सम्प्रेषण की बाधाएँ क्या है ? इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है ? What are the communication barriers? How can they be removed?

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सम्प्रेषण की बाधाएँ (Barriers to Communication )

सम्प्रेषण का प्रमुख उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा समूह को किसी संवाद का अर्थबोध कराके प्रभावित करना है, परन्तु कभी-कभी ऐसा होता है कि संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता संवाद को भिन्न-भिन्न रूप में समझ लेते हैं और सम्प्रेषण के इच्छित उद्देश्य की प्राप्ति नहीं हो पाती। ऐसा कुछ बाधाओं के कारण होता है। सम्प्रेषण में भौतिक, मनोवैज्ञानिक तथा बोधक बाधाएँ आती हैं। भौतिक बाधाएँ दूरी, शोरगुल तथा समय के अभाव आदि घटकों से उत्पन्न होती है अर्थात् भौतिक बाधाओं पर वातावरण का प्रभाव पड़ता है। मनोवैज्ञानिक बाधाएँ भावनाओं पदों की स्थितियों, सामाजिक मूल्यों तथा वैयक्तिक मतभेदों आदि घटकों से उत्पन्न होती हैं। बोधक बाधाएँ उस समय उत्पन्न होती है जब संवाददाता संवाद प्राप्तकर्ता की योग्यता, अनुभव और भाषा-ज्ञान आदि की जानकारी किये बिना ही संवाद को प्रेषित कर देता है। ऐसी स्थिति में संवाद प्राप्तकर्ता संवाद को समझने और उसके अनुसार कार्य करने में अपने को असमर्थ पाता है। सम्प्रेषण की प्रमुख बाधाएँ निम्न है

(1) संगठनात्मक संरचना (Organisational Structure)-व्यापारिक संस्थाओं में सम्प्रेषण की प्रभावशीलता काफी हद तक उनके संगठन संरचना पर निर्भर करती है। किसी संगठन संरचना में जितने अधिक स्तर होंगे उतनी ही अधिक बाधाएँ संवाद को भेजने और समझने में उत्पन्न होंगी, क्योंकि सन्देश को प्रसारित होने के लिए इस सभी स्तरों से गुजरना पड़ता है। ऊपर की ओर सम्प्रेषण में जय अधीनस्थ अपने निकटतम अधिकारी के अतिरिक्त अन्य अधिकारियों से प्रत्यक्ष नहीं मिल पाते तो उन्हें घुटन एवं बेचैनी होने लगती है। यह बाधा उस समय उग्र रूप धारण कर लेती है जब उनका संवाद उच्च अधिकारी तक विभिन्न स्तरों की वजह से उसी रूप में नहीं पहुँच पाता है।

(2) भाषा सम्बन्धी भाषाएँ (Barriers to Language)-भाषा की समस्या सम्प्रेषण प्रक्रिया की सर्वाधिक महत्वपूर्ण बाधा मानी जाती है। भाषा के कारण संवाददाता द्वारा प्रेषित संवाद, प्राप्तकर्ता को भली-भाँति समझने में बाधा उत्पन्न कर देता है। ये बाधाएँ उस समय उत्पन्न होती है जब संवाददाता, संवादप्राप्तकर्ता की योग्यता की पूर्ण जानकारी किये बिना ही संवाद का प्रेषण कर देता है और ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है जिनके अनेक अर्थ निकलते हैं। ऐसी परिस्थिति में संवाद प्राप्तकर्ता संवाद का अपनी सुविधा, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर ही अर्थ लगाता है। यदि संवाददाता शब्दों का उचित चयन नहीं करता तो जो आशय सन्देश द्वारा वह प्रकट करना चाहता है, आवश्यक नहीं कि सन्देश प्राप्तकर्ता उसे उसी रूप में समझ ले।

(3) दोषपूर्ण उद्देश्य (Unsound Objectives)-कई बार सम्प्रेषण का उद्देश्य ही दोषपूर्ण या विकृत होने से सम्प्रेक्षण की अनेक बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। कभी-कभी सम्प्रेक्षण का वास्तविक उद्देश्य प्रकट उद्देश्य से भिन्न होता है जिससे सम्प्रेक्षण के इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति नहीं हो पाती। उदाहरणार्थ, किसी संस्था में कर्मचारियों को दिये जाने वाले प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें कार्य सम्बन्धी प्रशिक्षण देना न होकर उनके नेताओं के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न करना हो तो प्रशिक्षण योजनाओं का सफल होना असम्भव नहीं तो दुष्कर अवश्य ही होगा।

(4) स्थिति सम्बन्धी (Status Related)-सम्प्रेषण की एक मुख्य बाधा स्थिति सम्बन्ध से उत्पन्न होती है। औपचारिक संगठन संरचना में विभिन्न व्यक्तियों का पारस्परिक सम्बन्ध अधिकारी एवं अधीनस्थ का होता है। यह स्थिति सम्बन्ध सम्प्रेषण को पर्याप्त मात्रा में प्रभावित करती है। संगठन में व्यक्ति की स्थिति और पद उसकी भावनओं एवं दूसरे व्यक्तियों के प्रति उसके व्यवहार को प्रभावित करते हैं। फलतः दोनों ओर के सम्प्रेषण पक्षपातपूर्ण हो जाते हैं। अधिकारी सदैव पद भिन्नता बनाये रखना चाहते हैं। वह अधीनस्थों पर अपनी पदरूपी उच्चता बनाये रखने के कारण ऐसे सुझाव एवं सूचनाएँ स्वीकार नहीं करते जो उनकी निर्णय योग्यता को कमजोर करते हैं।

(5) समयाभाव ( Shortage of Time)-अनेक अवसरों पर यह देखने को मिलता है कि संवाददाता संवाद को समयाभाव के कारण यथासमय संवाद प्राप्तकर्ता को प्रेषित नहीं कर पाते जिससे संवाद की प्रभावशीलता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि संवाद को ऐसे समय प्रषित किया जाये जब संवाद प्राप्तकर्ता उसे ग्रहण करने के लिए मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से तैयार हो ।

(6) श्रवण (Listening)- सम्प्रेषण की एक मुख्य बाधा श्रवण सम्बन्धी बाधा है। सम्प्रेषण की प्रभावशीलता के लिए यह आवश्यक है कि संवाद प्राप्तकर्ता संवाद को ठीक प्रकार से सुने। यदि संवाद प्राप्तकर्ता संवाददाता द्वारा प्रेषित संवाद को अच्छी तरह से नहीं सुनता तो उसके लिए संवाद का सही एवं पूर्ण अर्थ निकाल पाना कठिन ही होता है।

(7) भौगोलिक दूरी (Geographical Distance)-संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता के मध्य भौगोलिक दूरी भी सम्प्रेक्षण की एक प्रमुख बाधा है। यद्यपि आधुनिक समय में सम्प्रेषण के शीघ्रगामी नों यथा-तार, टेलीफोन, टेलेक्स आदि ने संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता के मध्य इस दूरी को इम कर दिया है, लेकिन जिन क्षेत्रों में इनका प्रयोग नहीं हुआ है, वहाँ पर यह समस्या ज्यों की त्यों विद्यमान है। भारत गाँवों का देश हैं, छोटे-छोटे गाँवों में अभी भी इन सम्प्रेषण साधनों का अभाव होने के कारण सब्देशवाहक एवं पत्र द्वारा ही सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है जिससे पर्याप्त समय, श्रम एवं धन का अपव्यय होता है।

(8) भावनात्मक धारणाएँ (Emotional Attitudes)-संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता की भावनात्मक धारणाएँ भी सम्प्रेषण में बाधा उत्पन्न करती है। कभी-कभी संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता की धारणाएँ एवं विचार इतने दृढ़ हो जाते हैं कि संवाद प्राप्तकर्ता, संवाददाता के प्रत्येक संवाद का एक ही अर्थ लगाता है और उसे (संवाद) सही रूप में समझने को तैयार ही नहीं होता। संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता की भावनाओं में अन्तर अनेक कारणों से होता है। इन कारणों में शारीरिक बनावट, आचरण, खान-पान, वेश-भूषा आदि प्रमुख हैं।

(9) पदोन्नति की भावना (Desire of Promotion)-जिन संगठनों की पदोन्नति नीति उच्च अधिकारियों को सर्वाधिक महत्व देती हो और अधीनस्थों की पदोन्नति उनकी कृपा पर निर्भर करती हो, वहाँ अधीनस्थ अपने उच्च अधिकारियों को सदैव प्रसन्न रखना चाहते हैं। वे कभी भी उनके व्यवहार, क्रियाकलापों एवं निर्देशों के प्रति न तो शिकायत ही करते हैं और न ही उपयोगी सुझाव ही प्रस्तुत करते हैं। वे तो अपने उच्च अधिकारियों की हाँ में हाँ मिलाकर उनका विश्वास प्राप्त करना चाहते हैं। इस मनोवृत्ति से अधीनस्थ अपने उच्च अधिकारियों की दृष्टि में ऊपर उठ जाते हैं जो उनकी पदोन्नति में सहायक होती है।

(10) मानवीय सम्बन्ध (Human Relations) – वर्तमान समय में प्रबन्ध जगत में जितना ध्यान मानवीय विचारधारा पर दिया जा रहा है उतना शायद ही किसी अन्य विचारधारा पर दिया जा रहा है। जिन औद्यागिक एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में औद्योगिक अशान्ति व्याप्त है, अर्थात् अधिकारियों एवं अधीनस्थों के मध्य मधुर सम्बन्ध नहीं है वहाँ उद्देश्यों से सन्देशों का भी गलत ही अर्थ लगाया जाता है। कभी-कभी तो अमानवीय सम्बन्धों के कारण अधिकारी एवं अधीनस्थ एक-दूसरे के सन्देशों के अनुसार कार्य करना तो दूर रहा, सुनना तक पसन्द नहीं करते। फलतः सम्प्रेषण के इच्छित लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं हो पातीं।

सम्प्रेषण की बाधाओं को दूर करने के सुझाव (Suggestions to Overcome Barriers of Communication)

सम्प्रेषण की बाधाओं को व्यावसायिक एवं मानवीय सभी दृष्टि से दूर करना आवश्यक है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए निम्न सुझाव उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं

(1) सम्प्रेषण योजना सम्प्रेषण की विभिन्न बाधाओं को दूर करने के लिए प्रथम सुझाव यह है कि सम्प्रेषण का कार्य एक निश्चित योजनानुसार होना चाहिए। योजनाबद्ध सम्प्रेषण से जहाँ एक ओर उच्च अधिकारियों और अधीनस्थों के मध्य सूचनाओं का आदान-प्रदान सरल हो जायेगा वहाँ दूसरी और अधीनस्थों को समय पर सूचनाएँ प्राप्त होने से ये कार्य का भली-भाँति निष्पादन कर सकेंगे और सूचनाओं की प्राप्ति में लगने वाले समय की बचत होगी।

(2) भाषा-सम्प्रेषण की बाधाओं में सबसे प्रमुख बाधा भाषा सम्बन्धी है। इस बाधा को दूर करने के लिए संवाददाता द्वारा संवाद के प्रेषण में सरल भाषा का प्रयोग करना चाहिए तथा संवाददाता द्वारा प्रयोग में लाये गये उसके स्वयं के ज्ञान एवं स्तर के अनुकूल न होकर संवाद प्राप्तकर्ता के ज्ञान एवं स्तर के अनुरूप होनी चाहिए।

(3) प्रत्यक्ष सम्प्रेषण-सम्प्रेषण की बाधाओं को दूर करने के लिए एक अन्य उपयोगी सुझाव यह है कि जहाँ तक सम्भव हो संवाद संक्षिप्त लेकिन परिपूर्ण हो और अपने प्रत्यक्ष रूप में हो। प्रत्यक्ष (सम्प्रेषण के लिए संगठन स्तरों में कमी करना आवश्यक है। उपक्रम में जितने संगठन स्तर कम होंगे उतना ही अधिक प्रत्यक्ष सम्प्रेषण सम्भव होगा। फलतः संवाद पूर्ण सही रूप में संवाद प्राप्तकर्ता के पास पहुँच सकेंगे।

(4) पारस्परिक अविश्वास-संवाददाता और संवाद प्राप्तकर्ता के मध्य पारस्परिक अविश्वास अनेक बाधाओं को जन्म देता है। पारस्परिक अविश्वास एक-दूसरे को आवश्यक सूचनाएँ देने, स्वीकार करने एवं समझने में रोड़े अटकाता है। अतः उच्च अधिकारियों एवं अधीनस्थों के मध्य पारस्परिक सविश्वास एवं सद्भावना होनी चाहिए। किसी भी संगठन में पारस्परिक सद्भावना एवं सविश्वास की स्थापना करने का दायित्व उच्च अधिकारियों का होता है। अधिकारियों की कथनी एवं करनी में अन्तर नहीं होना चाहिए। यह अन्तर ही पारस्परिक अविश्वास को जन्म देता है।

(5) सन्देश की स्पष्टटता-प्रत्येक सन्देश की भाषा सरल व स्पष्ट होनी चाहिए तथा भाषा ऐसी होनी चाहिए, जिसका एक ही अर्थ निकलता हो।

(6) सन्देश की पूर्णता-प्रेषित किये जाने वाले सन्देश न केवल सरल भाषा में व स्पष्ट हॉ, बल्कि पूर्ण होने चाहिए। अपूर्ण सन्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, अतः सन्देश पूर्ण होने चाहिए।

(7) सन्देश की समरूपता-सन्देश की विषय-सामग्री संस्था के उद्देश्यों, नीतियों एवं कार्यक्रमों के अनुरूप होनी चाहिए, परस्पर विरोधी सन्देशों से भ्रम एवं सन्देह उत्पन्न होते हैं।

(8) संचार की निरन्तरता-सूचनाओं एवं विचारों का निरन्तर आदान-प्रदान, प्रभावशाली संचार का आवश्यक तत्व है। अतः सन्देश कर्मचारियों को निरन्तर देते रहना चाहिए।

(9) प्राप्तकर्ता को समझना यदि सन्देश भेजने वाले व्यक्ति को सन्देश पाने के भौतिक सामाजिक तथा बौद्धिक वातावरण की जानकारी है तो वह अधिक प्रभावशाली संचार कर सकता है. अतः उसे स्वयं को सन्देश प्राप्तकर्ता की स्थिति में रखकर सन्देश प्रेषित करने चाहिए।


Barriers to Communication

The main purpose of communication is to influence a person or a group by making sense of a dialogue, but sometimes it happens that the interlocutor and the receiver understand the dialogue in different ways and the desired purpose of communication is not achieved. . This happens because of some constraints. There are physical, psychological and cognitive barriers to communication. Physical barriers arise from factors like distance, noise and lack of time, that is, the effect of the environment on physical barriers. Psychological barriers arise from factors such as emotions, positions, situations, social values, and individual differences. Perceptual barriers arise when the correspondent transmits the dialogue without knowing about the ability, experience and language-knowledge of the recipient of the dialogue. In such a situation, the recipient of the dialogue finds himself unable to understand the dialogue and act accordingly. The main barriers to communication are

(1) Organizational Structure – The effectiveness of communication in business organizations largely depends on their organizational structure. The more levels there are in an organization structure, the greater the barriers to communicating and understanding communication, as the message has to pass through all these levels to be transmitted. In upward communication, Jai subordinates are unable to meet directly with officers other than their nearest officer, then they start feeling suffocated and restless. This obstacle assumes a severe form when their communication does not reach the higher authority in the same form due to different levels.

(2) Barriers to Language – The problem of language is considered to be the most important obstacle in the communication process. Due to the language, the communication transmitted by the reporter creates a hindrance in understanding the recipient well. These obstacles arise when the correspondent, without knowing the full potential of the recipient, transmits the dialogue and uses words that have multiple meanings. In such a situation, the recipient of the dialogue interprets the dialogue on the basis of his own convenience, ability and experience. If the correspondent does not choose the right words, then the intention that he wants to convey through the message, it is not necessary that the receiver of the message will understand it in that way.

(3) Unsound Objectives – Sometimes the purpose of communication is faulty or distorted, causing many obstacles to communication. Sometimes the actual objective of the observation is different from the apparent objective so that the intended objectives of the observation are not achieved. For example, if the purpose of training given to employees in an organization is not to give them job-related training but to create distrust towards their leaders, then the training plans will be difficult if not impossible, if not impossible.

(4) Status Related – One of the main barriers to communication arises from the status relationship. In the formal organization structure, the interpersonal relationship of different people is that of the officer and the subordinate. This situation affects the relationship communication to a great extent. An individual’s position and position in the organization affect his feelings and his behavior towards other people. As a result, communication on both sides becomes biased. Officers always want to maintain distinction of rank. Due to maintaining his official superiority over the subordinates, he does not accept such suggestions and information which weakens his decision-making ability.

(5) Shortage of Time – On many occasions it is seen that the correspondent is unable to send the dialogue to the recipient in time due to paucity of time, which adversely affects the effectiveness of the dialogue. Apart from this, it is also necessary that the dialogue should be delivered at such a time when the recipient of the dialogue is mentally and physically ready to receive it.

(6) Hearing – One of the main barriers to communication is the hearing barrier. For the effectiveness of communication, it is necessary that the recipient listens to the dialogue properly. If the recipient of the dialogue does not listen well to the dialogue sent by the correspondent, then it is difficult for him to get the correct and complete meaning of the dialogue.

(7) Geographical Distance – Geographical distance between the reporter and the recipient of the communication is also a major barrier of communication. Although in modern times the rapid communication methods such as telegram, telephone, telex, etc. have made this distance between the correspondent and the receiver of the communication, but in the areas where they have not been used, this problem still exists. . India is a country of villages, due to the lack of these communication tools in small villages, information is exchanged through messengers and letters only, due to which enough time, labor and money is wasted.

(8) Emotional Attitudes – Emotional perceptions of the reporter and the recipient of the dialogue also hinder communication. Sometimes the perceptions and thoughts of the interlocutor and the recipient of the dialogue become so strong that the recipient of the dialogue gives the same meaning to each and every dialogue of the correspondent and is not ready to understand it (dialogue) correctly. Correspondent & Dialogue Pvt.

The difference in the feelings of the recipient occurs due to many reasons. Among these reasons, physical appearance, behavior, eating habits, dress, etc. are prominent.

(9) Desire of Promotion – In organizations whose promotion policy gives utmost importance to higher officials and promotion of subordinates depends on their kindness, subordinates always want to keep their superiors happy. They never complain about their behavior, activities and instructions, nor do they offer useful suggestions. They want to gain the trust of their higher officials by saying yes to them. With this attitude subordinates rise above in the eyes of their superiors, which helps in their promotion.

(10) Human Relations – At present, as much attention is being given to human ideology in the management world, hardly any other ideology is being given. In industrial and business establishments where industrial unrest prevails, that is, there is no cordial relationship between officers and subordinates, then messages are also misinterpreted for purposes. Sometimes, due to inhuman relations, the officers and subordinates stay away from working according to each other’s messages, they do not even like to listen. As a result, the desired goals of communication are not achieved.

Suggestions to Overcome Barriers of Communication

It is necessary to remove the barriers of communication from all point of view of business and human. The following suggestions may prove useful to overcome these obstacles.

(1) Communication plan The first suggestion to remove various barriers to communication is that the work of communication should be done according to a definite plan. Planned communication, on the one hand, will facilitate the exchange of information between the superiors and the subordinates, on the other hand, due to the timely receipt of information to the subordinates, they will be able to perform the work well and save time in receipt of information. Will be

(2) Among the barriers to language-communication, the most important barrier is related to language. To overcome this obstacle, simple language should be used in the transmission of dialogue by the correspondent and it should be in accordance with the knowledge and level of the recipient of the dialogue, not according to his own knowledge and level used by the reporter.

(3) Direct communication – Another useful suggestion to remove the barriers to communication is that as far as possible the dialogue should be short but complete and in its direct form. For direct communication, it is necessary to reduce the level of organization. The lower the level of organization in the enterprise, the more direct communication will be possible. As a result, communication will be able to reach the recipient in the right form.

(4) Mutual mistrust- Mutual mistrust between the reporter and the receiver of the dialogue gives rise to many obstacles. Mutual mistrust creates obstacles in giving, accepting and understanding each other the necessary information. Therefore, there should be mutual trust and goodwill between the superiors and subordinates. It is the responsibility of the higher officials to establish mutual goodwill and trust in any organization. There should be no difference between the words and deeds of the officers. This difference gives rise to mutual distrust.

(5) Clarity of the message – The language of every message should be simple and clear and the language should be such that it conveys only one meaning.

(6) Completeness of the message – The message to be sent should not only be in simple language and clear, but it should be complete. Incomplete messages create confusion, so messages must be complete.

(7) Consistency of the message – The content of the message should be in accordance with the objectives, policies and programs of the organization, conflicting messages lead to confusion and doubts.

(8) Continuity of communication – Continuous exchange of information and ideas is an essential element of effective communication. Therefore, the message should be given to the employees continuously.

(9) Understanding the recipient If the person sending the message is aware of the physical, social and intellectual environment of receiving the message, then he can communicate more effectively. Therefore, he should send the message by placing himself in the position of the recipient of the message.

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