अंश पूंजी में कमी का क्या अर्थ है ? अशपूंजी में कमी करने की परिस्थितियाँ एवं विधि का वर्णन कीजिये। What is meant by reduction in share capital? Describe the conditions and method of reduction of equities capital.

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अंशपूँजी में कमी का अर्थ (Meaning of Reduction in Share Capital)

किसी कम्पनी की अंशपूँजी में कमी करने का अर्थ है-उसमें परिवर्तन करना। दूसरे शब्दों में, जब कम्पनी के पास अंशपूँजी वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं से अधिक हो जाती है तो ऐसी स्थिति में कम्पनी अपनी अंशपूँजी में कमी कर सकती है।

एक कम्पनी अपनी अंशपूँजी को निम्न रूपों से कम कर सकती है —

(i) चुकता पूँजी का वह भाग जो नष्ट हो, उसे रद्द करके।

(ii) चुकता पूँजी, यदि आवश्यकता से अधिक है तो अंशधारियों को उसका भुगतान करके।

(iii) जो अंश पूर्णदत्त नहीं है उनके अदत्त भाग की देयता को कम करके।

(iv) व्यायालय द्वारा स्वीकृति मिलने पर किसी अन्य विधि द्वारा पूँजी में कमी की जा सकती है।

अंशों द्वारा सीमित कम्पनी तथा गारण्टी द्वारा सीमित कम्पनी जिसमें अंशपूँजी है, अपनी अंशपूँजी में कमी निम्न शर्तों का पालन करते हुए कर सकती है–

(i) कम्पनी ने पूंजी में कमी करने के आशय का विशेष संकल्प पारित कर लिया हो।

(ii) कम्पनी ने उस विशेष संकल्प पर अधिकरण का अनुमोदन प्राप्त कर लिया हो।

(iii) कम्पनी पर सार्वजनिक- निक्षेप के पुनर्भुगतान अथवा उस पर देय भुगतान का बकाया नहीं हो।

अंश पूँजी में कमी के कारण (Causes of Reduction in Share Capital)

(1) पूँजी अधिक होने पर-जब व्यापार में पूँजी की मात्रा आवश्यकताओं से अधिक हो तो उसे कम किया जा सकता है।

(2) अत्यधिक व्यापारिक हानि होने पर जब कम्पनी को बहुत अधिक मात्रा में हानि हो रही हो तो वार्षिक खातों को ठीक करने के उद्देश्य से अपनी अंशपूंजी में कमी कर सकती है।

(3) बनावटी सम्पत्ति को अपलिखित करना-अब कम्पनी के आर्थिक चिट्टे में बनावटी सम्पत्तियों अधिक मात्रा में हो गयी हो जिससे चिठ्ठा अधिक प्रभावशाली व अच्छा प्रतीत न होता हो तो कम्पनी पूंजी में कमी करके इन बनावटी सम्पत्तियों को अपलिखित कर सकती है।

(4) सम्पत्तियाँ अधिक मूल्य पर दिखाने पर जब कम्पनी की स्थायी सम्पत्तियाँ अधिक मूल्य पर हाँ तो पूँजी में कमी करके इन्हें ठीक किया जा सकता है।

अंशपूँजी में कमी की विधियाँ (Methods of Reduction of Share Capital)

अधिकरण की अनुमति से अंशपूँजी में कमी निम्नलिखित विधियों में से किसी भी विधि से कर सकती है–

1. अदत्त पूँजी के सम्बन्ध में अशो पर दायित्व को समाप्त या कम (Extinguishing) करके-अंशपूँजी में कमी करने के लिए अदत्त पूँजी के सम्बन्ध में अंशों पर दायित्व को समाप्त या कम किया जा सकता है।

उदाहरण-एक कम्पनी के अपने ₹10 के अंकित मूल्य वाले अंशों पर ₹8 प्रति अंश प्रदत्त है। इस कम्पनी की अदत्त पूँजी ₹2 प्रति अंश है। कम्पनी इस अदत्त पूँजी के सम्बन्ध में ₹2 प्रति अंश दायित्व को समाप्त कर सकती है। ऐसा करने पर कम्पनी की पूंजी ₹2 प्रति अंश कम हो जायेगी। यदि कम्पनी चाहे तो अदत्त पूँजी दायित्व र एक प्रति अंश की दर से भी कम कर सकती है तथा शेष १ एक और माँग सकती है।

2. नष्ट हो चुकी दत्त पूँजी को निरस्त (Cancelling) करके-कम्पनी अपनी पूँजी को कम करने के लिए अपनी नष्ट हो चुकी प्रदत्त पूँजी को या उस प्रदत्त पूँजी को जो उपलब्ध सम्पत्तियों द्वारा अनिरूपित (unrepresented) है, को निरस्त या अपलिखित भी कर सकती है। इस प्रकार से पूंजी में कमी करते समय अंशों पर दायित्व को समाप्त किया भी जा सकता है अथवा नहीं भी।

उदाहरण-एक कम्पनी के ₹10 के अंकित मूल्य के सभी अंश पूर्ण प्रदत्त हैं किन्तु कम्पनी में भारी हानियों होने के कारण उसकी 70% पूँजी नष्ट हो चुकी है। दूसरे शब्दों में, 70% पूँजी का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई सम्पत्ति नहीं है। ऐसी स्थिति में एक विकल्प तो यह है कि कम्पनी ₹10 के पूर्ण प्रदत्त अंशों को ₹3 के पूर्ण प्रदत्त अंशों में परिवर्तित कर सकती है। इससे कम्पनी की पूँजी कम हो जायेगी और अंशधारियों का कोई अतिरिक्त दायित्व भी उत्पन्न नहीं होगा। दूसरा विकल्प यह है कि कम्पनी अंशों के अंकित मूल्य को ₹10 यथावत रखते हुए उन अंशों पर ₹ 3 प्रति अंश प्रदत्त मान सकती है। ऐसी स्थिति में अंशधारियों का ₹7 प्रति अंश चुकाने का दायित्व बना रहेगा। ऐसा करने से केवल प्रदत्त अंशपूँजी में ही कमी होगी. निर्गमित एवं दत्त पूँजी में कोई कमी नहीं होगी।

3. आवश्यकता से अधिक प्रदत्त पूँजी का भुगतान (Paying off करके-कम्पनी अपनी पूंजी में कमी करने के लिए अपनी प्रदत्त पूंजी में से आवश्यकता से अधिक पूँजी अंशधारियों को लौटा भी सकती है। ऐसा करते समय कम्पनी अंशों पर दायित्व को समाप्त कर भी सकती है और नहीं भी।

उदाहरण-एक कम्पनी की पूंजी में ₹10 के अंकित मूल्य के पूर्ण प्रदत्त अंश है। वह कम्पनी बहुत लाभ कमा चुकी है, फलइसकेपास आवश्यकता से अधिक न एकत्र हो चुका है। अतः कम्पनी इसके अंशधारियों को प्रति का करती है। इससे आवश्यकता से अधिक पूंजी का भुगतान हो जायेगा ऐसा करते समय यदि कम्पनी अपने अंशों के अंकित मूल्य को भी घटाकर ₹5 प्रति अंश कर देती है तो अंधारियों का दायित्व सदैव के लिए घट जायेगा और कम्पनी की एवं प्रदत्त पूंजी में कमी हो जायेगी, किन्तु यदि कम्पनी अंशों के अंकित मूल्य को पचायत रखती है तो सदस्य ₹5 प्रति अंश के लिए उत्तरदायी बने रहेंगे। इससे कम्पनी की निमित पूजी में कमी नहीं होती किन्तु प्रदत्त पूंजी ₹5 प्रति अंश से कम हो जायेगी।

अंशपूँजी में कमी की प्रक्रिया (Procedure of Reduction in Share Capital)– अंशपूँजी में कमी करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाती है —

(1) अन्तर्जियम में अधिकार होना-कम्पनी अंशपूंजी में तभी कर सकती है जबकि अन्तनियमों में ऐसा करने का अधिकार हो ।

(2) विशेष प्रस्ताव पास करना-अंशपूंजी में कभी करने के लिए कम्पनी को एक विशेष प्रस्ताव पास करना पड़ता है। विशेष प्रस्ताव पास किये बिना अंशपूंजी में कमी नहीं की जा सकती है।

(3) अधिकरण की स्वीकृति हेतु आवेदन-कम्पनी द्वारा अंशपूंजी में कमी करने के लिए अधिकरण की स्वीकृति लेना आवश्यक है। इस हेतु कम्पनी को अधिकरण के समक्ष आवेदन करना होता है।

(4) अधिकरण द्वारा सूचना देना आवेदन पत्र प्राप्त करने के पश्चात् अधिकरण यह देखेगा कि कम्पनी द्वारा सार्वजनिक विक्षेप की राशि एवं उस पर देय ब्याज की राशि का भुगतान कर दिया गया है या नहीं। इसके पश्चात् अधिकरण प्राप्त हुए आवेदन की सूचना-(1) केन्द्रीय सरकार, (11) कम्पनी के रजिस्ट्रार, (iii) सेवी (यदि कम्पनी सूचीबद्ध है) तथा (iv) कम्पनी के लेनदारों को देगा।


Meaning of Reduction in Share Capital

To reduce the share capital of a company means to change it. In other words, when the share capital with the company exceeds the present and future requirements, then in such a situation the company can reduce its share capital.

A company can reduce its share capital in the following ways –

(i) By canceling that part of the paid-up capital which is destroyed.

(ii) The paid-up capital, if there is more than the requirement, by paying the same to the shareholders.

(iii) by reducing the liability of the unpaid portion of the share which is not fully paid.

(iv) The capital can be reduced by any other method if approved by the court.

A company limited by shares and a company limited by guarantee having share capital can reduce its share capital subject to the following conditions-

(i) the company has passed a special resolution intending to abate the capital.

(ii) the company has obtained the approval of the Tribunal on that particular resolution.

(iii) the company is not in arrears of repayment of public deposits or payments due thereon.

Causes of Reduction in Share Capital

(1) When the capital is more – When the amount of capital in the business is more than the requirements, then it can be reduced.

(2) In case of excessive business loss, when the company is incurring substantial losses, it may reduce its share capital for the purpose of correcting the annual accounts.

(3) Writing off fictitious assets – Now that there has been a large amount of fictitious assets in the balance sheet of the company, due to which the balance does not appear more effective and good, then the company can write off these fictitious assets by reducing the capital.

(4) If the assets are shown at a higher value, when the fixed assets of the company are at a higher value, then they can be corrected by reducing the capital.

Methods of Reduction of Share Capital

With the permission of the Tribunal, the share capital may be reduced by any of the following methods-

1. By Extinguishing or Extinguishing the liability on shares in respect of paid-up capital – To reduce the share capital, the liability on shares can be abolished or reduced in respect of paid-up capital.

Example- A company is paid ₹8 per share on its shares of face value of ₹10. The paid-up capital of this company is ₹2 per share. The company can liquidate the liability of ₹ 2 per share in respect of this paid-up capital. By doing this the capital of the company will be reduced by ₹ 2 per share. If the company so desires, the paid-up capital liability can be reduced at the rate of T one per share and the balance can be called for one more.

2. By canceling the lost paid up capital – the company may also cancel or write off its lost paid up capital or the paid up capital which is unrepresented by the available assets in order to reduce its capital. can. In this way the liability on the shares may or may not be abolished while reducing the capital.

Example- All the shares of a company with a face value of ₹ 10 are fully paid-up, but due to heavy losses in the company, 70% of its capital has been lost. In other words, there is no asset to represent 70% of capital. One option in such a situation is that the company may convert the fully paid-up shares of ₹10 into fully paid-up shares of ₹3. This will reduce the capital of the company and no additional liability of the shareholders will also arise. Another option is that the company may consider those shares to be ₹ 3 per share paid-up by keeping the face value of the shares as ₹ 10. In such a situation, the liability of the shareholders to pay ₹ 7 per share will remain. Doing so will only reduce the paid-up share capital. There will be no shortfall in the issued and paid up capital.

3. By paying off the excess paid-up capital, the company can also return the excess capital from its paid-up capital to the shareholders to reduce its capital. While doing so, the company can also eliminate the liability on the shares. is and is not.

Example- A company has fully paid-up shares of face value of ₹ 10 in its capital. That company has earned a lot of profit, as a result, it has not collected more than required. Therefore, the company makes copies of its shareholders. This will lead to the payment of more capital than necessary, while doing so, if the company reduces the face value of its shares to ₹ 5 per share, then the liability of the Andharis will decrease forever and the company’s and paid-up capital will decrease, but If the company retains the face value of the shares, the members will continue to be liable for ₹ 5 per share. This does not reduce the fixed capital of the company, but the paid-up capital will be less than ₹ 5 per share.

Process of Reduction in Share Capital- The following procedure is adopted to reduce the share capital –

(1) Having right in the Articles of Association – A company can do in share capital only if it has the right to do so in the Articles of Association.

(2) Passing of a special resolution- The company has to pass a special resolution to do something in the share capital. The share capital cannot be reduced without passing a special resolution.

(3) Application for the approval of the Tribunal – For the reduction of share capital by the company, it is necessary to take the approval of the Tribunal. For this the company has to make an application before the Tribunal It happens.

(4) Intimation by the Tribunal. After receiving the application, the Tribunal shall see whether the amount of public deposit and interest thereon have been paid by the company. Thereafter, the Tribunal shall give notice of the application received – (1) to the Central Government, to (11) the Registrar of Companies, (iii) the Sevy (if the company is listed) and (iv) the creditors of the company.

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