प्रबन्ध की परिभाषा दीजिए। भारत के आर्थिक विकास में प्रबन्ध के बढ़ते हुए महत्व को बताइये। Give the definition of management. State the increasing importance of management in the economic development of India.

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प्रबन्ध से आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Management)

प्रबन्ध से आशय, पूर्व निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक साधनों की व्यवस्था करना है। दूसरे शब्दों में, प्रबन्ध एक सतत् प्रक्रिया है, जिसमें निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु नियोजन, संगठन, नेतृत्व, भर्ती एवं नियन्त्रण के द्वारा संस्था के मानवीय एवं भौतिक साधनों के मध्य समन्वय स्थापित किया जाता है। वास्तव में प्रबन्ध एक शक्ति है जिसके द्वारा संस्था के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति करने के लिए दूसरे के प्रयत्नों को नियोजित, समन्वित, अभिप्रेरित, निर्देशित एवं नियन्त्रित करना है।

(1) सी. डब्ल्यू. विल्सन (C. W. Wilson) के अनुसार, “निश्चित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय शक्तियों के प्रयोग एवं निर्देशन की प्रक्रिया प्रबन्ध कहलाती है।”

(2) जे. एन. शुल्जे (J. N. Schulze) के अनुसार, “प्रबन्ध वह शक्ति है जो एक पूर्व निर्धारितलक्ष्य की पूर्ति के लिए संगठन का नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं संचालन करता है।”

(3) आर. सी. डेविस (R. C. Davis) के अनुसार, “प्रबन्ध कहीं पर भी कार्यकारी नेतृत्व का कार्य है, यह संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उसकी क्रियाओं का नियोजन, संगठन एवं नियन्त्रण का कार्य है। ”

भारत में प्रबन्ध के बढ़ते हुए महत्व के कारण (Reasons for Increasing Importance of Management in India)

आज के वैज्ञानिक युग में भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रबन्ध का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। औद्योगिक जटिलताओं, श्रम विभाजन तथा विशिष्टीकरण के कारण इसका महत्व और भी अधिक प्रतीत होने लगा है। भारत में प्राकृतिक साधनों का विदोहन करने, न्यूनतम लागत पर अधिक उत्पादन करने, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने, बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के सन्दर्भ में प्रबन्ध के महत्व को स्वीकार किया गया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए प्रबन्ध के महत्व को निम्नलिखित विन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

(1) तीव्र औद्योगीकरण हेतु-कुशल प्रबन्ध द्वारा हम देश की प्राकृतिक सम्पदा का उचित विदोहन कर सकते हैं, जिससे तीव्र गति से औद्योगीकरण किया जा सकता है।

(2) साधनों का अधिकतम उपभोग-प्रायः कहा जाता है कि ‘भारत’ एक ऐसा अमीर देश है जिसके निवासी निर्धन है। यह एक परस्पर विरोधी किन्तु एक सत्य तव्य है। आज भी भारत में 46 प्रतिशत जनता गरीबी के कुचक्र में पिसकर दरिद्र जीवन बिता रही है। कुशल और गतिशील नेतृत्व, सफल नियोजक, संगठन, नियन्त्रण और समन्वय के द्वारा देश के उपलब्ध साधनों का अधिकतम विदोहन करने के लिए प्रबन्ध बहुत ही महत्वपूर्ण है।

(3) रोजगार की मात्रा में वृद्धि भारत में बेरोजगारी की समस्या इस समय प्रमुख समस्याओं में से एक है और यह दिन-प्रतिदिन जटिल होती जा रही है। इस समस्या का समाधान औद्योगिक विकास द्वारा ही सम्भव है और औद्योगिक विकास के लिए कुशल प्रबन्ध का होना जरूरी है।

(4) उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि देश की प्रगति तथा जनकल्याण हेतु उत्पादन में वृद्धि की अत्यन्त आवश्यकता है। उत्पादन में वृद्धि दो प्रकार से सम्भव है-प्रथम, उत्पादन के साधनों की मात्रा में परिवर्तन करके और द्वितीय, उत्पत्ति के साधनों की उत्पादकता बढ़ाकर उत्पत्ति के साधनों की उत्पादकता बढ़ाकर उत्पादन में वृद्धि एक आदर्श स्थिति है। कुशल प्रबन्ध उत्पत्ति के साधनों का सर्वोत्तम उपयोग करके उनकी उत्पादकता में वृद्धि करने में सफल हो सकता है। अतः देश में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रबन्ध का बहुत महत्व है।

(5) राष्ट्रीय आय में वृद्धि प्रबन्ध के द्वारा देश के उपलब्ध साधनों का अधिकतम उपयोग करने से उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय तथा प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होती है और देश में खुशहाली तथा समृद्धि बढ़ती है।

(6) पूँजी निर्माण में वृद्धि-भारत में पूँजी निर्माण की दर लगभग 14 प्रतिशत है जबकि कुछ देशों में यह दर 30 प्रतिशत है। भारत में पूंजी निर्माण की धीमी प्रगति के कारण ही औद्योगिक विकास की भी धीमी प्रगति हुई है। अजः पूँजी निर्माण की दर बढ़ाने के लिए कुशल प्रबन्ध अति आवश्यक है, क्योंकि कुशल प्रबन्ध से औद्योगिक विकास होता है और औद्योगिक विकास से पूँजी निर्माण दर में वृद्धि होती है।

(7) श्रम एवं पूँजी में मधुर सम्बन्ध-कुशल प्रबन्ध के द्वारा आये दिन होने वाली हड़ताल, तालावन्दी, दुर्घटना, घेराव, औद्योगिक संघर्ष आदि को समाप्त करके श्रमिक एवं प्रबन्धकों में मधुर सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है।

(8) समाजवादी समाज की स्थापना सम्भव-हमारी सरकार का लक्ष्य भारत में समाजवादी समाज की स्थापना करना है। यह केवल कुशल प्रबन्ध के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। इसमें आर्थिक सत्ता के केन्द्रीयकरण को रोककर अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटा जा सकता है।

(9) न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन-कुशल प्रबन्ध के द्वारा उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूँजी, मशीन तथा माल का दुरुपयोग रोककर) का समुचित प्रयोग करके न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन किया जा सकता है।

(10) निर्यात को बढ़ावा-भुगतान सन्तुलन को अपने पक्ष में लेने के लिए आयात कम एवं निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए इस कार्य के लिए कुशल प्रवन्ध की आवश्यकता है।

(11) अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा का सामना-कुशल प्रबन्ध द्वारा वैज्ञानिक प्रबन्ध एवं विवेकीकरण का सहारा लेकर हम अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा का सामना कर सकते हैं।


Meaning and Definition of Management

Management refers to the provision of necessary resources for the attainment of predetermined objectives. In other words, management is a continuous process, in which co-ordination is established between the human and material resources of the organization through planning, organization, leadership, recruitment and control to achieve the set objectives. In fact, management is the power by which to plan, coordinate, motivate, direct and control the efforts of others to achieve the predetermined goals of the organization.

(1) C. W. According to Wilson (C. W. Wilson), “Management is the process of using and directing human forces to achieve definite objectives.”

(2) J. N. According to Schulze (J. N. Schulze), “Management is the power that leads, guides and conducts an organization to achieve a predetermined goal.”

(3) R. According to R. C. Davis, “Management anywhere is the function of the executive leadership, it is the planning, organization and control of its activities to achieve the objectives of the organization. ,

Reasons for Increasing Importance of Management in India

In today’s scientific age, the importance of management in Indian economy is increasing day by day. Due to industrial complexities, division of labor and specialization, its importance is becoming more visible. In India, the importance of management has been recognized in the context of exploiting natural resources, producing more at minimum cost, increasing per capita income, solving the problem of unemployment. The importance of management for a developing country like India can be explained by the following points:

(1) For rapid industrialization – through efficient management, we can make proper use of the natural wealth of the country.
can be exploited, which can lead to rapid industrialization.

(2) Maximum consumption of resources – It is often said that ‘India’ is such a rich country whose residents are poor. This is a conflicting but one true statement. Even today, 46 percent of the people in India are living a poor life in the vicious circle of poverty. Management is very important to make maximum use of available resources of the country through efficient and dynamic leadership, successful planner, organization, control and coordination.

(3) Increase in the volume of employment The problem of unemployment in India is one of the major problems at the moment and it is getting complicated day by day. The solution of this problem is possible only through industrial development and efficient management is necessary for industrial development.

(4) Increase in production and productivity There is an urgent need to increase production for the progress and welfare of the country. Increase in production is possible in two ways- first, by changing the quantity of the factors of production and secondly, by increasing the productivity of the factors of production, by increasing the productivity of the factors of production, an ideal situation is to increase production. Efficient management can be successful in increasing their productivity by making the best use of the means of production. Therefore, management is of great importance to increase production and productivity in the country.

(5) Increase in National Income By making maximum use of available resources of the country, the amount of production increases, as a result of which the national income and per capita income increase and prosperity and prosperity increases in the country.

(6) Increase in capital formation- The rate of capital formation in India is about 14 percent while in some countries this rate is 30 percent. Due to the slow progress of capital formation in India, the slow progress of industrial development has also taken place. Aj: Efficient management is very necessary to increase the rate of capital formation, because efficient management leads to industrial development and industrial development increases the rate of capital formation.

(7) Good relation between labor and capital – By efficient management, by eliminating strikes, lockouts, accidents, sieges, industrial conflicts, etc., a cordial relationship can be established between workers and managers.

(8) Establishment of Socialist Society Possible – The goal of our government is to establish a socialist society in India. This can be achieved only through efficient management. In this, the gap between rich and poor can be bridged by preventing the centralization of economic power.

(9) Maximum production at minimum cost – By making proper use of the means of production (by preventing misuse of land, labour, capital, machine and material), maximum production can be done at minimum cost.

(10) Promotion of exports – To take the balance of payments in its favor, imports should be reduced and exports should be encouraged for this work, efficient management is needed.

(11) Facing international competition – By taking the help of scientific management and rationalization through efficient management, we can face international competition.

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