाये जाते हैं जिनमें उन सभी मुख्य मुख्य बातों का उल्लेख होता है जिन्हें संचालक ने याचना के सम्बन्ध में पास किया है।

4. याचना – पत्र की सूचना सदस्यों का भेज दी जाती है। कुछ कम्पनियाँ याचनाओं की सूचना समाचार पत्रों के द्वारा भी प्रकाशित कराती हैं ताकि अंशधारियों को इसका ज्ञान प्राप्त हो सके।

5. सदस्यों के द्वारा माँग पर देय राशि साधारणतया कम्पनी के बैंक में जमा करा दी जाती है। बैंक उन्हें ऐसे भुगतान की रसीद दे देता है। बैंक याचनाओं की प्राप्तियों का विवरण कम्पनी के पास भेज देता है।

याचना राशि का भुगतान न करने के प्रभाव (Effects of Non-Payment of a Call)

याचना राशि का भुगतान न करने के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं–

1. यदि कोई संचालक याचना राशि का भुगतान निर्धारित अवधि के 6 माह तक नहीं करता, तो उसे अपना पद छोड़ना पड़ेगा।

2. याचना का भुगतान न करने पर अंशधारी अपने अंशों को कम्पनी को लौटाने के लिये बाध्य होता है।

3. याचना के लिये निर्धारित भुगतान तिथि से याचना के भुगतान होने की तिथि तक की अवधि के लिये अंशधारी 5 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लिया जा सकता है।

4. कम्पनी के द्वारा उचित सूचना दिये जाने पर भी अंशधारी के द्वारा याचना का भुगतान न किये जाने पर कम्पनी ऐसे अंशों को जब्त कर सकती है।


Meaning of Calls

Generally, companies with share capital keep asking for small amount according to their requirement by not taking the face value of the shares together. Companies ask for some amount on application (which should not be less than 5 percent of the face value of the shares), some amount on allotment and the remaining amount in pre-determined installments at different times. The amount of capital which is demanded from the shareholders after allotment is called demand or solicitation. For these solicitations, resolutions are passed by the Board of Directors and after making the solicitation, some time is given to each shareholder to pay the amount of the solicitation within which the shareholders pay this amount.

Legal Provisions Regarding Calls

The following are the legal arrangements for a valid demand on the basis of the provisions of the Companies Act, Councilor’s Articles or Table ‘F’ and the decisions of the courts –

(1) Calling should not exceed 25 percent of the face value of shares – The Board of Directors may from time to time make solicitations on the members for the amount of their shares, but no call should exceed 25 percent of the face value of the shares. needed.

(2) Time difference in solicitations – There must be a gap of at least 1 month between two requests.

(3) Solicitations in accordance with the Articles of Councilors – If the company has made its Articles of Councilors, the solicitations should be made in accordance with the provisions of the Articles of Councilors and in the manner.

(4) Giving 14 days’ notice for payment – At least 14 days’ notice is necessary for payment of the amount demanded on the request.

(5) The right to adjourn the requisition The Director’s Assembly has the right to adjourn the requisition.

(6) Passing of resolution by the Board of Directors A solicitation shall be deemed to have been made at the time when the Board of Directors passes the resolution for that requisition. The date of passing of such proposal is considered as the date of petition.

(7) Joint owner to be jointly liable – The joint owners of the shares are jointly and severally liable for the payment of solicitations.

(8) Paying 5% annual interest for non-payment within a reasonable period- If the amount called for on the call is not paid by a shareholder till the day which is fixed for payment, the shareholder shall be liable to pay Where these solicitations are paid for, interest is to be paid at 5% per annum (or at such lower rate as the operator may determine).

(9) Right to waive interest – The Board of Directors has the right to waive the interest on the solicitations wholly or partly.

(10) Right to take advance The Board of Directors has the right to take advance on calls from any member who wishes to give advance amount of the calls.

(11) Right to pay interest of up to 6% on advance amount – up to 6% interest can be given on this advance amount of solicitations.

(12) Call to be paid in cash or otherwise – The payment of call may be made in cash or otherwise. If it means to be considered equivalent to receiving cash by the company.

Procedure for Making a Call

The following procedure is generally followed for making solicitation –

1. Whenever the company requires money after allotment of shares, a Board of Directors is convened to make solicitations. In this meeting a motion for solicitation is passed.

2. After the resolution of solicitation is passed by the directors, the secretary of the company prepares a call list in which the names and addresses of the shareholders, period of solicitation etc. are described.

3. Call-letter: Letters of call are made by the secretary of the company, in which all those main things are mentioned which the director has passed in relation to the solicitation.

4. Notice of call letter is sent to the members. Some companies also get the information of solicitations published through newspapers so that the shareholders can get knowledge about it.

5. The amount payable by the members on demand is generally deposited in the bank of the company. The bank gives them a receipt for such payment. The bank sends the details of receipts of solicitations to the company.

Effects of Non-Payment of a Call

Non-payment of the call amount has the following effects-

1. If any operator does not pay the call amount for 6 months of the stipulated period, then he will have to leave his post.

2. In case of non-payment of the call, the shareholder is bound to return his shares to the company.

3. Interest at the rate of 5% per annum can be charged to the subscriber for the period from the date fixed for the call to the date of payment of the call.

4. The company may forfeit such shares in the event of non-payment of the call by the shareholder even after giving proper notice by the company.

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