असाधारण आम सभा क्या है ? यह कब बुलाई जा सकती है ?

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असाधारण सामान्य सभा (Extra Ordinary General Meeting)

असाधारण सभा कम्पनी के अंशधारियों की सामान्य सभा होती है। यह सभा किसी विशेष कार्य को सम्पन्न करने के लिए बुलाई जाती है। वार्षिक सामान्य सभा के अलावा अंशधारियों की सभी सभाएँ असाधारण सभाएँ कहलाती है। ऐसी सभा का आयोजन तब किया जाता है, जबकि कोई ऐसा आवश्यक कार्य आ जाता है, जिसके लिये वार्षिक सामान्य सभा की प्रतीक्षा नहीं की जा सकती है।

कम्पनी के सदस्यों की वे सभी सभाएँ जो दो वार्षिक साधारण सभाओं के अन्तराल के दौरान होती है, असामान्य साधारण सभाएँ ही कहलाती है। कोई भी कम्पनी जब चाहे अपनी असामान्य साधारण सभा कर सकती है किन्तु किसी भी कम्पनी के लिए ऐसी सभा बुलाना एवं आयोजित करना अनिवार्य नहीं है।

कभी-कभी संचालक मण्डल के सदस्य यह अनुभव करते हैं कि कुछ निर्णयों/कार्यों को अगली वार्षिक साधारण सभा तक टाला नहीं जा सकता है। ऐसी स्थिति में कम्पनी को अपने सदस्यों की तत्काल एक साधारण सभा बुलानी पड़ती है। इसी प्रकार कभी-कभी कम्पनी के सदस्य भी कम्पनी की तत्काल सभा बुलाने की माँग करते हैं। ऐसी सभा को ही असामान्य साधारण सभा कहते हैं |

सरल शब्दों में, “आकस्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वर्ष में किसी भी समय बुलाई जाये वाली सभा कम्पनी की असाधारण, व्यापक या सामान्य सभा कहलाती है।”

असाधारण सामान्य सभा बुलाने के उद्देश्य (Aims of Calling Extra Ordinary General Meeting)

असाधारण सामान्य सभा निम्नलिखित कार्यों के सम्बन्ध में निर्णय करने हेतु बुलाई जाती है–

1. पार्षद सीमानियम के किसी वाक्य में परिवर्तन करने हेतु।

2. पार्षद अन्तर्नियमों की किसी व्यवस्था या नियम में परिवर्तन हेतु।

3. कम्पनी के नाम में परिवर्तन हेतु।

4. कम्पनी अंशपूँजी में कमी या वृद्धि करने हेतु

5. कम्पनी के रजिस्टर्ड कार्यालय को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरित करने हेतु।

6. संचालकों को ऋण देने या उनके पारिश्रमिक में वृद्धि करने हेतु।

7 ऋणपत्र निर्गमन करने हेतु।

8. अन्य किसी विशेष कार्य हेतु।

असाधारण सामान्य सभा किसके द्वारा बुलाई जा सकती है ? (Who is Authorised to Call Extra Ordinary General Meeting)

असामान्य साधारण सभा निम्नलिखित में से किसी के भी द्वारा बुलायी जा सकती है–

I. संचालक मण्डल द्वारा स्वेच्छा से (By the Board at its Own Will)

सामान्यतः कम्पनी के अन्तर्नियमों में भी यह व्यवस्था होती है कि कम्पनी का संचालक मण्डल जब भी उपयुक्त समझे कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुला सकता है। न्यायालय ने भी व्यवस्था की है कि संचालक मण्डल जब भी उपयुक्त एवं कम्पनी के हित में आवश्यक समझे कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुला सकता है।

इसी प्रकार कम्पनी के अन्तर्नियमों में यह व्यवस्था है कि यदि किसी समय संचालक मण्डल की न्यूनतम कार्यवाहक संख्या के बराबर संचालक भारत में नहीं हो तो कम्पनी का कोई भी संचालक अथवा कम्पनी के कोई भी दो सदस्य मिलकर कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुला सकते हैं। यह सभा भी ठीक उसी विधि से बुलाई जानी चाहिये जैसे कि कम्पनी के संचालक-मण्डल द्वारा बुलाई जाती है।

यह उल्लेखनीय है कि संचालक मण्डल असामान्य साधारण सभा बुलाने का संकल्प अपनी सभा में या घर बैठे ही संचरण द्वारा (By circulation) पारित कर सकता है।

जब कम्पनी के संचालक स्वेच्छा से कम्पनी की असामान्य साधारण सभा को बुलाते हैं तो वे स्वयं उसकी कार्यावली (Agenda) निर्धारित करते हैं। ऐसे कार्यावली में सम्मिलित सभी विशेष कार्यों में प्रत्येक के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण तव्यों का व्याख्यात्मक विवरण दिया जायेगा।

II. सदस्यों की भाँग पर संचालक-मण्डल द्वारा (By Board on the Requisition of Members)

कम्पनी का प्रत्येक सदस्य कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुलाने की माँग करने का अधिकार रखता है। किसी भी सदस्य को कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुलाने की माँग करने से निषेधाज्ञा द्वारा भी रोका नहीं जा सकता है। कोई भी सदस्य ऐसी सभा की माँग करने के उद्देश्यों के कारणों को प्रकट करने के लिए भी बाध्य नहीं होता है किन्तु न्यायालय से उसकी माँग पर विचार -अवश्य कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था की है कि सभा की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा यह बताना अनिवार्य नहीं है कि वे किसी संचालक को क्यों हटाना चाहते हैं। वे इस सभा की सूचना में भी संचालक को हटाने के कारणों को स्पष्ट करने हेतु वाध्य नहीं है।

यदि किन्हीं सदस्यों ने अपने अंशों पर याचना राशि (call money) का भुगतान नहीं किया है, तो वे ऐसी सभा को बुलाने की कर सकते है तथा उसमें मतदान भी नहीं कर सकते हैं।

सभा की माँग का हक (Members entitled)- असामान्य साधारण सभा को बुलाने की माँग ने का हक निम्नांकित सदस्यों का है–

(i) अंश पूँजी वाली कम्पनी की दशा में, असामान्य साधारण सभा बुलाने की माँग मताधिकारयुक्त पदत्त अंशपूँजी के कम से कम 10 प्रतिशत भाग के धारकों द्वारा की जा सकती है। माँग करने वालों द्वारा इतनी अंश पूँजी उस तिथि को धारित होनी चाहिये जिस तिथि को ऐसी सभा बुलाने की माँग की जाती है।

(ii) बिना अंशपूँजी वाली कम्पनी की दशा में असामान्य साधारण सभा की माँग कम्पनी के कुल मताधिकार रखने वाले सदस्यों में से कम से कम 10 प्रतिशत मताधिकार रखने वाले सदस्यों द्वारा की जानी चाहिये माँग करने वालों द्वारा इतने मताधिकार उस तिथि को प्राप्त होने चाहिये जिस तिथि को ऐसी माँग की जाती है।

यह उल्लेखनीय है कि यदि कोई एक अकेला सदस्य भी इन अपेक्षाओं को पूरा करता है तो यह अकेला सदस्य भी सभा बुलाने की वैध माँग कर सकता है।

यदि सभा में विचारणीय मामला पूर्वाधिकार अंशधारियों के हितों से सरोकार रखता है तो वे भी सभा कि माँग कर सकते हैं या समता अंशधारियों के साथ मिलकर माँग कर सकते हैं।

सदस्यों की माँग पर सभा बुलाने सम्बन्धी नियम–सदस्यों की माँग पर सभा बुलाने के सम्बन्ध में प्रमुख अन्य नियम निम्नानुसार है–

(i) सभा के माँगपत्र में सभा बुलाने के उद्देश्य या मामलों को स्पष्ट करना चाहिए। जो मामला मॉंगपत्र में नहीं लिखा गया है वह सभा में उठाया नहीं जा सकता है।

(ii) सभा के मॉंगपत्र पर सभा बुलाने की माँग करने वालों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

(iii) सभा का मागपत्र कम्पनी के रजिस्टर्ड कार्यालय में दिया जाना चाहिए।

(iv) सभा का माँगपत्र अलग-अलग प्रपत्रों में हो सकता है किन्तु प्रत्येक मॉंगपत्र पर सभा की माँग करने वाले एक या अधिक व्यक्तियों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं।

संचालक मण्डल द्वारा कार्यवाही (Action by the Board)-जब सभा का वैध मागपत्र प्राप्त होता है तो संचालक मण्डल को उसके प्राप्त होने या कम्पनी के पास जमा होने के 21 दिनों के भीतर सभा बुला लेनी चाहिये तथा 45 दिनों के भीतर सभा आयोजित कर लेनी चाहिये।

जब कम्पनी का संचालक मण्डल सदस्यों की माँग पर कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुलाने का निर्णय कर लेता है तो उसे निम्नांकित कार्यवाही करनी चाहिये–

(i) उस संकल्प की सूचना सभी सदस्यों को देनी चाहिये जो सभा में प्रस्तुत किये जा सकते हैं अथवा जिसे प्रस्तुत करने का सदस्यों का इरादा है।

(ii) उस संकल्प के सम्बन्ध में कोई भी विवरण हो तो उसका सदस्यों में प्रसारण।

यह उल्लेखनीय है कि यदि सभा की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा अपनी सहमति वापस ले ली जाती है अथवा वे अब कम्पनी के सदस्य नहीं रहते हैं तो भी संचालक मण्डल को सभा बुलानी ही पड़ती है किन्तु न्यायालय द्वारा ऐसी सभा के बुलाने पर निषेधाज्ञा जारी कर दी हो तो संचालक मण्डल सभा बुलाने से इन्कार कर सकता है।

III. माँगकर्ता सदस्यों द्वारा (By the Requisitionists)

सभा की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा भी कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुलायी जा सकती है। इस सम्बन्ध में प्रमुख प्रावधान इस प्रकार है–

(i) संचालक मण्डल द्वारा सभा न बुलाना-जब कम्पनी के निर्धारित संख्या में मताधिकार रखने वाले सदस्य कम्पनी के संचालक मण्डल से कम्पनी की सभा बुलाने की वैध माँग करते हैं किन्तु संचालक-मण्डल उस मागपत्र के प्राप्त होने के 21 दिन के भीतर भी सभा नहीं बुलाता है तथा 45 दिनों के भीतर सभा आयोजित नहीं करता है तो सभा की माँग करने वाले सदस्य माँग करने की तिथि से 3 माह के भीतर कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुला सकते हैं।

(ii) सभा बुलाने के अधिकारी-(अ) अंशपूँजी वाली कम्पनी की दशा में, सभा की माँग करने वाले उन सदस्यों द्वारा सभा बुलाई जा सकती है जो कम्पनी की मताधिकारयुक्त कुल प्रदत्त पूँजी कम-से-कम 1/10 भाग की अंशपूँजी को धारित करते हैं।

(ब) यदि कम्पनी बिना अंशपूँजी वाली है तो सभा की माँग करने के दिन कम्पनी के कुल मताधिकार के 1/10 भाग पर अधिकार रखने वाले सदस्य सभा बुलाने का अधिकार रखते हैं।

(iii) सभा बुलाने की विधि-सभा बुलाने की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा सभा ठीक उसी प्रकार बुलाई जाएगी, जिस प्रकार कि संचालक-मण्डल द्वारा बुलाई जाती है। उसकी सूचना, विशेष कार्यों के व्याख्यात्मक विवरण किसी अन्य सभा के समान ही रहते हैं।

(iv) सभा बुलाने की समय सीमा-यह भी उल्लेखनीय है कि सभा की माँग करने वाले सदस्य सभा की माँग करने के तीन माह की अवधि में ही स्वयं सभा बुला सकते हैं, उसके बाद नहीं किन्तु इसकी स्थगित सभा तीन माह बाद भी हो सकती है।

(v) खर्चों का भुगतान-सभा की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा सभा बुलाई जाने पर सभा के खच (सभा के स्थान के खर्चों सहित) के भुगतान का दायित्व कम्पनी पर ही होता है किन्तु यदि सदस्यों द्वारा सभा की माँग करने पर सभा न बुलाने के लिए यदि कोई संचालक दोषी पाया जाता है तो कम्पनी उस संचालक को देय होने वाले शुल्क एवं पारिश्रमिक की राशि में से कटौती कर सकती है। सभा की माँग करने वाले सदस्यों द्वारा सभा बुलाने सम्बन्धी कुछ नियमों का उल्लेख किया गया है जो निम्न है–

(i) सभा की 21 दिनों की स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिये।

(ii) सभा की सूचना में सभा का स्थान, दिन, तिथि तथा समय तथा सभा में किये जाने वाले कार्यों का उल्लेख होना चाहिये।

(iii) यदि कोई संकल्प विशेष संकल्प के रूप में पारित किया जाना प्रस्तावित है तो इसकी विधिवत् सूचना दी जानी चाहिये।

(iv) सूचना पर सभा की माँग करने वाले सभी सदस्यों द्वारा अथवा उनके विधिवत् रूप से अधिकृत प्रतिनिधियों से |

(v) ऐसी सूचना के साथ प्रत्येक विशेष कार्य के महत्वपूर्ण तथ्यों का व्याख्यात्मक विवरण संलग्न करना आवश्यक नहीं है।

(vi) सभा की माँग करने वाले सदस्य कम्पनी के सदस्यों की सूची माँग सकते हैं। इस सूची में सदस्यों के पंजीकृत पते एवं उनके द्वारा धारित अंशों की संख्या का उल्लेख होगा। माध्य से दी जायेगी।

(vii) सभा की सूचना स्पीड पोस्ट, अथवा रजिस्टर्ड डाक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मध्य से दी जाएगी |

IV. अधिकरण के आदेश द्वारा (By the Order of Tribunal)

1. अधिकरण के आदेश की दशाएँ- अधिकरण कम्पनी की असामान्य साधारण सभा बुलाने क आदेश निम्न दशाओं में दे सकता है–

(i) जब कम्पनी की वार्षिक साधारण सभा के अतिरिक्त कोई अन्य सभा बुलाना सम्भव नहीं हो |

(ii) जब इस अधिनियम या कम्पनी के अन्तर्नियमों के प्रावधानों के अनुसार कम्पनी की सभा हो।

(iii) जब इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा कम्पनी के अन्तर्नियमों के अनुसार सभा का संचालन करना असम्भव हो गया हो।

2. सभा बुलाना-अधिकरण असामान्य साधारण सभा बुलाने का आदेश निम्नांकित आधारों पर दे सकता है

(i) स्वप्रेरण से (Own motion) |

(ii) कम्पनी के किसी संचालक के आवेदन पर |

(iii) कम्पनी के किसी ऐसे सदस्य के आवेदन पर जो ऐसी सभा में मतदान का हकदार है।

3. अधिकरण द्वारा निर्देश अधिकरण ऐसी सभा के सम्बन्ध में निम्नांकित निर्देश दे सकता है–

(i) कम्पनी को ऐसी सभा बुलाने आयोजित एवं संचालित करने का कोई भी ऐसा आदेश दे सकता है जो अधिकरण उपयुक्त समझे।

(ii) कम्पनी को कोई भी ऐसा सहायक या अनुषंगी निर्देश दे सकता है जिसे वह समायोजित समझता है। ऐसे निर्देशों में सभा को बुलाने आयोजित करने तथा संचालित करने हेतु इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा कम्पनी के अन्तर्नियमों में परिवर्तन करने के निर्देश भी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अधिकरण अपने निर्देशों में यह निर्देश भी दे सकता है कि ऐसी सभा में कम्पनी का कोई के सदस्य स्वयं या परोक्षी के माध्यम से उपस्थित हो तो भी गणपूर्ति हुई मानी जायेगी और वैध सभा ईमानी जायेगी।

4. कम्पनी की सभा माना जाना-अधिकरण के आदेश/निर्देश से बुलायी, आयोजित एवं ालित की गयी सभा को सभी उद्देश्यों के लिए कम्पनी की विधिवत् रूप से बुलायी, आयोजित एवं लित की गयी सभा माना जायेगा।

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