अभिप्रेरण के ‘एक्स’ तथा ‘वाई’ सिद्धान्त को समझाइए। Explain the ‘X’ and ‘Y’ principles of motivation.

0
64

मैकग्रेगर की एक्स एवं वाई विचारधारा (McGregor’s X and Y Theory)

प्रस्तुत विचारधारा का प्रतिपादन मैकग्रेगर (McGregor) ने किया है। उन्होंने प्रबन्ध सम्बन्धी विचारधारा को निम्न दो भागों में बाँटा है–(1) एक्स सिद्धान्त (X-Theory), तथा (2) वाई सिद्धान्त (Y-Theory)। जहाँ एक ओर एक्स सिद्धान्त निराशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर

वाई-सिद्धान्त आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इन दोनों सिद्धान्तों का संक्षिप्त विवेचन प्रकार है

(1) एक्स-सिद्धान्त (X-Theory)- एक्स-सिद्धान्त एक परम्परागत सिद्धान्त है जो इस मान्यता पर आधारित कि व्यक्ति कार्य करना नहीं चाहते। अतः उनसे कार्य लेने के लिए उन्हें डराना, मान लताड़ना एवं अन्य किसी भी प्रकार से भय दिखाना आवश्यक है। वह कड़े अनुशासन, भय काउण्डे के जोर से ही कार्य करता है। अतः बिना भय के कर्मचारी कार्य करने को तत्पर नहीं होता है। नेतृत्व का निरंकुशतावादी सिद्धान्त भी इसी पर आधारित है। इस सिद्धान्त के अनुसार सत्ता और दोनों समानार्थी एक्स-सिद्धान्त की प्राथमिक मान्यताएँ निम्न है-

(1) एक सामान्य व्यक्ति स्वेच्छा से कार्य करना नहीं चाहता है।

(i) व्यक्ति से कार्य लेने के लिए उस पर दबाव डालना तथा भय दिखाना आवश्यक है; जैसे-डराना, धमकाना, लताइना आदि डर के कारण ही व्यक्ति कार्य करने को तत्पर होता है।

(ii) व्यक्ति निर्देश अन्तर्गत ही कार्य करना पसन्द करता है।

(iii) व्यक्ति परम्परागत ढंग से कार्य सम्पन्न करता है।

(iv) उसमें कार्य के प्रति अरुचि की भावना होती है।

(v) व्यक्ति उत्तरदायित्व से सदैव बचने का प्रयास करता है।

(vi) व्यक्ति बहुत कम महत्वाकांक्षी होता है तथा सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व देता है।

(vii) व्यक्ति वित्तीय प्रलोभन के आधार पर ही कार्य करता है। अतः यदि उसे अधिक पारिश्रमिक दिया जाए तो वह अधिक समय तक एवं अच्छा कार्य करने को तत्पर हो जायेगा।

(viii) प्रवन्ध की दृष्टि से श्रमिक की कोई ध्यान नहीं होती अपितु वह तो मशीन का एकमात्र पुर्जा होता है उसे अपनी बुद्धि का परिचय देने का सुअवसर प्राप्त नहीं होता है।

[एक्स-सिद्धान्त की उपर्युक्त मान्यताओं का अध्ययन करने के पश्चात् यह कहा जा सकता है। कि वर्तमान दशाओं में यह सिद्धान्त अनुपयुक्त है। यह निराशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है तथा श्रमिकों को एक मशीन का पुर्जा मात्र ही समझता है। इसमें मानवीय मूल्यों का भी अभाव है। इस सिद्धान्त के अनुसार वह शक्ति एवं नियन्त्रण का प्रयोग करता है तथा अपने मनमाने निर्णय उन पर जबरदस्ती दोपता है।

(2) वाई-सिद्धान्त (Y-Theory)- एक्स-सिद्धान्त के दोषों को दूर करने के लिए श्री मैकग्रेगर नेवाई-सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। यह सिद्धान्त मानवीय मूल्यों तथा प्रजातान्त्रिक व्यवस्था पर आधारित है। यह सिद्धान्त यह मानता है कि व्यक्ति स्वयं अपनी इन्दा से कार्य करना चाहता है तथा उसमें आशावादी एवं सृजनात्मक प्रकृति होती है।

वाई-सिद्धान्त की प्राथमिक मान्यताएँ निम्न है

(i) व्यक्ति स्वेच्छा से कार्य करना चाहता है। उसे कार्य करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

(ii) प्रत्येक कार्य अरुचिकर नहीं होता और न सामान्य व्यक्ति में कार्य करने के प्रति अरुचि की भावना ही होती है। वस्तुतः स्थिति यह है कि कार्य करने से व्यक्ति को सन्तोष का अनुभव होता है।

(iii) व्यक्ति से कार्य लेने के लिए उसे भय दिखाने या डराने की जरूरत नहीं है। जिस कार्य को करने के लिए उसे नियुक्त किया गया है, वह उसका निष्पादन करने में स्वयं ही अपना उत्तरदायित्व समझता है। प्रवन्ध को तो कार्य करने का उचित वातावरण तथा कार्य करने के उचित साधन उपलब्ध कराने पड़ते हैं।

(iv) यह कहना गलत है कि व्यक्ति सदैव उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास करता है। व्यक्ति में उत्तरदायित्व से बचने की प्रवृत्ति होना स्वाभाविक नहीं है अपितु इसका मूल कारण महत्वाकांक्षा का अभाव होना तथा सुरक्षा पर अत्यधिक बल दिया जाना है।

(v) व्यक्ति कार्य का निष्पादन केवल वित्तीय प्रलोभनों के कारण ही नहीं करता अपितु अवित्तीय प्रलोभन भी उसे कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

(vi) संगठन सम्बन्धी समस्याओं का समाधान करने में विवेक शक्ति, चातुर्य एवं सजनात्मकता का गुण सामान्यतः सभी लोगों में पाया जाता है। हाँ, यह हो सकता है कि किसी में यह गुण कम हो तथा दूसरे में अधिक प्रबन्धक को कर्मचारियों से कार्य लेते समय इन गुणों का लाभ उठाना चाहिए। कर्मचारियों से सहभागिता एवं विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

(vii) यह सिद्धान्त प्रजातान्त्रिक सिद्धान्त पर आधारित है।

(viii) यह कर्मचारियों की सन्तुष्टि पर बल देता है।

(ix) इससे श्रमिक अधिक सन्तुष्ट होता है तथा उसका जीवन स्तर ऊँचा उठता है।

( वाई-सिद्धान्त की उपर्युक्त मान्यताओं का अध्ययन करने के पश्चत् यह कहा जा सकता है कि वर्तमान दशाओं में यह सबसे अधिक क्रियाशील एवं लोकप्रिय सिद्धान्त है जिसको लागू करने से न केवल श्रमिकों की कुशलता में वृद्धि होती है अपितु उनकी आय में भी वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप श्रमिकों का जीवन स्तर ऊँचा उठता है। वाई-सिद्धान्त एक आधुनिक सिद्धान्त है जो हमारे समक्ष आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इससे श्रम तथा प्रबन्ध दोनों को ही सन्तुष्टि मिलती है। यह सिद्धान्त व्यक्तिगत तथा सामूहिक उद्देश्यों दोनों में प्रभावी समन्वय स्थापित करने की चेष्टा करता है।


McGregor’s X and Y Theory

The presented ideology has been rendered by McGregor. He has divided the management ideology into the following two parts – (1) X-Theory, and (2) Y-Theory. While on the one hand the X theory presents a pessimistic view, on the other hand

The Y-theory presents an optimistic view. A brief description of these two theories is as follows

(1) X-Theory – X-theory is a traditional theory based on the belief that individuals do not want to work. Therefore, in order to take work from them, it is necessary to intimidate them, reprimand them and show fear in any other way. He works only with the force of strict discipline, fear count. Therefore, the employee is not ready to work without fear. The authoritarian theory of leadership is also based on this. According to this theory, the following are the primary beliefs of the two synonymous X-theory:

(1) A normal person does not want to act voluntarily.

(i) It is necessary to put pressure and show fear on the person to take work from him; Such as intimidation, intimidation, latina etc. only because of fear, a person is ready to act.

(ii) The person likes to work under the instructions.

(iii) The person performs the work in a traditional way.

(iv) He has a feeling of disinterest towards work.

(v) A person always tries to avoid responsibility.

(vi) The person is very less ambitious and gives highest importance to safety.

(vii) The person acts only on the basis of financial inducement. Therefore, if he is given more remuneration, then he will be ready to do good work for a long time.

(viii) From the point of view of management, the worker has no attention, but he is the only part of the machine, he does not get a chance to show his intelligence.

[After studying the above assumptions of X-theory, it can be said that That this theory is inappropriate in the present conditions. It presents a pessimistic view and considers workers as mere parts of a machine. It also lacks human values. According to this principle, he exercises power and control and forces his arbitrary decisions on them.

(2) Y-Theory – To remove the defects of X-theory, Mr. McGregor propounded the NewY-theory. This principle is based on human values ​​and democratic system. This theory assumes that a person wants to work with his own intention and has an optimistic and creative nature.

The following are the primary assumptions of Y-theory

(i) The person wants to act voluntarily. He should be given the opportunity to work.

(ii) Not every work is distasteful and neither does the common man have any distaste for work. In fact, the situation is that one feels satisfaction by doing work.

(iii) There is no need to show fear or intimidate the person to take the task. He himself considers his responsibility to perform the work for which he has been appointed. Management has to provide proper working environment and proper means of doing work.

(iv) It is wrong to say that one always tries to avoid responsibility. It is not natural for a person to avoid responsibility, but its root cause is lack of ambition and excessive emphasis on security.

(v) The person performs the work not only because of financial incentives but also non-financial inducements motivate him to work.

(vi) The quality of discretion, tact and creativity in solving organizational problems is generally found in all people. Yes, it may be that one has less of this quality and in another the manager should take advantage of these qualities while taking work from the employees. There should be participation and consultation with the employees.

(vii) This theory is based on the democratic principle.

(viii) It emphasizes on the satisfaction of the employees.

(ix) This makes the worker more satisfied and his standard of living rises.

(After studying the above assumptions of Y-theory, it can be said that it is the most active and popular principle in the present conditions, applying which not only increases the efficiency of workers but also increases their income. As a result of which the standard of living of the workers rises. Y-theory is a modern theory which presents an optimistic view to us. This gives satisfaction to both labor and management. This principle seeks to establish effective coordination between both individual and collective objectives. tries.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here