प्रस्तुत कहानी के माध्यम से लेखक मध्यम वर्ग की उन्नति चाहता है। उसे वास्तविक रूप से उन्नत देखने के लिए लेखक ने व्यंग्यात्मक रूप से संकेत किए हैं कि जब तक व्यक्ति अपनी समस्या के प्रति गंभीर नहीं होगा वह उन्नति नही कर सकता। दूसरा बिंदु मोहन राकेश ले यह बताया है कि सभी व्यक्तियों को एकजुट होना पड़ेगा अन्यथा उन्नति के सब रास्ते बंद हो जाएँगे। इसके अतिरिक्त बड़ा सोचें तथा अपना कार्य मुस्तैदी से करें और कर्त्तव्यनिष्ठ बने तभी उन्नति संभव है। • बाहरी दिखावा न करते हुए आंतरिक रूप से स्वयं को सुदृढ़ बनाएँ और अपनी समस्या का समाधान बौद्धिक रूप से खोजें तभी वास्तविक उन्नति संभव है।


Through the presented story, the author wants the advancement of the middle class. To make him look really advanced, the author has sarcastically indicated that unless a person is serious about his problem, he cannot progress. The second point Mohan Rakesh has told is that all the people have to be united, otherwise all the paths of progress will be closed. Apart from this, think big and do your work diligently and become responsible only then progress is possible. • Strengthen yourself internally without showing outward appearances and find the solution to your problem intellectually, only then real progress is possible.

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