प्रबन्ध की आधुनिक अवधारणा से आप क्या समझते है? उन अवधारणाओं के नाम बताइए, जिनके कारण प्रबन्ध को आधुनिक प्रबन्ध की संज्ञा आती है। What do you understand by the modern concept of management? Name the concepts due to which management is called modern management.

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प्रबन्ध का जन्म कब और कहाँ से आरम्भ हुआ, इस विषय में कुछ कहना कठिन है। इस सम्बन्ध में तो केवल यह कहा जा सकता है कि मानव सभ्यता के उदय के साथ ही प्रबन्ध शब्द का जन्म हुआ। उस समय प्रबन्ध का कार्य मानव संगठन के कुशल संचालन एवं राज्यों के प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रशासन सम्बन्धी सिद्धान्तों का निर्माण करना था, किन्तु वर्तमान समय में जये-जये विचारों के सृजन एवं वैज्ञानिक उन्नति के कारण प्रबन्ध का कार्य क्षेत्र व्यापक हो गया है। अतः यह कहना उचित है कि सामूहिक प्रयासों को नियोजित, संगठित एवं नियन्त्रित करने को ही प्रबन्ध कहते है, यह अवधारणा कोई नई विचारधारा नहीं है, वरन यह उतनी ही पुरानी है, जितना मानव सभ्यता का इतिहास, किन्तु फिर भी नवीन विचारों के फलस्वरूप प्रबन्ध का क्षेत्र व्यापक हो गया है। प्रबन्ध के सम्बन्ध में अनेक आधुनिक अवधारणाओं के कारण आज के प्रबन्ध को आधुनिक प्रबन्ध की संज्ञा दी

जाती है। वास्तव में विभिन्न विद्वानों ने प्रबन्ध को भिन्न-भिन्न रीतियों से परिभाषित किया है। ये अवधारणाएँ मुख्य रूप से उन धारणाओं पर आधारित है, जिनकी कल्पना प्रत्येक ने अपने विचारों में की है। प्रबन्ध की विभिन्न अवधारणाओं में मुख्य रूप से प्रबन्ध को अनेक अयों में प्रयुक्त किया गया है। इन विभिन्न अवधारणाओं में प्रबन्ध की अलग-अलग विशेषताएँ बताई गयी है।

विभिन्न विद्वानों ने प्रबन्ध की जो अवधारणाएँ प्रस्तुत की है, उनको निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता

(1) हैरोल्ड कूण्टज की अवधारणा-इनके अनुसार, “प्रबन्ध औपचारिक रूप से संगठित समूह के साथ उसके द्वारा कार्य करने की कला है। इनकी प्रबन्ध सम्बन्धी यह अवधारणा प्रबन्ध के आधुनिक दर्शन पर आधारित है। आधुनिक परिस्थितियों में प्रबन्ध अपने अधीनस्थों से तभी कार्य ले सकता है, जबकि वह स्वयं उनके साथ मिलकर कार्य करने के लिए तत्पर हो ।

(2) लॉरेन्स ए. एप्पले की अवधारणा-इनके अनुसार, “प्रबन्ध व्यक्तियों का विकास है, न कि वस्तुओं का निर्देशन” लॉरन्स ए. एप्पले ने प्रबन्ध की अपनी परिभाषा में मुख्य रूप से दो बातों पर जोर दिया है। सर्वप्रथम यह व्यक्तियों का विकास है, द्वितीय यह केवल वस्तुओं का निर्देशन नहीं है। वर्तमान समय में इस अवधारणा का तेजी से विकास हो रहा है। यह अवधारणा निर्जीव संसाधनों की तुलना में ‘मानव’ को उद्योग या व्यवसाय का विशिष्ट संसाधन मानते हुए उसके विकास पर जोर देती है। इस प्रकार उनकी यह अवधारणा प्रबन्ध के मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित है।

(3) थियोहैमन की अवधारणा-हैमन ने प्रबन्ध को निम्न रूपों में प्रस्तुत किया है

(अ) प्रबन्ध अधिकारियों के रूप में इस अवधारणा के अनुसार प्रबन्ध से आशय सामान्यतः प्रबन्ध अधिकारियों से होता है, जिसके अन्तर्गत सम्बन्धित इकाई में कार्य करने वाले लोगों के कार्यों पर नियन्त्रण स्थापित किया जाता है।

(ब) विज्ञान के रूप में प्रबन्ध से आशय ऐसे विज्ञान से होता है, जिसमें व्यावसायिक, नियोजन, संगठन, संचालन, समन्वय, प्रेरणा तथा नियंत्रण से सम्बन्धित सिद्धान्तों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है।

(स) प्रवन्ध प्रक्रिया के रूप में इस अवधारणा के अनुसार प्रबन्ध एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके

अन्तर्गत अन्य लोगों के साथ मिल-जुलकर कार्य किया जाता है। (4) जेम्स लुण्डी की अवधारणा-इसके अनुसार, प्रबन्ध मुख्य रूप से विशिष्ट उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए दूसरे के प्रयत्नों को नियोजित अभिप्रेरित एवं नियन्त्रित करने का कार्य है। इस अवधारणा के अनुसार, प्रबन्ध के तीन चरणों पर जोर दिया है- (1) नियोजन, (2) क्रियान्वयन, (3) नियन्त्रण, जिनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।

प्रबन्ध की विभिन्न अवधारणाएँ (Various Concepts of Management)

प्रबन्ध की विभिन्न अवधारणाएँ निम्न हैं जिनके कारण प्रबन्ध को आधुनिक प्रबन्ध की संज्ञा प्रदान की जाती है

(1) अन्य लोगों द्वारा उनके साथ मिलकर कार्य करने की अवधारणा प्रारम्भ में प्रबन्ध का -आशय उन व्यक्तियों से लगाया जाता था जो दूसरे लोगों अर्थात् श्रमिकों से कार्य सम्पन्न कराते थे।

इस अवधारणा का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें तानाशाही की बू आती है कि प्रबन्धक स्वयं काम नहीं करते, बल्कि वे दूसरों से काम लेते हैं। इसलिए इस अवधारणा में संशोधन किया गया तथा प्रबन्ध को व्यक्ति समूहों के साथ मिलकर कार्य सम्पन्न कराने की कला की संज्ञा दी गई है।

(2) नेतृत्व रूपी अवधारणा-इस अवधारणा के अनुसार, प्रबन्ध का आशय ऐसी विचार शक्ति से है जो संगठन के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु नेतृत्व द्वारा सम्पूर्ण संगठन में प्रयुक्त की जाती है। वास्तव में किसी भी संस्था के लिए कुशल नेतृत्व की बहुत आवश्यकता होती है, क्योंकि कुशल नेतृत्व द्वारा ही उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है।

(3) सामूहिक प्रयास की अवधारणा-इस अवधारणा के अनुसार, एक व्यक्ति अलग-अलग रहकर कुछ भी प्राप्त नहीं करता। अतः संस्था के निर्धारित उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की व्यवस्था अर्थात् नियोजन, संगठन, निर्देशन, समन्वय, अभिप्रेरणा तथा नियन्त्रण है और इसी सामूहिक प्रयास का नाम प्रबन्ध है।

(4) निर्णय प्रक्रिया से सम्बन्धित अवधारणा-कुछ विद्वानों का मत है कि प्रबन्ध का एकमात्र कार्य यह निर्णय लेना है कि किसी कार्य को करने के विभिन्न दंगों में से कौन-सा ढंग सर्वोत्तम रहेगा। चूँकि प्रबन्ध का प्रमुख कार्य निर्णय लेना है, अतः प्रबन्ध के सिद्धान्त का केन्द्र बिन्दु निर्णायककार्य है और प्रबन्ध के शेष विचार इससे जुड़े होते हैं। ”

(5) पेशा सम्बन्धी अवधारणा-इस अवधारणा के अनुसार, आधुनिक प्रबन्धक, प्रबन्ध को एक पेशा मानते हैं। अमेरिकन प्रबन्ध एसोसिएशन के अनुसार, “प्रबन्ध एक पेशा है और उसी रूप में आज इसका विकास हो रहा है।” अब हमारे देश में पूँजीपति प्रबन्धकों का स्थान पेशेवर प्रबन्धकों ने ग्रहण करना शुरू कर दिया है।

(6) सार्वभौमिक सम्बन्धी अवधारणा सार्वभौमिक सम्बन्धी अवधारणा के मुख्य समर्थन हेनरी फेयोल थे। उनके अनुसार प्रबन्ध एक सार्वभौमिक क्रिया है जो प्रत्येक संस्था में चाहे वह धार्मिक हो, राजनैतिक हो, सामाजिक हो अथवा व्यावसायिक एवं औद्योगिक हो, समान रूप से सम्पन्न की जाती है।

(7) औद्योगिक समाज के आर्थिक अंग सम्बन्धी अवधारणा प्रो. छूकर ने प्रबन्ध को औद्योगिक समाज का एक महत्पूर्ण आर्थिक अंग माना है। अन्य अर्थशास्त्री भी प्रबन्ध को भूमि, श्रम, पूँजी की तरह उत्पादन का एक साधन मानते हैं। लेकिन प्रबन्ध अन्य उत्पादन साधनों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि आधुनिक समय में एक फर्म का प्रबन्ध ही मुख्य रूप से उस फर्म की उत्पादकता व लाभादायकता का निर्धारक है।

(8) वैज्ञानिक विश्लेषण की अवधारणा-इस अवधारणा के अनुसार प्रबन्ध एक ऐसा विज्ञान है जो नियोजन, संगठन, समन्वय, अभिप्रेरण, संचालन तथा नियन्त्रण से सम्बन्धित सिद्धान्तों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, ताकि निर्धारित उद्देश्य आसानी से प्राप्त किये जा सकें। अतः प्रबन्ध की वैज्ञानिक अवधारणा यह स्पष्ट करती है कि प्रबन्ध के अन्तर्गत की जाने वाली प्रत्येक क्रिया का कुछ-न-कुछ वैज्ञानिक आधार होता है।


It is difficult to say anything about when and where did management begin. In this regard, it can only be said that with the rise of human civilization, the word management was born. At that time the task of management was to formulate the principles of administration for efficient operation of human organization and administrative work of the states, but in the present time, due to the creation of ideas and scientific advancement, the scope of management has become wider. Therefore, it is fair to say that planning, organizing and controlling collective efforts is called management, this concept is not a new ideology, but it is as old as the history of human civilization, but still management is the result of new ideas. The area has become wider. Due to many modern concepts regarding management, today’s management is called modern management.

She goes. In fact, different scholars have defined management in different ways. These concepts are mainly based on the assumptions that each has conceived in their thoughts. In various concepts of management, mainly management has been used in many ways. Different features of management have been described in these different concepts.

The concepts of management presented by various scholars can be explained as follows:

(1) Concept of Harold Koontz – According to him, “Management is the art of working with a formally organized group through it. This concept of management is based on the modern philosophy of management. In modern conditions, management works only with its subordinates.” when he himself is ready to work together with them.

(2) Lawrence A. According to Apple’s concept, “Management is the development of individuals, not the direction of things” by Lawrence A. Apple has mainly emphasized two things in his definition of management. Firstly it is the development of individuals, secondly it is not merely the direction of things. At present, this concept is developing rapidly. This concept emphasizes on the development of ‘human’ as a specific resource of industry or business as compared to non-living resources. Thus his concept is based on the human approach to management.

(3) Theohamn’s concept-Hayman has presented management in the following forms

(a) According to this concept as management officers, management generally refers to the management officers, under which control is established over the work of the people working in the concerned unit.

(b) Management as a science means such a science, in which scientific analysis is done about the principles related to business, planning, organization, operation, coordination, motivation and control.

(c) According to this concept as a management process, management is a process through which

The work is done in collaboration with other people. (4) Concept of James Lundy- According to this, management is primarily the act of planning, motivating and controlling the efforts of others for the attainment of specific objectives. According to this concept, emphasis has been laid on three stages of management – ​​(1) planning, (2) implementation, (3) control, through which the set goals can be achieved.

Various Concepts of Management

Following are the various concepts of management, due to which management is given the name of modern management.

(1) The concept of other people working together with them, in the beginning, the meaning of management was applied to those persons who used to get the work done by other people i.e. workers.

The biggest drawback of this concept is that it smacks of dictatorship that the managers do not do the work themselves, but they take work from others. Therefore, this concept was amended and management has been termed as the art of getting things done together with groups of individuals.

(2) Concept of Leadership- According to this concept, management means such thought power which is used by the leadership throughout the organization to achieve the set goals of the organization. In fact, efficient leadership is very much needed for any organization, because production and productivity can be increased only by efficient leadership.

(3) Concept of Collective Effort – According to this concept, a person does not achieve anything by being isolated. Therefore, to achieve the set objectives and goals of the organization, there is a system of collective efforts i.e. planning, organization, direction, coordination, motivation and control and the name of this collective effort is management.

(4) Concept related to decision process – Some scholars are of the opinion that the only function of management is to decide which of the various methods of doing a work will be the best. Since the main function of management is decision-making, decision-making is central to the theory of management and the rest of management’s ideas are related to it. ,

(5) Concept related to profession- According to this concept, modern managers consider management as a profession. According to the American Management Association, “Management is a profession and is growing in the way it is today.” Now in our country the place of capitalist managers has started to be taken over by professional managers.

(6) Universal relational concept Universal relational The main supporter of the concept was Henri Fayol. According to him, management is a universal activity which is carried out equally in every organization whether it is religious, political, social or commercial and industrial.

(7) The concept of economic part of industrial society was given by Prof. Chhukar has considered management as an important economic part of industrial society. Other economists also consider management as a means of production like land, labour, capital. But management is more important than other means of production, because in modern times the management of a firm is the main determinant of the productivity and profitability of that firm.

(8) Concept of Scientific Analysis – According to this concept, management is a science which presents scientific analysis of the principles related to planning, organization, coordination, motivation, operation and control, so that the set objectives can be easily achieved. Therefore, the scientific concept of management makes it clear that every action performed under management has some or the other scientific basis.

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