विवरणात्मक सांख्यिकी का अर्थ (Meaning of Descriptive Statistics)

विवरणात्मक सांख्यिकी का आशय किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित वास्तविक तथ्यों के आधार पर वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत करने से है ताकि उसका निदान सरलतापूर्वक खोजा जा सके। दूसरे शब्दों में विवरणात्मक सांख्यिकी में उन सांख्यिकीय रीतियों का अध्ययन किया जाता है, जिनका प्रयोग सूचनाओं को अर्थपूर्ण बनाने एवं उनका विवरण देने के लिए किया जाता है। विवरणात्मक सांख्यिकी की प्रमुख विशेषता किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित पूर्ण एवं यथार्थ सूचनाएँ प्रदान करना है। अतः ये अध्ययन किसी समुदाय या समूह के सम्पूर्ण जीवन से सम्बन्धित प्रक्रियाओं के होते हैं। इन सम्पूर्ण सामाजिक प्रक्रियाओं का वर्णन वैज्ञानिक विधि की सहायता से किया जाता है। विवरणात्मक सांख्यिकी का सम्बन्ध निम्न दो प्रकार की समस्याओं से होता है

(1) किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित सामान्य नियमों की खोज करना।

(2) समस्या को हल करने हेतु विशिष्ट परिस्थितियों में निदान खोजना।

इस प्रकार स्पष्ट है कि विवरणात्मक या वर्णनात्मक सांख्यिकी के लिए यह आवश्यक होता है कि किसी सामाजिक विषय के सम्बन्ध में पूर्ण एवं यथार्थ सूचनाएँ एकत्र की जाएँ। ये सूचनाएँ वैज्ञानिक ढंग से प्राप्त की जाती हैं और इनका आधार वास्तविक एवं विश्वसनीय तथ्य है। इस प्रकार स्पष्ट है कि विवरणात्मक सांख्यिकी के माध्यम से संख्यात्मक तथ्यों की मौलिक विशेषताओं को प्रदर्शित किया जाता है।

अनुमानिक या निष्कर्षात्मक सांख्यिकी का अर्थ (Meaning of Inductive or Inferential Statistics)

किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन में परिकल्पना (Hypothesis) का महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि एक ओर परिकल्पना आंकड़ों के संकलन में सहायक होती है तथा दूसरी ओर वह अध्ययन को एक विशिष्ट दिशा भी प्रदान करती है। इसके साथ यह भी स्पष्ट है कि किसी भी परीक्षण के द्वारा प्राप्त परिणामों से यह पता चलता है कि परिपकल्पना सत्य है या असत्य। किन्तु सांख्यिकी के क्षेत्र में परिकल्पना के सत्य या असत्य होने की जाँच एकत्रित आंकड़ों के सांख्यिकी विश्लेषण के आधार पर की जाती है और जिन विधियों के उपयोग द्वारा परिकल्पना के सत्य या असत्य होने की जाँच की जाती है उन्हें अनुमानित सांख्यिकी कहते हैं तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को सांख्यिकीय अनुमान कहते हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि अनुमानित सांख्यिकी उस सांख्यिकी को कहा जाता है जिसके द्वारा उपकल्पना का परीक्षण करके उसके आधार पर समष्टि में वितरित किसी लक्षण के सम्बन्ध में अनुमान किया जाता है। इस तथ्य को एक अन्य प्रकार से इस प्रकार समझाया जा सकता है कि आकलन के आधार पर प्राचलन के सम्बन्ध में जिन विधियों द्वारा अनुमान लगाया जाता है उन्हें आनुमानिक सांख्यिकी कहते हैं। सरल शब्दों में, किसी छोटे समूह या न्यादर्श (Sample) का अध्ययन करके सम्पूर्ण क्षेत्र के बारे में अनुमान लगाने या उचित निष्कर्ष निकालने को आधुनिक सांख्यिकी कहा जाता है। यदि किसी महाविद्यालय के छात्रों की औसत आयु ज्ञात करने के लिए कुछ छात्रों का चयन करके उनकी आयु का औसत निकाला जाता है तो इन कुछ छात्रों की आयु को ही महाविद्यालय के कुल छात्रों की औसत आयु मान लिया जाता है। इस प्रकार व्यादर्श (चयनित छात्रों का समूह) के औसत से समग्र (कुछ छात्र) का औसत अनुमानित करना अनुमानिक सांख्यिकी के अन्तर्गत आता है।

विवरणात्मक सांख्यिकी के उद्देश्य (Objects of Descriptive Statistics)

विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना के भी कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं। संक्षेप में इन उद्देश्यों को अग्रलिखित तीन वर्गों में व्यक्त किया जा सकता है

(1) समूह अथवा परिस्थिति के लक्षणों का परिशुद्ध वर्णन–विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना में हम किसी समूह जैसे कोई राजनीतिक दल अथवा किसी परिस्थिति जैसे हड़ताल या चुनाव आदि का परिशुद्ध वर्णन करते हैं एवं क्रमवार विस्तृत ज्ञान प्राप्त करते हैं। यह ज्ञान गुणात्मक एवं संख्यात्मक दोनों ही प्रकार का हो सकता है। जैसे गुणात्मक ज्ञान से हमें यह पता लगता है कि किस चुनाव के उम्मीदवार किस-किस राजनीतिक दल के थे अथवा वे किस-किस जाति के थे ? संख्यात्मक ज्ञान संख्या पर आधारित होता है। यह सामान्यतः किसी चर की आवृत्ति होती है। जैसे किसी चुनाव में कितने लोगों ने भाग लिया।

(2) किसी चर की आवृत्ति निश्चित करना विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना से अध्ययन करते समय हमें विषय या समस्या का कुछ ज्ञान रहता है। यह ज्ञान पहले किए हुए अन्वेषणात्मक या दूसरे लोगों के अध्ययनों द्वारा प्राप्त होता है। इसलिए वर्णनात्मक अध्ययन के उद्देश्य सुस्पष्ट होते हैं। जैसे यह निश्चित रहता है कि हमें किन लक्षणों का वर्णन करना है। समस्त लक्षणों का वर्णन किसी एक अध्ययन से नहीं होता है। जैसे किसी संस्था के विभिन्न भागों का आकार एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है किन्तु यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक अध्ययन में इसका समावेश हो। इसी प्रकार किन चरों की आवृत्ति देखनी है यह तय होता है।

(3) चरों के साहचर्य के विषय में पता लगाना विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना का एक और उद्देश्य यह है कि इसके द्वारा चरों के साहचर्य के विषय में पता लगाया जाता है। जैसे पिछड़े देशों में आय और शिक्षा में धनात्मक साहचर्य पाया जाता है अर्थात् अमीर व्यक्ति सामान्यतः अधिक शिक्षित होते हैं। विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना में हम किसी प्रकार विभिन्न चरों के साहचर्य का पता लगाते हैं अर्थात् यह देखते हैं कि साहचर्य है या नहीं और यदि है तो इस प्रकार का यहाँ यह ध्यान रखने योग्य बात है कि समस्त चरों का एक-दूसरे के साथ साहचर्य हम नहीं देखते। हम केवल उन चरों का साहचर्य देखते हैं जहाँ हम इनकी आशा करते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विवरणात्मक प्ररचना विवरणात्मक उपकल्पनाओं की परीक्षा करना है। इस प्रकार की उपकल्पनाओं का परीक्षण एक अधिक विकसित प्ररचना द्वारा होता है। वर्णनात्मक अध्ययन द्वारा केवल इन उपकल्पनाओं का निर्माण होता है। जैसे यदि हम किन्हीं घरों में बहुत अधिक साहचर्य पाएँ तो हम यह उपकल्पना बना सकते हैं कि उनमें से एक कारण है और दूसरा नहीं।

विवरणात्मक सांख्यिकी के चरण (Steps of Descriptive Statistics)

वर्णनात्मक अनुसन्धान रचना को किस तरह आयोजित किया जाए इसके कुछ आवश्यक भी हैं। प्रमुख चरण निम्नांकित हैं चरण-

(1) अनुसन्धान उद्देश्यों का निरूपण (2) तथ्य संकलन एवं पद्धतियों का चयन (3) निदर्शन का चयन (4) आधार सामग्री का संकलन एवं परीक्षण (5) परिणामों का विश्लेषण करना। (6) प्रतिवेदन प्रस्तुत करना

इन समस्त चरणों से सफलतापूर्वक गुजरने के साथ ही विवरणात्मक सांख्यिकी या वर्णनात्मक अनुसन्धान प्ररचना के उद्देश्यों की प्राप्ति सम्भव है।

विवरणात्मक सांख्यिकी की सांख्यिकीय रीतियाँ (Statistical Methods of Descriptive Statistics)

विवरणात्मक सांख्यिकी के अन्तर्गत आने वाली सांख्यिकीय रीतियाँ निम्न प्रकार हैं- (1) समकों का संग्रहण (Collection of Data) सांख्यिकीय विधियों द्वारा ज्ञान की खोज करना सांख्यिकीय अनुसन्धान कहा जाता है। सांख्यिकीय अनुसन्धान का उद्देश्य सुव्यवस्थित तथा वैज्ञानिक पद्धति से सांख्यिकीय रीतियों का उपयोग करते हुए सम्बन्धित समंकों को संकलित करना तथा उनके आधार पर निष्कर्ष निकालना है। समंकों का संकलन सांख्यिकीय अनुसन्धान का एक प्रमुख चरण है। समंकों का संकलन सम्पूर्ण अनुसन्धान अथवा प्रतिदर्श अनुसन्धान के रूप में किया जा सकता है।

(2) समकों का व्यवस्थीकरण (Organisation of Data Editing)-समंकों के व्यवस्थीकरण में समंकों का सम्पादन, वर्गीकरण, सारणीयन आदि का अध्ययन किया जाता है। सम्पादन का मुख्य उद्देश्य सम्भावित त्रुटियों और अनियमितताओं का पता लगाना व उन्हें दूर करना है।

(3) वर्गीकरण एवं सारणीयन (Classification and Tabulation) संकलित समंकों को अधिक सरल एवं तुलना योग्य बनाने के लिए किसी गुण-विशेष के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटना वर्गीकरण कहलाता है। वर्गीकृत समंकों को सारणी रूप में रखना सारणीयन कहा जाता है।

(4) प्रस्तुतीकरण (Presentation)–समकों में प्रस्तुतीकरण में प्रायः तीन सांख्यिकीय रीतियाँ आती हैं-सांख्यिकीय सारणियाँ, चित्र (diagram) तथा बिन्दुरेखीय चित्र (graph) चित्र एवं ग्राफ द्वारा प्रस्तुत समक मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ते हैं।

(5) विश्लेषण (Analysis)–समंकों के विश्लेषण की प्रमुख उल्लेखनीय रीतियाँ (i) केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (माध्य), (ii) अपकिरण, विषमता, पृथुशीर्षत्व आदि के माप, (iii) सहसम्बन्ध, प्रतीपगमन, काल श्रेणी, सूचकांक आदि की गणना एवं मापन आदि हैं।

(6) निर्वाचन (Interpretation) समंकों का विश्लेषण करने के पश्चात् उचित, निष्पक्ष और बुद्धिमत्तापूर्ण निष्कर्ष निकाले जाते हैं। निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया को समकों का निर्वचन (interpretation of data) कहा जाता है।

अनुमानित सांख्यिकी की सांख्यिकीय रीतियाँ (Staticstical Methods of Inferential Statiesties) अनुमानित सांख्यिकी के अन्तर्गत सांख्यिकीय रीतियाँ निम्न प्रकार हैं

(i) प्रायिकता सिद्धान्त (Probability Theory) -सांख्यिकी के गणितीय सिद्धान्त प्रायिकता सिद्धान्त पर ही आधारित हैं।

(ii) प्रतिदर्श सिद्धान्त (Sampling Theory)-प्रतिदर्श सिद्धान्त की सहायता से परिकल्पना परीक्षण, सार्थकता परीक्षण आदि अनुमानिक सांख्यिकी के अन्तर्गत ही आते हैं। (iii) पूर्वानुमान (Forecasting)– प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर भविष्य के बारे में अनुमान लगाया जाना भी अनुमानित सांख्यिकी के अन्तर्गत किया जा सकता है। पूर्वानुमान एक ऐसी सांख्यिकीय रीति है जिसके द्वारा अनुभवों एवं परिणामों के आधार पर भावी गति की ओर इंगित किया जाता है ताकि मानव का कल्याण किया जा सके।


Meaning of Descriptive Statistics

Descriptive statistics means to present a descriptive description of a social problem on the basis of real facts so that its solution can be found easily. In other words, descriptive statistics is the study of the statistical methods that are used to make sense of information and to describe it. The main feature of descriptive statistics is to provide complete and accurate information related to a social problem. Therefore, these studies are of the processes related to the whole life of a community or group. All these social processes are described with the help of scientific method. Descriptive statistics is concerned with the following two types of problems:

(1) To find out the general rules related to a social problem.

(2) Finding solutions in specific situations to solve the problem.

It is thus clear that for descriptive or descriptive statistics, it is necessary to collect complete and accurate information about a social subject. These information are obtained in a scientific manner and are based on real and reliable facts. It is thus clear that the fundamental characteristics of numerical facts are displayed through descriptive statistics.

Meaning of Inductive or Inferential Statistics

Hypothesis has an important place in any scientific study because on the one hand hypothesis helps in the collection of data and on the other hand it also provides a specific direction to the study. With this it is also clear that the results obtained by any test show whether the hypothesis is true or false. But in the field of statistics, the test of whether the hypothesis is true or false is done on the basis of statistical analysis of the collected data and the methods by which the hypothesis is checked to be true or false are called inferential statistics and the method of decision making. The process is called statistical inference. Thus it is clear that inferred statistics is called that statistics, by which hypothesis is tested and based on it, estimates are made regarding a characteristic distributed in the population. This fact can be explained in another way in this way that the methods by which estimates are made in relation to the parameters on the basis of estimates are called inferential statistics. In simple words, by studying a small group or sample, it is called modern statistics to estimate or draw reasonable conclusions about the whole area. If the average age of some students is selected to find the average age of the students of a college, then the age of these few students is taken as the average age of the total students of the college. In this way, estimating the average of the overall (some students) from the average (group of selected students) comes under inferential statistics.

Objects of Descriptive Statistics

There are also some important objectives of the descriptive research design. In short, these objectives can be expressed in the following three categories:

(1) Precise description of the characteristics of a group or situation – In the descriptive research design, we accurately describe a group like a political party or a situation like strike or election etc. and get detailed knowledge sequentially. This knowledge can be both qualitative and numerical. For example, from qualitative knowledge, we get to know which election candidates belonged to which political party or which caste they belonged to? Numerical knowledge is based on numbers. It is usually the frequency of a variable. Like how many people participated in an election.

(2) Determining the frequency of a variable While studying from the descriptive research design, we have some knowledge of the topic or problem. This knowledge is gained through earlier exploratory or other people’s studies. Therefore the objectives of the descriptive study are clear. As such it remains certain which symptoms we have to describe. Not all symptoms can be described by a single study. For example, the size of the different parts of an institution may be an important feature, but it is not necessarily included in every study. Similarly, the frequency of which variables to observe is decided.

(3) Finding out about the association of variables Another purpose of the descriptive research design is to find out about the association of variables. For example, in backward countries, there is a positive association between income and education, that is, rich people are generally more educated. In the descriptive research design, we somehow find out the association of different variables, that is, we see whether there is an association or not, and if it is, then this type of thing is to be noted here that we do not associate all the variables with each other. Look. We only see the association of variables where we expect them. Thus we can say that descriptive design is to test descriptive hypotheses. Such hypotheses are tested by a more developed design. These hypotheses can be formed only by descriptive study.

Is. For example, if we find a lot of associations in certain households, we can hypothesize that one of them is the cause and the other is not.

Steps of Descriptive Statistics

There are also some essentials of how to organize the descriptive research design. The major steps are as follows-

(1) Formulation of research objectives (2) Data collection and selection of methods (3) Selection of model (4) Compilation and testing of base material (5) Analyzing the results. (6) submission of reports

With successful passing of all these steps, it is possible to achieve the objectives of descriptive statistics or descriptive research design.

Statistical Methods of Descriptive Statistics

Statistical methods that come under descriptive statistics are as follows- (1) Collection of data The search for knowledge by statistical methods is called statistical research. The purpose of statistical research is to collect related data using statistical methods in a systematic and scientific way and draw conclusions on the basis of them. Data collection is a major step in statistical research. The collection of data can be done in the form of complete research or sample research.

(2) Organization of Data Editing – In the arrangement of data, editing, classification, tabulation etc. is studied. The main purpose of editing is to detect and correct possible errors and irregularities.

(3) Classification and Tabulation To make the collected data more simple and comparable, dividing it into different classes on the basis of a particular attribute is called classification. Keeping grouped data in tabular form is called tabulation.

(4) Presentation – There are usually three statistical methods in the presentation of equations – statistical tables, diagrams and dotted diagrams.

(5) Analysis – The main notable methods of analysis of data are (i) measures of central tendency (mean), (ii) measures of dispersion, asymmetry, heterogeneity etc., (iii) correlation, regression, time series, index etc. Calculation and measurement etc.

(6) After analyzing the election data, fair, fair and intelligent conclusions are drawn. The process of drawing a conclusion is called the interpretation of data.

Statistical Methods of Inferential Statistics The following are the statistical methods under estimated statistics.

(i) Probability Theory – The mathematical principles of statistics are based on probability theory only.

(ii) Sampling Theory – With the help of sample theory, hypothesis testing, significance test, etc. come under inferential statistics. (iii) Forecasting – Estimating about the future based on the findings obtained can also be done under estimated statistics. Forecasting is a statistical method by which the future course of action is indicated on the basis of experiences and results so that the welfare of human beings can be done.

1 COMMENT

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