पर्यावरण विश्लेषण से क्या आशय है ? इसका निदान समझाइए। What is meant by environmental analysis? Explain its diagnosis.

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वातावरण या पर्यावरण विश्लेषण का आशय (Meaning of Environment Anlysis)

संगठन एक खुली व्यवस्था है। वे बाह्य वातावरण के अनुरूप संसाधनों में परिवर्तन करते हैं। और व्यवसाय के संचालन हेतु इसी पर निर्भर रहते हैं। ये बाह्य वातावरण से कच्चा माल, पूँजी, श्रम, ऊर्जा तथा सूचनाएँ ग्रहण करते हैं। व्यवसाय में प्रयुक्त सामग्री उत्पाद एवं सेवाओं में परिवर्तन होकर बाहा वातावरण को तैयार माल की पूर्ति करती है।

‘वातावरण’ या पर्यावरण का अर्थ उन प्रभाव, कारक एवं संस्थाओं से है जो व्यावसायिक संस्थाओं को प्रभावित करती हैं। दूसरे शब्दों में, पर्यावरण या वातावरण उन बाह्य परिस्थितियों एवं प्रभाव जिसके अन्तर्गत व्यावसायिक संस्था संचालित की जाती है। इसके अन्तर्गत सभी कारक सम्मिलित किये जाते हैं जो कि बाह्य एवं एकल व्यवसाय के नियन्त्रण एवं प्रबन्धन से परे हो। अतः व्यावसायिक वातावरण को उन सभी परस्थितियों एवं कारकों, जिसके अन्तर्गत व्यवसाय को संचालित करते हैं, के रूप में परिभाषित कर सकते हैं। इन कारकों के अन्तर्गत ग्राहक, ऋणदाता, प्रतिस्पर्धी, पूर्तिकर्त्ता, सरकार, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन, राजनैतिक दल एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगठन सम्मिलित किये जाते हैं। इनमें से कुछ कारक व्यवसाय को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं जबकि कुछ अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।

वातावरण को अनिश्चित एवं शक्तियुक्त कौन बनाता है ?

कई दबाव एक-दूसरे को संचालित करते हैं और प्रत्येक का व्यापार पर उपयोगी प्रभाव पड़ता है। इस कारण उच्च स्तरीय अनिश्चितताएँ बढ़ती हैं जो कि निर्णयन को एक कठिन कार्य बना देते हैं। व्यवसाय हेतु कष्टकारी पर्यावरण या वातावरण में योगदान देने वाले कारक निम्नलिखित हैं

(i) कम्प्यूटर उद्योग में तीव्र तकनीकी परिवर्तन; जैसे-नवीन नमूने आदि अस्तित्व में आते हैं।

(ii) सरकार की आर्थिक नीतियों में निरन्तर परिवर्तन; जैसे-लाइसेंस नीति, मुद्रा नीति, कर नीति इत्यादि।

(iii) राजनैतिक अनिश्चितता; जैसे-अस्थिर सरकार, शासन कर रहे दल के नेतृत्व में परिवर्तन इत्यादि।

(iv) सामाजिक परिवर्तन- अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं हेतु नौकरियों आरक्षण की माँग

(v) उपभोक्ताओं की पसन्द एवं फैशन में परिवर्तन; जैसे-सिंथेटिक वस्त्रों के स्थान पर खादी वस्त्रों को प्राथमिकता, असंतृप्त वसायुक्त तेल को नापसन्द करना।

(vi) श्रम की अशान्ति भी औद्योगिक कलह को बढ़ावा देती है। अधिक आर्थिक लाभ हेतु माँग, यूनियन के क्रियाकलापों में विरोध इत्यादि।

पर्यावरण घटकों का विश्लेषणात्मक वर्गीकरण (Analytical Classification of Environmental Factors)

पर्यावरण घटकों का विश्लेषणात्मक वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है-

(I) आर्थिक पर्यावरण (Economic Environment)- आर्थिक पर्यावरण के अन्तर्गत उन घटकों को शामिल करते हैं जोकि आर्थिक क्रियाओं के विकास की आकृति और इसमें निम्न को शामिल करते हैं

(1) कर प्रणाली (2) पूर्तिकर्ताओं की मोलतोल करने की क्षमता (3) औद्योगिक सौग (4) वित्तीय सुविधायें; (5) बाजार घटक (6) प्रशुल्क नीतिः (7) आय का वितरण; (8) मुद्रा एवं फू बाजार (9) आर्थिक प्रणाली (10) परिवहन, (11) उपभोक्ताओं की मोल-तोल करने की क्षमता, (1 प्रतियोगिता की प्रकृति: (13) उत्पादकता (14) प्लाट एवं सामग्री; (15) प्राकृतिक संसाधन; (16) मौद्रिक नीति: (17) आर्थिक नियोजन (18) सामान्य आर्थिक दशायें।

(II) राजनैतिक/वैधानिक पर्यावरण (Political/Legal Environment)-इसके अन्तर्गत के घटक शामिल किये जाते हैं जो कि सरकारी नीतियों के द्वारा व्यवसाय को नियन्त्रित या सुविधा प्रदान करते हैं। इसमें निम्न को शामिल करते हैं

(1) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (2) विदेशी व्यापार से सम्बन्धित अधिनियम; (3) रम सब्जियमः (4) सरकार की नीतियाँ (5) मूल्य तथा वितरण सम्बन्धी अधिनियम; (6) कम्पनी अधिनियम (7) औद्योगिक एवं लाइसेंस नीति; (8) देश का संविधान

(III) तकनीकी पर्यावरण (Technological Environment)–संसार में शीघ्रता से परिवर्तित हुई प्रौद्योगिकी तकनीक ने पर्यावरण पर बहुत प्रभाव डाला है। इस पर्यावरण के द्वारा व्यक्तियों के जीवन स्तर तथा संस्कृति पर भी प्रभाव पड़ा है। तकनीकी पर्यावरण का प्रभाव प्रमुख रूप से- (1) सूचना प्रक्रिया (2) व्यवसाय की उत्पादन प्रक्रियायें; (3) उत्पादन के स्तर इत्यादि पर विशेषतः पड़ता है। तकनीकी पर्यावरण के माध्य से व्यवसाय का विपणन, वित्त, उत्पाद का विकास तथा उपभोक्ता की व्यवसाय से अपेक्षाएँ इत्यादि भी निर्धारित होती है। उपलब्ध तकनी पर्यावरण के माध्यम से यह भी निर्धारित किया जाता है कि व्यावसायिक संगठन में व्यावसायिक क्रियाएँ किस प्रकार की होंगी, उनकी प्रकृति क्या होगी तथा रोजगार की दशायें कैसी होंगी। व्यवसाय का भावी स्वरूप भी तकनीकी पर्यावरण के द्वारा ही निर्धारित हो रहा है।

(IV) सामाजिक एवं सांस्कृतिक पर्यावरण (Social and Cultural Environment) सामाजिक तथा सांस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण ग्रामीण व शहरी जनजीवन, व्यवसाय का सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में योगदान, व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व, सामाजिक संस्थाओं तथा संगठनों, समूहवाद व व्यक्तिवाद, शिक्षा, राष्ट्र की संस्कृति, वर्ग की रचना इत्यादि तत्वों से होता है। इस पर्यावरण पर धन का प्रभाव, उन्नति की आकांक्षा, व्यक्तियों का व्यवसाय के प्रति दृष्टिकोण, परिवार की स्थिति तथा कार्य के प्रति व्यक्तियों का दृष्टिकोण इत्यादि महत्वपूर्ण योदान देते हैं। व्यवसाय को समाज की स्थिति के अनुरूप ही चलना पड़ता है। इसका कारण यह है कि वह भी इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। व्यवसाय का लक्ष्य समाज को वस्तुओं तथा सेवाओं की प्राप्ति कराना होता है। अतः समाज में जो भी परिवर्तन होते हैं उससे उसे सामंजस्य बनाये रखना होता है।

(V) प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment)-प्राकृतिक पर्यावरण का भी अत्यन्त महत्व है। इसमें राष्ट्र का विस्तार, वन, भूमि, जल सम्पदा, जलवायु इत्यादि को शामिल करते हैं। बहुत से क्षेत्र किसी प्राकृतिक सम्पदा के धनी हो सकते हैं, उदाहरण के लिये; खनिज सम्पदा, इस प्रकार की दशा में उस सम्पदा से सम्बन्धित व्यवसाय का वहाँ शीघ्र विकास होने लगता है। धरातल उस राष्ट्र में परिवहन सुविधाओं पर प्रभाव डाल सकता है। देश की कृषि पर प्राकृतिक वातावरण का भी अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। अतः अर्थव्यवस्था के प्रत्येक हिस्से पर प्राकृतिक वातावरण का भी अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। वह प्रभाव किसी पर कम अथवा किसी पर अधिक हो सकता है। प्राकृतिक पर्यावरण में व्यवसाय तथा उद्योग का हस्तक्षेप सामान्यतः नगण्य होता है।

वातावरण के विश्लेषण की तकनीकें (Techniques of Environment Analysis)

सुविचारित प्रबन्ध के लिए उपलब्ध वातावरण का विश्लेषण एवं मूल्यांकन अनिवार्यतः किया जाना चाहिए। निगमीय उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सुविचारित प्रबन्ध शैली में अनेक निर्णय लिये जाते हैं और उन पर अमल किया जाता है। इससे विविध वैकल्पिक संगठनात्मक ढाँचों में चयन करने में भी सहायता मिलती है। वातावरणीय विशलेषण के अभाव में निष्पादनता की नियमित जाँच एवं भावी | नियोजन के लिए सामयिक पूर्वानुमान लगाना सम्भव नहीं हो पाता। वातावरण विश्लेषण की प्रमुख तकनीकें निम्न है

(1) SWOT विश्लेषण- SWOT का अर्थ है शक्ति या strength (S), दुर्बलताएँ या Weak ness (W), अवसर या Opportunities (O), एवं धमकियाँ या Threats (T)। कम्पनी के घरेलू वातावरण का मूल्यांकन कर इसकी शक्ति एवं दुर्बलताओं का पता लगाया जा सकता है, जबकि बाह्य वातावरण के मूल्यांकन से उपलब्ध अवसरों एवं धमकियों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

(2) मॉइकल पॉर्टर का प्रतिस्पर्द्धात्मक व्यूहनीति मॉडल-इस मॉडल में उद्योग एवं प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण का विश्लेषण करने का प्रतिरूप प्रस्तुत किया गया है। यह संगठनों एवं वातावरण के बीच सम्बन्ध पर आधारित है तथा फर्म स्तर पर विशिष्ट व्यूहनीतियों के निर्माण में सहायक होता है। इस मॉडल में निम्नलिखित चर शामिल किए गए हैं

  • (i) प्रवेश प्रतिरोध; जैसे-पैमाने की मितव्ययिताएँ, पेटेंट, आदि।
  • (ii) प्रतिस्थापनों का भय, जैसे-सीमाएँ एवं मूल्य वृद्धि।
  • (iii) आपूर्तिकर्ताओं की सौदेबाजी की शक्ति; जैसे-थोक आपूर्ति।
  • (iv) ग्राहकों की सौदेबाजी की शक्ति जैसे-थोक माँग ।
  • (v) प्रतिस्पर्धा की मात्रा; जैसे-लाभों में कमी

(3) स्कैन करने के प्रतिरूप व्यावसायिक वातावरण को जानने के लिए विद्वानों द्वारा मॉडल तैयार किए गए हैं। इन मॉडलों को उन तत्वों पर केन्द्रित किया जाता है जिनसे वातावरणीय मूल्यांकन सरल हो जाता है। उदाहरणस्वरूप, अग्लियर (Augliar) ने व्यावसायिक वातावरण के बारे में जानकारी इकट्टी करने के लिए निम्न विधियाँ सुझाई हैं

  • (i) औपचारिक खोज-विशिष्ट उद्देश्यों के लिए जानकारी एकत्रित करना।
  • (ii) अनौपचारिक खोज-जानकारी एकत्र करने के लिए कोई व्यवस्थित तरीका न अपनाया
  • (iii) दशीय परिदृश्य-ऑकड़ों का उद्देश्यपूर्ण संकलन
  • (iv) निर्देशहीन परिदृश्य- बिना किसी उद्देश्य के सूचना संकलन।

(4) सुव्यवस्थित मॉडल-इन मॉडलों में कार्य संगठन में प्रबन्ध प्रणाली पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है ये प्रणालियाँ तदर्थ एवं अनियमित स्वभाव की होती हैं। संकट से निपटने के लिए या बजटीय अनुमान लगाने के लिए तदर्थ टीमों का गठन किया जा सकता है। निर्णय प्रक्रिया एवं समस्या समाधान के लिए आवश्यक वातावरणीय सूचना एकत्र करने के लिए नियमित प्रणाली की व्यवस्था की जा सकती है। अवसरों की पहचान के लिए भी नियमित प्रणालियों का गठन किया जा सकता है। इन प्रणालियों द्वारा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी एवं राजनैतिक प्रवृत्तियों से सम्बद्ध सूचना का संकलन किया जाता है।

वातावरण या पर्यावरण निदान (Environment Diagnosis)

वातावरण विश्लेषण से प्राप्त परिणामों का निदान किए बिना समस्याओं का समापन सम्भव नहीं है। वातावरण के निदान के अन्तर्गत अवसरों का निर्धारण एवं विश्लेषण की प्रक्रिया में आने वाली आपत्ति का निर्धारण सरल है। उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर नीति नियोजनकों को यह तय करना चाहिए कि सूचनाओं के किन समूहों पर विश्वास किया जाये एवं किन्हें उपेक्षित किया जाये। कम महत्वपूर्ण सूचनाओं से अधिक महत्वपूर्ण सूचनाओं को अलग करना। विस्तृत / बड़े व्यवसायों हेतु यह निश्चित रूप से मुश्किल कार्य है जहाँ सूचनाएँ अत्यधिक विस्तृत एवं विस्तीर्ण होती है। वातावरण की सूचनाओं का निर्धारण एवं सम्बन्धित आने वाली विपत्तियों एवं अवसरों के प्रभाव को निर्धारित करने हेतु वातावरण के विश्लेषण के दौरान प्राप्त सूचनाओं का क्रमबद्ध मूल्यांकन करते हैं। इस कारण, ETOP का निर्माण एक उपयोगी विधि है। वातावरण के विश्लेषण से प्राप्त परिणामों की संरचना हेतु  ETOP सबसे उपयोगी तरीका है जो कि नीतिगत निर्णय से सम्बन्धित होता है एवं लोगों द्वारा प्रयोग में लाया जाता है। पर्यावरण निदान निम्न मुख्य बातों पर निर्भर करता है

  • (1) पर्यावरण विश्लेषण से मिलने वाली सामग्री की विश्वसनीयता ।
  • (2) रणनीति या व्यूह रचना निर्माण करने का गत अनुभव।
  • (3) अभिप्रेरण का स्तर|
  • (4) अनुसंधान एवं विकास विभाग की सुदृढ़ता।
  • (5) परिवर्तन को सहर्ष स्वीकार करने की मनौवैज्ञानिक तैयारी।

Meaning of Environment Analysis

Organization is an open system. They make changes in the resources according to the external environment. And depend on it for the operation of the business. They receive raw materials, capital, labour, energy and information from the external environment. The materials used in the business transform into products and services and supply the finished goods to the external environment.

‘Environment’ or environment means those influences, factors and institutions that affect business entities. In other words, environment or environment are those external conditions and influences under which the business organization is operated. Under this, all the factors are included which are beyond the control and management of external and single business. Therefore, business environment can be defined as all those conditions and factors under which the business is conducted. Under these factors, customers, lenders, competitors, suppliers, government, social and cultural organizations, political parties and international organizations are included. Some of these factors affect the business directly while some affect it indirectly.

What makes the environment uncertain and powerful?

Many pressures drive each other and each has a useful effect on the business. This leads to high level of uncertainties which make decision making a difficult task. Following are the factors that contribute to the troublesome environment or environment for business

(i) rapid technological changes in the computer industry; As new samples etc. come into existence.

(ii) frequent changes in the economic policies of the Government; Such as license policy, monetary policy, tax policy, etc.

(iii) political uncertainty; For example, unstable government, change in the leadership of the ruling party, etc.

(iv) Social Change- Demand for reservation of jobs for minorities and women

(v) Change in consumer preferences and fashion; For example, preferring Khadi fabrics in place of synthetic fabrics, disliking oil containing unsaturated fats.

(vi) Labor unrest also gives rise to industrial strife. Demand for more economic benefits, opposition to union activities, etc.

Analytical Classification of Environmental Factors

Analytical classification of environmental components can be done on the following basis-

(I) Economic Environment – ​​Under the economic environment, those components are included which shape the development of economic activities and include the following

(1) Tax system (2) Negotiating ability of suppliers (3) Industrial gifts (4) Financial facilities; (5) Market Factors (6) Tariff Policy: (7) Distribution of Income; (8) Money and Food Market (9) Economic System (10) Transportation, (11) Bargaining Ability of Consumers (1 Nature of Competition: (13) Productivity (14) Plot and Materials; (15) Natural Resources (16) Monetary Policy: (17) Economic Planning (18) General Economic Conditions.

(II) Political/Legal Environment – ​​The components are included under this which control or facilitate business through government policies. It includes the following

(1) Minimum Wages Act (2) Acts relating to foreign trade; (3) Rum Vegetable: (4) Government Policies (5) Price and Distribution Act; (6) Companies Act (7) Industrial and Licensing Policy; (8) Constitution of the country

(III) Technological Environment- The rapidly changing technology technology in the world has made a great impact on the environment. This environment has also affected the quality of life and culture of the people. The impact of the technological environment mainly- (1) information process (2) production processes of the business; (3) It is particularly affected by the level of production etc. The marketing, finance, product development and consumer expectations from the business are also determined through the technical environment. Through the available technical environment, it is also determined that what will be the type of business activities in the business organization, what will be their nature and what will be the conditions of employment. The future nature of business is also being determined by the technological environment.

(IV) Social and Cultural Environment Creation of social and cultural environment Rural and urban life, Contribution of business in social and cultural programs, Social responsibility of business, Social institutions and organizations, Collectivism and individualism, Education, Nation culture, class composition, etc. The effect of money on this environment, desire for progress, attitude of individuals towards business, family situation and attitude of individuals towards work etc. Business has to run according to the condition of the society. The reason for this is that he is also an important part of it. The goal of business is to get goods and services to the society. Therefore, it has to be in harmony with whatever changes take place in the society.

(V) Natural Environment – Natural environment is also very important. It includes the extent of the nation, forests, land, water resources, climate etc.

Huh. Many regions may be rich in natural resources, for example; Mineral wealth, in this type of condition, the business related to that wealth starts developing soon. The terrain can affect the transportation facilities in that nation. The natural environment also has a great impact on the agriculture of the country. Therefore, the natural environment also has a great impact on every part of the economy. That effect can be less on some or more on others. The interference of business and industry in the natural environment is generally negligible.

Techniques of Environment Analysis

The environment available for a well thought out management must be analyzed and evaluated. In order to achieve corporate objectives, many decisions are taken and implemented in a well thought out management style. It also helps in making selections among various alternative organizational structures. In the absence of environmental analysis, regular checking of performance and future. It is not possible to make timely forecast for planning. Following are the main techniques of environment analysis

(1) SWOT Analysis- SWOT stands for Strength or Strength (S), Weakness or Weakness (W), Opportunities or Opportunities (O), and Threats or Threats (T). The strengths and weaknesses of the company can be ascertained by evaluating its home environment, whereas the knowledge of the opportunities and threats available can be obtained by evaluating the external environment.

(2) Michael Porter’s Competitive Strategic Model- In this model a model has been presented to analyze the industry and the competitive environment. It is based on the relationship between organizations and the environment and helps in formulation of specific strategies at the firm level. The following variables are included in this model

(i) penetration resistance; Such as economies of scale, patents, etc.
(ii) Fear of substitutions, such as limits and price rise.

(iii) the bargaining power of the suppliers; such as bulk supply.

(iv) Bargaining power of customers such as bulk demand.

(v) the amount of competition; loss of benefits

(3) Models of scanning have been designed by scholars to know the business environment. These models focus on the elements that make environmental assessment easy. For example, Augliar has suggested the following methods for gathering information about the business environment

(i) To collect information for formal search-specific purposes.
(ii) informal search – did not adopt any systematic method of collecting information

(iii) Tentative Scenario – Purposeful Collection of Data

(iv) Directionless scenario – Information gathering without any purpose.

(4) Systematic Model – In these models, the focus is on the management system in the work organization, these systems are ad hoc and irregular in nature. Ad-hoc teams may be formed to deal with the crisis or to make budgetary estimates. Regular system can be arranged for collecting necessary environmental information for decision making and problem solving. Routine systems can also be set up to identify opportunities. Information related to economic, social, cultural, technological and political trends is collected through these systems.

Environment Diagnosis

It is not possible to eliminate the problems without diagnosing the results obtained from the environmental analysis. Determination of opportunities under the diagnosis of the environment and the determination of the objection that comes in the process of analysis is simple. On the basis of available data, policy planners should decide which sets of information should be trusted and which should be ignored. Separating more important information from less important information. This is certainly a difficult task for large/large businesses where the information is very detailed and expansive. To determine the information of the environment and to determine the impact of the related disasters and opportunities, systematically evaluate the information obtained during the analysis of the environment. For this reason, building an ETOP is a useful method. ETOP is the most useful method for structuring the results obtained from the analysis of the environment, which is related to policy decisions and is used by the people. Environmental diagnosis depends on the following main factors

(1) The reliability of the material obtained from environmental analysis.
(2) Past experience in strategy or strategy formulation.

(3) The level of motivation.

(4) Strengthening of R&D department.

(5) Psychological preparation to accept change happily.

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