‘अंशों के हरण’ का क्या अर्थ है ? एक वैधानिक हरण की क्या आवश्यक शर्तें है तथा अंशों के हरण का क्या-क्य प्रभाव होता है ? समझाइये। What is meant by ‘forfeiture of shares’? What are the essential conditions of a statutory forfeiture and what are the effects of forfeiture of shares? explain.

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  1. अंशों के हरण से आशय (Meaning of Forfeiture of Shares)

पूँजी एकत्रित करने के लिये कम्पनी अंशधारियों पर याचनायें करती है। यदि कोई अंशधारी अपने अंशों पर की गई याचनाओं का भुगतान निरन्तर सूचनाओं के पश्चात् भी नहीं करता, तो संचालक मण्डल एक प्रस्ताव पास कर ऐसे अंशों का हरण कर सकता है। कम्पनी अधिनियम 2013 अंशों के हरण के सम्बन्ध में कुछ नहीं बतलाता है। अतः वैधानिक रूप से कम्पनी तब तक अंशों का हरण नहीं कर सकती जब तक कि कम्पनी के अन्तर्नियमों में इस प्रकार की कोई व्यवस्था न की गई। हो। कम्पनी के पार्षद अन्तर्नियमों के अनुसार अंशों का जब्त करना ही ‘अशों का हरण’ (Forfeiture of shares) कहलाता है और जिन अंशों का हरण किया जाता है उन्हें ‘अपहरित अंश’ (Forfeited (Shares) कहते हैं।

अंशों के हरण करने की विधि (Procedure for Forfeiture of Shares)

अंशों के हरण की विधि कम्पनी के पार्षद अन्तर्नियमों या सारणी ‘एफ’ (Table “F) के अनुसार निम्नलिखित हैं–

1. भुगतान न करने वाले अंशधारियों की सूची संचालक सभा में प्रस्तुत करना-याचना के भुगतान के लिये निर्धारित समय के अन्दर जिन अंशधारियों के द्वारा याचना की राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तो कम्पनी का सचिव ऐसे अंशधारियों की एक सूची बनाता है और इस सूची को संचालक सभा में प्रस्तुत करता है।

2. नोटिस भेजना कम्पनी के पार्षद अन्तर्नियमों में या सारणी ‘एफ’ में दिये गये नियमों को ध्यान में रखते हुए संचालक यह आदेश देते हैं कि ऐसे अंशधारियों के पास नोटिस भेजा जाये जिन्होंने अंशों पर याचना की राशि का भुगतान नहीं किया है। इस नोटिस में अंशधारियों को यह सूचना दी जाती है कि एक निश्चित अवधि तक (जो नोटिस पहुँचने की तिथि से 14 दिन से कम नहीं होनी चाहिए) याचना की धनराशि + ब्याज + अन्य आवश्यक व्ययों का भुगतान कर दिया जाये अन्यथा अंशों का हरण कर लिया जायेगा।

3. भुगतान के लिये एक दूसरा नोटिस भेजना-प्रथम नोटिस के बाद यदि अंशधारी एक निश्चित समय तक भुगतान नहीं करता, तो उक्त आशय का एक दूसरा रजिस्टर्ड नोटिस और भेजा जाता है।

4. हरण के लिये प्रस्ताव पास करना यदि दूसरे रजिस्टर्ड नोटिस के बाद भी कोई अंशधारी भुगतान नहीं करता, तो संचालक सभा को इस तथ्य की सूचना दी जाती है और संचालक अंशों के लिए प्रस्ताव पास कर देते हैं।

5. हरण के प्रस्ताव की सूचना अंशधारी को देना-इस प्रस्ताव के पास होने के बाद अंशधारी को यह सूचना प्रेषित कर दी जाती है कि उनके अंशों का हरण कर लिया गया है, अतः वह प्रमाण पत्र को लौटा दे।

6. प्राप्त धनराशि को अश हरण खाते में हस्तान्तरित करना-हरण किये हुए अंशों पर पहले की प्राप्त धनराशि का ‘अंश-हरण खाते में हस्तान्तरित कर दिया जाता है।

7. रजिस्टर से नाम हटाना-सदस्यों के रजिस्टर से ऐसे अंशधारी का नाम हटा दिया जाता है जिसके अंशों का हरण कर लिया गया है।

8. हरण की घोषणा करना-कम्पनी का कोई अधिकृत अधिकारी लिखित में यह घोषणा करता है कि किस-किस क्रम संख्या वाले अंशों का हरण किया गया है।

अंशों के वैधानिक हरण सम्बन्धी व्यवस्थायें

(Provisions Regarding the Statutory Forfeiture of Shares) अंशों का हरण वैधानिक होना चाहिये अन्यथा वह न्यायालय के द्वारा मान्य नहीं होगा अंशी के

वैधानिक हरण के लिये कम्पनी अधिनियम में निम्नलिखित व्यवस्थायें हैं

1. कम्पनी के पार्षद अन्तर्नियमों में व्यवस्थायें कोई भी कम्पनी सामान्यतया तब तक अंशो का हरण नहीं कर सकती जब तक कि पार्षद अन्तनियमों में अंशों के हरण के सम्बन्ध में स्पष्ट रूप से व्यवस्था न कर दी गई हो।

2. हरण करने का उचित औचित्य-अंशों का हरण करने का उचित औचित्य होना चाहिए जो केवल अंशधारियों के द्वारा याचना का भुगतान एक निश्चित समय तक न करना हो सकता है। किसी

अन्य कारण से कम्पनी अंशों का हरण नहीं कर सकती, भले ही कम्पनी के पार्षद अन्तनियमों में

इसके अतिरिक्त व्यवस्था क्यों न हो।

3. हरण करते समय समुचित कार्यवाही किया जाना-अंशों का हरण तब तक वैध नहीं नहीं माना जा सकता जब तक कि उसके लिये उचित कार्यवाही न की गई हो। यदि कोई याचना वैधानिक रूप से नहीं की गई हो तो ऐसी याचना का भुगतान न करने पर संचालक अंशों के हरण की कार्यवाही नहीं कर सकते।

4. हरण की प्रक्रिया उचित तथा वैच होनी चाहिए-अंशों के हरण करने की प्रक्रिया उचित तथा वैव होनी चाहिए अन्यथा अंशों का हरण अवैध माना जायेगा। अंशों के हरण करने की व्यवस्था कम्पनी के पार्षद अन्तनियमों में उल्लिखित वैध नियमानुसार ही होनी चाहिए।

5. संचालकों के द्वारा अंशों के हरण के अधिकार का प्रयोग कम्पनी के हित में किय जाना-अंशों के हरण करन का अधिकार केवल कम्पनी के संचालकों को है उनको इस अधिकार का प्रयोग कम्पनी के हित में करना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो अंशों के हरण को निरस्त किया जा सकता है। इसके लिये अंशधारियों को न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने का भी अधिकार प्राप्त होता है।

अंशों के हरण का प्रभाव (Effects of Forfeiture of Shares)

अंशों का विधिवत् हरण होने पर अंशधारियों के अधिकार व दायित्व पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं–

(1) अंशधारी का अंशों पर स्वामित्व नहीं रहता है।

(2) अंशधारी हरण किये हुए अंशों के सम्बन्ध में कम्पनी का सदस्य नहीं रहता है।

(3) उसे भविष्य में लाभांश मिलने का अथवा अन्य कोई अधिकार नहीं रहता।

(4) अंशधारी केवल उतनी राशि के लिय उत्तरदायी होता है जो कि अंशों के हरण की तिथि पर उसे देनी वी अर्थात् भविष्य में की जाने वाली माँगों के लिये वह उत्तरदायी नहीं होगा।

(5) यदि हरण के एक वर्ष के अन्दर कम्पनी का समापन होता है तो वह उसी भाँति उत्तरदायी होता है जिस तरह कम्पनी के ‘ब’ सूची के धनदाता उत्तरदायी होते हैं।

हरण किये गये अंशों का पुनः निर्गमन (Re-Issue of Forfeited Shares)

हरण किये गये अंशों के पुनः जिरोमन के सम्बन्ध में निम्नलिखित नियम है–

1. संचालक मण्डल की सहमति हरण किये गये अंशों की बिक्री संचालक मण्डल की सहमति से की जा सकती है तथा इन अंशों को समाप्त भी किया जा सकता है।

2. हरण अंशों के पुनः निर्गमन की राशि-हरण किये गये अंशों को उस राशि के कम पर नहीं जा सकता जो कि उन पर बकाया थी अर्थात् कम्पनी के द्वारा जितनी राशि का हरण किया गया है अधिकतम उतनी ही राशि नये अंशधारियों को कटौती के रूप में दी जा सकती है। हरण किये गये अशोको प्रीमियम पर निर्गमित किया जा सकता है।

3. प्रस्ताव पास करना-अंशों को पुनः निर्गमन करने के लिये एक प्रस्ताव पास किया जाता है और इसी प्रस्ताव के आधार पर अंशों की पुनः बिक्री होती है।

4. अंश प्रमाण पत्रों का निर्गमन कम्पनी नये अंशधारी को अंशों का प्रमाण-पत्र निर्गमन करती है।


Meaning of Forfeiture of Shares

In order to raise capital, the company makes solicitations on the shareholders. If a shareholder does not pay the calls made on his shares even after continuous notices, then the Board of Directors can forfeit such shares by passing a resolution. The Companies Act 2013 does not say anything regarding forfeiture of shares. Therefore, legally the company cannot forfeit the shares unless such a provision is made in the Articles of the Company. Ho. According to the Articles of Association of the company, the forfeiture of shares is called ‘Forfeiture of Shares’ and the shares which are forfeited are called ‘Forfeited Shares’.

Procedure for Forfeiture of Shares

The method of forfeiture of shares is as per the Articles of Association or Table ‘F’ of the company-

1. Presenting the list of non-paying shareholders in the Board of Directors – Within the time stipulated for the payment of the call, the Secretary of the company makes a list of such shareholders and makes a list of such shareholders. The director presents the list to the assembly.

2. Sending of notices The Board of Directors of the company, keeping in view the rules given in the Articles or in Table ‘F’, order that notice be sent to such shareholders who have not paid the amount of call for shares. In this notice, it is informed to the shareholders that within a certain period (which should not be less than 14 days from the date of receipt of the notice) the amount of solicitation + interest + other necessary expenses should be paid, otherwise the shares are forfeited. will go.

3. Sending a second notice for payment – After the first notice, if the subscriber does not make the payment within a certain time, a second registered notice to the said effect is sent.

4. Passing of motion for forfeiture If any shareholder does not pay even after the second registered notice, the fact is informed to the Board of Directors and the directors pass the motion for shares.

5. Intimation of the offer of forfeiture to the shareholder – After the proposal is passed, information is sent to the shareholder that his shares have been forfeited, so he should return the certificate.

6. Transfer of the received amount to the forfeiture account – The amount received earlier on the forfeited shares is transferred to the ‘Forfeiture’ account.

7. Deletion of name from the register- The name of such shareholder whose shares have been forfeited is removed from the register of members.

8. Declaring forfeiture.- An authorized officer of the company declares in writing the serial number of shares to be forfeited.

statutory forfeiture of shares

(Provisions Regarding the Statutory Forfeiture of Shares) Forfeiture of shares should be legal, otherwise it will not be valid by the court.

There are following provisions in the Companies Act for statutory forfeiture

1. Provisions in the Councilor’s Articles of the Company No company can ordinarily forfeit shares unless a provision has been made in the Councilor’s Articles to forfeiture of shares.

2. Reasonable justification for forfeiture – There should be a proper justification for forfeiture of shares which may be only due to non-payment of call by the shareholders for a certain period of time. Any

The company cannot forfeit the shares for any other reason, even if the councilors of the company are

Apart from this, why not make arrangements?

3. Appropriate action to be taken while forfeiture – Forfeiture of shares cannot be considered valid unless proper action has been taken for the same. If a call has not been made by law, then the director cannot proceed for forfeiture of shares for non-payment of such call.

4. Procedure for forfeiture should be proper and consistent – The process of forfeiture of shares should be proper and proper, otherwise the forfeiture of shares will be considered illegal. The arrangement for forfeiture of shares should be as per the legal rules mentioned in the Articles of Association of the company.

5. Exercising the right of forfeiture by the directors in the interest of the company – Only the directors of the company have the right to forfeit the shares, they should exercise this right in the interest of the company. If they do not do so, the forfeiture of shares can be cancelled. For this, the shareholders also get the right to present a suit in the court.

Effects of Forfeiture of Shares

Due to forfeiture of shares, the rights and liabilities of the shareholders are affected by the following:-

(1) The shareholder does not have ownership of the shares.

(2) The shareholder ceases to be a member of the company in respect of the forfeited shares.

(3) He has no right to receive dividend in future or any other right.

(4) The shareholder is liable only for the amount which he has to pay on the date of forfeiture of the shares i.e. he will not be liable for future demands.

(5) If the company is dissolved within one year of the forfeiture, then he is liable in the same way as the payees of the ‘B’ list of the company are liable.

Re-Issue of Forfeited Shares

Following are the rules regarding re-rotation of forfeited shares-

1. Consent of the Board of Directors The forfeited shares can be sold with the consent of the Board of Directors.

And these parts can also be eliminated.

2. Amount of re-issue of forfeited shares – The forfeited shares cannot be reduced to the amount that was due on them, that is, the maximum amount forfeited by the company as a deduction to the new shareholders. can be given in Forfeited Ashoko can be issued at premium.

3. Passing of Offer – A resolution is passed for re-issue of shares and on the basis of this offer the shares are re-sold.

4. Issue of Share Certificates The company issues certificate of shares to the new shareholder.

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