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कम्पनी के प्रविवरण से आप क्या समझते हैं ? कम्पनी के प्रविवरण में क्या-क्या विवरण दिये जाते हैं ? समझाइए।

अनिवार्य एक सार्वजनिक कम्पनी को व्यापार प्रारम्भ करने का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी पूँजी एकत्रित करनी होती है। यह कार्य सामान्य जनता को प्रविवरण निर्गमित करके दिया जाता है। विधान के अनुसार एक सार्वजनिक कम्पनी के लिए प्रविवरण निर्गमित करना तभी वह जनता से पूँजी प्राप्त कर सकती है। प्रविवरण एक ऐसा प्रपत्र है जिसके द्वारा एक सार्वजनिक को प्रविक कम्पनी जनता को अपने अंश, ऋण-पत्र खरीदने या निक्षेप जमा करने हेतु आमन्त्रित करती है। इसमें निवेशकों और ऋणदाताओं की सुरक्षा हेतु कम्पनी द्वारा आवश्यक जानकारी प्रदान की जाती है।

कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(70) के अनुसार, “प्रविवरण आशय ऐसे प्रपत्र से है जिसे प्रविवरण के रूप में वर्णित या निर्गमित किया गया हो तथा इसमें धारा 32 में उल्लिखित से हो, जो हैरिंग प्रविवरण या धारा 31 में उल्लिखित शैल्फ-प्रविवरण या कोई सूचना पत्र, गश्तीफा, विज्ञापन द अन्य प्रपत्र शामिल है, जो जनता से किसी निगमित संस्था की प्रतिभूतियों के अभिदान या क्रय लिए प्रस्ताव आमन्त्रित करता है। ”

टापहम एवं टापहम के अनुसार, “प्रविवरण से आशय ऐसे परिपत्र से है, जो प्रवर्तकों के द्वार कम्पनी के समामेलन के पश्चात् उसके अंशों को खरीदने के लिए जनता को प्रेरित करने हे प्रकाशित किया जाता है। ”

इस प्रकार स्पष्ट है कि “कोई भी प्रपत्र जिसके द्वारा कम्पनी के लिए निक्षेप अथवा अंशों ऋण-पत्रों का क्रय करने के लिए जनता से प्रस्ताव आमन्त्रित किया जाता है, प्रविवरण कहलाता है।

प्रविवरण की विशेषताएँ (Characteristics of Prospectus)

पविवरण की प्रमुख विशेषताओं को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) विवरण एक लिखित प्रलेख या दस्तावेज होता है।

(2) यह किसी सूचना पत्र, परिपत्र या विज्ञापन के रूप में हो सकता है।

(3) यह किसी सार्वजनिक कम्पनी द्वारा जारी किया जा सकता है।

(4) यह किसी निजी कम्पनी द्वारा जारी नहीं किया जा सकता है।

(5) यह किसी सार्वजनिक कम्पनी द्वारा जनता को दिया गया निमन्त्रण है।

(6) प्रविवरण पर तिथि लिखी होती है जिसे प्रविवरण जारी करने की तिथि माना जाता है।

(7) प्रविवरण पर प्रत्येक संचालक या प्रस्तावित संचालक के हस्ताक्षर होने आवश्यक है।

प्रविवरण के उद्देश्य (Objects of Prospectus)

प्रविवरण निर्गमन के प्रमुख उद्देश्यों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) जनता को कम्पनी के अंश तथा ऋण-पत्र क्रय करने के लिए आमन्त्रित करने के लिए (2) जनता के अंश तथा ऋण-पत्र क्रय करने के लिए दी गयी शर्तों एवं छूटों का लेखा करने के लिए

(3) प्रविवरण में लिखी बातों के लिए संचालक उत्तरदायी है, इस बात की घोषणा करना।

प्रविवरण का निर्गमन कौन कर सकता है। (Who can Issue Prospectus)

प्रविवरण का निर्गमन निम्नलिखित में से कोई कर सकता है

(1) किसी भी सार्वजनिक कम्पनी द्वारा।(2) ऐसी कम्पनी की ओर से किसी भी व्यक्ति द्वारा। (3) कम्पनी के निर्माण से सम्बन्धित या निर्माण में हित रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा। (4) कम्पनी के निर्माण से सम्बन्धित या निर्माण में हित रखने वाले किसी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा। (5) उस व्यक्ति या संस्था द्वारा जिसे कम्पनी ने अपनी प्रतिभूतियाँ इस आशय से हैं या करने का ठहराव किया है कि उन्हें जनता को पुनः प्रस्तावित किया जायेगा।

क्या प्रविवरण का निर्गमन आवश्यक है ?

(Is the Issue of Prospectus Compulsory ? ) प्रत्येक कम्पनी के लिये प्रविवरण का निर्गमन आवश्यक नहीं है। एक निजी कम्पनी जनता

को प्रविवरण निर्गमित ही नहीं कर सकती। एक सार्वजनिक कम्पनी को जनता से पूँजी एकत्रित करने के लिए प्रविवरण निर्गमित करना आवश्यक है। लेकिन एक सार्वजनिक कम्पनी को निम्न दशाओं में प्रविवरण का निर्गमन करना आवश्यक नहीं है

1. यदि आवेदन पत्र किसी ऐसे व्यक्ति के यथार्थ निर्गमन के सम्बन्ध में निर्गमित किया गया हो, जो कि अंशों या ऋण-पत्रों के लिये कम्पनी के साथ अभिगोपन का अनुबन्ध करता हो। 2. यदि अंशों या ऋण-पत्रों का निर्गमन केवल विद्यमान अंशधारियों अथवा ऋणपत्रधारियों को ही किया जाना हो।

3. यदि ऐसे अंशों या ऋण-पत्रों का निर्गमन होता है, जो कि पहले निर्गमित किये गये अंशों या ऋण-पत्रों से पूर्णतया मिलते-जुलते हों और जिनमें किसी प्रमाणित स्कन्ध विपणि में व्यवहार किया जाता हो।

4. यदि अंशों व ऋण-पत्रों के लिये जनता को आमन्त्रित करना वर्जित हो।

प्रविवरण की विषय-सामग्री

(Contents of the Prospectus) प्रविवरण कम्पनी का एक महत्वपूर्ण प्रलेख होता है जो जनता को कम्पनी की व्यावसायिक योजनाओं और उसकी लाभप्रदता के सम्बन्ध में जानकारी देकर जनता को कम्पनी में अपना धन

विनियोजित करने के लिए आकर्षित करता है। इसलिये आवश्यक है कि प्रविवरण में कम्पनी वास्तविक स्थिति का सही चित्र प्रस्तुत किया जाये और उसमें कम्पनी से सम्बन्धित समस्त महत्वपू बातों का वर्णन हो । कम्पनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार प्रविवरण की विषय साम निम्नलिखित बातों को शामिल करना आवश्यक है

1. तिथि- प्रत्येक प्रविवरण पर तिथि अंकित होगी। यह अंकित तिथि ही प्रविवरण के प्रकाशन तिथि मानी जायेगी। 2. हस्ताक्षर प्रत्येक प्रविवरण पर उन सभी व्यक्तियों के हस्ताक्षर होंगे जिनके नाम

उल्लेख प्रथिवरण में किया गया है।

3. सूचनाएँ- प्रत्येक कम्पनी के प्रविवरण में निम्नलिखित सूचनाएँ होंगी A. कम्पनी का नाम, कम्पनी के पंजीकृत कार्यालय का पता कम्पनी सचिव, मुख्य वित्तीय अधिकारी, अंकेक्षकों, विधि परामर्शदाताओं, बैंकों तथा निर्धारित किये गये अन्य व्यक्तियों के नाम ।

B. निर्गम के खुलने एवं बन्द होने की तिथि C. निर्धारित किये गये समय में आवंटन-पत्र जारी करने तथा रिफण्ड भेजने सम्बन्धी घोषणा

D. अनुसूचित बैंक में पृथक बैंक खाते के सम्बन्ध में विवरण- यह विवरण इस आशय का होगा कि निर्गम से प्राप्त समस्त धनराशि इस खाते में अन्तरित की जायेगी। इसके अतिरिक्त यह घोषण • भी की जायेगी कि इस निर्गम से प्राप्त राशि के साथ-साथ पूर्ववर्ती निर्गमों से प्राप्त राशि में से प्रयुक्त राशि तथा अप्रयुक्त राशि तथा निर्धारित की गयी रीति से प्रकटीकरण किया जायेगा।

E. अभिगोपन का विवरण प्रविवरण में अभिगोपकों के नाम, पते, टेलीफोन नम्बर, फैक्स नम्बर तथा ई-मेल के पते तथा उनके द्वारा अभिगोपित राशि का उल्लेख किया जायेगा। F. संचालकों, अंकेक्षकों, निर्गम बैंकों, विशेषज्ञ तथा अन्य निर्धारित किये गये व्यक्तियों के सहमति-प्रविवरण में प्रन्यासियों, सोलिसिटर्स या एडवोकेट्स, निर्गम मर्चेन्ट बैंकर्स, निर्गम रजिस्ट्रार

उचारदाताओं, विशेषज्ञों की सहमति भी सम्मिलित की जायेगी। G. प्रतिभूतियों के आवंटन एवं निर्गमन की प्रक्रिया एवं समय-सारणी।

H. संचालकों का विवरण जिसमें उनकी नियुक्ति तथा पारिश्रमिक, कम्पनी में उनके हित की प्रकृति एवं सीमा तथा निर्धारित की गयी अन्य बातों का विवरण भी होगा।

1. प्रवर्तक के अंशदान के स्रोत के सम्बन्ध में निर्धारित की गयी रीति से प्रकटीकरण ।

J. कम्पनी के प्रमुख उद्देश्य एवं कम्पनी का वर्तमान व्यवसाय तथा इसका स्थान, परियोजना क्रियान्वयन की समय-सारणी।

K. न्यूनतम अभिदान, जिसमें प्रीमियम के रूप में देय राशि, नकद के अतिरिक्त प्रतिफल प

निर्गमित अंशों का विवरण भी होगा।

4. परियोजना का विवरण-प्रविवरण में परियोजना से सम्बन्धित निम्न विवरण दिया जायेगा

(a) परियोजना के विशिष्ट जोखिम तत्वों के सम्बन्ध में प्रबन्धकों का नजरिया या विचार।

(b) परियोजना का गर्भकाल । (c) परियोजना की प्रगति की सीमा।

(d) परियोजना को पूर्ण करने की अन्तिम तिथि

5. मुकदमों का विवरण प्रविवरण में परिवादों या कानूनी कार्यवाहियों का विवरण भी दिय 6. प्रतिवेदन प्रत्येक प्रविवरण में वित्तीय सूचनाओं के उद्देश्यों से निम्नांकित प्रतिवेदनों के जायेगा।

(i) कम्पनी के लाभों एवं हानियों, सम्पत्तियों एवं दायित्वों तथा अन्य निर्धारित किये गये विषय के सम्बन्ध में अंकेक्षकों का प्रतिवेदन |

(11) प्रविवरण जारी करने के वित्तीय वर्ष के पूर्ववर्ती 5 वर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लाभों एवं हानियों से सम्बन्धित प्रतिवेदन, जिसमें सहायक कम्पनियों के ऐसे ही प्रतिवेदन भी होंगे। ये प्रतिवेदन निर्धारित रीति से तैयार किये जायेंगे।

7. घोषणा प्रविवरण में एक घोषणा इस आशय की भी सम्मिलित की जायेगी कि प्रविवरण को

तैयार करने में कम्पनी अधिनियम के प्रावधानों का पालन कर लिया गया है। 8. अन्य कोई भी सामग्री प्रविवरण में निर्धारित की गयी अन्य सामग्री एवं प्रतिवेदन भी सम्मिलित किये जायेंगे। इनमें से कुछेक प्रमुख बातें निम्नानुसार है 1. निर्गम गृह (Issue house) द्वारा विक्रय हेतु प्रस्ताव में अतिरिक्त विषय वस्तु निर्गम गृह द्वारा जारी किये जाने वाले विक्रय हेतु प्रस्ताव (प्रविवरण) में निम्नांकित बातों का समावेश किया जायेगा

(1) उस प्रस्ताव के लिए प्राप्त या प्राप्त किये जाने वाले प्रतिफल की शुद्ध राशि (ii) वह समय एवं स्थान जहाँ उस अनुबन्ध का निरीक्षण किया जा सकता है जिसके अधीन निर्गम गृह को प्रतिभूतियाँ आबंटित की गयी है अथवा आबंटित करने का ठहराव किया गया है।

2. प्रविवरण के मुख पृष्ठ पर लिखी जाने वाली विषय-वस्तु प्रत्येक प्रविवरण के मुख पृष्ठ पर निम्नांकित बातों का उल्लेख किया जायेगा

(i) प्रविवरण की प्रति पंजीयन हेतु रजिस्ट्रार को सुपुर्द कर दी गयी है। (ii) इस सुपुर्द किये गये प्रविवरण की प्रति के साथ संलग्न किये जाने वाले प्रलेखों का उल्लेख अथवा उस विवरण का उल्लेख जिसमें ये प्रलेख सम्मिलित है।

प्रविवरण में असत्य एवं कपटपूर्ण विवरण

(Untrue and Fradulent Statement in Prospectus)

प्रविवरण ऐसा प्रपत्र है जो जनता को अपना धन कम्पनी में विनियोग करने हेतु आकर्षित करता है। कोई भी व्यक्ति प्रविवरण में दी हुई बातों के आधार पर ही कम्पनियों के अंश तथा ऋणपत्र खरीदने को प्रेरित होता है। असत्य कथन एवं कपट का आशय केवल असत्य कथन से ही नहीं है अपितु किसी भूल से भी है जो तथ्यों के सम्बन्ध में जनता को भ्रम में डाल सकती है। स्पष्ट शब्दों में इसका अभिप्राय किसी भी ऐसे कथन अथवा भूल से है जो जनता के मस्तिष्क पर वास्तविक तथ्यों के सम्बन्ध में एक असत्य प्रभाव डाल सकती है, किसी महत्वपूर्ण तथ्य का छिपाव भी इसी के अन्तर्गत आता है। प्रविवरण की विषय सामग्री लिखते समय ‘सुनहरे नियम’ को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। इस नियम के अनुसार प्रविवरण निर्गमन करने वालों को प्रत्येक विषय सही एवं उचित ढंग से लिखना चाहिये। अतः प्रविवरण निर्गमन करने वालों की यह जिम्मेदारी है कि प्रविवरण में किसी महत्वपूर्ण बात को न छिपाया जाये, कोई असत्य कथन या मिथ्यावर्णन प्रकाशित न किया जाये जिससे विनियोगकर्ता को धोखा हो और यदि ऐसा होता है तो वे सभी व्यक्ति दोषी ठहराये जायेंगे जिन्होंने प्रविवरण के निर्माण में भाग लिया है।

कम्पनी अधिनियम के अनुसार (i) प्रविवरण में सम्मिलित विवरण असत्य माना जाता है। यदि यह विवरण जिस प्रसंग में तथा जिस रूप में प्रयोग हुआ है, धोखे में डालने वाला है अर्थात् अलग से यह विवरण सत्य हो सकता है पर जिस प्रसंग में दिया गया है उसके साथ पढ़ने में धोखा देता है तो इसे सत्य होते हुए भी असत्य माना जाता है। (ii) यदि प्रविवरण में कोई बात लिखने में छूट गई है और ऐसा न होने से इसके पढ़ने वालों को धोखा हुआ है तो भी प्रविवरण असत्य विवरण माना जायेगा।

प्रविवरण में असत्य एवं कपटपूर्ण विवरण के परिणाम

(Consequences of Untrue and Fradulent Statement in Prospectus) प्रत्येक ऐसे व्यक्ति, जिसने प्रविवरण में दिये गये असत्य कथन एवं विवरण के आधार पर कम्पनी के अंश अथवा ऋण-पत्र क्रय किये हैं, को अग्रलिखित दो अधिकार प्राप्त हैं

(1) कम्पनी के विरुद्ध अंशधारियों को अधिकार इसके अन्तर्गत प्रविवरण में दिये गये असत्य कथनों के लिए कम्पनी निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हो जाते हैं अधिकार (Right of Rescision of Contract

(1) अनुबन्ध के परित्याग करने का अंशधारी किसी भी ऐसे अनुबन्ध का परित्याग कर सकता है जिसे उसने प्रविवरण के अथवा असत्य लेख को सत्य मानकर किया हो, चाहे यह असत्य वर्णन अज्ञानवश हो कपटमय, ऐसे व्यक्ति को अनुबन्ध परित्याग करने एवं अपने अंशों को वापस करने का है और वह उनके बदले में कम्पनी से रुपया भी ले सकता है। पीड़ित अभिदाता अपने इस का उपयोग निम्नलिखित शर्तों के अधीन कर सकता है (1) प्रविवरण कम्पनी द्वारा अथवा कम्पनी की ओर से किसी व्यक्ति द्वारा निर्गमित किय

हो। (ii) प्रविवरण में दिया गया कथन या विवरण असत्य होना चाहिए अथवा उसमे दिये विवरण में किसी बात को छिपाने का प्रयास किया गया हो। उदाहरण-यदि कोई कम्पनी प्रवि लिखती है कि उसने पिछले 5 वर्षों में 20% लाभांश वितरित किया है जबकि वास्तव में इस कम्प पिछले 5 वर्षों में हानि ही हुई है, लाभ नहीं हुआ है। कम्पनी पिछले संचित लाभों में से लाभ भुगतान करती रही है। किन्तु इस तथ्य को प्रविवरण में नहीं लिखा। यहाँ इस महत्वपूर्ण बात छिपाने का प्रयास किया गया है। अतः यह कपटपूर्ण कार्य है।

(iii) असत्य कथन या छिपाय किसी ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य के सम्बन्ध में होना चाहिए प्रतिभूतियों के अभिदान करने अथवा नहीं करने के निर्णय को प्रभावित करने वाला हो। उदाह के लिए, एक कम्पनी के प्रविवरण में यह लिखा था कि 2 बड़े ख्याति प्राप्त व्यवसायी कम्पनी संचालक बनने को सहमत हो गये हैं। वास्तविकता यह थी कि उन दोनों ने कम्पनी की करने की इच्छा प्रकट की थी। निर्णय दिया गया कि प्रविवरण में महत्वपूर्ण तथ्य मिथ्याकथन अतः अभिदाता अनुबन्ध निरस्त करने के हकदार हैं।

(iv) अभिदाता के प्रविवरण में प्रविवरण के असत्य कथन पर विश्वास करके ही या उस से प्रेरित होकर ही प्रतिभूतियों का अभिदान किया हो। यदि कोई अभिदाता प्रविवरण देखें, पढ़े बिना ही प्रतिभूतियों का अभिदान करता है तो वह अनुबन्ध को निरस्त करने का हकदार होता है।

(v) अनुबन्ध के निरस्तीकरण का हक केवल मूल अभिदाताओं/आबंटियों को ही होता है। कोई व्यक्ति स्कन्ध विनिमय केन्द्र से अंश खरीदता है तो वह प्रविवरण में मिथ्यावर्णन का सहारा अनुबन्ध का परित्याग नहीं कर सकता है।

(vi) अनुबन्ध के निरस्तीकरण के अधिकार का उपयोग उचित समय के भीतर – समापन प्रारम्भ होने से पहले ही कर देना चाहिये।

तथा कम्पनी

(2) दक्षतिपूर्ति प्राप्त करना (To Receive the Compensation) – असत्य कथन के पर अनुबन्ध को समाप्त करने के पश्चात् कम्पनी से हर्जाना भी वसूल किया जा सकता है, परन्तु • अधिकार अनुबन्ध की समाप्ति के बाद ही वसूल किया जा सकता है। क्षतिपूर्ति कराने हेतु उसे निम्नलिखित तथ्यों को सिद्ध करना होगा

(i) उसने भ्रामक /असत्य प्रविवरण पर विश्वास करके ही कम्पनी की प्रतिभूतियों का अभिदान

किया था। (ii) वह प्रविवरण कम्पनी द्वारा अथवा कम्पनी की ओर से किसी व्यक्ति द्वारा ही जारी किय

गया था। (ii) उसे उस भ्रामक या असत्य प्रविवरण के कारण वास्तव में क्षति उठानी पड़ी है।

(11) संचालकों, प्रवर्तकों, विशेषज्ञों आदि के विरुद्ध अधिकार (Right against Directors,

Promoters, Experts etc) अधिनियम में उन व्यक्तियों की सूची दी गयी है जो भ्रामक असत्य प्रविवरण के लिए उत्तरदायी है। वे निम्नानुसार है

(1) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो प्रविवरण जारी करने के समय कम्पनी के संचालक हैं। (ii) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिन्होंने कम्पनी के प्रविवरण में कम्पनी के संचालक के रूप में नाम अंकित करने हेतु अनुमति दी है अथवा कम्पनी का संचालक बनने हेतु अपनी सहमति दी है।

(iii) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो कम्पनी का प्रवर्तक है।

(iv) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसने प्रविवरण जारी करने का अधिकार दिया है।

(v) प्रत्येक विशेषज्ञ जो कम्पनी के निर्माण, प्रवर्तन या प्रबन्ध से सम्बन्धित एवं हितधारी है

अथवा रहा है।

संचालकों, प्रवर्तकों, विशेषज्ञों के दायित्व को निम्न दो वर्गों में बाँटा जा सकता है A. दीवानी या सिविल दायित्व (Civil Liability) कम्पनी के संचालक, प्रवर्तक, विशेषज्ञ आदि सभी (उपर्युक्त वर्णित सभी) का उन अभिदाताओं के प्रति दीवानी/ नागरिक दायित्व हैं जिन्होंने भ्रामक / असत्य प्रविवरण पर विश्वास कर कम्पनी की प्रतिभूतियों के लिए अभिदान किया है। दूसरे शब्दों में प्रत्येक पीड़ित अभिदाता को ऐसे संचालकों आदि के विरुद्ध निम्नलिखित उपचार प्राप्त हैं

1. असत्य कथन या तथ्यों के विलोप के लिए क्षतिपूर्ति प्रत्येक अभिदाता जिसने असत्य या भ्रामक प्रविवरण (जिसमें कुछ तथ्यों को सम्मिलित नहीं किया गया है/तथ्यों का विलोप किया है) पर विश्वास करके प्रतिभूतियों के लिए अभिदान किया है, वह कम्पनी के संचालकों आदि से वह समस्त हानियाँ वसूल कर सकता है जो उसे अभिदान के कारण हुई है।

2. कपटपूर्ण विवरण के लिए असीमित व्यक्तिगत दायित्व-कभी-कभी यह सिद्ध कर दिया जाता है कि कोई प्रविवरण प्रतिभूतियों के आवेदकों या किसी अन्य व्यक्ति के साथ कपट करने की बीयत से जारी किया था अथवा किसी कपटपूर्ण उद्देश्य से जारी किया था। ऐसी दशा में प्रत्येक संचालक, प्रवर्तक, विशेषज्ञ आदि का असीमित रूप से व्यक्तिगत दायित्व होगा। वे उस प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उठाई गई क्षति के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे जिसने ऐसे प्रविवरण के आधार पर प्रतिभूतियों का अभिदान किया था।

B. दण्डनीय दायित्व (Criminal Liability) यदि कोई असत्य प्रविवरण जारी किया, प्रसारित किया या वितरित किया जाता है तो उस प्रविवरण के निर्गमन को अधिकृत करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उत्तरदायी होगा। कपट के लिए दोषी पाया गया कोई भी व्यक्ति कम-से-कम 6 माह की तथा अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा से दण्डित किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, उसे कम-से-कम कपट में निहित राशि से तथा अधिकतम कपट में निहित राशि से 3 गुना तक की राशि के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया जा सकेगा। यदि किसी कपट में सार्वजनिक हित का प्रश्न भी निहित है तो कारावास की सजा 3 वर्ष से कम नहीं होगी।

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