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पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला से जुडी महत्वपूर्ण बातें –

पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला वनसंसाधनो से भरापूरा जिला है।  यहाँ खनिज संसाधन ,औषधि  पौधों से भरा पूरा है।

गॉव और क्षेत्रफल –

गौरेला पेंड्रा जिले की मांग पिछले 25 वर्षों से चली आ रही थी जो 2020 में जाकर पूरा हुआ। इस जिले में तीन तहसील और तीन विकासखंड (पेंड्रा, गौरेला, मरवाही ) है।  इस जिले में कुल 166 ग्रामपंचायत और कुल गाँव की संख्या 225 है।  इसकी कुल क्षेत्रफल 1 लाख 68 हजार 225 हेक्टेयर है।

विधानसभा और लोकसभा – 
विधान सभा की दृस्टि से देखें तो 200 गॉंव मरवाही विधान सभा और 25 गॉव कोटा विधानसभा के गॉव को मिलकर बनाया गया है।  लोकसभा में कोरबा लोकसभा क्षेत्र के 200 गॉव और बिलासपुर लोकसभा के 25 गॉव को मिलकर बनाया गया है।

जनसंख्या –
जनगणना 2011 के अनुसार इस जिले की कुल जनसँख्या 3 लाख  36 हजार 420 था।  इसमें सबसे अधिक आबादी गौरेला विकासखंड में निवास कराती है।

जिले की स्थिति – 
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला अंतर राज्यीय सिमा से जुड़ती है।  ये जिला पश्चिम में मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला से जुड़ती है पूर्व  में कटघोरा जिला कोरबा से जुड़ती है उत्तर में मनेन्द्रगढ़ जिला कोरिया से जुड़ती है।  और दक्षिण में लोरमी जिला मुंगेली और कोटा जिला बिलासपुर से जुड़ता है।

इतिहास –
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला का इतिहास परिदृश्य से महत्वपूर्ण है यहाँ पेंड्रा से छत्तीसगढ़ की प्रथम मासिक अखबार छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन  1900 में माधवराव सप्रे द्वारा किया गया था।

 पर्यटन –
पर्यटन के लिहाज से इस जिले महत्वपूर्ण स्थानों में से एक कबीर चबूतरा है। ऐसा मन जाता है की यहाँ पर गुरुनानक देव और कबीर दास  जी एक दूसरे से मिले थे और उनके बिच  गहन चिंतन  हुआ था।

नदी – 
अरपा नदी – 
अरपा नदी का उद्गम  पेंड्रा जिला के खोडरी खोंगसरा से हुआ है।  ये शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदीयों में से एक है।

विशेष –
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला प्राकृतिक रूप से बहुत ही मनोरम है। पूरा जिला वन आच्छादित जिला है।  यहाँ बहुत से औषधि पेड़ पौधे भी है।  यहाँ की बिष्णुभोग का चावल देश विदेश तक  ख्याति प्राप्त की है।
साथ ही यहाँ की वन औषधि महत्वपूर्ण है और उपयोगी है।

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