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कौशिल्या माता का मायका जहाँ अपने ही ननिहाल में बंद हैं भांचा राम

एक ओर अयोध्या में जहां लोग रामलला मंदिर निर्माण की बाट जोह रहे हैं वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 30 किलोमीटर दूर अपने ननिहाल में भगवान राम कई वर्षों से ताले में बंद हैं।
रायपुर से करीब 27 किमी दूरी पर चंद्रखुरी में कौशल्या माता का मंदिर है।इस मंदिर के गर्भगृह में मां कौशल्या की गोद में बालरुप में भगवान श्रीरामजी की बाल प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं भक्तों का मन मोह लेती है।कौशल्या मंदिर रायपुर जिले के अंतर्गत चंद्रखुरी नामक एक छोटे से गांव में स्थित है।
इसके चारों ओर ‘छह कोरी तारिया’ अर्थात 126 तालाब होने की बात यहाँ के ग्रामीणो के द्वारा बताया जाता है किंतु अभी इस क्षेत्र में 20-25 तालाब ही शेष हैं।चंदखुरी अयोध्या के राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या का जन्मस्थल माना जाता है। विश्व में कौशल्या माता का यह एकमात्र मंदिर है।
माता कौशल्या का मायका होने के कारण इस गांव को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है। गांव के मध्य में भगवान राम का मंदिर है जो पिछले कई वर्षों से बंद है। इसकी वजह यहां दो परिवारों के बीच मंदिर के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद है। छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल कहा जाता है और रामायण काल में दक्षिण कोसल के राजा भानुमंत का राज्य था।जिनकी पुत्री भानुमति कौशल्या थी। दक्षिण कोसल की राजधानी आरंग नगरी थी तथा चंदखुरी का नाम पहले चंद्रपुरी था जहां माता कौशल्या का जन्म हुआ था।
चूंकि छत्तीसगढ़ श्रीराम का ननिहाल है इसलिए राम छत्तीसगढ़ वासियों के भांजे हुए। यही कारण है कि यहां के निवासी अपने भांजे में भगवान राम की छवि देखते हैं, तथा यहां भांजे का पैर छूने का रिवाज़ है।
‘इंहाँ के जम्मो लोगन ह कौशिल्या माता ल मान दान के रूप म पूजथें अउ संगे संग राम भगवान ल भांचा राम कहिथें’

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