अंतरिक्ष मे जाने वाला पहली यात्री, अंतरिक्ष में मानव यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?

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अंतरिक्ष में मानव यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी…

इस आर्टिकल की प्रमुख बातें

मानव अंतरिक्ष यात्रा या उड़ान एक ऐसी अंतरिक्ष यात्रा होती है, जहाँ अंतरिक्ष यान में चालक दल या खगोलयात्री सवार होते हैं। अंतरिक्ष यात्रा करने वाले व्यक्ति को अंतरिक्ष यात्री कहते हैं। अंतरिक्ष यात्रा करने के लिए रॉकेट का निर्माण प्रथम सफलता थी । इसके बाद बढ़ती तकनीकों के चलते अंतरिक्ष यात्रा के लिए अनेक इलेक्ट्रॉनिक साधना का निर्माण किया गया और आज तक कई लोग अंतरिक्ष की यात्रा कर चुके हैं। तो चलिए देखते हैं कि अंतरिक्ष मे जाने वाला पहली यात्री, अंतरिक्ष में मानव यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?

20 वीं शताब्दी के बाद से अन्तरिक्ष में अनेक खोजे हुई है। नई तकनीको के चलते आज मनुष्य चाँद पर भी पहुँचने में भी सफल रहे है। आज मनुष्य द्वारा ऐसे संसाधनों का निर्माण किया गया है। जिससे मानव अन्य ग्रहों पर जाने में सक्षम है। और वर्तमान में जिस प्रकार अंतरिक्ष की सफल यात्राओ और जिस प्रकार अन्तरिक्ष में जाने के संसाधनों में विकास हुआ है। इस प्रकार अगले कुछ समय तक चलता रहा तो आने वाले समय में मानव अन्य ग्रहों पर भी कदम रख सकते है।

अंतरिक्ष यात्रा क्या है?

स्पेस या अंतरिक्ष वह स्थान है जिसकी ना तो शुरुआत है और ना ही अंत पर अंतरिक्ष पृथ्वी का बाहरी आवरण है। मूल रूप से हमारी पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष में यात्रा को अंतरिक्ष यात्रा कहा जाता है। अब तक के सभी मानव अंतरिक्ष यानों में मानव पायलट रहे हैं, लेकिन 2015 में पहला स्वायत्त मानव ले जाने वाला अंतरिक्ष यान भी डिजाइन कर लिया गया।

अंतरिक्ष यात्रा क्यों किया जाता हैं? अंतरिक्ष मे क्यों जाते है?

स्पेस या अंतरिक्ष सौरमंडल होता है जिसमें हमें ग्रह तारे सितारे सूर्य चंद्रमा आदि होते हैं। अंतरिक्ष की यात्रा का मूल उद्देश्य ग्रह उपग्रह चंद्रमा तथा अन्य अंतरिक्ष में स्थित पिंड के बारे में जानकारी एकत्रित करना है। इसी कारण अंतरिक्ष यात्रा की जाती है। इतिहास में कई ऐसे अंतरिक्ष यात्री हुए हैं जिन्होंने अपनी यात्रा के दौरान खोज कर अपने देश का नाम कमाया है। आज हम अंतरिक्ष मे ज्यादा जानते है इसका कारण यही अंतरिक्ष यात्रा हैं।

अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत कब और कैसे हुई?

अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत रूस द्वारा 1957 की गई इस अंतरिक्ष यात्रा में रूस ने कोई इंसान नहीं भेजा बल्कि एक रोबोट को भेजकर प्रथम अंतरिक्ष यात्रा की। इस यात्रा में सफलता पाने के बाद रूस ने मानव को अन्तरिक्ष में भेजा और इसके बाद सभी देशो ने अपने अपने देशो के अन्तरिक्ष यात्री भेजे। अंतरिक्ष में जाने वाला व्यक्ति यूरी गागरिन सोवियत संघ से था। यूरी गागरिन ने इस दौरान तकरीबन डेढ़ घंटे तक अंतरिक्ष में समय बिताया और सुरक्षित रूप से वापस पहुंचे। यह अंतरिक्ष यान की पहली सफलता थी। इसके बाद अन्य देशों ने भी अपनी ओर से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजना शुरू किया।

अंतरिक्ष मे जाने वाला पहली यात्री, पहली स्पेस, पहली महिला यात्री कौन कौन है ? देखे विस्तृत जानकारी…

1. अंतरिक्ष मे जाने वाला पहला इंसान – यूरी गागरिन

9 मार्च 1934 रूस के क्लूशीनो में जन्मे यूरी गागरिन अंतरिक्ष मे जाने वाले पहले इंसान हैं। 12 अप्रेल 1961 को वोस्टोक-1 नामक अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष की यात्रा कर यूरी गागरिन ने इतिहास रचा था। गागरिन अतंरिक्ष में 1 घंटा 48 मिनट तक रहे। यूरी गागरिन ऐसे यान में थे जिसमें किसी आपात स्थिति में बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी और उसके कंट्रोल को वह छू भी नहीं सकते थे। कंट्रोल रूम से हुए उनके संवाद के मुताबिक़ अंतरिक्ष यान की कैप्सूल विंडो से उन्हें पृथ्वी बड़ी सुंदर दिखाई दी थी। पृथ्वी पर बादलों की छाया मनमोहक दृश्य पैदा कर रही थी। 27 मार्च 1968 को महज 34 साल के उम्र में यूरी गागरिन का एक हवाई दुर्घटना में मृत्यु हो गया था।

2. सर्वप्रथम अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने वाला देश – रूस

चंद्रमा पर सबसे पहले पहुंच कर, सोवियत संघ ने अंतरिक्ष की रेस में पहला स्थान दर्ज कराया था। स्पुतनिक 1 रूस द्वारा निर्मित धरती का पहला कृत्रिम उपग्रह था। इसको 1957 में प्रक्षेपित किया गया था। इसके बाद फ़रवरी 1966 में चंद्रमा की सतह पर लूना 9 के ज़रिए पहली सॉफ्ट लैंडिंग करने में भी रूस कामयाब रहा और चंद्रमा की सतह की तस्वीर भी सबसे पहले सोवियत संघ ने ही दिया।

3. अंतरिक्ष मे जाने वाला पहला स्‍पेस डॉग – लाईका

लाइका एक सोवियत अंतरिक्ष कुत्ता था। मॉस्को की सड़कों में भटकने वाली लाइका को सोवियत अंतरिक्ष यान स्पुतनिक 2 के रहने के लिए चुना गया था जिसे 3 नवंबर 1957 को बाहरी अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था। जो अंतरिक्ष में जाने वाला पहले जानवरों में से एक बन गया, और पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला यह पहला जानवर था। 3 नवंबर, 1947 को लाइका नाम की डॉगी को स्पूतनिक-2 स्पेसक्राफ्ट में डालकर अंतरिक्ष भेजा गया था। लाइका ने स्पूतनिक-2 में धरती के कक्ष का चक्कर भी लगाया था।

स्पेसक्राफ्ट का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाने के कारण लाइका की मौत हो गई थी। स्पूतनिक -2 पांच महीने बाद 14 अप्रैल, 1958 को धरती पर लौटते समय टुकड़ों में बंट गया। उसकी मृत्यु का सही कारण और समय 2002 तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसके बजाय, यह बताया गया था कि जब उसकी ऑक्सीजन छह दिन की थी, तब उसकी मृत्यु हो गई थी। उसके सम्मान में मास्को में एक छोटा सा स्मारक उस सैन्य अनुसंधान सुविधा के पास बनाया गया था, जहाँ लाइका को अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार किया था। यह प्रयोग यह साबित करने के लिए किया गया था कि एक जीवित यात्री को कक्षा में लॉन्च किया जा सकता है और वह एक माइक्रो-ग्रैविटी पर्यावरण को सहन कर सकता है।

4. अंतरिक्ष मे जाने वाली पहली महिला
– वेलेन्टिना तरेश्कोवा

1950 के दशक के प्रारम्भ में पूर्व सोवियत संघ ने जब अन्तरिक्ष युग की शुरूआत की थी, तब लोगों को यह अजूबा ही लगा था कि जीता-जागता इन्सान अन्तरिक्ष में जा सकता है और वापस भी आ सकता है। और वो दिन बहुत जल्द ही आ गया जब वेलेन्तिना तेरेस्कोवा नाम की रूसी महिला ने स्पेन सूट पहन कर अन्तरिक्ष की यात्रा की और विश्व की प्रथम महिला अन्तरिक्ष यात्री का कीर्तिमान बनाया। फिर तो पूरी दुनिया में महिलाओं को आन्तरिक्ष में भेजने की स्पर्धा – सी चल पड़ी थी।

वेलनटीना तेरेश्कोवा अंतरिक्ष मे जाने वाला दुनिया की ऐसी पहली महिला है जो रूस की 400 से अधिक आवेदकों और 5 निर्णायकों में से चुनी गयी थी अंतरिक्ष यात्रा के लिए। वेलनटीना तेरेश्कोवा एक सेवानिवृत्त रूसी अंतरिक्ष यात्री और राजनीतिज्ञ है। इनका जन्म 6 मार्च 1937 को हुआ था। वेलनटीना तेरेश्कोवा की पहली अंतरिक्ष उड़ान वोस्तोक-6 में 6 जून 1973 को प्रारम्भ हुई थी। और अपनी अंतरिक्ष की पहली यात्रा में इन्होने 3 दिनों में पृथ्वी के 48 ग्रहपथ पूरे किए थे।

5. अंतरिक्ष मे जाने वाला पहला भारतीय – राकेश शर्मा

02 अप्रैल, 1984 विंग कमांडर राकेश शर्मा अपने तीन सोवियत साथियों के साथ अंतरिक्ष के लिए तत्कालीन सोवियत संघ के बैकानूर से उनके सोयुज टी-11 अंतरिक्षयान से दाखिल हुए। उन्होंने कुल सात दिन, 21 घंटे और 40 मिनट अंतरिक्ष में बिताए और सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटे। राकेश शर्मा भारत के प्रथम और विश्व के 138 वें अंतरिक्ष यात्री थे। पंजाब के पटियाला में 13 जनवरी 1949 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे राकेश शर्मा ने यह मुकाम कड़ी परीक्षाओं से गुजरने के बाद हासिल किया था। उनकी उपलब्धि से प्रेरित होकर ही भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया। सोवियत सरकार ने भी उन्हें हीरो ऑफ सोवियत यूनियन सम्मान से नवाजा।

6. चांद पर कदम रखने वाला पहला इंसान – नील आर्मस्‍ट्रॉन्‍ग

5 अगस्त 1930 को जन्मे नील एल्डन आर्मस्ट्रांग एक अमेरिकी खगोलयात्री और चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति थे। इसके अलावा वे एक एयरोस्पेस इंजीनियर, नौसेना अधिकारी, परीक्षण पायलट, और प्रोफ़ेसर भी थे। खगोलयात्री (ऍस्ट्रोनॉट) बनने से पूर्व वे नौसेना में थे। 20 जुलाई 1969 को अपोलो लूनार मॉड्यूल ईगल से उतरकर नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद की धरती पर पहला कदम रखा था। इसके करीब 19 मिनट बाद जिस शख्स ने चांद की धरती पर दूसरा कदम रखा था उसका नाम बज एल्ड्रिन था, जबकि तीसरे अंतरिक्ष यात्री माइकल कोलिंस यान में ही मौजूद थे। ये अंतरिक्ष यात्री 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा पर रुके थे।

7. चन्द्रमा पर आदमी भेजने वाला पहला देश – अमेरिका

1969 में पहली बार अमेरिका ने किसी इंसान को चांद पर भेजने में सफलता पायी थी। वह क्षण मिशन में लगे लोगों के लिए गौरान्वित करने वाला था। अपोलो-11 अंतरिक्ष यान को 1969 में अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से सुबह 08:32 बजे लॉन्च किया गया था। जिस लूनर मॉड्यूल से ये दोनों अंतरिक्ष यात्री अपोलो-11 से निकलकर चंद्रमा तक पहुंचे उसे ‘द ईगल’ नाम दिया गया था। अपीलों-11, 20 जुलाई, 1969 को चंद्रमा पर लैंडिंग किया था। तीन अंतरिक्ष यात्रियों का यह दल चंद्रमा की सैर करने के बाद 24 जुलाई 1969 को वापस धरती पर लौट आया था। इनके यान की लैंडिंग प्रशांत महासागर में कराई गई थी। अपोलो-11 मिशन में दुनियाभर के लगभग 40 हजार लोगों ने अपनी भूमिकाएं निभाई थी।

8. मंगल ग्रह पर चालक रहित अंतरिक्ष यान भेजने वाला पहला देश – अमेरिका

मार्स या मंगल ग्रह पर जाने के लिए कई देशों के बीच रेस छिड़ चुकी हैं। मंगल ग्रह पर पहले मिशन की शुरुआत सबसे पहले सोवियत संघ ने की थी। लेकिन सफलता नहीं मिली। मिशन मंगल की पहली सफलता 28 नवंबर 1964 को अमेरिका को मिली। मंगल पर अब तक कुल 58 मिशन भेजे गए हैं, मंगल ग्रह पर अब तक 8 देशों ने अब तक मंगल मिशन भेजे हैं, मंगल ग्रह पर अब तक सबसे ज्यादा मिशन अमेरिका ने 29, दूसरे नंबर पर सोवियत संघ रूस ने 22 और तीसरे नंबर पर यूरोपियन यूनियन ने 4 मिशन भेजे हैं। भारत, जापान, चीन और यूएई ने एक-एक मिशन भेजे हैं।

9. चन्द्रमा की परिक्रमा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान – लूना-10

लूना 10 अंतरिक्ष यान को 31 मार्च 1966 को एक पृथ्वी परिक्रमा मंच से चंद्रमा की ओर प्रक्षेपित किया गया था। अंतरिक्ष यान ने 3 अप्रैल 1966 को चंद्र कक्षा में प्रवेश किया और 3 घंटे बाद अपनी पहली कक्षा पूरी की। लूना 10 ने चंद्र कक्षा में व्यापक शोध किया, चंद्रमा के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत, उसके विकिरण बेल्ट, और चंद्र चट्टानों की प्रकृति, ब्रह्मांडीय विकिरण, और माइक्रोमीटरोइड घनत्व पर महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया। शायद इसकी सबसे महत्वपूर्ण खोज बड़े पैमाने पर सांद्रता जिसे ” मास्कन ” कहा जाता है, का पहला सबूत था।

10. मंगल ग्रह पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान – वाइकिंग-1

वाइकिंग 1 ऑर्बिटर 19 जून, 1976 को मंगल ग्रह की कक्षा में भेजा गया था, और मंगल ग्रह पर इसे 21 जून को लैंडिंग कर साइट प्रमाणीकरण की कक्षा 4 जुलाई 1976 के लिए योजना बनाई गई थी, लेकिन प्राथमिक लैंडिंग साइट की इमेजिंग से पता चला कि यह सुरक्षित लैंडिंग के लिए बहुत कठिन था। इसलिए सुरक्षित स्थान मिलने तक लैंडिंग में देरी हुई।

फिर 20 जुलाई को लैंडर यूटीसी पर ऑर्बिटर से अलग हो गया और 11:53:06 यूटीसी पर क्रिस प्लैनिटिया पर उतरा। इसी दिन ठीक अपोलो-11 मून लैंडिंग की सातवीं वर्षगांठ थी। वाइकिंग 1 नासा के वाइकिंग कार्यक्रम के भाग के रूप में मंगल पर भेजे गए दो अंतरिक्ष यान (वाइकिंग 2 के साथ) में से पहला था,  20 जुलाई 1976 को लैंडिंग कर यह इतिहास में पहला सफल मंगल लैंडर था।

11. चन्द्रमा पर उतरने वाला पहला चालक युक्त अंतरिक्ष यान – ईगल

12. चन्द्रमा पर मानव को पहुचाने वाला यान – अपोलो-11

संयुक्त राज्य का अपोलो-11 यान चन्द्रमा पर पहुँचने वाला प्रथम यान था। जिसमें तीन मानव यात्री थे जो यह 20 जुलाई 1969 को चन्द्रमा पर उतरा था। यह चंद्रमा पर उतरने वाला पहला चालक युक्त अंतरिक्ष यान था। इसके बाद 1972 तक अमेरिका के 6 मानवयुक्त तथा अनेकों मानवरहित यान चन्द्रमा पर पहुँचे।  संयुक्त राज्य अमेरिका का यह मिशन मानव इतिहास व अन्तरिक्ष अनुसन्धान के इतिहास में एक बडी उपलब्धी के रूप में देखा जाता है।

13. अंतरिक्ष मे भेजे जाने वाला प्रथम स्‍पेस शटल – कोलंबिया

कोलंबिया स्पेस शटल STS-107 उड़ान भरने वाला पहला अंतरिक्ष यान था। कोलंबिया की पहली उड़ान की कमान जेमिनी और अपोलो कार्यक्रमों के एक अनुभवी जॉन यंग ने संभाली थी, जो 1972 में चंद्रमा पर चलने वाले नौवें व्यक्ति थे, इसे पहली मानव अंतरिक्ष यान (वोस्तोक-1) की 20 वीं वर्षगांठ पर 12 अप्रैल 1981 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था, और 14 अप्रैल, 1981 को पृथ्वी की 36 बार परिक्रमा करने के बाद एडवर्ड्स एयर में सूखी झील के रनवे पर उतरकर वापस लौटा था, और इसने दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले 27 मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया था। जिसके बाद 16 जनवरी 2003 को उसकी 28 वीं और आखिरी उड़ान साबित हुई।

14. सबसे अधिक उम्र का अंतरिक्ष यात्री – कार्ल जी हैनिजे

कार्ल गॉर्डन हेनिज़ का एक खगोल विज्ञानी, अंतरिक्ष वैज्ञानिक नासा के अंतरिक्ष यात्री, और प्रोफेसर था। वह अपोलो 15 और स्काईलैब 2, 3, और 4 के लिए अंतरिक्ष यात्री सहायता दल के सदस्य थे। एक मिशन विशेषज्ञ के रूप में, उन्होंने 1985 में स्पेस शटल चैलेंजर पर उड़ान भरी। उन्हें 1974 में NASA असाधारण वैज्ञानिक उपलब्धि पदक से सम्मानित किया गया। कार्ल हेनिज़ का जन्म 17 अक्टूबर, 1926 को ओहियो के सिनसिनाटी में हुआ था। वह सिनसिनाटी के बाहर एक छोटे से डेयरी फार्म में पले-बढ़े, और उनके बचपन के नायक बक रोजर्स और सर एडमंड हिलेरी थे, जो माउंट के शिखर पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति थे। 5 अक्टूबर 1993 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

15. सबसे कम उम्र का अंतरिक्ष यात्री – गेरेमान तितोब

6 अगस्त 1961 को कक्षा के लिए सवार गेरेमान तिबोब  अंतरिक्ष में चौथे व्यक्ति थे, लॉन्च के समय इनका उम्र 26 साल से भी कम था। वह 2021 तक अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे, फिर यह रिकॉर्ड टूट गया जब ओलिवर डेमन ने ब्लू ओरिजिन NS-16 पर उड़ान भरी थी। तो उनका उम्र केवल 18 साल का था। चूंकि डेमन ने एक सबऑर्बिटल मिशन के लिए उड़ान भरी थी, लेकन गेरेमान पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने हुए हैं।

11 सितंबर 1935 को जन्म लिए गेरेमान की उड़ान ने आखिरकार साबित कर दिया कि इंसान अंतरिक्ष में रह सकते हैं और काम कर सकते हैं । वह कई बार पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले पहले व्यक्ति थे। जो कुल 17 बार अंतरिक्ष यान का संचालन करने वाले और अंतरिक्ष में एक दिन से अधिक समय बिताने वाले पहले व्यक्ति थे। वह कक्षा में सोने वाले और अंतरिक्ष बीमारी से पीड़ित होने वाले पहले व्यक्ति भी थे (अंतरिक्ष में उल्टी करने वाले पहले व्यक्ति बने) गेरेमान अंतरिक्ष से पहले फोटोग्राफर थे। उन्होंने कक्षा से पहली मैनुअल तस्वीरें बनाईं, इस प्रकार अंतरिक्ष से पृथ्वी की आधुनिक पहली तस्वीरों के लिए एक रिकॉर्ड स्थापित किया। मास्को में 65 वर्ष की आयु में उनके सौना में हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया।

16. अंतरिक्ष मे जाने वाला प्रथम टीचर – शेरिन क्रिस्टा मैकॉलिफ़ (अमरिका)

क्रिस्टा मैकॉलिफ़ कॉनकॉर्ड, न्यू हैम्पशायर की एक अमेरिकी शिक्षक थी, और अंतरिक्ष शटल चैलेंजर आपदा में मारे गए सात क्रू सदस्यों में से एक थी, और वह अंतरिक्ष में पहले शिक्षक बनने के लिए निर्धारित की गयी थी। 28 जनवरी 1986 को, शटल लॉन्च के कुछ देर बाद ही वह शटल टूट गया और उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के बाद स्कूल और छात्रवृत्ति उनके सम्मान में नामित की गईं और 2004 में उन्हें मरणोपरांत कौंसियन स्पेस मेडल ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया गया।

17. अंतरिक्ष मे जाने वाला पहली अमेरिकी महिला – सैली राइड

सैली क्रिस्टेन राइड एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी और अंतरिक्ष यात्री थी। उनका जन्म 26 मई 1951 को लॉस एंजेलिस में हुआ था। वह 1978 में NASA में शामिल हुई और 1983 में वह पहली अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बनी। लेकिन अंतरिक्ष में जाने वाली वह तीसरी महिला थी। उनके प्रशंसा में नेशनल स्पेस सोसाइटी के वॉन ब्रौन अवॉर्ड शामिल थे और उन्हें राष्ट्रीय महिला हॉल ऑफ फेम और अंतरिक्ष यात्री हॉल ऑफ फेम दोनों में शामिल किया गया था।

18. अंतरिक्ष में विचरण करने वाली पहली महिला – श्वेतलाना सेवित्स्काया

स्वेतलाना सवित्सकाया एक सेवानिवृत्त सोवियत एविएटर और अंतरिक्ष यात्री है जो 1972 में सोयूज टी-7 पर सवार होकर अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला थी। स्वेतलाना सवित्सकाया का जन्म 8 अगस्त 1984 को हुआ था। स्वेतलाना सवित्सकाया अंतरिक्ष में जाने वाली दूसरी ऐसी महिला अंतरिक्ष यात्री थी जो की 19 साल के बाद वेलनटीना तेरेश्कोवा के बाद अंतरिक्ष में गयी थी। 25 जुलाई 1985 में अपनी अंतरिक्ष की दूसरी उड़ान के दौरान स्वेतलाना ने अंतरिक्ष में सैर करने वाली पहली महिला का खिताब भी हासिल किया। उन्होंने 2010 में 3 घंटे और 35 मिनट के लिए सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर एक ईवा का आयोजन किया जिसमे उन्होंने धातुओं को काँटा और वेल्ड भी किया।

19. प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री – कल्पना चावला

कल्पना चावला एक भारतीय अमरीकी अन्तरिक्ष यात्री और अन्तरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी, और अन्तरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी। वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं। कल्पना चावला मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल हुईं और वे 1998 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुनी गयीं थी।

उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवम्बर 1997 को छह अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस-87 से शुरू हुआ। कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। तमाम तरह के शोध और चर्चा के बाद वापसी के समय अंतरिक्ष यान के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के समय जिस तरह की भयावह घटना घटी वह अब इतिहास का विषय बन गई है। यह नासा और दुनिया के लिए एक दर्दनाक घटना थी।

20. सबसे अधिक दिनों तक अंतरिक्ष मे रहने वाला यात्री – वलेरी पोल्याकोव

वलेरी व्लादिमीरोविच पॉलाकोव एक रूसी पूर्व अंतरिक्ष यात्री हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले यात्री हैं। एक यात्रा के दौरान 14 महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहे। उनका संयुक्त अंतरिक्ष अनुभव 22 महीने से अधिक का है। पॉलाकोव ने 1988-89 में सोयुज टीएम -6 बोर्ड पर डॉक्टर अंतरिक्ष यात्री के रूप में अंतरिक्ष में अपना पहला मिशन उड़ाया। मीर अंतरिक्ष स्टेशन पर अपनी 241 दिनों की उड़ान के दौरान, उन्होंने कई चिकित्सा प्रयोग किए।

अपने मिशन के बाद, पॉलाकोव दूसरे मिशन के लिए प्रशिक्षण से पहले प्रशासनिक कर्तव्यों पर लौट आया। उन्होंने 1994 में सोयुज टीएम-18 के डॉक्टर कॉस्मोनॉट के रूप में मीर अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी। मीर पर इस प्रवास के दौरान-8 जनवरी, 1994 से 22 मार्च, 1995 तक उन्होंने 438 दिनों का रिकॉर्ड बनाया। अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक लगातार रहना।

21. दो बार अंतरिक्ष मे जाने वाला पहला यात्री – कर्नल ब्लादीमीर कोमारोव

कर्नल व्लादिमीर मिखाइलोविच कोमारोव एक सोवियत परीक्षण पायलट, एयरोस्पेस इंजीनियर और कॉस्मोनॉट इंजीनियर थे। अक्टूबर 1964 में उन्होंने वोसखोद 1 की कमान संभाली, जो एक से अधिक चालक दल के सदस्यों को ले जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान था। वह दो बार अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले पहले सोवियत अंतरिक्ष यात्री बने, जब उन्हें सोयुज 1 के एकल पायलट के रूप में चुना गया, जो इसकी पहली चालक दल की परीक्षण उड़ान थी। पैराशूट की विफलता के कारण उसका सोयुज कैप्सूल 24 अप्रैल 1967 को फिर से प्रवेश करने के बाद जमीन पर गिर गया, जिससे वह अंतरिक्ष उड़ान में मरने वाला पहला इंसान बन गया।

22. अंतरिक्ष यान से बाहर निकलने वाला पहला व्यक्ति – एलैक्सी लियोनोव

एलेक्सी आर्किपोविच लियोनोव्ला एक सोवियत और रूसी अंतरिक्ष यात्री, वायु सेना के प्रमुख जनरल, लेखक और कलाकार थे। 18 मार्च 1965 को, वोसखोद 2 मिशन के दौरान 12 मिनट और 9 सेकंड के लिए कैप्सूल से बाहर निकलते हुए, वे स्पेसवॉक करने वाले पहले व्यक्ति बने।

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