विकेन्द्रीयकरण की परिभाषा दीजिए। विकेन्द्रीयकरण को प्रभावित करने वाले घटकों को संक्षेप में बताइए। Give the definition of decentralisation. Briefly explain the factors affecting decentralization.

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केन्द्रीयकरण का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Centralisation)

केन्द्रीयकरण से आशय उस स्थिति से है जिसमें उपक्रम में सम्पन्न किये जाने वाले सभी प्रकार के कार्यों को करने के लिए निर्णय लेने का अधिकार उच्च अधिकारियों के पास हो। दूसरे शब्दों में केन्द्रीयकरण से आशय केन्द्र के पास रहने से है एवं विकेन्द्रीयकरण से आशय केन्द्र से दूर हटने से है। इस प्रकार किसी संगठन में केन्द्रीय बिन्दुओं पर, व्यवस्थित एवं स्थायी ढंग से अधिकार संरक्षित रखने को केन्द्रीयकरण कहते हैं। केन्द्रीयकरण में किये जाने वाले कार्य के सम्बन्ध में अधिकांश निर्णय उन व्यक्तियों के द्वारा नहीं लिये जाते जो काम कर रहे हैं, बल्कि संगठन में एक उच्चतर बिन्दु पर लिये जाते हैं। इसमें अधिकार सौंपने का क्षेत्र सीमित हो जाता है तथा निर्णय उच्च-स्तर पर लिये जाते हैं।

हेनरी फेयोल (Henary Fayol) के अनुसार, “अधीनस्थों की भूमिका को बढ़ाने के लिए जो भी कदम उठाये जाते हैं, वे सब केन्द्रीयकरण के अन्तर्गत आते हैं तथा इसके विपरीत जो उसको कम करते हैं, वे विकेन्द्रीयकरण में आते हैं।”

कूण्टज एवं ओ’डोनेल (Koontz and O’Donnell) के अनुसार, “केन्द्रीयकरण एवं विकेन्द्रीयकरण में ठीक उतना ही अन्तर है जितना कि गर्म और ठण्डे पानी में केन्द्रीयकरण के अन्तर्गत उच्चस्तरीय प्रबन्धकों के पास ही अधिकारों का केन्द्रीयकरण रहता है।”

लुईस ए. ऐलन (Louis A. Allen) के अनुसार, केन्द्रीयकरण से आशय है कि किये जाने वाले कार्य के सम्बन्ध में अधिकांश निर्णय उन व्यक्तियों द्वारा नहीं लिये जाते हैं जो कि कार्य कर रहे है, अपितु संगठन में एक उच्चतर बिन्दु पर लिए जाते हैं।”

केन्द्रीयकरण के गुण (Merits of Centralisation)

अधिकार सत्ता के केन्द्रीयकरण के निम्नलिखित प्रमुख लाभ/गुण हैं

(1) क्रियाओं में एकरूपता- विकेन्द्रीयकरण की क्रियाओं में एकरूपता का अभाव रहता है, क्योंकि विभिन्न अधिकारी विभिन्न तरह से अधिकारों का प्रयोग करते हैं। इसके विपरीत केन्द्रीयकरण में समस्त व्यावसायिक क्रियाएँ एक ही व्यक्ति द्वारा सम्पन्न किये जाने के कारण क्रियाओं में पूर्ण एकरूपता रहती है। निर्णयों में भी विभिन्नता के स्थान पर एकरूपता पायी जाती है।

(2) संकटकालीन परिस्थितियों का सरलता से सामना केन्द्रीयकरण में चूंकि एक ही व्यक्ति द्वारा निर्णय लिया जाता है अतः निर्णय में सरलता बनी रहती है। यह प्रारूप संकटकालीन स्थिति के लिए विशेष रूप से उपयुक्त रहता है, क्योंकि संकटकालीन परिस्थितियों में शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।

(3) एकीकरण को बढ़ावा-उपक्रम के कुशल संचालन को समरूप एवं एकता प्रदान करने के लिए केन्द्रीय संचालन आवश्यक है। यदि विकेन्द्रीयकरण बहुत अधिक सीमा तक बढ़ा दिया जाये तो ऐसी समरूपता एवं एकता स्थापित होना कठिन है।

(4) प्रभावकारी निरीक्षण सम्भव-केन्द्रीयकरण में एक ही केन्द्रीय अधिकारी होता है, अतः उसका परीक्षण प्रभावी होता है व उसके आदेशों का शीघ्र पालन होता है। इस प्रकार पर्यवेक्षकों पर अनावश्यक भार नहीं पड़ पाता है।

(5) नियन्त्रण में सुविधा केन्द्रीयकरण के अन्तर्गत समस्त कार्य एक ही छत के नीचे होता है तथा पलकों का प्रत्यक्ष सम्बन्ध सर्वोच्च अधिकारी से होता है। अतः प्रभावी नियन्त्रण होता है तथा सभी कार्य अच्छी प्रकार से जिम्मेदारी के साथ किये जाते हैं।

केन्द्रीयकरण के दोष (Demerits of Centralisation)

अधिकार सत्ता के केन्द्रीयकरण के प्रमुख दोष निम्न है

(1) अधिक कागजी कार्यवाही केन्द्रीयकरण के कारण नियमों, कार्य-विधियों तथा पद्धतियों इत्यादि का प्रमाणीकरण हो जाता है। प्रत्येक कार्य, कार्यविधि में जकड़ जाता है तथा कागजी कार्यवाही में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो जाती है।

(2) विभागीय अधिकारियों के साथ टकराव-केन्द्रीयकरण में शीर्ष प्रवन्ध तथा विभागीय प्रवन्ध के मध्य सदैव टकराव की स्थिति बनी रहती है।

(3) युवा अधिकारियों में असन्तोष-केन्द्रीयकरण से युवा अधिकारियों में असन्तोष, निराशा तथा संघर्ष की भावनाएँ उत्पन्न होने लगती है।

(4) नियन्त्रण में शिथिलता-छोटे उपक्रमों में तो केन्द्रीयकरण के आधार पर प्रभावशीलता बनायी रखी जा सकती है, लेकिन बड़े उपक्रमों में केन्द्रीयकरण के कारण नियन्त्रण का विस्तार बढ़ जाता है, जिससे नियन्त्रण में शिथिलता आ जाती है।

(5) कार्यों में विलम्ब केन्द्रीयकरण के कारण उच्च स्तरीय प्रबन्ध के कार्य में वृद्धि होती है, जिसके कारण कार्यों में विलम्ब होने की सम्भावना रहती है।

विकेन्द्रीयकरण का अर्थ एवं परिभाषा  (Meaning and Definition of Decentralisation)

जब एक उच्च अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थों को अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में अधिकारों का भारार्पण किया जाता है तो उसे विकेन्द्रीयकरण कहते हैं। सामान्यतः विकेन्द्रीयकरण द्वारा उच्च अधिकारी सम्पूर्ण कार्यों को (अधिक महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़कर) अधीनस्थ अधिकारियों को हस्तान्तरित कर देता है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि विकेन्द्रीयकरण भारार्पण का ही एक रूप है जो कि भारार्पण की तुलना में अधिक व्यापक है।

कूण्टज एवं ओ’डोनेल (Koontz and ODonnell) के अनुसार, अधिकार सत्ता का विकेन्द्रीयकरण अधिकार प्रत्यायोजन का आधारभूत पहलू है और जिस सीमा तक उस अधिकार सीमा का भारार्पण नहीं किया जाता है वह केन्द्रित हो जाती है।

” ई. एफ. एल. ब्रीच (E. F. L.. Breech) के अनुसार, “विकेन्द्रीयकरण भारार्पण के फलस्वरूप मिलने वाले दायित्वों का आकार होता है।”

हेनरी फेयोल (Henry Fayol) के अनुसार, “अधीनस्थ वर्ग की भूमिका के महत्व को बढ़ाने के लिए जो भी कदम उठाये जाते हैं, वे सभी विकेन्द्रीयकरण के अन्तर्गत आते हैं।”

विकेन्द्रीयकरण के सिद्धान्त (Principles of Decentralisation)

विकेन्द्रीयकरण के प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित है

(1) विकेन्द्रीयकरण से सम्बन्धित निर्णय लेने का अधिकार उच्च अधिकारियों को दिया जाए चाहिए।

(2) विकेन्द्रीयकरण तभी क्रियान्वित होगा जबकि वास्तव में अधिकार प्रदान किये गये हों।

(3) विकेन्द्रीयकरण इस विश्वास पर आधारित है कि जिन अधिकारियों को कार्य तथा अधिकार सौंपे जा रहे हैं, वे स्वयं निर्णय लेने की क्षमता रखते हों।

(4) विकेन्द्रीयकरण के लिए इस प्रकार की आपसी साझेदारी का होना आवश्यक है कि स्टाफ का प्रमुख योगदान कुछ अनुभवी लोगों के माध्यम से रेखा कर्मचारियों को सहायता एवं परामर्श प्रदान करता है ताकि वे निर्णय ले सकें एवं उसमें स्वयं सुधार कर सकें।

(5) विकेन्द्रीयकरण एक इस भावना पर भी आधारित है कि अनेक व्यक्तियों द्वारा लिए गए। निर्णय एक व्यक्ति द्वारा किये गये निर्णय की अपेक्षा अधिक अच्छे होते हैं।

(6) विकेन्द्रीयकरण तभी सम्भव है जबकि उच्च अधिकारी सच्चे हृदय से निम्न स्तर के अधिकारियों को अधिकार प्रदान करे तथा उत्तरदायित्व सौंपे।

(7) विकेन्द्रीयकरण का लाभ तभी होगा जबकि निर्णय लेने के अधिकार के साथ-साथ उत्तरदायित्व की भावना भी उत्पन्न हो ।

विकेन्द्रीयकरण को प्रभावित करने वाले घटक (Factors affecting of Decentralisation)

विकेन्द्रीयकरण की मात्रा को प्रभावित करने वाले सामान्य घटक अग्रलिखित हैं

(1) संगठन का आकार (Size of Organisation) – सामान्यतः एक संगठन का आकार जितना बड़ा होता है, उसमें विकेन्द्रीयकरण की मात्रा भी उतनी ही अधिक पायी जाती है क्योंकि ऐसे संगठन में उच्च अधिकारी अकेला सभी कार्यों को नहीं कर सकता। इसके विपरीत, छोटे संगठन में विकेन्द्रीयकरण की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है।

(2) स्थायित्व (Stability)-व्यवसाय में स्थायित्व की अवस्था में विकेन्द्रीयकरण को बढ़ावा मिलता है, जबकि अस्थिरता एवं अनिश्चितता होने पर केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति पायी जाती है।

(3) प्रबन्धकीय नीतियाँ (Managerial Policies)-प्रबन्धकीय नीतियाँ अथवा प्रबन्धकीय दृष्टिकोण भी विकेन्द्रीयकरण की मात्रा को प्रभावित करता है। आधुनिक व व्यापक प्रबन्धकीय दृष्टिकोण वाले प्रबन्धक विकेन्द्रीयकरण को स्वीकार करते हैं और उसे प्रोत्साहन देते हैं, जबकि संकीर्ण व परम्परागत दृष्टिकोण वाले प्रबन्धक केन्द्रीयकरण को अधिक पसन्द करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि संगठन में समान नीतियों का पालन किये जाने की अवस्था में केन्द्रीयकरण को अधिक अपनाया जाता है, जबकि नीतियों में विविधता की अवस्था में विकेन्द्रीयकरण का पालन आवश्यक हो जाता है।

(4) निर्णयों का महत्व एवं प्रकृति (Importance and Nature Decisions) – यदि व्यवसाय की प्रकृति ऐसी है जिसमें महत्वपूर्ण एवं स्थायी प्रकृति के निर्णय लिये जाते हैं तो वहाँ विकेन्द्रीयकरण की मात्रा कम होगी क्योंकि उच्च अधिकारियों को अधीनस्थों को अधिकार सौंपते समय सदैव यह डर बना रहेगा कि त्रुटि की अवस्था में व्यवसाय को बहुत बड़ी क्षति न उठानी पड़ जाये। वित्तीय कम्पनियों की अवस्था में निर्णयों के विशिष्ट महत्व के कारण ही केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति अधिक पायी जाती है। दैनिक प्रकृति एवं सामान्य महत्व के निर्णयों की अवस्था में विकेन्द्रीयकरण अधिक पसन्द किया जाता है।

(5) अधीनस्थों की योग्यता (Ability of the Subordinates)-अधीनस्थ जितने अधिक योग्य व सक्षम होंगे, संगठन में विकेन्द्रीयकरण की मात्रा उतनी ही ज्यादा होगी। यदि अधीनस्थ योग्य, कुशल व अनुभवी न हों तो उच्च अधिकारी उन्हें अधिकर सौंपने में हिचकिचाते हैं परिणामस्वरूप विकेन्द्रीयकरण की मात्रा कम हो जाती है।

(6) प्रबन्धकों की उपलब्धता (Availability of Managers) – उच्च स्तर पर प्रबन्धकों की उपलब्धता केन्द्रीयकरण को और अनुपलब्धता विकेन्द्रीयकरण को प्रोत्साहन देती है।

(7) व्यावसायिक क्रियाओं का फैलाव (Dispersion of Business Activities) – व्यवसाय की क्रियाएँ विभिन्न क्षेत्रों में फैली होने की अवस्था में विकेन्द्रीयकरण आवश्यक हो जाता है क्योंकि सभी निर्णय केन्द्रीय या उच्च प्रबन्ध द्वारा लेना व्यावहारिक दृष्टि से सम्भव नहीं होता। इसी प्रकार एक ही संस्था में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय और व्यावसायिक क्रियाओं की अवस्था में भी विकेन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है।

(8) आधुनिक तकनीके (Modern Techniques)-आधुनिक तकनीकें जो निर्णयन में सहायक है, केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं। उहदारण के लिए, कम्प्यूटर तकनीक विकेन्द्रीयकरण को हतोत्साहित करती है और केन्द्रीयकरण को बढ़ावा देती है।

विकेन्द्रीयकरण के गुण  (Merits of Decentralisation)

विकेन्द्रीयकरण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है

(1) उच्च अधिकारियों के भार में कमी-विकेन्द्रीयकरण से उच्च अधिकारियों का कार्यभार हल्का हो जाता है क्योंकि उच्च अधिकारियों द्वारा कार्य निम्न अधिकारियों को हस्तान्तरित कर दिया जाता है।

(2) प्रेरणा एवं मनोबल में सुधार विकेन्द्रित व्यवस्था अधीनस्थ कर्मचारियों को स्वतन्त्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार प्रदान करके तथा निश्चित क्षेत्रों में कार्य करने के लिए उत्तरदायी बनाकर उन्हें प्रेरणा प्रदान करती है तथा उनका मनोबल ऊँचा उठाती है।

(3) विविधीकरण को प्रोत्साहन विकेन्द्रीयकरण से विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि इसमें प्रत्येक कार्य की अलग-अलग क्रियाओं के लिए अलग-अलग अध्यक्षों की नियुक्ति की जाती है।

(4) योग्य प्रबन्धकों की प्राप्ति-विकेन्द्रित संगठन संरचना योग्य प्रबन्धकों की प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इससे उपक्रम को योग्य प्रवन्धक सरलता से मिल जाते हैं।

(5) युवा अधिकारियों को प्रेरणा-चूँकि विकेन्द्रीयकरण से युवा अधिकारियों को स्वतन्त्र निर्णय लेने का अवसर मिलता है। फलतः कर्मचारियों में उत्साह एवं प्रेरणा की सृष्टि होती है। ऐसा होने से वे

कार्य को अधिक परिश्रम एवं लगन से करते हैं।

विकेन्द्रीयकरण के दोष (Demerits of Decentralisation)

विकेन्द्रीयकरण की प्रमुख हानियों निम्नलिखित हैं

(1) अधिक लागत- विकेन्द्रीयकरण में प्रत्येक विभाग को सभी सुविधाओं से सुसज्जित करना होता है तथा सभी विभागों में कार्यालय के अतिरिक्त, समुचित संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ती है। इसके साथ ही, उत्पादन और विपणन की सुविधाएँ भी प्रत्येक विभाग के लिए उपलब्ध करनी होती है। इससे लागत अधिक हो जाती है और छोटे उपक्रम इसे नहीं अपना सकते हैं।

(2) विशिष्ट सेवाओं में प्रयोग कठिग-कुछ विशिष्ट सेवाओं, जैसे-लेखाकर्म तथा सांख्यिकीय विभाग में या तो विकेन्द्रीयकरण लागू ही नहीं किया जा सकता था लागू करने के कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के कारण केवल आंधिक मात्रा में ही विकेन्द्रीयकरण लागू किया जा सकता है।

(3) उचित समन्वय का अभाव-यदि संस्था के विभिन्न अधिकारियों में उचित समन्वय नहीं है तो विकेन्द्रीयकरण को लागू करना कठिन हो जाता है जोकि अधिकांश संस्थाओं में नहीं पाया जाता।

(4) उपक्रम की प्रगति में बाधा- विकेन्द्रीयकरण से योग्य व्यक्तियों की संख्या कम हो जाती है को उपक्रम की प्रगति में बाधा उपस्थित करती है।

विकेन्द्रीयकरण एवं भारार्पण में अन्तर (Difference between Decentralisation and Delegation)

प्रायः लोग इन दोनों शब्दों को एक ही समझते हैं और दोनों को एक ही अर्थ में प्रयोग करते हैं, मगर यह विचारधारा गलत है, क्योंकि दोनों में महत्वपूर्ण अन्तर है। एक उदाहरण द्वारा यह बात स्पष्ट की जा सकती है; माना उच्चस्तरीय प्रबन्ध संगठन में कर्मचारियों की नियुक्ति का कार्य अपने एक विभागीय प्रबन्ध अर्थात् सेविवर्गीय प्रबन्धक को सौंप देता है तो यह भायर्पण है। यदि वह अपने-अपने विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति करने का भार सभी विभागों के अध्यक्षों पर डाल देता है तो यह विकेन्द्रीयकरण कहलायेगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि विकेन्द्रीयकरण भारार्पण का व्यापक रूप है। इन दोनों में जो अन्तर है, उसको निम्न प्रकार स्पष्ट कर सकते हैं

(1) भारार्पण विकेन्द्रीयकरण की दिशा में उठाया जाने वाला एक कदम है। इस दृष्टि से विकेन्द्रीयकरण में भारार्पण स्वतः निहित है, अतः विकेन्द्रीयकरण भारार्पण की तुलना में अधिक व्यापक है।

(2) भारार्पण की क्रिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अधिकारों के हस्तान्तरण से ही पूर्ण हो जाती है, परन्तु विकेन्द्रीयकरण की क्रिया उस समय पूर्ण मानी जाती है, जबकि संगठन के समस्त अथवा अधिकांश व्यक्तियों तक सत्ता का भारार्पण हो जाता है।

(3) भारार्पण का प्रयोग सीमित सत्ता का विवरण दर्शाता है जबकि विकेन्द्रीयकरण अधिकार सत्ता का विस्तृत विवरण प्रकट करता है।

(4) विकेन्द्रीयकरण, भायर्पण का परिणाम होता है, कारण नहीं क्योंकि भायर्पण से विकेन्द्रीयकरण को जन्म मिलता है, विकेन्द्रीयकरण से भारार्पण को जन्म नहीं मिलता है।

(5) भारार्पण दो स्तरों के मध्य अधिकार सुपुर्दगी का नाम है, जबकि सम्पूर्ण संगठन में अधिकार सुपुर्दगी की क्रिया को विकेन्द्रीयकरण कहते हैं।

केन्द्रीयकरण और विकेन्द्रीयकरण में अन्तर (Difference between Centralisation and Decentralisation)

केन्द्रीयकरण एवं विकेन्द्रीयकरण दोनों एक-दूसरे के विलोम रूप है। इन दोनों में निम्न प्रमुख अन्तर है–

(1) केन्द्रीयकरण में उच्च अधिकारियों पर कार्यभार अधिक रहता है जबकि विकेन्द्रीयकरण में ठीक इसका उल्टा यानि कि कार्यभार में कमी रहती है।

(2) केन्द्रीयकरण में क्रियाओं की एकरूपता बनी रहती है जबकि विकेन्द्रीयकरण में नहीं रहती। एकरूपता

(3) केन्द्रीयकरण में संकटकालीन परिस्थितियों का आसानी से सामना किया जा सकता है जबकि विकेन्द्रीयकरण में संकटकालीन परिस्थितियों का सामना आसानी से नहीं किया जा सकता है।

(4) केन्द्रीयकरण में एकीकरण को प्रोत्साहन मिलता है लेकिन विकेन्द्रीयकरण में एकीकरण को प्रोत्साहन नहीं मिलता है।


Meaning and Definition of Centralization

Centralization refers to the situation in which the higher officials have the right to take decisions for carrying out all kinds of work to be done in the undertaking. In other words, centralization means staying near the center and decentralization means moving away from the center. Thus, the preservation of authority over central points in an organization in a systematic and permanent manner is called centralization. Most of the decisions regarding the work to be done in centralization are not taken by the persons who are working but are taken at a higher point in the organisation. In this, the scope of delegating authority is limited and decisions are taken at the higher level.

According to Henry Fayol, “All the steps taken to increase the role of subordinates come under centralization and on the contrary those which reduce it, they come under decentralization.”

According to Koontz and O’Donnell, “The difference between centralization and decentralization is as much as the centralization of authority remains with the high level managers under centralization in hot and cold water.”

Lewis A. According to Allen (Louis A. Allen), centralization means that most of the decisions regarding the work to be done are not taken by the persons who are doing the work, but are taken at a higher point in the organization.

Merits of Centralisation

The following are the major advantages/qualities of centralization of authority.

(1) Uniformity in actions- There is lack of uniformity in the activities of decentralization, because different officials exercise rights in different ways. On the contrary, in centralization, there is complete uniformity in activities due to the completion of all business activities by a single person. Even in decisions, there is uniformity instead of difference.

(2) Facing crisis situations easily, in centralization, since the decision is taken by only one person, hence the decision remains simple. This format is especially suitable for emergency situations, as there is a need for quick decision making in critical situations.

(3) Promoting integration- Central operation is necessary to provide uniformity and unity for efficient operation of the enterprise. If decentralization is increased to a great extent, then it is difficult to establish such homogeneity and unity.

(4) Effective inspection possible – There is only one central officer in centralization, so his testing is effective and his orders are followed quickly. In this way there is no unnecessary burden on the supervisors.

(5) Under the centralization of convenience in control, all the work is done under one roof and the eyelids are directly related to the highest authority. So there is effective control and all the work is done well with responsibility.

Demerits of Centralisation

Following are the major drawbacks of centralization of authority power

(1) More paperwork centralization leads to authentication of rules, procedures and procedures etc. Every task gets bogged down in process and paperwork gets increased unnecessarily.

(2) Conflict with departmental officers – In centralization, there is always a situation of conflict between the top management and the departmental management.

(3) Dissatisfaction-centralization among young officers leads to feelings of dissatisfaction, frustration and conflict among young officers.

(4) Relaxation in control – In small enterprises, effectiveness can be maintained on the basis of centralization, but due to centralization in large enterprises, the expansion of control increases, which leads to laxity in control.

(5) Delay in tasks: Due to centralization, the work of high level management increases, due to which there is a possibility of delay in works.

Meaning and Definition of Decentralization

When a higher authority delegates a relatively greater amount of authority to his subordinates, it is called decentralisation. Generally, through decentralization, the higher authority transfers all the functions (except the more important ones) to the subordinate officers. In short, it can be said that decentralization is a form of weighting which is more comprehensive than weighting.

According to Koontz and O’Donnell, decentralization of authority is a fundamental aspect of delegation of authority and the extent to which that authority is not delegated becomes concentrated.

According to E. F. L. Breech, “Decentralization is the size of the liabilities resulting from the weighting.”

According to Henry Fayol, “All the steps which are taken to increase the importance of the role of the subordinate class, they all come under decentralisation.”

Principles of Decentralization

Following are the main principles of decentralization

(1) The right to take decisions related to decentralization should be given to the higher officials.

(2) Decentralization will take effect only when the actual rights have been conferred.

(3) Decentralization is based on the belief that the officials to whom the tasks and powers are being delegated have the capacity to make their own decisions.

(4) For decentralization, it is necessary to have such mutual partnership that the main contribution of the staff provides help and advice to the line staff through some experienced people so that they can take decisions and improve them on their own.

(5) Decentralization is also based on a feeling that it is taken by many people. Decisions are better than the decisions made by one person.

(6) Decentralization is possible only when the higher authority gives authority and entrusts responsibility to the lower level officers with a sincere heart.

(7) Decentralization will be beneficial only when decision making rights along with the sense of responsibility also arise.

Factors affecting of Decentralization

Following are the common factors affecting the degree of decentralization

(1) Size of Organization – Generally, the larger the size of an organization, the greater the degree of decentralization is found in it because in such an organization the higher authority cannot do all the work alone. In contrast, there is relatively little need for decentralization in a small organization.

(2) Stability – Decentralization is encouraged in the state of stability in business, while the tendency towards centralization is found when there is instability and uncertainty.

(3) Managerial Policies – Managerial policies or managerial approach also affects the degree of decentralization. Managers with modern and broad managerial approach accept and encourage decentralization, whereas managers with narrow and traditional approach prefer centralization more. It is worth mentioning that in the case of similar policies being followed in the organization, centralization is adopted more, whereas in the case of diversity in policies, it becomes necessary to follow the decentralization.

(4) Importance and Nature of Decisions – If the nature of business is such in which decisions of important and permanent nature are taken, then the degree of decentralization will be less because there is always this fear while delegating authority to subordinates to higher officials. It will be ensured that in the event of error, the business should not have to suffer a great loss. In the case of financial companies, the tendency of centralization is found more because of the special importance of decisions. Decentralization is preferred more in case of decisions of daily nature and general importance.

(5) Ability of the Subordinates – The more capable and capable the subordinates are, the greater will be the degree of decentralization in the organization. If the subordinates are not qualified, skilled and experienced, the higher officials are hesitant to delegate authority to them, as a result the degree of decentralization is reduced.

(6) Availability of Managers – Availability of managers at higher level encourages centralization and non-availability encourages decentralization.

(7) Dispersion of Business Activities – Decentralization becomes necessary when business activities are spread over different areas because it is not practically possible to take all the decisions by the central or higher management. Similarly, the tendency of decentralization is encouraged even in the case of different types of business and business activities in the same organization.

(8) Modern Techniques – Modern techniques which are helpful in decision making, promote the tendency of centralization. For example, computer technology discourages decentralization and promotes centralization.

Merits of Decentralization

Following are the main advantages of decentralization

(1) Reduction in the load of higher officers- Decentralization lightens the workload of higher officers because the work is transferred by higher officers to lower officers.

(2) Improving Motivation and Morale Decentralized system provides motivation to subordinate employees and raises their morale by giving them the right to take independent decisions and making them responsible for working in certain areas.

(3) Promotion of Diversification Decentralization encourages diversification, because in this, different heads are appointed for different activities of each job.

(4) Receipt of qualified managers- Decentralized organization structure is an important source of attainment of qualified managers. Due to this, qualified managers are easily available to the enterprise.

(5) Motivation to young officers – Since decentralization gives opportunity to young officers to take independent decisions. As a result, enthusiasm and motivation are created in the employees. so that they

Do the work with more diligence and dedication.

Demerits of Decentralization

Following are the major disadvantages of decentralization

(1) High cost- In decentralization, every department has to be equipped with all facilities and in addition to the office in all the departments, there is a proper number of employees.

Employees have to be recruited. Along with this, facilities for production and marketing also have to be made available to each department. This makes the cost more and smaller enterprises cannot adopt it.

(2) Difficulty used in specific services – Decentralization could not be implemented either in some specialized services, such as accounting and statistical department Is.

(3) Lack of proper co-ordination- If there is no proper co-ordination among the various officers of the organization then it becomes difficult to implement decentralization which is not found in most of the institutions.

(4) Obstacles in the progress of the enterprise- Decentralization reduces the number of qualified persons and presents a hindrance in the progress of the enterprise.

Difference between Decentralization and Delegation

Often people think of these two words as the same and use both in the same sense, but this view is wrong, because there is an important difference between the two. This can be clarified by an example; Suppose if the high level management entrusts the work of appointment of employees in the organization to one of its departmental management i.e. the departmental manager, then it is a farewell. If he puts the burden of appointing the employees in his respective department on the heads of all the departments, then it will be called decentralization. Thus it is clear that decentralization is a comprehensive form of weighting. The difference between these two can be explained as follows

(1) Decentralization is a step towards decentralization. From this point of view, decentralization is inherent in weighting, so decentralization is more comprehensive than weighting.

(2) The process of devolution is completed only by the transfer of rights from one person to another, but the process of decentralization is considered complete when all or most of the people in the organization are transferred to power.

(3) The use of encumbrance shows the description of limited authority whereas decentralization reveals the detailed description of authority.

(4) Decentralization is the result, not the cause, because decentralization gives birth to decentralization, decentralization does not give birth to dedication.

(5) Delegation is the name of delegation of authority between two levels, while the process of delegating authority in the whole organization is called decentralization.

Difference between Centralization and Decentralization

Centralization and decentralization are both opposites of each other. Following are the major differences between these two-

(1) In centralization, the workload on the higher officials is more whereas in decentralization, the exact opposite, that is, there is a decrease in the workload.

(2) Uniformity of activities is maintained in centralization whereas in decentralization it is not. uniformity

(3) Crisis situations can be easily dealt with in centralization whereas in decentralization, emergency situations cannot be easily faced.

(4) Centralization encourages integration but decentralization does not encourage integration.

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