केन्द्रीय प्रवृत्ति या सांख्यिकी माध्य (Central Tendency or Statistical Mean)

सांख्यिकी विज्ञान में समंकों के संकलन, सम्पादन, वर्गीकरण तथा सारणीयन आदि क्रियाओं से आंकड़ों को व्यवस्थित, सुबोध एवं समझने योग्य बनाया जाता है। किन्तु समंकों को संक्षिप्त करके उन्हें याद रखने योग्य बनाया जाता है। इसके लिये सांख्यिकी में माध्यों का प्रयोग किया जाता है। इसीलिये संख्यात्मक तथ्यों के मूल्यों में किसी विशेष मूल्य के आसपास संकेन्द्रित होने की प्रवृत्ति को केन्द्रीय प्रवृत्ति कहा जाता है। अन्य शब्दों में, एक ऐसा अंक जो किसी श्रेणी के लगभग मध्य में स्थित होता है और उसके महत्वपूर्ण लक्षणों का प्रतिनिधित्व करता है, उसे केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप या माध्य कहते हैं।

प्रो. सिम्पसन एवं काफ्का के अनुसार, “केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप एक ऐसा प्रतिरूपी मूल्य है जिसकी ओर अन्य संख्यायें संकेन्द्रित होती हैं।” प्रो. केलांग व स्मिथ के मतानुसार, “माध्य को कभी-कभी केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप इसलिये कहा जाता है क्योंकि व्यक्तिगत चर मूल्य इसके चारों ओर अधिकतम जमा होते हैं।” उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि माध्य एक सरल एवं संक्षिप्त अंक है जो समंकमाला के सभी पदों का प्रतिनिधित्व करता है।

सांख्यिकीय माध्य के उद्देश्य तथा कार्य (Objectives and Functions of Statistical Mean)

सांख्यिकी माध्य के कुछ कार्य व उद्देश्य अग्र प्रकार पाये जाते हैं-

1. माध्य एकत्रित सामग्री को सामान्य व्यक्ति के समझने योग्य बनाता है। 2. इसकी सहायता से दो या दो से अधिक वर्गों की तुलना की जा सकती है।

3. माध्य मूल्य के आधार पर भावी योजनाओं का पता लगाया जा सकता है। 4. इसके द्वारा माध्य की रचना की प्रकृति का ज्ञान प्राप्त होता है।

5. इसके माध्य से समंकों के समय के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

आदर्श माध्य के आवश्यक तत्व (Essentials of an Ideal Mean)

एक आदर्श माध्य में निम्नलिखित बातों का समावेश होना चाहिये (i) माध्य की परिभाषा स्पष्ट व सरल होनी चाहिये ताकि अन्य व्यक्ति अथवा अनुसन्धानकर्ता को अनुमान लगाने की आवश्यकता न हो।

(ii) एक आदर्श माध्य वह होता है जिसकी गणना सरलता से की जा सकती है। (iii) माध्य एक निश्चित संख्या होना चाहिये।

(iv) आदर्श माध्य वह होता है जिसमें समग्र के प्रतिनिधित्व का गुण हो । (v) आदर्श माध्य की संख्या निरपेक्ष होती है।

(vi) एक आदर्श माध्य वह होता है जिसके व्यादर्श में थोड़ा बहुत परिवर्तन करने पर (vii) एक आदर्श माध्य वह होता है जिसमें अंकगणितीय एवं बीजगणितीय विधियों का प्रयोग किया जाना सम्भव हो ।

उसका माध्य पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

सांख्यिकीय माध्यों के प्रकार (Types of Statistical Averages)

अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इसके प्रकारों को निम्न भाँति रखा जाता है-

(क) स्थिति सम्बन्धी माध्य (Average of Position) (1) मध्यिका (Median)– इसका संकेताक्षर ‘M’ है।

(2) भूयिष्ठक अथवा बहुलक (Mode)- इसका संकेताक्षर ‘Mo’ या ‘Z’ है।

(ख) गणितीय माध्य (Mathematical Averages)

(3) अंकगणितीय माध्य अथवा समान्तर माध्य या केवल माध्य (Arithmetic Mean or Mean) इसका संकेताक्षर X है। (4) गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean) इसका संकेताक्षर G.M.’ है।

(5) हरात्मक माध्य (Harmonic Mean)– इसका संकेताक्षर ‘H. M.’ है।

(6) द्विघातीय माध्य (Quadratic Mean)

(ग) व्यापारिक माध्य (Commercial Average) इसका संकेताक्षर ‘Q.M. है।

(7) चल अथवा गतिमान माध्य (Moving Averages), (8) प्रणामी या संचयी माध्य (Progressive Averages), तथा (9) संग्रचित माध्य (Composite Averages)

समान्तर माध्य का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Mean)

समान्तर माध्य सबसे सरल, उत्तम तथा लोकप्रिय माध्य है। सामान्य भाषा में औसत शब्द का उपयोग इसी समान्तर माध्य के लिये किया जाता है। वास्तव यह केन्द्रीय प्रवृत्ति का सबसे लोकप्रिय तथा सरल माप है।

प्रो. मिल के शब्दों में, “समान्तर माध्य किसी का समायोजन केन्द्र है।” प्रो. डब्ल्यू, आई. किंग के मतानुसार, “समंकमाला के पदों के योग में उनकी संख्या का भाग देने से जो राशि प्राप्त होती है उसे ही माध्य कहा जाता है।” इस प्रकार कहा जा सकता है कि समान्तर माध्य वह मूल्य होता है जो किसी श्रेणी के समस्त पदों के मूल्य के योग में संख्या का भाग देने से प्राप्त होता है।

इसकी गणना करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान दिया जाता है 1. श्रेणी में से अथवा बाहर से किसी संख्या को अनुमानित माध्य (dx) माना जाता है। 2. अनुमानित माध्य से धन (+) तथा ऋण (-) के चिन्हों को ध्यान में रखते हुये प्रत्येक वास्तविक पद से अन्तर विचलन लिये जाते हैं।

3. धन (+) तथा ऋण (-) चिन्हों को ध्यान में रखते हुये विचलन का योग किया जाता है।

4. विचलन के योग में पदों की संख्या या आवृत्ति के योग का भाग दिया जाता है। 5. प्राप्त भजनफल को अनुमानित माध्य में जोड़कर या घटाकर माध्य ज्ञात किया जाता


Central Tendency or Statistical Mean

In Statistical Science, data is made systematic, comprehensible and understandable by activities like collection, editing, classification and tabulation of data. But the data is shortened to make them memorable. Means are used for this in statistics. That is why the tendency of the values ​​of numerical facts to be concentrated around a particular value is called central tendency. In other words, a number which is located approximately in the middle of a series and represents its important features, is called the measure or mean of central tendency.

Pro. According to Simpson and Kafka, “The measure of central tendency is the typical value towards which other numbers are concentrated.” According to Prof. Keylong and Smith, “The mean is sometimes called a measure of central tendency because the individual variable values ​​are maximum accumulated around it.” On the basis of the above definitions, it can be said that the mean is a simple and concise number which represents all the terms of the data series.

Objectives and Functions of Statistical Mean

Some of the functions and purposes of statistical mean are found as follows-

1. Mean makes the collected material understandable to the common man. 2. With the help of this, two or more classes can be compared.

3. Future plans can be ascertained on the basis of mean value. 4. Through this the knowledge of the nature of the composition of the mean is obtained.

5. Through this information about the timing of the data is obtained.

Essentials of an Ideal Mean

An ideal mean should include the following things (i) The definition of mean should be clear and simple so that there is no need for other person or researcher to guess.

(ii) An ideal mean is one which can be easily calculated. (iii) The mean must be a fixed number.

(iv) The ideal mean is one which has the property of representing the whole. (v) The number of ideal mean is absolute.

(vi) An ideal mean is one in which it is possible to use arithmetic and algebraic methods on a small change in the sample (vii) an ideal mean.

It should have minimal impact on the mean.

Types of Statistical Averages

For the convenience of study, its types are kept as follows-

(a) Average of Position (1) Median – Its abbreviation is ‘M’.

(2) Bhuyishthak or Mode – Its abbreviation is ‘Mo’ or ‘Z’.

(b) Mathematical Averages

(3) Arithmetic Mean or Arithmetic Mean or simply Mean, its abbreviation is X. (4) Geometric Mean Its abbreviation G.M.’ Is.

(5) Harmonic Mean – Its abbreviation ‘H. M.’ Is.

(6) Quadratic Mean

(c) Commercial Average Its abbreviation ‘Q.M. Is.

(7) Moving Averages, (8) Progressive Averages, and (9) Composite Averages

Meaning and Definition of Mean

Arithmetic mean is the simplest, best and popular mean. In common language, the word average is used for this arithmetic mean. In fact it is the most popular and simplest measure of central tendency.

Pro. In the words of Mill, “The arithmetic mean is the center of adjustment.” Pro. According to W, I. King, “The sum obtained by dividing the sum of the terms of a data series by their number is called the mean.” Thus, it can be said that the arithmetic mean is the value which is obtained by dividing the number by the sum of the values ​​of all the terms of a series.

The following points are taken into account while calculating this 1. Any number in or out of the series is considered as the estimated mean (dx). 2. Considering the plus (+) and minus (-) signs from the estimated mean, the difference deviations are taken from each actual term.

3. Taking into account the plus (+) and minus (-) signs, the deviation is added.

4. The sum of the deviations is divided by the sum of the number of terms or the frequency. 5. The mean is found by adding or subtracting the obtained hymn to the estimated mean.

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