अभिप्रेरणा क्या है ? मैस्लो के अभिप्रेरण सिद्धान्त को समझाइये। What is motivation? Explain Maslow’s theory of motivation.

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अभिप्रेरणा का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Motivation)

अभिप्रेरणा मानव की अन्तःप्रेरणा होती है, जिससे प्रेरित होकर व्यक्ति स्वयं कार्य करने का हक होता है। किसी भी व्यक्ति में कार्य करने की योग्यता तो हो सकती है, लेकिन कार्य उसी दशा से सम्पन्न हो सकेगा जब वह व्यक्ति कार्य करने के लिए प्रेरित हो। अतः किसी भी व्यक्ति से कार्य के निष्पादन कराने के लिये उसे अभिप्रेरणा देना आवश्यक है। अभिप्रेरणा या उत्प्रेरणा वह शक्ति है जो को अधिकाधिक कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। धन से किसी भी व्यक्ति की भौतिक उपस्थिति प्राप्त की जा सकती है किन्तु उसका साहस, प्रेरणा, निष्ठा तथा पहलशक्ति प्राप्त नहीं की जा सकती है। ये सभी उपलब्धियों अभिप्रेरणा द्वारा ही प्राप्त की जाती है।

(1) केरोल शार्टल (Caroll Shartle) के अनुसार, “अभिप्रेरणा एक निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति या एक निर्दिष्ट दशा में होने की उत्कृष्ट इच्छा या तनाव है।”

(2) एडविन बी. फिलिप्पो (Edwin B. Filippo) के अनुसार, “अभिप्रेरणा लाभ अथवा पुरस्कार की सम्भावना के माध्यम से इच्छानुसार काम कराने के लिए दूसरों को प्रभावित करने का प्रयास करने वाली प्रक्रिया कही जा सकती है।”

(3) माइकल जे. जूसियस (Michel J. Jucius) के अनुसार, “अभिप्रेरणा स्वयं को अथवा किसी अन्य व्यक्ति को वांछित कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करने की क्रिया है अर्थात् वांछित प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए सही बटन को दबाना है।”

मैस्लो का अभिप्रेरणा सिद्धान्त (Maslow’s Theory of Motivation)

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ए. एच. मैस्लो (A. H. Maslow) ने 1943 में मानवीय आवश्यकताओं को क्रमबद्धता के आधार पर इस अभिप्रेरणा सिद्धान्त को विकसित किया। इस सिद्धान्त की यह मान्यता है कि प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताएँ अनेक होती हैं और उनमें क्रमबद्धता पायी जाती है; वैसे-जीवन रक्षक, सुरक्षात्मक, सामाजिक सम्मान, स्वाभिमान एवं आत्म-विकास से सम्बन्धित आवश्यकताएँ। मैस्लो के अनुसार, यदि एक संस्थान इन आवश्यकताओं के क्रम को ध्यान में रखकर कर्मचारियों को अभिप्रेरित करे तो कर्मचारियों को निरन्तर कार्य करने के लिए अभिप्रेरित किया जा सकता है।

आवश्यकताओं की क्रमबद्धता (Hierarchy of Needs)

मैस्लो के अनुसार मानवीय आवश्यकताओं को निम्न पाँच स्तरों में बाँटा गया है—

 

(1) शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological Needs)-ये आवश्यकताएँ मनुष्य को जीवित रखने के लिए आवश्यक होती है। इन आवश्यकताओं की अनुभूति बार-बार होती है। इन आवश्यकताओं की पूर्ति ही श्रमिक को सबसे अधिक अभिप्रेरित करती है। इन आवश्यकताओं में मैस्लो ने भोजन, कपड़ा, मकान, पानी, निद्रा, हवा आदि आवश्यकताओं को सम्मिलित किया है। मैस्लो कहते हैं कि ज्यों ही ये आवश्यकताएं पूरी होती है, त्यों ही ये व्यक्ति को अभिप्रेरित करती है।

(2) सुरक्षात्मक आवश्यकताएँ (Safety Needs)-ये आवश्यकताएँ दूसरे क्रम पर आती है। प्रत्येक व्यक्ति भय एवं अनिश्चितता से सुरक्षा चाहता है। जब उसकी शारीरिक आवश्यकताएँ पूरी हो जाती है तो वह रोजगार की सुरक्षा चाहता है तथा असामयिक दुर्घटनाओं से भी सुरक्षा चाहता है। इस प्रकार वह आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक सुरक्षा को विशेष महत्व देता है।

(3) सामाजिक आवश्यकताएँ (Social Needs)-ये आवश्यकताएँ तीसरे क्रम पर आती है। शारीरिक एवं सुरक्षात्मक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के बाद मनुष्य समाज में अपना स्थान बनाना चाहता है, अन्य लोगों से स्नेह व प्रेम की कामना करता है। मैस्लो ने इस आवश्यकताओं में सामाजिक सम्मान, अन्य व्यक्तियों से सहयोग की अपेक्षा, अच्छी स्थिति आदि को शामिल किया है। इसके अनुसार यदि व्यक्ति की इन सामाजिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि नहीं की जाती तो वह कार्य में बाधा, विरोध एवं असहयोग उत्पन्न करने लगता है। अतः उपक्रम में अनौपचारिक सम्बन्धों का विकास, औद्योगिक प्रजातन्त्र, श्रम सहभागिता आदि योजनाओं का सहारा लेकर इन आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने का प्रयास करना चाहिए।

(4) स्वाभिमान या सम्मान की आवश्यकताएँ (Esteem of Ego Needs)-ये आवश्यकताएँ चौथे क्रम पर आती है। इन आवश्यकताओं में मैस्लो ने प्रतिष्ठा प्राप्त करना, आत्म-सम्मान और आत्म विश्वास की भावना का विकास करना, कार्य की मान्यता प्राप्त करने की भावना आदि को सम्मिलित किया गया है। यद्यपि व्यक्ति की ये सभी आवश्यकताएँ पूरी होनी आवश्यक नहीं है, किन्तु प्रबन्धकों को यथासम्भव कर्मचारियों की इन आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने का प्रयास करना चाहिए।

(5) आत्म प्राप्ति की आवश्यकताएँ (Self-Actualisation Needs)-मैस्लो के आवश्यकता क्रमबद्धता में इन आवश्यकताओं का अन्तिम स्थान होता है। इस स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति अपनी दबी हुई भावनाओं एवं अनुभूतियों को सामने लाने का प्रयास करता है। मैस्लो के शब्दों में, “एक व्यक्ति जो भी हो सकता है, उसे वही होना चाहिए। इसी आवश्यकता को हम आत्म-विकास की आवश्यकता कह सकते हैं। ”

मैस्लो द्वारा निर्धारित उपर्युक्त इन आवश्यकताओं को श्रमिक इसी क्रम में पूरा करने का प्रयास करता है और मनुष्य जैसे ही एक आवश्यकता की पूर्ति कर लेता है तो वह फिर दूसरे, तीसरे और आगे की स्तर की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट कराने का प्रयास करता है। परन्तु यह सीमा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है। इन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मौद्रिक एवं अमौद्रिक प्रेरणाओं का होना आवश्यक है।

मैस्लो द्वारा प्रतिपादित आवश्यकता क्रमबद्धता सिद्धान्त की आलोचनाएँ

कुछ विद्वानों ने इस विचारधारा की निम्नलिखित आलोचनाएँ है–

(1) आवश्यकताओं का उपर्युक्त वर्गीकरण प्रत्येक व्यक्ति के लिए एवं प्रत्येक स्थिति में उपयुक्त नहीं है। व्यक्ति एवं स्थान के अनुसार आवश्यकताओं का क्रम अलग-अलग हो सकता है।

(2) सभी व्यक्तियों के लिए एवं सभी परिस्थितियों में आवश्यकताओं का महत्व समान नहीं होता। अर्थात् आवश्यकताओं का महत्व भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न हो सकता है।

(3) यह धारणा भी उचित नहीं है कि जब तक निम्न स्तर की आवश्यकताएँ पूरी नहीं होती है। तब तक उच्च स्तर की आवश्यकताओं की सन्तुष्टि कोई प्रेरणा नहीं देती है।

(4) सामान्य व्यक्ति इतना दूरदर्शी नहीं होता है कि वह अपनी भावी आवश्यकताओं का पहले से ही अनुमान लगा ले।

(5) आवश्यकताओं का यह वर्गीकरण अन्तिम नहीं है। स्वयं मास्लो ने बाद में दो अन्य आवश्यकताओं की ओर ध्यान दिलाया है-एकीकरण की आवश्यकताएँ तथा आध्यात्मिक आवश्यकताएँ।

(6) आवश्यकताओं के स्तर को अनेक घटक प्रभावित करते हैं जिनकी तरफ मास्लो ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इसका प्रमुख उदाहरण है- आय का स्तर। एक व्यक्ति की जितनी अधिक आय होगी उसकी आवश्यकताओं का स्तर भी उतना ही अधिक ऊँचा होगा।

उपर्युक्त आलोचनाओं के पश्चात् भी यह सही है कि मैस्लो द्वारा विकसित आवश्यकता क्रमबद्धता सिद्धान्त का वर्तमान समय में अपना विशेष महत्व है एवं आशावादी दृष्टिकोण पर आधारित है।


Meaning and Definition of Motivation

Motivation is the human’s inner motivation, due to which a person has the right to act by being inspired. Any person can have the ability to do work, but the work can be completed only if that person is motivated to do the work. Therefore, it is necessary to motivate any person to get the work done. Motivation or motivation is the power that motivates one to do more and more work. The physical presence of any person can be obtained from money, but his courage, inspiration, loyalty and initiative cannot be obtained. All these achievements are achieved only by motivation.

(1) According to Carol Shartle, “Motivation is the excellent desire or stress to achieve a certain goal or to be in a specified state.”

(2) Edwin B. According to Filippo (Edwin B. Filippo), “Motivation can be said to be the process of trying to influence others to do what they want through the prospect of profit or reward.”

(3) Michael J. According to Michel J. Jucius, “Motivation is the act of encouraging oneself or another person to do a desired action, that is, to press the right button to elicit a desired response.”

Maslow’s Theory of Motivation

American psychologist A. H. Maslow (A. H. Maslow) developed this motivation theory in 1943 on the basis of the hierarchy of human needs. It is the belief of this theory that the needs of each person are many and there is a hierarchy in them; By the way, the needs related to life-saving, protective, social respect, self-respect and self-development. According to Maslow, if an organization motivates the employees keeping in mind the sequence of these needs, then the employees can be motivated to work continuously.

Hierarchy of Needs

According to Maslow, human needs are divided into the following five levels:

(1) Physiological Needs – These needs are necessary to keep a human alive. These needs are felt over and over again. The fulfillment of these needs motivates the worker the most. In these needs, Maslow has included the needs of food, clothing, shelter, water, sleep, air etc. Maslow says that as soon as these needs are met, they motivate the individual.

(2) Safety Needs – These needs come in second order. Everyone wants protection from fear and uncertainty. When his physical needs are satisfied, he wants security of employment and also wants protection from untimely accidents. In this way, he gives special importance to economic and psychological security.

(3) Social Needs – These needs come in the third order. After satisfying the physical and protective needs, man wants to make his place in the society, seeks affection and love from other people. Maslow has included in these needs social respect, expectation of cooperation from other persons, good standing etc. According to this, if these social needs of the person are not satisfied, then he starts creating obstacles, opposition and non-cooperation in the work. Therefore, efforts should be made to satisfy these needs by taking the help of schemes like development of informal relations, industrial democracy, labor participation etc.

(4) Esteem of Ego Needs – These needs come in the fourth order. These needs include gaining prestige, developing a sense of self-esteem and self-confidence, a sense of being recognized for work, etc. Although all these needs of the individual are not necessary to be fulfilled, but managers should try to satisfy these needs of the employees as far as possible.

(5) Self-Actualisation Needs – These needs have the last place in Maslow’s need hierarchy. At this stage each person tries to bring out his suppressed feelings and feelings. In the words of Maslow, “Whatever a person may be, he must be. This need is what we might call the need for self-development.”

The worker tries to fulfill these needs as prescribed by Maslow in this sequence and as soon as man fulfills one need, he then tries to satisfy the needs of the second, third and so on. But this limit varies from person to person. Monetary and non-monetary motivations are necessary for the fulfillment of these needs.

Criticisms of Maslow’s need hierarchy theory

Some scholars have given the following criticisms of this ideology-

(1) The above classification of needs is not suitable for every person and in every situation. The order of requirements may vary according to the individual and the place.

(2) The importance of needs is not the same for all persons and in all circumstances. That is, the importance of needs can be different in different circumstances.

(3) This assumption is also not correct.

That is until the lower level requirements are met. Till then the satisfaction of higher level needs does not give any motivation.

(4) The common man is not so far-sighted that he can foresee his future needs.

(5) This classification of needs is not final. Maslow himself later pointed out two other needs—the need for integration and the spiritual need.

(6) The level of needs is influenced by many factors which Maslow has not paid any attention to. A prime example of this is the level of income. The higher the income of a person, the higher will be the level of his needs.

Despite the above criticisms, it is true that the need hierarchy theory developed by Maslow has its own special importance in the present times and is based on optimistic view.

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