मालती जोशी जी की कहानियों में शिल्प वै विध्य पर टिप्पणी लिखिए ? Write a comment on Shilp Vaidhya in the stories of Malti Joshi ji?

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मालती जी की कहानियों में सामाजिक तथा पारिवारिक वातावरण अधिक चित्रित हुआ है। इसके अंतर्गत सामाजिक, रीति-रिवाज, परंपराएँ, कुरीतियाँ, सामंजस्य, वैमनस्य आदि का चित्रण मिलता है। परिवार में मानसिक तनाव व खिंचाव के वातावरण की सृष्टि करता है।

तत्कालीन समाज में बेटी के प्रति जो हीन भावना थी, उसका चित्रण भी मालती जी ने बहुत अच्छे ढंग से किया है। उसके जन्म को अशुभ, पालन-पोषण व विवाह को बोझ समझा जाता है। .नारी के प्रति इस प्रकार की हीन भावना पुरुष प्रधान समाज की देन है जो हमेशा लड़के की चाह में ही रहता है। उसे अपने वंश का उद्धारक व वंश चलाने वाला मानता है, लेकिन कभी यह विचार नहीं करता कि उसे जन्म देने वाली भी एक नारी ही है। पुरुष अपनी वंश वाहक की इस अभिलाषा की पूर्ति के लिए नारी का बलिदान कर देता है।

मालती जी ने अपनी कहानियों में शहरी और ग्रामीण दोनों ही वातावरण का चित्रण किया है। गाँव में जहाँ बड़े-बड़े घर होते हैं, वहीं शहरों में छोटे-छोटे कमरे ही होते हैं। गाँव में बहू बेटी को घर की मर्यादा में घूँघट डालकर रहना पड़ता है, वहीं शहर में उनका जीवन स्वतंत्र रूप से बीतता है। मालती जी ने ग्रामीण वातावरण का चित्रण सटीक रूप से किया है।

मालती जी ने अपनी रचनाओं में भाषा, संवाद, शैली व कथानक को सजीव प्रभावी व रोचक बनाकर पाठक को अपने से जोड़कर रखती हैं, वैसे ही कथानक में तत्कालीन परिस्थितियाँ, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, नैतिक, धार्मिक वातावरण भी समाहित हैं।

मालती जी ने विषयानुरूप अपनी कहानियों में लंबे संवाद भी लिखे हैं। विषय के गांभीर्य को स्पष्ट करने के लिए कहानी के ये संवाद सर्वथा उपयुक्त होते हैं। मालती जी ने जिस तरह पात्रानुकुल भाषा का प्रयोग किया है, ठीक वैसे ही पात्रानुकूल संवाद लिख कर कहानी को प्रभावी बनाया है। मालती जी की कहानियाँ शिल्प वैविध्य की दृष्टि से प्रभावपूर्ण है। उन्होंने प्रसंगानुकूल भाषा शैली व संवाद के साथ-साथ वातावरण का वर्णन भी बड़ी सहजता से की है। कहीं भी उसकी कहानियों में असहज या अस्वाभाविकता का भाव नहीं आता है। शिल्प कला की दृष्टि से उन्होंने पाठकों पर अपना प्रभाव स्थापित किया

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