विनम्रता सूचक संरचना किसे कहते है ? चार उदाहरण दीजिए। What is the politeness indicator structure called? Give four examples.

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विनम्रतासूचक संरचनाओं में अनुनय विनय के भाव निहित रहते हैं। साथ ही किसी कार्य को करने के लिये आग्रह भी किया जाता है। ऐसी संरचनाओं के वाक्यों से शिष्टाचार और सभ्यता प्रकट होती है। इन वाक्यों का प्रयोग छोटो द्वारा बड़ों के प्रति सम्मानजनक भावों की अभिव्यक्ति के लिये किया जाता है। विनम्रतासूचक वाक्यों का प्रारंभ विनयसूचक शब्दों से किया जाता है, जैसे श्रीमानजी, मान्यवर, कृपया, कृपा करके आदि। कहीं-कहीं ये वाक्य क्रिया के विनम्रतासूचक रूप में भी प्रयोग में आते हैं। वाक्य के अन्त में ये ध्वनि आती है। कृपया इसे पढ़िये। आइये, यहाँ बैठिये। ध्यान से सुनिये। कृपया मेरा कहना मानिये आदि। कभी-कभी आज्ञार्य वाक्यों में विनयसूचक रूप दिया जाता है, परन्तु ऐसे वाक्य शिष्टता, विनम्रता एवं शालीनता की कोटि में नहीं आते हैं।

जैसे- कृपया, जल्दी आओ कृपया आप स्वयं अनुभव करो इसी प्रकार ‘करिये और ‘कीजिये’ में से ‘कीजिये के प्रयोग में श्रोता के प्रति अधिक विनम्रता का भाव प्रकट होता है, जैसे भोजन करिये। कहीं-कहीं स्वयं को छोटा करके दिखाने और सम्बोध्य को बड़ा दिखाने में विनम्रता की अभिव्यक्ति होती है, जैसे-अपने महल जैसे भवन को ‘गरीबखाना’ और दूसरे के सामान्य घर को ‘दौलतखाना’ कहने के मूल में विनम्रता प्रदर्शन का ही भाव निहित है। श्रोता जब आयु में बड़ा अथवा अन्य किसी कारण से आदरणीय हो तो, विनवतासूचक अभिव्यक्ति के लिये आप, श्रीमान, महोदय,

महानुभाव, सर, जी, साहब, सरकार, हुजूर आदि सम्बोधन प्रयोग में लाये जाते हैं। विनता को प्रकट करने वाली शब्द संरचना बहुत अधिक है। विनम्रता का भाव वक्ता के कथन, उच्चारण के उच्च और निम्न अथवा शान्त भाव से प्रकट होता है। विनमतासूचक शब्द संरचनाओं को अग्रांकित बिन्दुओं के आधार पर विश्लेषित किया जा सकता है

1. सम्बोधन में विनम्रता सम्बोधन व्यक्ति की प्रकृति, संस्कार और शिष्टता पर निर्भर रहता है। सम्बोधन में विनम्रता को प्रकट करने वाले कुछ शब्द इस प्रकार हैं-आप, श्रीमान, महोदय, आदरणीय, सर, महाशय, साहब, महानुभाव, जी, हुजूर, मालिक, सरकार, महाभाग इत्यादि ।

2. विनसतासूचक क्रियाएँ किसी भी व्यक्ति की मनोदशा पर वक्ता द्वारा प्रयुक्त क्रियाओं का अधिक असर होता है। विनम्रतासूचक क्रियाएँ हैं-आइए, बैठिए, कहिये, पधारिए, आराम कीजिये, सुशोभित कीजिये, लीजिये, दीजिये, देखिए, खाइए, पीजिये, सुनाइए, उठाइए, ले जाइए, बनाइए आदि।

3. वक्ता की मनोदशा या मनोभाव पर आधारित विनसता-वक्ता जितनी शान्ति या शान्त मनोभाव से अभिव्यक्ति देगा, उतनी विनम्रता प्रकट होती है, जैसे—–(i) सर! यहाँ इस कुर्सी पर बैठिए। (ii) मैं तो आपका सेवक हूँ। (iii) आप तो आज्ञा कीजिए, इत्यादि।

4. शक्ति सम्पन्न व्यक्ति की विनम्रता कहा जाता है कि विनम्रता वीरों का आभूषण है। शक्तिशाली व्यक्ति जब विनम्रता प्रकट करता है तो विनम्रता से सुशोभित व्यक्ति और भी मनोहर लगता है। भगवान विष्णु को भृगु ऋषि ने पद प्रहार (लात मारी) किया था, तब विष्णुजी ने अपनी विनम्रता में कहा था- “क्षमा करें गुरुदेव! आपके पैरों को चोट तो नहीं लगी, मेरा वक्षस्थल तो वज्र का बना है।”

5. वात्सल्ययुक्त विनम्रता बच्चों के प्रति माता-पिता के मन में अत्यधिक विनम्रता का भाव रहता है। उस विनम्रता में वात्सल्य का समावेश होता है। माता अपने पुत्र अथवा पुत्री को बेटे, बिटिया शब्द के साथ उसके नये-नये नाम नित्य रखती है। वात्सल्ययुक्त शब्दों की लम्बी सूची है, मन में जो आता है वही प्यार या स्नेह से नाम रख देते हैं।

6. समर्पणवाचक विनम्रता गुरुजनों, माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति समर्पणवाचक विनम्रता का भाव रहने के कारण समर्पणवाचक शब्दों या वाक्य का प्रयोग किया जाता है, जैसे—(i) बाबा हुजूर मेरी रक्षा कीजिए। (ii) सरकार! आप ही मेरे जीवन के रखवाले हैं। (iii) मुझे अपना बना लीजिये। (iv) मेरे मन में ऐसा भाव पैदा कीजिये कि मैं हमेशा आपके कदमों में रहूँ। (v) मेरे सरकार ! मेरे अवगुणों को दूर कीजिये ये वाक्य समर्पण को अभिव्यक्त करते हैं।

7. अधिक विनम्रता प्रकट करने वाले शब्द अधिक विनम्रता को प्रकट करने के लिए क्रियाओं में विनम्रतासूचक प्रत्यय ‘इए’ और ‘जिए’ आदि लगाकर ‘गा’, ‘गी’ और ‘गे’ को जोड़ देते हैं, जैसे आइए और लीजिये। अब और अधिक विनम्रता के लिए आइएगा और लीजिएगा। अधिक विनम्रता को प्रकट करने वाली क्रियाओं को इस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है-(i) देंगे-दीजिये-दे दीजिए-दीजिएगा दे दीजिए न। (ii) लो-लीजिए ले लीजिए- लीजिएगा ले लीजिएगा-ले लीजिए न।


The expressions of persuasion and modesty are inherent in polite structures. Along with this, a request is also made to do some work. Sentences from such structures reveal manners and civility. These sentences are used by the younger to express respectful feelings towards the elders. Polite sentences are started with polite words, such as sir, dear, please, kindly etc. Sometimes these sentences are also used in the polite form of the verb. This sound comes at the end of the sentence. Please read this. Come on, sit here. Listen carefully. Please obey me etc. Sometimes a polite form is given in obligatory sentences, but such sentences do not come in the category of politeness, humility and decency.

For example, please, come soon, please feel yourself in the same way, in the use of ‘do’ and ‘do’ out of ‘do’, a sense of humility is expressed towards the listener, like eat. In some places, there is an expression of humility in showing oneself small and making the addressee big, for example, at the root of calling one’s palace-like building as ‘poorkhana’ and the common house of others as ‘daulatkhana’, there is a sense of humility. . When the audience is older in age or respectable for any other reason, then you, sir, sir, for polite expression.

Addresses like Excellency, Sir, Sir, Sir, Sarkar, Huzoor etc. are used. There is a lot of word structure revealing Vinta. The sense of humility is manifested by the high and low of the speaker’s utterance, or by the calmness of the utterance. The derogatory word structures can be analyzed on the basis of the following points

1. Humility in Addressing depends on the nature, culture and decency of the person. Some words expressing humility in the address are as follows – you, sir, sir, respected, sir, sir, sir, nobleman, sir, gentleman, master, government, great, etc.

2. Derogatory verbs The mood of any person is more influenced by the verbs used by the speaker. The polite verbs are come, sit, say, come, rest, adorn, take, give, see, eat, drink, hear, pick up, take away, make, etc.

3. Vinlessness based on the mood or sentiment of the speaker – The more calm or calm the speaker gives the expression, the more humility is manifested, such as – (i) Sir! Sit here on this chair. (ii) I am your servant. (iii) You then order, etc.

4. Humility of a Powerful Person It is said that humility is the ornament of the brave. When a powerful person shows humility, a man adorned with humility looks even more handsome. Lord Vishnu was Pad Prahar (kicked) by Bhrigu Rishi, then Vishnu said in his humility – “Sorry Gurudev! Your feet are not hurt, my chest is made of thunderbolt.”

5. Respectful humility There is a feeling of extreme humility in the mind of parents towards children. In that humility, there is love. Mother names her son or daughter with the words son, daughter and her new names regularly. There is a long list of affectionate words, whatever comes in the mind, they name it with love or affection.

6. Surrender Humility Due to the feeling of devotional humility towards teachers, parents and elders, words or sentences are used, such as- (i) Baba Huzoor, protect me. (ii) Government! You are the keeper of my life. (iii) Make me yours. (iv) Create such a feeling in my mind that I will always be at your feet. (v) My government! Remove my demerits These sentences express dedication.

7. Words showing more humility Add ‘ga’, ‘gi’ and ‘gay’ to verbs by adding polite suffixes ‘ea’ and ‘live’ etc. to express more humility, like come and take. Now for more humility will come and collect. The verbs expressing more humility can be used as follows- (i) give-give-give-give-give-don’t. (ii) Take-Take-Take-Take-Take-Take-Take-Don’t.

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