क्रियात्मक संगठन के प्रमुख लक्षण क्या है ? इसके गुण-दोषों का वर्णन कीजिए। रेखा संगठन एवं क्रियात्मक संगठन में अन्तर स्पष्ट कीजिए। What are the main features of functional organization? Describe its merits and demerits. Explain the difference between line organization and functional organization.

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क्रियात्मक संगठन से आशय (Meaning of Functional Organisation)

टेलर के अनुसार, क्रियात्मक संगठन के अन्तर्गत प्रबन्ध कार्य का विभाजन इस प्रकार किया जाता है कि उप-निरीक्षक से नीचे प्रत्येक व्यक्ति को यथासम्भव कम क्रियाएँ करनी पड़ें। जहाँ तक सम्भव होता है, प्रबन्ध करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का कार्य केवल एक प्रमुख क्रिया तक सीमित रहता है। संगठन की इस पद्धति का मुख्य लक्ष्य यह है कि प्रत्येक श्रमिक का केवल अपने अधिकारी से ही सम्बन्ध रहता है, जो उसे विभिन्न क्रियाएँ करने के लिए आवश्यक आदेश देता है। इस पद्धति में निम्नलिखित आठ अधिकारी होते हैं जो अपना-अपना विशेष कार्य करते हैं

कारखाना स्तर पर

(1) टोली नायक-टोली नायकों का मुख्य कार्य विभिन्न टोलियों की आवश्यक सामग्री उपलब्ध ठन तथा कार्य से सम्बन्धित उनकी प्रत्येक परेशानी दूर करना है।

(2) गति नायक-श्रमिकों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए तथा काम किस प्रकार किया जाय, इस सम्बन्ध में आवश्यक सूचना देने तथा काम करने की विधि का प्रदर्शन करने का कार्य यह व्यक्ति करता है।

(3) जीर्णोद्धार नायक-इसका यह कार्य होता है कि वह देखे कि यन्त्रों का उपयोग ठीक प्रकार से किया जा रहा है कि नहीं। यन्त्रों की मरम्मत कराने की उचित व्यवस्था भी यही करता है। वह श्रमिकों को यह बताता है कि वे मशीनों में तेल आदि देकर उनको किस प्रकार टिकाऊ बनायें।

(4) निरीक्षक नायक निरीक्षक का मुख्य कार्य निर्मित वस्तुओं की किस्म की जाँच करना होता है। कार्यालय स्तर पर

(5) कार्यक्रम लिपिक-यह दैनिक कार्यक्रम की योजना बनाता है। किस क्रम में अमुक शक्ति से कार्य लिया जाना चाहिए तथा कौन-सा कार्य कहाँ हो रहा है और उनका अधिकारी कौन है, इसकी सूचना बनाता है।

(6) संकेत कार्ड लिपिक-संकेत कार्ड लिपिक सदैव संकेत कार्डों को ही बनाते रहते हैं। ये संकेत कार्ड इस प्रकार तैयार किये जाते हैं जिससे कर्मचारियों को सरलतापूर्वक प्रत्येक सूचना मिल सके।

(7) समय एवं लागत लिपिक-यह व्यक्ति समय एवं मूल्य सम्बन्धी समुचित लेखा करने के लिये उत्तरदायी होता है।

(8) अनुशासन लिपिक–यह कारखाने में अनुशासन के लिये उत्तरदायी होता है। यह हर श्रमिक के काम का विवरण रखता है तथा अच्छे काम के लिये उचित पुरस्कार और खराब काम के लिये दण्ड की व्यवस्था करता है।

क्रियात्मक संगठन की विशेषताएँ (Characteristics of Functional Organisation)

क्रियात्मक संगठन में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं

(1) इसमें कार्य का विभाजन छोटी-से-छोटी क्रिया में किया जाता है।

(2) प्रत्येक विशिष्ट कार्य के लिए एक विशेषज्ञ नियुक्त किया जाता है।

(3) विशेषज्ञों का कर्मचारियों से सीधा सम्बन्ध होता है।

(4) यह प्रणाली विशिष्टीकरण के सिद्धान्त पर आधारित है।

(5) निर्णय लेने से पूर्व अधिकारियों द्वारा विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाता है।

(6) जिस समय विशेषज्ञ जो कार्य करता है, वह उस समय केवल उसी कार्य के प्रति उत्तरदायी होता है।

क्रियात्मक संगठन के गुण (Merits of Functional Organisation)

क्रियात्मक संगठन के प्रमुख गुण या लाभ निम्न है

(1) सहयोग की भावना-इसमें एक व्यक्ति का नियन्त्रण न होने के कारण सहयोग की भावड को प्रोत्साहन मिलता है।

(2) विशिष्टीकरण एवं श्रम विभाजन के लाभ-इस पद्धति में प्रत्येक कार्य में विशिष्ट योग्यता रखनी होती है। अतः इसमें श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण के लाभ प्राप्त होते हैं।

(3) श्रमिकों की कुशलता में वृद्धि श्रमिकों को उनकी योग्यता एवं कुशलता के अनुसार कार्य सौंपा जाता है। अतः उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

(4) बड़े पैमाने के उत्पादन-विशिष्टीकरण तथा प्रमापीकरण के कारण इसमें बड़े पैमाने पर उत्पादन करना बहुत आसान होता है।

(5) प्रेरणात्मक-चूँकि इसमें व्यक्तिगत योग्यताओं तथा कार्य कुशलताओं का प्रदर्शन होता है, अतः इसे प्रेरणात्मक पद्धति कहा जा सकता है।

(6) औद्योगिक सम्बन्धों में सुधार संगठन की इस पद्धति को प्रयोग में लाने से औद्योगिक सम्बन्धों में सुधार होता है।

(7) श्रमिकों को सीमित क्रियाएँ करना-चूँकि इसमें श्रमिकों को सीमित क्रियाएँ करनी पड़ती अतः उनमें उच्च स्तर की कार्य कुशलता बनी रहती है।

क्रियात्मक संगठन के दोष (Demerits of Functional Organisation)

क्रियात्मक संगठन के निम्नलिखित दोष हैं

(1) शिथिल अनुशासन-कर्मचारी को अनेक पदाधिकारियों के निर्देशन में काम करना पड़ता है, इससे अनुशासन शिथिल हो जाता है।

(2) समन्वय में कठिनाई-प्रारम्भिक स्तर के अधिकारियों के कार्यों में समन्वय स्थापित करना एक कठिन कार्य होता है।

(3) उत्तरदायित्व का अभाव-इससे एक ही काम पर कई अधिकारी हो जाते हैं और सुनिश्चितता व जिम्मेदारी का अभाव होने लगता है।

(4) कार्यान्वयन कठिन-इस प्रणाली को कार्यान्वित करना कठिन होता है, क्योंकि इसके अन्तर्गत नियन्त्रण का अधिक विभाजन हो जाता है।

(5) मितव्ययिता का अभाव यह प्रणाली अधिक खर्चीली है, क्योंकि कार्यों को अनेक भागों एवं उपविभागों में बाँट दिया जाता है जिसके कारण सभी विभागों की स्थापना में अधिक व्यय करना पड़ता है।


Meaning of Functional Organization

According to Taylor, the division of management work under functional organization is done in such a way that every person below the sub-inspector has to perform as few activities as possible. As far as possible, the work of each person in management is limited to only one major activity. The main goal of this method of organization is that every worker has a relationship only with his officer, who gives him necessary orders to perform various activities. In this system, there are the following eight officers who perform their specific tasks.

at factory level

(1) Toli Nayak – The main task of the Toli Nayak is to make available the necessary materials of different groups and to remove their problems related to work.

(2) Speed ​​Nayak – To increase the efficiency of the workers and how to do the work, this person does the work of giving the necessary information and demonstrating the method of doing the work.

(3) Renovation Nayak – Its function is to see whether the yantras are being used properly or not. It also makes proper arrangements to get the equipment repaired. He tells the workers how to make the machines durable by giving them oil etc.

(4) The main function of Inspector Nayak Inspector is to check the quality of manufactured goods. at office level

(5) Program Clerk – He plans the daily schedule. In which sequence the work should be taken with such power and which work is being done where and who is their official, makes information about it.

(6) Signal card clerk – Signal card clerk always keeps on making signal cards. These sign cards are designed in such a way that the employees can get each and every information easily.

(7) Time and cost clerk – This person is responsible for proper accounting of time and cost.

(8) Discipline Clerk – It is responsible for discipline in the factory. It keeps the details of the work of each worker and arranges for fair reward for good work and punishment for bad work.

Characteristics of Functional Organization

Following are the characteristics of functional organization

(1) In this, the work is divided into small actions.

(2) An expert is appointed for each specific job.

(3) Experts have a direct relationship with the employees.

(4) This system is based on the principle of specialization.

(5) Experts are consulted by the officers before taking a decision.

(6) At the time when the specialist is doing the work, he is only responsible for that work at that time.

Merits of Functional Organization

Following are the main features or advantages of functional organization

(1) Feeling of cooperation – In this, due to lack of control of one person, the spirit of cooperation is encouraged.

(2) Advantages of specialization and division of labor – In this method, each job has to have a specific ability. Therefore, the benefits of division of labor and specialization are obtained in this.

(3) Increase in the efficiency of workers Workers are assigned work according to their ability and skill. Hence their efficiency increases.

(4) Large scale production – Due to the specialization and standardization, it is very easy to produce on a large scale.

(5) Motivational – Since it shows personal abilities and work skills, it can be called motivational method.

(6) Improvement in industrial relations By using this method of organization, industrial relations improve.

(7) Workers have to do limited activities- Since workers have to do limited activities in this, therefore high level of work efficiency remains in them.

Demerits of Functional Organization

Following are the disadvantages of functional organization

(1) Loose Discipline – The employee has to work under the direction of many officials, due to which the discipline becomes loose.

(2) Difficulty in coordinating – It is a difficult task to establish coordination in the works of the officers of the initial level.

(3) Lack of accountability – This leads to many officers on the same job and there is a lack of certainty and responsibility.

(4) Difficult to implement – This system is difficult to implement, because there is more division of control under it.

(5) Lack of economy This system is more expensive, because the work is divided into many parts and sub-divisions, due to which more expenditure has to be incurred in the establishment of all the departments.

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