अनाधिकृत कार्यों के सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं ? अनाधिकृत कार्यों के क्या रिणाम होते हैं ? What do you understand by the principle of unauthorized acts? What are the consequences of unauthorized actions?

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अधिकारों के बाहर कार्यों का आशय (Meaning of Ultra Vires Act)

कोई भी कम्पनी अपने सीमानियम में उल्लिखित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही कार्य कर सकती है। सीमानियम का उद्देश्य खण्ड कम्पनी के कार्यों और अधिकारों की सीमाएँ निश्चित करता है। कोई भी कम्पनी इन सीमाओं तथा अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती है। किन्तु, जब कोई कम्पनी अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन करके कोई कार्य करती है तो वह ‘अधिकारों के बाहर कार्य अवक अनाधिकृत कार्य’ तथा ‘अधिकारातीत कार्य’ या ‘शक्ति बाह्य’ (Ultra vires) कहलाता है।

‘अधिकारों के बाहर कार्य से तात्पर्य उन कार्यों से है जो सीमानियम द्वारा निर्धारित सीमाओं के हर होते हैं। ऐसे कार्य सीमानियम के उद्देश्यों से मेल नहीं खाते हैं। ये कार्य उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनावश्यक होते हैं। परन्तु ऐसे कार्यों का अवैध अथवा सार्वजनिक हित या लोकनीति के विरुद्ध होना आवश्यक नहीं है। ये कार्य केवल कम्पनी के उद्देश्यों के विरुद्ध अथवा उद्देश्य से परे होते हैं।

‘अधिकारों के बाहर’ का सिद्धान्त यह कहता है कि कोई कम्पनी अपने सीमानियम द्वारा प्रदत्त अधिकार सीमा के बाहर कोई कार्य अथवा अनुबन्ध करती है तो वह कार्य व्यर्थ होता है। अधिकारों के बाहर किये जाने वाले कार्यों तथा अनुबन्धों से कम्पनी का कोई वैधानिक दायित्व उत्पन्न नहीं होता है। इन अनुबन्धों को बाद में किसी भी प्रकार से वैध भी नहीं बनाया जा सकता है और न इन कार्यों तथा अनुबन्धों की पुष्टि या अनुसमर्थन (ratification) ही किया जा सकता है। इतना ही नहीं, यदि कम्पनी के सभी सदस्य मिलकर सर्वसम्मति से ‘अधिकारों के बाहर’ के कार्यों का पुष्टिकरण या अनुसमर्थन करने का संकल्प भी पारित करें तो भी उन कार्यों को वैध नहीं बनाया जा सकता है।

अधिकारों के बाहर कार्यों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है–

(1) पार्षद सीमानियम द्वारा अनाधिकृत कार्य-यदि कम्पनी अपने पार्षद सीमानियम के बाहर कोई ऐसा कार्य करती है जिसके लिए वह अधिकृत नहीं है तो वह अधिकारों के बाहर माना जायेगा भले ही अधिनियम के अन्तर्गत हो; जैसे-कम्पनी के उद्देश्य वाक्य के बाहर कार्य करना, अधिकृत पूँजी से अधिक पूँजी का निर्गमन करना आदि। इस सम्बन्ध में एशबरी रेलवे केरिज एण्ड आयरन कम्पनी लि. बनाम रिके का मामला है। इस मामले के तथ्यों के अनुसार कम्पनी के उद्देश्य वाक्य में लिखा था कि “कम्पनी का उद्देश्य रेल के डिब्बे तथा रेल की मशीनें बनाना, बेचना तथा किराये पर देना, मैकेनिक इन्जीनियर्स तथा जनरल कान्ट्रेक्टर्स का कार्य करना।” इस कम्पनी ने रिके (Riche) नामक रेलवे ठेकेदार से बेल्जियम में रेल की पटरी बिछाने के लिए धनराशि देने का अनुबन्ध कर लिया। बाद में कम्पनी ने इस अनुबन्ध के अन्तर्गत धनराशि नहीं दी और यह कहा कि उसके ‘अधिकारों के बाहर’ का अनुबन्ध है। रिके ने कम्पनी पर अनुबन्ध भंग का वाद प्रस्तुत | किया तथा न्यायालय से क्षतिपूर्ति करवाने की प्रार्थना की रिके ने तर्क दिया कि कम्पनी के नाम के साथ लगे ‘जनरल-कान्ट्रेक्टर्स’ शब्द से प्रकट होता है कि कम्पनी इस कार्य को करने के लिए | अधिकृत थी। किन्तु न्यायालय ने जनरल कान्ट्रेक्टर्स शब्द का तात्पर्य उन अनुबन्धों के लिए ही माना जो मैकेनिकल इन्जीनियरिंग से ही सम्बन्धित हो। अतः वह अनुबन्ध अधिकारों के बाहर है लॉर्ड चान्सलर केयर्ल्स ने निर्णय में लिखा है कि अधिकारों के बाहर किया गया अनुबन्ध व्यर्थ होत है और उसका अंशधारियों की सर्वसम्मति से भी अनुसमर्थन नहीं किया जा सकता है।

(2) अन्तनियमों द्वारा अनाधिकृत कार्य-यदि कम्पनी कोई ऐसा कार्य करे जो पार्षद समयम के अधिकार क्षेत्र में हो परन्तु कम्पनी के अन्तनियमों के बाहर हो तो ऐसे कार्यों को अन्तनियमों द्वारा अनाधिकृत कार्य कहते हैं, जैसे-निश्चित दर से अधिक व्याज देना, नियमों में व्यवस्था न होने पर अंशों का अपहरण करना आदि। यदि कोई कार्य अन्तनियमों से बाहर है तो कम्पनी आवश्यक प्रस्ताव पारित करके ऐसा अधिकार प्राप्त कर सकती है और यदि यह कार्य पार्षद सीमानियम के अधिकार क्षेत्र में है तो कम्पनी आवश्यक कार्यवाही करके ऐसे कार्यों का अनुमोदन कर सकती है।

(3) कम्पनी अधिनियम द्वारा अनाधिकृत कार्य-यदि कोई कम्पनी ऐसा कार्य करती है जो कम्पनी अधिनियम की व्यवस्थाओं के विपरीत है अथवा प्रदत्त अधिकारों के बाहर है तो ऐसे कार्यों को कम्पनी अधिनियम द्वारा अनाधिकृत कार्य कहते हैं; जैसे-पूँजी में से लाभांश दाँटना, वैधानिक | कार्यवाही पूर्ण होने से पूर्व पूंजी में परिवर्तन करना, कम्पनी द्वारा स्वयं अंश खरीदना आदि।

‘अधिकारों के बाहर’ कार्यों का प्रभाव (Effects of Ultra-Vires)

जब भी कोई कम्पनी अपने अधिकारों के बाहर कार्य करती है तो उसके परिणाम उत्पन्न होते है —

1. अनाधिकृत कार्यों का व्यर्थ एवं प्रभावहीन होना-जब कोई कम्पनी अनाधिकृत कार्य करती तो वह कार्य प्रारम्भ से ही व्यर्व एवं प्रभावहीन माना जाता है। इन कार्यों को किसी भी दशा न्यायालय में प्रवर्तित नहीं करवाया जा सकता है।

उदाहरण — एक कम्पनी ने अपने अधिकारों के बाहर जाकर एक चावल मिल खरीदकर उसे चालित किया। कम्पनी ने एक व्यक्ति से मूल्य प्राप्त कर चावल प्रेषिति (Consignee) को उस वल की घटिया किस्म के कारण बहुत ही भारी हानि पर बेचना पड़ा। कम्पनी के संचालकों ने प्रेथिति को हानि की भरपायी का वचन दे दिया। न्यायालय ने निर्णय दिया कि कम्पनी उस नि की भरपायी के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि चावल का व्यापार करना कम्पनी के उद्देश्यों बाहर है।

2. अनुसमर्थन सम्भव नहीं-अनाधिकृत कार्य पूर्णतः व्यर्थ होते हैं। अतः अनाधिकृत का अर्थात् व्यर्थ कार्यों का अंशधारियों की सर्वसम्मति से भी पुष्टिकरण या अनुसमर्थन नहीं किया सकता है।

3. निषेधाज्ञा जब कोई कम्पनी अपने अधिकारों के बाहर कार्य करती है तो उसका कोई सदस्य न्यायालय से प्रार्थना करके निषेधाज्ञा जारी करवा सकता है। न्यायालय द्वारा निषेधाज्ञा ज करने पर कंम्पनी द्वारा अधिकारों के बाहर किये जा रहे कार्यों को रोक देना पड़ता है।

4. कम्पनी का कोई दायित्व नहीं चूँकि सीमानियम के बाहर किये गये कार्य तथा अनुग व्यर्थ होते हैं, अतः उन कार्यों तथा अनुबन्धों से किसी भी प्रकार का कोई दायित्व भी उत्पन्न नहीं है। अतः न तो कम्पनी ही किसी बाहा पक्षकार पर वाद प्रस्तुत कर सकती है और न बाह्य पक्षका कम्पनी पर वाद प्रस्तुत कर सकता है।

5. संचालकों का कम्पनी के प्रति व्यक्तिगत दायित्व-जब कम्पनी के संचालक कोई ऐसा या अनुबन्ध करते हैं जो सीमानियम के बाहर (अनाधिकृत) है तो संचालकों को उत्तरदायी ठहराव सकता है। ऐसे कार्यों तथा अनुबन्धों से उत्पन्न होने वाली हानि की पूर्ति करवाने के लिए कम्पन कोई भी सदस्य संचालकों पर न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकता है।

6. अधिकारों के बाहर प्राप्त सम्पत्ति पर अधिकार यदि कोई कम्पनी कभी अपने अधिकारों तथा शक्तियों के बाहर कुछ सम्पत्ति खरीदती है तो भी उस सम्पत्ति पर कम्पनी का अधिकार सुरक्षित रहता है, क्योंकि वह सम्पत्ति कम्पनी की पूँजी से ही खरीदी जाती है।

7. उपार लिया गया धन वसूला नहीं जा सकता-यदि किसी बैंक या किसी व्यक्ति ने किसी कम्पनी को अधिकारों के बाहर के कार्यों के लिए धन उधार दिया तो वह उस धन को वसूल नहीं कर सकता है। परन्तु यदि कम्पनी अपनी इच्छा से भुगतान करना चाहे तो कर सकती है। यदि कम्पनी एक बार इस राशि का भुगतान कर देती है तो वह उसे पुनः वसूल नहीं कर सकती है।

8. दुष्कार्य के लिए कम्पनी का दायित्व नहीं यदि कोई कम्पनी अधिकारों के बाहर कार्य करती है और उसके परिणामस्वरूप कोई दुष्कार्य (Tort) हो जाता है तो कम्पनी को उस दुष्कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है। दुष्कार्य के लिए कम्पनी को तभी उत्तरदायी व्हराया जा सकता है कि जबकि वह दुष्कार्य सीमानियम में उल्लिखित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किसी कर्मचारी द्वारा अपनी सेवा के दौरान किया गया हो।

अधिकारों के बाहर कार्यों के अपवाद (Exceptions)

अधिकारों के बाहर कार्य सामान्यतः व्यर्थ होते हैं, किन्तु निम्नलिखित परिस्थितियों में ये कार्य प्रवर्तित भी करवाये जा सकते हैं–

1. अन्तर्नियमों के बाहर के कार्यों की पुष्टि-यदि कोई कार्य अन्तर्नियमों के बाहर है, किन्तु सीमानियम के भीतर है तो उस कार्य की कम्पनी की साधारण सभा में पुष्टि की जा सकती है। अतः इस प्रकार अनाधिकृत कार्य भी वैच बनाया जा सकता है।

2. संचालकों के अधिकारों के बाहर के कार्यों की पुष्टि-यदि संचालक कुछ ऐसे कार्य करते हैं जो उनके अधिकारों के बाहर है, किन्तु कम्पनी के अधिकारों के भीतर है तो कम्पनी की साधारण सभा में उनकी पुष्टि की जा सकती है और उन्हें वैध बनाया जा सकता है।

3. कम्पनी के हित में सद्भाव से किये गये कार्यों के दायित्व से मुक्ति-संचालक अपने अधिकारों के बाहर कोई कार्य करते हैं तो वह कार्य सामान्यतः व्यर्थ होता है। ऐसे कार्यों के लिए संचालक व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होते हैं। किन्तु संचालक यह सिद्ध कर देते हैं कि उन्होंने वे सभी कार्य पूर्ण सद्भाव तथा कम्पनी के हित को ध्यान में रखकर किये हैं तो वे अपने व्यक्तिगत दायित्व से मुक्त किये जा सकते हैं।

4. अनाधिकृत दिये ऋणों को वसूल करने का अधिकार कोई भी कम्पनी अपने अधिकारों के बाहर किसी अन्य व्यक्ति से ऋण को वसूल कर सकती है। वह इस बात की आड़ नहीं ले सकता है कि ऋण अधिकारों के बाहर दिया गया है।

5. अधिकारों के बाहर ऋण लेने या उधार खरीददारी करने पर कोई अधिकार नहीं-यदि कोई कम्पनी अपने अधिकारों के बाहर जाकर ऋण ले लेती या कुछ सम्पत्तियों को उधार पर क्रय कर लेती है तो ऋणदाता या विक्रेता उस ऋण या सम्पत्ति को पुनः प्राप्त कर सकता है। ऋणदाता या विक्रेता न्यायालय से उस सम्पत्ति को या उस धन को या उस धन से प्राप्त सम्पत्ति को ढूँढ़ने एवं वापस प्राप्त करने का आदेश प्राप्त करने हेतु आवेदन कर सकता है।

6. मिथ्यावर्णन से अधिकारों के बाहर ऋण लेने पर संचालकों का दायित्व-यदि कम्पनी के संचालकों ने मिथ्यावर्णन करके कम्पनी के लिए ऋण प्राप्त किया है तो उन ऋणों का भुगतान के लिए उन संचालकों का दायित्व होगा।

7. अधिकारों के बाहर किये गये भुगतान के लिए संचालकों का दायित्व-यदि संचालक कम्पनी के अधिकारों के बाहर के कार्यों के लिए कोई भुगतान करते हैं तो वे संचालक को उस धनराशि के पुनर्भरण के लिए उत्तरदायी होंगे। परन्तु संचालक चाहे तो ऐसा भुगतान करने वाले व्यक्तियों को चुकायी गयी राशि लौटाने की माँग भी कर सकते हैं। यदि उन्हें भी इस बात की जानकारी रही हो कि उन्हें यह भुगतान कम्पनी के अधिकारों के बाहर जाकर किया जा रहा है।

8. अनियमित कार्यों के लिए दायित्व-कभी-कभी कम्पनी किसी कार्य को करने में कानूनी -प्रावधानों की प्रक्रिया का अथवा अन्तर्नियमों की व्यवस्थाओं का पालन नहीं करती है। ऐसी स्थिति में वे सभी कार्य अनियमित कार्य कहलाते हैं। उनके लिए कम्पनी उत्तरदायी होती है जबकि प्रक्रिया का विधिवत् पालन कर लिया जाता है।


Meaning of Ultra Vires Act

Any company can act only for the fulfillment of the purposes specified in its memorandum. The Objective Clause of the Memorandum of Association lays down the limits of the functions and powers of the company. No company may infringe these limits and rights. But, when a company does any work in violation of its jurisdiction, then it is called ‘acts outside rights’ or ‘unauthorized acts’ and ‘extra vires’ or ‘ultra vires’.

‘Acts outside rights’ means those acts which are in denominator of the limits prescribed by the memorandum. Such acts do not conform to the objectives of the memorandum. These actions are unnecessary for the attainment of the objectives. But such actions need not be illegal or against public interest or public policy. These actions are only against or beyond the objectives of the company.

The principle of ‘out of rights’ states that if a company performs any work or contract outside the limits of rights provided by its memorandum, then that work is void. No statutory liability of the company arises from the acts and contracts which are done outside the rights. These agreements cannot be made valid in any way later, nor can these acts and contracts be ratified or ratified. Not only this, even if all the members of the company together unanimously pass a resolution confirming or ratifying the acts ‘out of rights’, even those actions cannot be made valid.

The functions outside the rights can be divided into the following parts-

(1) Acts unauthorized by councilor memorandum – If the company does any work outside its councilor memorandum for which it is not authorized, then it shall be deemed to be outside the rights even if it is under the Act; For example, working outside the company’s objectives sentence, issuing more capital than the authorized capital, etc. In this regard Ashbury Railway Carriage and Iron Company Ltd. Vs Ricky’s case. According to the facts of this case, the purpose of the company was written in the sentence that “The object of the company is to manufacture, sell and rent railway coaches and railway machines, to do the work of Mechanic Engineers and General Contractors.” This company hired Riche. An agreement was made with a railway contractor named Railway Contractor to pay for the laying of railway tracks in Belgium. Later the company did not give the money under this contract and said that the contract was ‘out of its rights’. Ricky sued the company for breach of contract. Ricky argued that the word ‘General-Contractors’ appearing with the name of the company was authorized to do this work. The meaning of the word contractors is considered only for those contracts which are related to mechanical engineering. Therefore, that contract is outside the rights. not ratified can go.

(2) Acts unauthorized by the Articles – If the company does any such work which is within the jurisdiction of the Councilor’s time but is outside the Articles of the Company, then such acts are called unauthorized acts by the Articles, such as paying more than the fixed rate of interest, rules and regulations. If there is no arrangement in it, hijacking of parts etc. If any work is outside the Articles of Association, then the company can obtain such right by passing the necessary resolution and if this work is within the jurisdiction of the Councilor Memorandum, then the company can approve such works by taking necessary action.

(3) Acts unauthorized by the Companies Act – If a company does such an act which is contrary to the provisions of the Companies Act or is outside the rights conferred, then such acts are called unauthorized acts by the Companies Act; For example, dividend distribution from capital, statutory. Change in capital before completion of proceedings, purchase of shares by the company itself, etc.

Effects of Ultra-Vires

Whenever a company acts outside its rights, its consequences arise –

1. Unauthorized works to be useless and ineffective – When a company does unauthorized work, then that work is considered wasteful and ineffective from the beginning. These actions cannot be enforced in any court.

Example- A company went out of its rights and bought a rice mill and operated it. The company got the price from a person and sold the rice to the consignee at a very heavy loss due to the substandard quality of that rice. The directors of the company have given an undertaking to indemnify Preeti for the loss. The court ruled that the company was not liable to make up the money as trading in rice was outside the company’s objectives.

2. Ratification is not possible – Unauthorized works are completely useless. Therefore, unauthorized, meaningless works cannot be confirmed or ratified even by the consensus of the shareholders.

3. Injunction When a company acts outside its rights, any member of it can get the injunction issued by praying to the court. More by the company on injunction by the court

The work being done outside the houses has to be stopped.

4. No liability of the company Since the works and parts done outside the memorandum are void, therefore no liability of any kind arises from those works and contracts. Therefore, neither the company can sue any outside party nor the outside party can sue the company.

5. Personal liability of the directors to the company – When the directors of the company make any contract or contract which is outside the memorandum (unauthorized) then the directors can be held liable. Any member of the company can file a suit in the court against the directors to compensate for the loss arising out of such works and contracts.

6. Right on the property acquired outside the rights If a company ever buys some property outside its rights and powers, even then the right of the company on that property remains safe, because that property is purchased from the company’s capital only.

7. Money borrowed cannot be recovered- If a bank or any person lent money to a company for works outside its rights, it cannot recover that money. But if the company wishes to make the payment, it can. Once the company has paid this amount, it cannot recover it again.

8. The company is not liable for the misdeed, if a company acts outside the rights and as a result of a tort, then the company cannot be held liable for that misdemeanor. The company can be held liable for the misdemeanor only if the misdemeanor is committed by an employee in the course of his service for carrying out the purposes specified in the memorandum.

Exceptions for actions outside rights

Actions outside the rights are generally useless, but in the following circumstances, these works can also be enforced-

1. Confirmation of acts outside the articles – If any act is outside the articles but within the memorandum, that act may be confirmed in the general meeting of the company. Therefore, unauthorized work in this way can also be made a watch.

2. Confirmation of acts outside the rights of the directors – If the directors do some such acts which are outside their rights but within the rights of the company, then they can be confirmed and legalized in the general meeting of the company. could.

3. Exemption from liability for acts done in good faith in the interest of the company – If the operator does any work outside his rights, then that work is generally in vain. The operators are personally responsible for such actions. But if the directors prove that they have done all those things keeping in mind the full good faith and interest of the company, then they can be relieved of their personal liability.

4. Right to recover unauthorized debts Any company can recover debts from any other person outside its rights. He cannot take the guise that the loan is given out of rights.

5. No right on taking loan or making purchase on credit outside rights- If a company takes loan or buys some assets on credit outside its rights, then the lender or seller can recover that loan or property. Is. The lender or seller can apply to the court to obtain an order to search and recover that property or that money or the property received from that money.

6. Liability of the operators on taking loans outside the rights due to misrepresentation – If the directors of the company have obtained loans for the company by misrepresenting, then those operators will be liable to pay those debts.

7. Liability of directors for payment made outside rights- If directors make any payment for works outside the rights of the company, they shall be liable to reimburse the amount to the operator. Provided that the Director may, if he so desires, demand the refund of the amount paid to the persons making such payment. If they also came to know that this payment is being made to them outside the rights of the company.

8. Liability for irregular acts – Sometimes the company does not follow the procedure of legal provisions or provisions of Articles of Association in doing any work. In this case, all those works are called irregular functions. The company is responsible for them when the process is duly followed.

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