वैज्ञानिक प्रबंध क्या है ? यह परंपरागत प्रबन्ध से किस प्रकार भिन्न है ? What is Scientific Management? How is it different from traditional management?

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वैज्ञानिक प्रबन्ध से आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Scientific Management)

वैज्ञानिक प्रबन्ध दो शब्दों के संयोग से बना है-विज्ञान और प्रबन्ध विज्ञान शब्द के भी स्वयं दो खण्ड–वि + ज्ञान है। ‘वि’ का अर्थ अधिक और ‘ज्ञान’ का अर्थ हमारी साधारण जानकारी से है। इस प्रकार विज्ञान का अर्थ ज्ञान की अभिवृद्धि से है जो कि नये उद्योगों द्वारा हमारे सामान्य ज्ञान में जुड़ जाती है। दूसरा शब्द है-‘प्रबन्ध’ जिसका अर्थ है, किसी भी कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से चलाना। अतः हम वैज्ञानिक प्रबन्ध का अर्थ इस प्रकार से ले सकते हैं कि किसी भी कार्य की अभिवृद्धि ज्ञान की सहायता से, योजनाबद्ध रूप से किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सुव्यवस्थित रूप से चलाने को वैज्ञानिक प्रबन्ध कहते हैं।

एफ. डब्ल्यू, टेलर (F. W. Taylor) के अनुसार, “वैज्ञानिक प्रबन्ध यह जानने की कला है कि आप लोगों से यथार्थ में क्या कराना चाहते हैं तथा यह देखना चाहते हैं कि वे उसको सुन्दर से सुन्दर तथा सस्ते ढंग से करें।

पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Dricker) के अनुसार, “वैज्ञानिक प्रबन्ध का आशय कार्य का

संगठित अध्ययन, कार्य का सरलतम अवयवों में विभाजन तथा मजदूरी द्वारा सम्पन्न किये जाने वाले कार्य के प्रत्येक अवयव का क्रमबद्ध सुधार करना है। ”

एच. एफ. पर्सन (H.F. Person) के अनुसार, “वैज्ञानिक प्रबन्ध से तात्पर्य ऐसे प्रबन्ध से है। जो वैज्ञानिक अन्वेषण एवं विश्लेषण से निकले हुए सिद्धान्तों पर अवलम्बित हो।” सारांश रूप में, “वैज्ञानिक प्रबन्ध, प्रबन्ध की उस पद्धति को कहते हैं, जिसमें नियोजन एवं नियन्त्रण का केन्द्रीकरण हो और श्रमिकों की कार्य क्षमता को बढ़ाने तथा अधिकतम उत्पादन के हेतु विभिन्न क्रियाओं का निरीक्षण किया जाये और प्रयोग के उपरान्त उसमें आवश्यक परिवर्तन किये जायें।

वैज्ञानिक प्रबन्ध की विशेषताएँ या लक्षण  (Characteristics of Scientific Management)

वैज्ञानिक प्रबन्ध की प्रमुख विशेषताओं या लक्षणों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) वैज्ञानिक प्रबन्ध की निश्चित योजना के द्वारा विभिन्न कार्यों को निश्चित तरीकों द्वारा सम्पादित किया जाता है।

(2) वैज्ञानिक प्रबन्ध में विभिन्न घटनाओं के सम्बन्ध में विश्लेषण एवं प्रयोग किये जाते हैं।

(3) वैज्ञानिक प्रवन्ध में अच्छे मानवीय सम्बन्धों पर विशेष जोर दिया जाता है।

(4) वैज्ञानिक प्रबन्ध में साधनों के अधिकतम उपयोग हेतु आवश्यक प्रयास किये जाते हैं।

(5) वैज्ञानिक प्रबन्ध में वस्तु का आकार, रंग, किस्म भार आदि के लिए प्रमाप निश्चित किये जाते हैं।

(6) वैज्ञानिक प्रबन्ध में कर्मचारियों में कार्य का विभाजन उनकी योग्यतानुसार किया जाता है।

(7) वैज्ञानिक प्रबन्ध में संस्था के पूर्व निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए समस्त शक्ति को जुटाया जाता है।

(8) वैज्ञानिक प्रबन्ध में व्यक्तिगत हित के स्थान पर सामूहिक हित को सर्वोपरि माना जाता है।

(9) वैज्ञानिक प्रबन्ध के फलस्वरूप कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि सम्भव होती है।

( 10 ) वैज्ञानिक प्रबन्ध के द्वारा संस्था के प्रत्येक कार्य विवेकपूर्ण ढंग से सम्पन्न किये जाते हैं।

वैज्ञानिक प्रबन्ध के सिद्धान्त

(Principles of Scientific Management)

वैज्ञानिक प्रबन्ध के मुख्य तत्वों या सिद्धान्तों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) कार्य का अनुमान-वैज्ञानिक प्रबन्ध का यह सिद्धान्त इस बात पर जोर देता है कि सामान्य परिस्थितियों में एक श्रमिक को कितना कार्य करना चाहिए, तथा तथ्य को प्रयोगों द्वारा ज्ञात करके निश्चित किया जाये। यह वैज्ञानिक प्रबन्ध का आधारभूत सिद्धान्त है।

(2) प्रयोग-श्रमिकों की मता बढ़ाने के सन्दर्भ में वैज्ञानिक प्रबन्ध में प्रयोगों का भी काफी महत्व है। प्रयोग के बिना वैज्ञानिक प्रबन्ध नहीं हो सकता। ये प्रयोग निम्न तीन दृष्टियों से किये जाते हैं

(i) समय अध्ययन- इस प्रयोग के आधार पर प्रत्येक क्रिया को करने का प्रमाणित समय निश्चित किया जाता है, जिस समय में एक कार्यक्षमता श्रमिक कार्य कर सकता है। इसमें समय के आधार पर मजदूरी दी जाती है। निर्धारित समय से कम समय में काम करने वाले को अधिक मजदूरी दी जाती है एवं ज्यादा समय में काम करने वाले को कम मजदूरी दी जाती है। इससे श्रमिक की काम टालने की प्रवृत्ति का अन्त हो जाता है।

(ii) गति अध्ययन-गति अध्ययन वास्तव में कार्य करने की ऐसी सर्वश्रेष्ठ विधि का पता लगाने की पद्धति है जिसमें श्रमिकों को कम से कम अपने शरीर को हिलाना-डुलाना है। इसके अन्तर्गत श्रमिकों की गतिविधियों को देखा जाता है और इस बात का प्रयत्न किया जाता है कि उस कार्य को करने की गतिविधियों में कमी हो। इसके लिए यन्त्रों में सुधार, श्रमिकों को शिक्षा, फिल्म आदि का प्रवन्ध किया जाता है।

(iii) यकावट अध्ययन-इसके अन्तर्गत प्रत्येक क्रिया करने में कितनी थकावट होती है, इसका अध्ययन किया जाता है अर्थात् वकान अध्ययन द्वारा यह पता लगाया जाता है कि श्रमिक को थकान कब, क्यों और कैसे होती है तथा उसे कैसे सुधारा जा सकता है। थकान अध्ययन का यह लक्ष्य होता है कि प्रत्येक श्रमिक को उचित विश्राम मिले और उसकी थकान कम हो ।

(3) कार्य योजना का निर्माण-वैज्ञानिक प्रबन्ध का मुख्य केन्द्र योजना विभाग है। प्रयोगों के आधार पर प्रत्येक कार्य के लिए विशेष योजना तैयार की जाये तथा उसके अनुसार श्रमिकों की आवश्यकता का ध्यान रखा जाये।

(4) श्रमिकों का चुनाव तथा प्रशिक्षण श्रमिकों की नियुक्ति वैज्ञानि ढंग से उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाये। शारीरिक तथा मानसिक दृष्टि से कार्य के लिए उपयुक्त व्यक्ति का चुनाव करके अच्छे उसे वेतन पर नियुक्त किया जाये। आकर्षक वेतन भी श्रमिक को उत्तम कार्य करने का प्रोत्साहन देता है।

(5) कर्मचारियों में कार्य का समुचित वितरण-श्रमिक की नियुक्ति एवं शिक्षा के बाद विभिन् भी अधिकाधिक कार्यक्षमताका क्रियाओं का श्रमिकों में उनकी शारीरिक, मानसिक एवं यान्त्रिक योग्यता के अनुसार वितरण हो | चाहिए जिससे वह काम पूर्वक करे तथा उद्योग लाभ हो।

(6) वस्तुओं का समुचित चुनाव एवं उपयोग श्रमिकों की कार्य क्षमता उनको दिये जाने वाले कच्चे माल पर निर्भर होती है। इसलिए कारखानों में प्रमापित (Standard) वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। इसके बाद उन वस्तुओं के उपयोग करने की पद्धति भी निश्चित की जाती है, जिससे उपयोग करते समय वस्तुओं का अपव्यय न हो वस्तुओं के उपयोग सम्बन्धी नये-जये प्रयोग करते रहना चाहिए।

(7) नवीनतम एवं कार्यक्षम यन्त्र सामग्री श्रमिक की कुशलता एवं कार्यक्षमता तभी अधिक हो सकती है जब उन्हें अच्छे से अच्छे औजार दिये जायें तथा नवीनतम यन्त्र सामग्री पर वे काम करें।अतः बड़ी सावधानी से यन्त्रों का चुनाव करना चाहिए और यन्त्रों की कार्यक्षमता बनाये रखने के लिए समय-समय पर उनकी मरम्मत करवानी चाहिए और आवश्यकतानुसार यन्त्र के पुजों को बदलते रहना चाहिए। यन्त्रों के उपयोग पर भी निरीक्षण रखा जाना चाहिए।

(8) कारखानों का स्वस्थ वातावरण कारखानों का स्वास्थ्यप्रद एवं प्रसन्नतापूर्ण वातावरण श्रमिकों की कान दूर करता है और कार्य में उनकी रुचि जाग्रत रखता है। इसके लिए कार्य करने के लिए पर्याप्त स्थान, आवश्यकतानुसार तापक्रम में परिवर्तन करने का आयोजन, जल-पान, स्नानगृह, शिशुगृह आदि की सुविधाएँ होना आवश्यक है।

(9) प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धति श्रमिकों की कार्य क्षमता में वृद्धि करने के लिए यह आवश्यक है कि कारखानों में प्रेरणात्मक मजदूरी पद्धति अपनायी जाये अर्थात् पद्धति ऐसी हो जिसके अपनाने से श्रमिक अधिक कार्य करने के लिए लालायित रहे। इसके लिए विभेदात्मक मजदूरी पद्धति उपयुक्त है।

(10) प्रमापीकरण-प्रमापीकरण वैज्ञानिक प्रबन्ध का मुख्य तत्व है। इसमें सम्पूर्ण कार्य का प्रमापीकरण कर दिया जाता है। अर्थात् किसी भी प्रबन्ध व्यवस्था को वैज्ञानिक बनाने के लिए उत्पादन प्रणाली, नियन्त्रण पद्धति, सामग्री, यन्त्र उपकरणों आदि का प्रमापित होना आवश्यक होता है। प्रमापीकरण के फलस्वरूप कार्य में एकरूपता आती है और किस्म में सुधार होता है। इसी कारण वैज्ञानिक प्रवन्ध में प्रमापीकरण को आधारशिला कहा गया है।

(11) मानसिक क्रान्ति-मानसिक क्रान्ति से तात्पर्य यह है कि मिल-मालिक अपना दकियानूसी व्यवहार छोड़कर श्रमिकों के साथ सद्भावनापूर्ण एवं मानवतापूर्ण व्यवहार कर उन्हें अधिकाधिक सुविधाएँ देने के लिए प्रयत्नशील हॉ, अमिक अपने मालिकों के प्रति अच्छा व्यवहार रखें और भ्रममूलक पारणाओं को छोड़ दें श्रम तथा पूँजी को घनिष्ठ सम्पर्क में आना चाहिए जिससे दोनों को लाभ हो।

वैज्ञानिक प्रबन्ध के लाभ (Advantages of Scientific Management)

वैज्ञानिक प्रबन्ध केवल नियोक्ताओं के लिए ही नहीं वरन् श्रमिकों, उपभोक्ताओं एवं समाज के लिए लाभदायक है। वैज्ञानिक प्रबन्ध के लाभों या पक्ष में तर्कों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) उत्पादन व्यय मे कमी-वैज्ञानिक प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य अपव्यय को रोककर उत्पादन व्यय में कमी करना है। इससे कारखाने के व्यय में मितव्ययता आती है जो कि सफलता की कुंजी है।

(2) वस्तु की किस्म में सुधार उचित निरीक्षण एवं प्रमापीकरण की व्यवस्था लागू होने से वस्तु की किस्म में सुधार होता है।

((3) औद्योगिक शान्ति–श्रम एवं पूंजी में पारस्परिक मित्रतापूर्ण वातावरण तैयार करने में वैज्ञानिक प्रवन्ध का महत्वपूर्ण योगदान है। औद्योगिक शान्ति से उत्पादकों को कार्य निश्चित समय में सम्पन्न होने का आश्वासन रहता है।

(4) श्रम विभाजन को प्रोत्साहन वैज्ञानिक प्रबन्ध में श्रम विभाजन को अपनाया जाता है जिसमें उद्योग को बम विभाजन से होने वाले लाभों की प्राप्ति होती है।

(5) कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि कार्यक्षमता बढ़ने के कारण कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होती है। समय-समय पर श्रमिकों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक प्रकार के प्रोत्साहन दिये जाते हैं, जिनमें वित्तीय प्रोत्साहन भी शामिल हैं, इससे कर्मचारियों के मनोबत में वृद्धि होती है।

(6) कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि वैज्ञानिक प्रबन्ध के अन्तर्गत कर्मचारियों में कार्य का समुचित एवं रुचि के अनुसार वितरण किया जाता है, जिससे कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

(7) समय की बचत वैज्ञानिक प्रबन्ध अपनाने से कार्य करने में समय की बचत होती है। वैज्ञानिक प्रवन्ध में वैज्ञानिक रीतियों से काम करने के कारण या श्रमिक कम समय में अधिक कार्य कर सकता है।

(8) उपभोक्ता को सस्ती वस्तुएँ उपलब्ध होना-मशीनों द्वारा उत्पादन करने से वस्तु की लागत कम आती है। फलस्वरूप उपभोक्ताओं को वैज्ञानिक प्रवन्ध के द्वारा उत्पादित वस्तुएँ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध होती है और उनके धन की बचत होती है।

(9) सामाजिक स्तर में वृद्धि वर्तमान समय में किसी देश का अस्तित्व उसके औद्योगिक विकास के आधार पर औंका जाता है। वैज्ञानिक प्रबन्ध को अपनाने से उत्पादन बढ़ता है, देश में आय बढ़ती है और इस प्रकार उद्योग एवं व्यवसाय का विकास होता है।

(10) रोजगार के साधनों में वृद्धि-वैज्ञानिक प्रबन्ध के प्रणेता श्री टेलर का कथन है कि वैज्ञानिक प्रवन्ध के परिणामस्वरूप उत्पादकता में वृद्धि होती है, नये-नये कारखाने खुलते हैं और देश में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है।

वैज्ञानिक प्रबन्ध के दोष

(Disadvantages of Scientific Management)

वैज्ञानिक प्रबन्ध में कुछ दोष भी बताये जाते हैं जिनके आधार पर उत्पादक व नियोक्ता वर्ग पूर्णतया सन्तुष्ट नहीं है और श्रमिक वर्ग खुलकर विरोध करता है। वैज्ञानिक प्रवन्ध के दोषों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(A) उत्पादक व नियोक्ताओं का असन्तोष

उत्पादक व नियोक्ताओं की दृष्टि से वैज्ञानिक प्रबन्ध में निम्न दोष बताये जाते हैं

(1) अधिक खर्चीली पद्धति वैज्ञानिक प्रवन्ध पद्धति अधिक खर्चीली है, क्योंकि इसको अपनाने से यन्त्रों में सुधार योजना विभाग की स्थापना एवं निरन्तर शोध आदि में अधिक पूँजी लगानी पड़ती है। अधिक खर्चे के कारण छोटे उद्योग तो इसे अपनाने का साहस ही नहीं कर सकते।

(2) कुशल कर्मचारियों को प्राप्त करना कठिन-वैज्ञानिक प्रबन्ध को लागू करने के लिए कुशल एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों को होना आवश्यक है, परन्तु यथाशीघ्र इनका मिलना सरल नहीं होता। अकुशल कर्मचारियों के हाथों में वैज्ञानिक प्रबन्ध की प्रणाली एक खिलौना मात्र बनकर रह जाती हैं।

(3) मन्दीकाल में भारस्वरूप-मन्दीकाल में वैज्ञानिक प्रबन्ध की व्यवस्था भारस्वरूप लगती है, क्योंकि उस समय इस पर किया जाने वाला व्यय या तो लाभ को कम करता है अथवा हानि को बढ़ाता है।

(4) पूर्ण प्रमापीकरण सम्भव नहीं वैज्ञानिक प्रबन्ध की सफलता के लिए पूर्ण प्रमापीकरण अपेक्षित है, किन्तु श्रमिकों के योग्यता, मानसिक शक्ति भिन्न-भिन्न होने के कारण पूर्ण प्रमापीकरण सम्भव नहीं हो पाता है।

(5) परम्परावादी दृष्टिकोण को त्यागने में कठिनाई-नियोक्ता परम्परावादी दृष्टिकोण रखते हैं जिसे वे आसानी से त्यागने को तैयार नहीं होते, अज्ञात एवं अनिश्चित लाभ की आशा में वे वर्तमान पद्धतियों को त्यागकर जोखिम नहीं उठाना चाहते।

(B) श्रमिकों का विरोध

श्रमिकों द्वारा वैज्ञानिक प्रबन्ध के विरोध के कारण श्रमिक वर्ग भी वैज्ञानिक प्रबन्ध का विरोध करता है, उनके द्वारा किये गए विरोध के निम्नलिखित कारण है

((1) श्रमिकों की प्रेरणा का अन्त-वैज्ञानिक प्रबन्ध में श्रमिक। देश के अनुसार ही कार्य करता है। अतः वह एक मशीन की भाँति बनकर रह जाता है। उसको व्यक्तिगत कुशलता एवं योग्यता को प्रदर्शित करने का कोई अवसर नहीं मिलता। इस प्रकार श्रमिकों में प्रेरणा का अन्त हो जाता है।

(2) बेकारी का भय वैज्ञानिक प्रबन्ध में अधिकतर श्रम बचाने वाले यन्त्रों का प्रयोग होता है साथ ही श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ जाती है। अतः प्रारम्भ में अनेक श्रमिकों के अयोग्य कहकर बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रकार श्रमिकों में बेकारी का भय बना रहता है।

(3) श्रमिकों पर कार्यभार अधिक-वैज्ञानिक प्रबन्ध अपनाने वाले श्रमिकों पर कार्यभार बढ़ जाता है उनको अधिक परिश्रम करना पड़ता है जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

(4) श्रम संघों द्वारा विरोध-श्रम संघ वैज्ञानिक प्रवन्ध का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि इसके अन्तर्गत श्रमिकों में मजदूरी, कार्य तथा सम्मान में अन्तर करने से विभाजन पैदा कर दिया जाता है। अतः उनमें एकता की भावना दुर्लभ हो जाती है।


Meaning and Definition of Scientific Management

Scientific management is formed by the combination of two words – science and management science also has two sections – V + knowledge. ‘V’ means more and ‘Knowledge’ means our simple knowledge. Thus science refers to the advancement of knowledge which is added to our general knowledge by new industries. The second word is ‘Prabandha’ which means to run any work in an orderly manner. Therefore, we can take the meaning of scientific management in such a way that with the help of increasing knowledge of any work, it is called scientific management to run systematically to achieve a goal.

F. According to W, Taylor (F. W. Taylor), “Scientific management is the art of knowing exactly what you want people to do and seeing that they do it in the most beautiful and cheap way.”

Peter F. According to Drucker (Peter F. Dricker), “Scientific management means

Organized study is the division of work into the simplest components and the systematic improvement of each element of the work to be performed by wages. ,

H. F. According to Person (H.F. Person), “Scientific management means such management which is based on principles derived from scientific investigation and analysis.” In summary, “Scientific management is that method of management, in which planning and control are centralized and to increase the efficiency of the workers and to maximize the production, various activities are observed and after the experiment necessary changes are made in them.” .

Characteristics of Scientific Management

The main features or characteristics of scientific management can be explained as follows:

(1) According to the definite plan of scientific management, various tasks are performed in certain ways.

(2) In scientific management, analysis and experiments are done in relation to various events.

(3) In scientific management, special emphasis is given on good human relations.

(4) In scientific management, necessary efforts are made for optimum utilization of resources.

(5) In scientific management, standards are fixed for the size, color, type, weight, etc. of the object.

(6) In scientific management, the work is divided among the employees according to their ability.

(7) In scientific management, all the power is mobilized to achieve the pre-determined objectives of the organization.

(8) In scientific management, rather than individual interest, collective interest is considered paramount.

(9) As a result of scientific management, it is possible to increase the efficiency of the employees.

(10) Through scientific management, every work of the institution is done judiciously.

principles of scientific management

(Principles of Scientific Management)

The main elements or principles of scientific management can be explained as follows:

(1) Estimation of work – This principle of scientific management lays emphasis on how much work a worker should do under normal circumstances, and the fact should be determined by finding out by experiments. This is the basic principle of scientific management.

(2) Experiments are also of great importance in scientific management in the context of increasing the capacity of the experimental workers. Scientific management cannot exist without experimentation. These experiments are done in the following three ways

(i) Time Study- On the basis of this experiment, the certified time for doing each action is fixed, in which time an efficient worker can do the work. In this, wages are given on time basis. Those who work in less time are given more wages and those who work in more time are given less wages. This ends the tendency of the worker to postpone work.

(ii) Motion study- Motion study is a method of finding out the best method of actually doing work in which the workers have to move their body at least. Under this, the activities of the workers are seen and an effort is made that there should be a decrease in the activities of doing that work. For this, provision is made for improvement of machines, education to workers, films etc.

(iii) Tiredness study- Under this, the study of how much fatigue is involved in doing each activity, that is, it is found out by work study that when, why and how fatigue occurs in the worker and how it can be improved. The goal of fatigue study is to ensure that each worker gets proper rest and has less fatigue.

(3) Preparation of action plan – The main center of scientific management is the planning department. On the basis of experiments, a special plan should be prepared for each work and according to it the need of the workers should be taken care of.

(4) Proper training should be arranged in a scientific manner for the selection and training of workers. After selecting a suitable person for the work physically and mentally, he should be appointed on good salary. Attractive salary also encourages the worker to do good work.

(5) Proper distribution of work among the employees – After the appointment and education of the workers, various activities of maximum efficiency will be given to the workers in their physical, mental and physical condition.

The distribution should be according to the triad’s merit. It should be done so that it works well and the industry is profitable.

(6) Proper selection and use of goods, the working capacity of the workers depends on the raw material supplied to them. Hence standard goods are used in factories. After this, the method of using those items is also decided, so that there is no wastage of items while using them, new experiments should be done regarding the use of the items.

(7) Latest and efficient machine material The efficiency and efficiency of the worker can be high only when they are given the best tools and they work on the latest machine material. Therefore, the machines should be selected very carefully and to maintain the efficiency of the machines. They should be repaired from time to time and the parts of the machine should be changed as per the requirement. The use of instruments should also be monitored.

(8) Healthy environment of factories Healthy and happy environment of factories removes the ears of workers and keeps them interested in work. For this, it is necessary to have adequate space for working, arrangement for changing the temperature as per requirement, facilities for drinking water, bathroom, nursery etc.

(9) Inspirational wage system In order to increase the working capacity of the workers, it is necessary that the incentive wage system should be adopted in the factories, that is, the method should be such that the workers are eager to work more by adopting it. Differential wage system is suitable for this.

(10) Standardization – Standardization is the main element of scientific management. In this, the whole work is standardized. That is, in order to make any management system scientific, it is necessary to have the production system, control method, material, equipment, equipment etc. Standardization results in uniformity of work and improvement in quality. For this reason, standardization has been called the cornerstone of scientific research.

(11) Mental revolution- Mental revolution means that millers should leave their routine behavior and try to provide maximum facilities to the workers by treating them in good faith and humane, workers should have good behavior towards their bosses and leave delusional paranoia. Let labor and capital come into close contact so that both are benefited.

Advantages of Scientific Management

Scientific management is beneficial not only to employers but also to workers, consumers and society. The arguments in favor or advantages of scientific management can be explained as follows:

(1) Reduction in production expenditure- The main objective of scientific management is to reduce the production expenditure by stopping the wastage. This brings economy in the expenditure of the factory which is the key to success.

(2) Improvement in the quality of the commodity With the implementation of proper inspection and standardization system, the quality of the commodity is improved.

((3) Industrial Peace – Scientific management has an important contribution in creating a mutually friendly environment in labor and capital. Industrial peace assures the producers of the completion of the work in a given time.

(4) Promotion of division of labor Division of labor is adopted in scientific management in which the industry gets the benefits of division of labor.

(5) Increase in the salary of the employees Due to the increase in efficiency, there is an increase in the salary of the employees. Various types of incentives are given from time to time to encourage the workers, including financial incentives, this increases the morale of the employees.

(6) Increase in the efficiency of the employees Under scientific management, the work is distributed properly and according to the interest among the employees, which increases the efficiency of the employees.

(7) Saving Time By adopting scientific management, time is saved in doing work. In scientific management, due to working in scientific methods or worker can do more work in less time.

(8) Affordable goods available to the consumer- Production by machines reduces the cost of the goods. As a result, the goods produced by scientific management are available to the consumers at cheap prices and their money is saved.

(9) Rise in social status At present, the existence of a country is judged on the basis of its industrial development. By adopting scientific management, production increases, income increases in the country and thus industry and business develop.

(10) Increase in the means of employment – Mr. Taylor, the pioneer of scientific management, has said that as a result of scientific management, productivity increases, new factories are opened and employment opportunities increase in the country.

defects of scientific management

(Disadvantages of Scientific Management)

Some defects are also told in scientific management, on the basis of which the producers and employers are not completely satisfied and the working class openly opposes. The defects of scientific method can be explained as follows:

(A) dissatisfaction between producers and employers

The following defects are pointed out in scientific management from the point of view of producers and employers

(1) More expensive method Scientific management method is more expensive, because by adopting it, more capital will be invested in the establishment of planning department and continuous research etc.

It has to be done. Due to the high cost, small industries cannot dare to adopt it.

(2) Difficult to get skilled workers – To implement scientific management, it is necessary to have skilled and trained employees, but it is not easy to get them as soon as possible. The system of scientific management remains a mere toy in the hands of unskilled workers.

(3) Burden in the recession – The system of scientific management seems to be burden in the recession period, because the expenditure on it at that time either reduces the profit or increases the loss.

(4) Complete standardization is not possible for the success of scientific management, complete standardization is required, but due to varying abilities, mental power of workers, complete standardization is not possible.

(5) Difficulty in abandoning the traditional approach – Employers have a traditional approach, which they are not ready to give up easily, they do not want to take the risk by abandoning the existing methods in the hope of unknown and uncertain benefits.

(B) workers’ protest

Due to the opposition of scientific management by the workers, the working class also opposes scientific management, the reasons for their opposition are as follows:

((1) End-scientific management of workers’ motivation. Worker works according to the country. So he remains like a machine. He does not get any opportunity to demonstrate personal skill and ability. Thus Motivation in the workers ends.

(2) Fear of unemployment In scientific management, most of the labor-saving devices are used, as well as the efficiency of the workers increases. Therefore, in the beginning, many workers are thrown out as unfit. In this way the fear of unemployment remains among the workers.

(3) Workload more on workers – The workload increases on the workers who adopt scientific management, they have to work harder, which has a bad effect on their health.

(4) Protest by labor unions: Labor unions oppose scientific provision because under it, division is created among workers by making difference in wages, work and respect. Therefore, the feeling of unity in them becomes rare.

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