कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत संचालकों की नियुक्ति सम्बन्धी प्रावधानों की व्याख्या कीजिए। Explain the provisions regarding appointment of directors under the Companies Act.

0
75

संचालक से आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Directors)

एक कम्पनी की दशा में प्रबन्ध का भार कुछ विशेष प्रकार के व्यक्तियों के सुपुर्द किया जाता है। अंशधारियों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण तथा उनके विभिन्न स्थानों पर बिखरे हुए होने से यह आवश्यक हो जाता है कि वे अपने प्रतिनिधियों को चुनें जो कम्पनी का प्रबन्ध करें, इन्हें प्रतिनिधियों को संचालक कहा जा सकता है। अतः संचालक से आशय उन व्यक्तियों से है, जो कम्पनी के प्रबन्ध, नीतिनिर्माण एवं व्यवसाय के संचालन करने का उत्तरदायित्व लेते हैं। ये व्यक्ति धनवान, प्रभावशील एवं व्यापारिक कार्यों में कुशल होते हैं। कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(34) के अनुसार, संचालक से आशय उपसंचालक से है जो कम्पनी के बोर्ड में नियुक्त किया गया हो।”

[“Directors mean’s a director appointed to the board of a company.”]

भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) के अनुसार, संचालक वह व्यक्ति है जो किसी कम्पनी की नीति का मार्गदर्शन करता है तथा उसकी कार्यप्रणाली का निरीक्षण करता है। किस नाम से उसे पुकारा जाता है, वह महत्वहीन है। इस शब्द में प्रबन्ध संचालक भी सम्मिलित है।”

[“A person who guids the policy and superintends the working of the company is a director. The name by which he is called is immaterial. The term includes Managing Director.”]

वेब्स्टर शब्दकोष (Webster’s Dictionary) के अनुसार, “संचालक उन व्यक्तियों के समूह में से एक व्यक्ति है जिन्हें कम्पनी के सम्पूर्ण निर्देशन का कार्य सौंपा जाता है। ”

इस प्रकार स्पष्ट है कि संचालक से आशय ऐसे व्यक्ति से है जो कम्पनी के व्यवसाय का प्रबन्ध करने के लिए अंशधारियों द्वारा चुना जाता है। एक संचालक कम्पनी का अधिकारी होता है, कर्मचारी नहीं संचालक के रूप में नियुक्त व्यक्ति प्रभावशाली, अनुभवी, व्यापारिक कार्यों में कुशल एवं धनवान व्यक्ति होते हैं।

कम्पनी के सभी संचालकों को संयुक्त रूप से ‘संचालक मण्डल’ के नाम से पुकारा जाता है। कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(10) के अनुसार, “कम्पनी के सम्बन्ध में संचालक मण्डल या मण्डल का आशय एक कम्पनी के संचालकों के समूह से है। संचालक मण्डल की सभाओं में ही कम्पनी के प्रबन्ध एवं संचालन से सम्बन्धित नीतियाँ बनाने एवं महत्वपूर्ण निर्णय लेने सम्बन्धी कार्य किये जाते हैं।

संचालकों की संख्या (Numbers of Directors)

कम्पनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, “एक सार्वजनिक कम्पनी में कम-से-कम 3 संचालक होंगे। निजी कम्पनी में कम-से-कम 2 संचालक एवं एक व्यक्ति कम्पनी में एक संचालक होगा। साथ ही संचालकों की अधिकतम संख्या 15 निर्धारित की गयी है।

कम्पनी के अन्तर्नियम कम्पनी में संचालकों की न्यूनतम और अधिकतम संख्या निर्धारित कर सकते हैं।

कम्पनी चाहे तो विशेष प्रस्ताव पारित करके 15 से अधिक संचालक नियुक्त कर सकती है। कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के लागू होने के बाद संचालक का पद; वैकल्पिक संचालक के पद सहित 20 कम्पनियों से अधिक कम्पनियों में धारण नहीं करेगा।

संचालकों की योग्यतायें (Qualifications of Directors)

भारतीय कम्पनी अधिनियम में संचालकों की अलग से कोई योग्यताएँ नहीं बताई गई हैं। केवल इतना ही कहा गया है कि केवल व्यक्ति ही संचालक हो सकते हैं, जिन्हें कम-से-कम एक योग्यता अंश लेना आवश्यक है तथा एक व्यक्ति अधिक-से-अधिक 20 कम्पनियों का संचालक नियुक्त किया जा सकता है।

संचालकों के लिए निम्न योग्यताओं का होना आवश्यक है–

(1) योग्यता अंश लेना-प्रत्येक संचालक को कम-से-कम एक या अन्तनियम द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता अंशों का लेना आवश्यक होता है।

(2) अंशों को हस्तान्तरण द्वारा लेना-योग्यता अंशों का बाजार से भी क्रय किया जा सकता है।

(3) अंशों का मूल्य ₹ 5,000 से अधिक न होना-संचालक के योग्यता अंशों का मूल्य 5,000 से अधिक न होना चाहिए। यदि एक अंश का मूल्य ही ₹5,000 से अधिक है तो एक अंश ही योग्यता अंश माना जायेगा।

(4) अंश रखने की अवधि-यदि संचालक अपनी नियुक्ति के 2 माह के अन्दर योग्यता अंश नहीं लेता या अपने कार्यकाल में उनके स्वामित्व अपने पास नहीं रखता तो उसका पद रिक्त समझा जायेगा।

(5) अंश के अतिरिक्त योग्यताएँ निर्धारित करना- अन्तर्नियमों द्वारा अंशों के अतिरिक्त संचालकों के लिए अतिरिक्त योग्यताएँ भी निर्धारित की जा सकती हैं, जिन्हें पूर्ण करना आवश्यक होगा।

(6) अंश- अधिपत्र – संचालकों द्वारा अंश अधिपत्र का रखना योग्यता अंशों की संख्या में सम्मिलित नहीं होगा।

(7) निजी कम्पनी के संचालक-निजी कम्पनी के संचालकों पर योग्यता अंश वाले नियम लागू नहीं होंगे।

केवल व्यक्ति का ही संचालक होना (Only Individual to be Director) — कोई समामेलित संस्था, संघ या फर्म को किसी कम्पनी के संचालक की तरह नियुक्त नहीं किया जाता है। केवल व्यक्ति (Individual) ही संचालक की तरह नियुक्त किये जा सकते हैं।

संचालकों की अयोग्यता (Disqualification of Directors)

निम्न व्यक्ति संचालक की तरह नियुक्त नहीं किये जा सकते हैं, अर्थात् ये संचालक बनने के लिए अयोग्य है–

(1) पागल व्यक्ति — अगर वह उचित व्यायालय द्वारा पागल व्हराया गया हो और अब भी पगल हो।

(2) अविवर्जित दिवालिया — एक ऐसा दिवालिया जिसे मुक्ति न प्राप्त हुई हो (Undischarged. insolvent)।

(3) दिवालिया होने के लिए आवेदनकर्ता — उसने दिवालिया होने के लिए आवेदन पत्र दिया हो और उसके आवेदन पत्र पर विचार होना हो।

(4) नैतिक दोष के लिए 6 माह की सजा पाया हुआ व्यक्ति — उसे किसी न्यायालय द्वारा नैतिक अपराध के अभियोग में कम से कम 6 माह की सजा दी गयी हो और इस सजा को समाप्त हुए अभी 5 वर्ष न हुए हों।

(5) याचना के भुगतान की अन्तिम तिथि समाप्त हुए 6 माह बीत गये हों और उसने अभी तक ऐसे अंशों की राशि का भुगतान न किया हो जिनका वह स्वयं व्यक्तिगत रूप में या अन्य के साथ संयुक्त रूप से धारी हो।

(6) प्रवर्तन निर्माण व प्रबन्ध के सम्बन्ध में अयोग्य ठहराये हुए व्यक्ति यदि किसी व्यक्ति को कम्पनी के प्रवर्तन, निर्माण प्रबन्ध के सम्बन्ध में दोषी होने के कारण सजा हो चुकी हो वह समापन के समय कपट या कर्तव्य भंग के लिए कम्पनी में दोषी ठहराया जा चुका हो।

(7) यदि उस व्यक्ति को संचालक पहचान क्रमांक आबंटित नहीं किया गया है।

संचालकों की नियुक्ति की विधियाँ (Methods of Appointment of Directors)

निम्नलिखित के द्वारा संचालकों की नियुक्ति की जा सकती है–

(1) प्रथम संचालकों की नियुक्ति (Appointment of First Directors) कम्पनी के प्रथम संचालकों की नियुक्ति पार्षद सीमानियम के हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा की जाती है। सामान्यतः प्रथम संचालकों के नाम कम्पनी के अन्तर्नियमों में दिये हुए रहते हैं। यदि किसी कम्पनी के अन्तर्नियमों में संचालकों का नाम नहीं दिया गया है या उनकी नियुक्ति नहीं की गई है तो पार्षद सीमानियम प हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति कम्पनी के संचालक तब तक माने जाते हैं जब तक कि संचालकों क नियुक्ति कम्पनी की सामान्य सभा में नहीं कर दी जाती है।

(2) कम्पनी की साधारण सभा में संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Directors i the Annual General Meeting of the Company)-उपरोक्त प्रकार से नियुक्त किये ग प्रथम संचालकों की अवधि कम्पनी की प्रथम वार्षिक साधारण सभा तक होती है। ऐसे संचालकों स्थान पर कम्पनी संचालकों की नियुक्ति कम्पनी के सदस्यों द्वारा कम्पनी की प्रथम वार्षिक सामा सभा में की जाती है।

प्रत्येक पब्लिक कम्पनी के कुछ संचालकों में से कम-से-कम 2/3 भाग के संचालक पारी अवकाश ग्रहण करते हैं। पारी से अवकाश ग्रहण करने वाले ऐसे 2/3 संचालकों में से 1/3 संचाल प्रतिवर्ष पारी से अवकाश ग्रहण करते हैं। ऐसे संचालकों के रिक्त स्थानों की पूर्ति सामान्य सभा सदस्यों द्वारा ही की जाती है उदाहरणार्थ, यदि किसी कम्पनी के संचालकों की संख्या 9 है तो उ 2/3 संचालकों अर्थात् 6 संचालकों को पारी से समय-समय पर अवकाश ग्रहण करना पड़ेगा। एन संचालकों के 1/3 अर्थात् 2 संचालकों को प्रतिवर्ष अवकाश ग्रहण करना पड़ेगा।

अवकाश ग्रहण करने वाले संचालकों में ऐसे संचालक पहले अवकाश ग्रहण करेंगे जो पि नियुक्ति के समय सबसे अधिक समय तक संचालक के पद पर कार्य कर रहे होंगे। यदि संचालकों की नियुक्त एक ही दिन की गयी हो तो, अन्तर्नियमों में किसी विपरीत व्यवस्था के अ में 1/3 संचालकों का निर्धारण ‘लाटरी प्रणाली’ से किया जायेगा।

उपर्युक्त व्यवस्थाओं के अनुसार संचालकों द्वारा अवकाश ग्रहण करने पर सामान्य सभा तो अवकाश ग्रहण करने वाले संचालक को या अन्य किसी व्यक्ति को संचालक नियुक्त किय सकता है। संचालकों की नियुक्ति की सूचना रजिस्ट्रार को नियुक्ति के 30 दिन के अन्दर चाहिए।

(3) संचालक मण्डल द्वारा संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Directors of Board of Directors)-संचालक मण्डल द्वारा आकस्मिक रिक्त स्थान की पूर्ति की जा सकती है। इस प्रकार नियुक्त किया गया संचालक उसी समय तक संचालक की तरह कार्य करेगा जब तक कि उस संचालक को करना चाहिए था जिसकी जगह इसकी नियुक्ति हुई है। आकस्मिक रिक्ति किसी संचालक की मृत्यु, दिवालियापन, त्यागपत्र या अयोग्यता के कारण उत्पन्न हो सकती है।

यदि एक कम्पनी का संचालक मण्डल अन्तर्नियमों द्वारा अधिकृत हो या कम्पनी की साधारण सभा में पारित किये गये प्रस्ताव द्वारा अधिकृत हो तो एक ऐसे संचालक के स्थान पर दूसरा वैकल्पिक संचालक नियुक्त कर सकता है जो कम-से-कम 3 माह के लिए भारत से बाहर गया हो। एक स्वतन्त्रत संचालक के स्थान पर वैकल्पिक संचालक उस व्यक्ति को ही नियुक्त किया जा सकता है जो स्वतन्त्र संचालक की नियुक्ति की योग्यता रखता हो।

(4) आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Directom on the Basis of Proportionate Representation System)-कोई भी सार्वजनिक कम्पन या उसकी सहायक निजी कम्पनी अपने अन्तर्नियमों द्वारा अधिकृत होने पर संचालकों की नियुक्ति आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर कर सकती है। कम्पनी के कम-से-कम 2/3 संचालक आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर नियुक्त किये जा सकते हैं।

(5) अन्य पक्षों द्वारा संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Directors b Others)-अन्तर्नियम के अधीन किसी तीसरे पक्षकार को एक या अधिक संचालकों को नियुवा करने का अधिकार दिया जा सकता है। उदाहरण के लिए सम्पत्ति के विक्रेता को अन्तर्नियमों के द्वा ऐसा अधिकार दिया जा सकता है। एक व्यक्ति जो कम्पनी को ऋण देता है, संचालक मण्डल में अपनी नामांकित व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है। सामान्यतः बैंकिंग कम्पनियाँ जब वह कम्पनियों को ऋण देती है तो इस प्रकार का अधिकार सुरक्षित रखती है जिससे वह निरीक्षण कर सकें कि उधार दिया धन उन्हीं कार्यों के लिए प्रयोग किया जा रहा है जिनके लिए वह दिया गया है। अन्य पक्षों द्वारा नियुक्त संचालकों की संख्या कुल मिलाकर संचालक मण्डल के कुल संचालकों की संख्या के भाग से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(6) ट्रिब्युनल द्वारा संचालकों की नियुक्ति (Appointment of Directors bybTribunal)– ट्रिब्युनल इतने संचालकों को नियुक्त कर सकता है जितने ट्रिब्युनल द्वारा कम्पनी वा इसके अंशधारियों के हित को या पब्लिक के हित को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक समझकर निर्देशित किये गये है। ट्रिब्युनल को केन्द्रीय सरकार द्वारा अथवा कम्पनी के कम से कम 100 सदस्यों द्वारा अथवा कुल मताधिकार शक्ति के भाग के स्वामी सदस्यों द्वारा आवेदन किया जाता है कि 10 कम्पनी का प्रबन्ध कम्पनी के हित में नहीं हो रहा है या सदस्यों के हित में नहीं है या पब्लिक के हित में नहीं है, तब अधिकरण इन तथ्यों से सन्तुष्ट हो जाने पर संचालकों की नियुक्ति करता है। कुल संचालकों की 2/3 संख्या की गणना करने में ट्रिब्युनल द्वारा नियुक्त संचालकों को नही गिना जायेगा।

संचालकों की नियुक्ति पर प्रतिबन्ध (Restriction of Appointment of Directors)

कम्पनी अधिनियम के अनुसार संचालकों की नियुक्ति पर निम्न प्रतिबन्ध लगाये गये हैं–

(1) केवल व्यक्ति ही संचालक होता है केवल एक व्यक्ति ही संचालक पद पर नियुक्त किया जा सकता है अर्थात् कोई भी समामेलित संस्था, संघ या फर्म किसी भी पब्लिक या प्राइवेट कम्पनी के संचालक पद के लिए नियुक्त नहीं की जा सकती है।

(2) संचालक पद की अधिकतम संख्या एक व्यक्ति एक समय में 20 कम्पनियों से अधिक का संचालक या वैकल्पिक संचालक नहीं बन सकता। पब्लिक कम्पनियों की दशा में वह केवल 10 कम्पनियों का ही संचालक बन सकता है। इसमें वे निजी कम्पनियाँ भी शामिल हैं जो किट सार्वजनिक कम्पनी की सूत्रधारी या सहायक कम्पनियाँ है।

यदि कोई व्यक्ति 20 कम्पनियों से अधिक कम्पनियों का संचालक रहता है, उस पर प्रथम 20 कम्पनियों के बाद प्रत्येक कम्पनी की दशा में ₹5,000 से लेकर ₹25,000 प्रतिदिन के हिसाब से दण्ड लगाया जा सकता है।

(3) एक संचालक भारत में 182 दिन रहा हो- प्रत्येक सार्वजनिक कम्पनी में कम से संचालक ऐसा होना चाहिए, जो गतवर्ष में भारत में कुल मिलाकर 182 दिन रहा हो।

(4) संचालक की लिखित सहमति किसी भी व्यक्ति को कम्पनी का संचालक नियुक्त नहीं किया जा सकता है, जब तक कि वह इस रूप में कार्य करने की सहमति न दे दे और यह सहमति 30 दिन के अन्दर रजिस्ट्रार के पास भेज देनी चाहिए।

(5) महिला संचालक-निम्न श्रेणी की कम्पनियों को एक महिला संचालक नियुक्ति करना अनिवार्य है–

(i) प्रत्येक सूचीबद्ध कम्पनी को कम्पनी अधिनियम 2013 के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर ।

(ii) अन्य कम्पनियों को जिनकी चुकता पूँजी एक सौ करोड़ से अधिक हो या बिक्री तीन सौ करोड़ हो, उन्हें कम्पनी अधिनियम, 2013 के लागू होने के 3 वर्ष के अन्दर

(6) संचालकों के योग्यता अंश-यदि अन्तर्नियमों में योग्यता अंशों के बारे में कुछ भी न दिया हो तो संचालकों के लिए योग्यता अंश निर्धारित किये जाएँ और कुछ के लिए नहीं। यदि किसी संचालक को पार्षद अन्तर्नियमों के अनुसार योग्यता अंश लेना आवश्यक है तो उसे ये अंश अपनी नियुक्ति के दो माह के अन्दर ले लेने होते हैं।

(7) संचालन पहचान नम्बर धारक की ही नियुक्ति प्रत्येक कम्पनी केवल ऐसे व्यक्ति को ही • संचालक के रूप में नियुक्त या पुनः नियुक्त करेगी जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा संचालक पहचान नम्बर (Director Identification Number) आबंटित कर दिया है।

(8) संचालक पद के लिए अयोग्य न होना-उसी व्यक्ति को संचालक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, जो संचालक पद के लिए अयोग्य न हो। निम्न व्यक्ति संचालक का पद ग्रहण करने के अयोग्य है–

(i) कोई अवयस्क,

(ii) यदि न्यायालय ने उसे अस्वस्थ मस्तिष्क पाया है,

(iii) यदि वह अविवर्जित दिवालिया हो,

(iv) यदि उसने दिवालिया घोषित किये जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया हो,

(v) यदि किसी नैतिक दोष के लिए न्यायालय ने उसे अपराधी ठहराते हुए छः माह की सजा दी हुए एवं उस घटना को अभी पाँच वर्ष न बीते हों।

(vi) यदि उसने अपने अंशों के सम्बन्ध में याचना के भुगतान की अन्तिम तिथि के छः माह उपरान्त तक भुगतान नहीं किया है।

(vii) यदि उसे कपटपूर्ण व्यवहार करने के आधार पर न्यायालय ने संचालक पद पर नियुक्त होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया हो।

(9) लाभ का स्थान ग्रहण करने वाला व्यक्ति कम्पनी के ऐसे किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को, जोकि कम्पनी में लाभ का पद ग्रहण किये हुये हो, संचालक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। हाँ, यदि कम्पनी की सामान्य व्यापक सभा में विशेष प्रस्ताव पारित हो जाये तो ऐसी नियुक्ति की जा सकती है।

(10) कम्पनी के कार्यालय में सूचना कोई भी व्यक्ति (संचालक पद से निवृत्त होने वाले संचालक को छोड़कर) जो कम्पनी के संचालक पद के लिए उम्मीदवार बनना चाहता है उसे या तो स्वयं अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से कम्पनी की सामान्य सभा को कम से कम 14 दिन पूर्व अपनी उम्मीदवारी की सूचना कम्पनी के कार्यालय में प्रस्तुत करनी आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी सूचना यथासमय नहीं देता है तो वह व्यक्ति संचालक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है।


Meaning and Definition of Directors

In the case of a company, the management is delegated to certain types of persons. Due to the large number of shareholders and their being scattered at different places, it becomes necessary that they choose their representatives who should manage the company, these representatives can be called as directors. Therefore, directors mean those persons who take responsibility for the management, policy making and conduct of business of the company. These people are wealthy, effective and efficient in business work. As per Section 2(34) of the Companies Act, 2013, “Director” means a Deputy Director appointed on the Board of the Company.”

[“Directors mean’s a director appointed to the board of a company.”]

According to the Supreme Court of India, a director is a person who guides the policy of a company and supervises its functioning. By what name he is called, it is unimportant. The term also includes the managing director.”

[“A person who guides the policy and superintends the working of the company is a director. The name by which he is called is immaterial. The term includes Managing Director.”]

According to Webster’s Dictionary, “An operator is one of a group of persons entrusted with the overall direction of the company.”

It is thus clear that director means a person who is chosen by the shareholders to manage the business of the company. A director is an officer of the company, not an employee, the person appointed as a director is an influential, experienced, skilled and wealthy person in business work.

All the directors of the company are jointly called by the name of ‘Board of Directors’. According to Section 2(10) of the Companies Act, 2013, “Board of Directors or the Board in relation to a company means the group of directors of a company. The Board of Directors shall constitute and make important policies relating to the management and operation of the company in the meetings of the Board of Directors. Decision making is done.

Numbers of Directors

According to the Companies Act, 2013, “A public company shall have at least three directors. There shall be at least two directors in a private company and one director in a one-person company. Also, the maximum number of operators has been fixed at 15.

The Articles of Association may stipulate the minimum and maximum number of directors in the company.

If the company wants, by passing a special resolution, it can appoint more than 15 directors. any person holding the office of Director after the commencement of this Act; shall not hold more than 20 companies including the post of Alternate Director.

Qualifications of Directors

The Indian Companies Act does not specify any separate qualifications of the directors. It has only been said that only persons can be directors, who are required to take at least one qualifying share and one person can be appointed director of not more than 20 companies.

The following qualifications are necessary for the operators-

(1) Taking qualifying shares – Every operator is required to take at least one or the minimum qualifying shares prescribed by the Articles of Association.

(2) Taking shares by transfer – Qualifying shares can also be purchased from the market.

(3) The value of the shares should not exceed ₹ 5,000 – The value of the operator’s qualifying shares should not exceed ₹ 5,000. If the value of one share is more than ₹5,000, then only one share will be considered as qualifying share.

(4) Period of holding shares – If the director does not take the qualifying shares within two months of his appointment or does not retain the ownership of them during his tenure, his post will be deemed to be vacant.

(5) Prescribing qualifications in addition to shares – By the Articles, additional qualifications can also be prescribed for operators in addition to shares, which will be necessary to fulfill.

(6) Share warrant – The holding of share warrant by the operators shall not be included in the number of qualifying shares.

(7) Directors of private company- The rules of qualifying share will not apply to the operators of private company.

Only Individual to be Director – No amalgamated institution, association or firm is appointed as a director of a company. Only individuals can be appointed as directors.

Disqualification of Directors

The following persons cannot be appointed as directors, that is, they are disqualified to be directors-

(1) Insanity – If he has been declared insane by the proper court and is still insane.

(2) Undischarged insolvent – An insolvent who has not been discharged (Undischarged. insolvent).

(3) Applicant for insolvency – He has made an application for insolvency and his application is to be considered.

(4) A person sentenced to 6 months for moral turpitude – He has been sentenced by a court of law for a moral offense of not less than 6 months and not yet five years have elapsed since the end of that sentence.

(5) Six months have elapsed since the last date for payment of the call and he has not yet paid the amount of shares held by him either personally or jointly with others.

(6) Enforcement, Construction and Management Person disqualified in connection with the case If any person who has been convicted by reason of being guilty in connection with the operation, construction and management of the company has been convicted of fraud or breach of duty in the company at the time of winding up.

(7) If that person has not been allotted a Operator Identification Number.

Methods of Appointment of Directors

Directors can be appointed by the following:-

(1) Appointment of First Directors The first directors of the company are appointed by the signatories of the council memorandum. Normally the names of the first directors are mentioned in the Articles of Association of the company. If the directors are not named or appointed in the Articles of Association of a company, the person signing the memorandum of council shall be deemed to be the director of the company until the directors are appointed at the general meeting of the company. She goes.

(2) Appointment of Directors i the Annual General Meeting of the Company – The period of the first directors appointed in the above way is till the first annual general meeting of the company. In place of such directors, the directors of the company are appointed by the members of the company in the first annual general meeting of the company.

Out of some directors of every public company, at least 2/3 of the directors take shift leave. Out of 2/3 such operators retiring from shift, 1/3 of the operators take leave from shift every year. The vacancies of such directors are filled only by the members of the general body, for example, if the number of directors of a company is 9, then 2/3 of the directors i.e. 6 directors will have to retire from time to time. 1/3rd of N operators i.e. 2 operators will have to retire every year.

Among the retiring operators, such operators will retire first, who will be working on the post of director for the longest time at the time of appointment. If the directors are appointed on the same day, then 1/3rd of the operators will be determined by ‘lottery system’ in case of any contrary arrangement in the Articles.

According to the above arrangements, on retiring by the directors, the general meeting can appoint the retiring director or any other person as the director. The registrar needs information about the appointment of directors within 30 days from the date of appointment.

(3) Appointment of Directors by the Board of Directors – Casual vacancies can be filled by the Board of Directors. The Director so appointed shall act as a Director for so long as he ought to have done by the Director in whose place he has been appointed. A casual vacancy may arise due to the death, bankruptcy, resignation or disqualification of an operator.

If the board of directors of a company is authorized by Articles or by resolution passed in the general meeting of the company, it may appoint another alternate director in place of such director who has been outside India for not less than three months. have gone In place of an independent director, an alternate director can be appointed only by a person who is qualified to be an independent director.

(4) Appointment of Directom on the Basis of Proportionate Representation System-Any public company or its subsidiary private company, authorized by its Articles, can appoint directors on the basis of proportional representation. . At least 2/3 of the directors of the company can be appointed on the basis of proportional representation.

(5) Appointment of Directors b Others – Under the Article, a third party may be empowered to appoint one or more directors. For example, such a right may be given to the seller of property by Articles. A person who gives loan to the company can appoint his nominee on the board of directors. Banking companies generally reserve the right when they give loans to companies so that they can observe that the money lent is being used for the same purposes for which it has been given. The total number of directors appointed by other parties should not exceed the share of the total number of directors of the board of directors.

(6) Appointment of Directors bybTribunal:- The Tribunal may appoint such number of directors as the Tribunal considers necessary to protect the interest of the company or its shareholders or the interest of the public. An application is made to the Tribunal by the Central Government or by not less than 100 members of the company or by the members owning part of the total voting power that the management of the company is not being carried on in the interest of the company or is not in the interest of the members or the public is not in the interest of the Directors, then the Tribunal, being satisfied with these facts, appoints the Directors. In computing 2/3rd of the total number of operators, the operators appointed by the Tribunal will not be counted.

Restriction of Appointment of Directors

Under the Companies Act

Accordingly, the following restrictions have been imposed on the appointment of directors:

(1) Only a person is a director, only one person can be appointed to the post of director, that is, no amalgamated institution, association or firm can be appointed to the post of director of any public or private company.

(2) Maximum number of director posts: A person cannot become a director or alternate director of more than 20 companies at a time. In case of public companies, he can become the director of only 10 companies. It also includes those private companies which are the proprietors or subsidiaries of kit public company.

If a person is the operator of more than 20 companies, he can be fined from ₹ 5,000 to ₹ 25,000 per day in the case of each company after the first 20 companies.

(3) A director who has stayed in India for 182 days- Every public company should have such a director who has stayed in India for a total of 182 days in the previous year.

(4) No person can be appointed as a director of the company unless he has consented to act as such and this consent must be sent to the Registrar within 30 days.

(5) Women Director – It is mandatory for the following categories of companies to appoint a woman director-

(i) to every listed company within one year of the commencement of the Companies Act, 2013.

(ii) to other companies having a paid-up capital of more than one hundred crores or sales of three hundred crores, within three years from the commencement of the Companies Act, 2013.

(6) Qualification Shares of Operators- If nothing is given in the Articles about qualification shares, then qualification shares may be prescribed for operators and not for others. If a director is required to take qualifying shares as per the Councilor’s Articles, then he has to take these shares within two months of his appointment.

(7) Appointment of Operator Identification Number Holder Every company shall appoint or re-appoint only such person as Director who has been allotted a Director Identification Number by the Central Government.

(8) Not to be disqualified for the post of Director- The same person can be appointed as Director, who is not unfit for the post of Director. The following persons are disqualified to hold the post of Director-

(i) a minor,

(ii) if the court has found him to be of unsound mind,

(iii) if he is an excluded insolvent,

(iv) if he has made an application for being declared insolvent,

(v) If the court has convicted him of a moral turpitude and sentenced him to six months’ imprisonment and five years have not yet elapsed since that incident.

(vi) if he has not paid the call in respect of his shares after six months from the last date of payment of the call.

(vii) if he has been disqualified from being appointed to the post of director by a court on the ground of fraudulent practice.

(9) Person holding an office of profit No such officer, employee or other person of the company, who is holding an office of profit in the company, can be appointed as a director. Yes, such appointment can be made if a special resolution is passed in the general general meeting of the company.

(10) Notice in the office of the company Any person (other than a retiring operator) who wishes to become a candidate for the post of director of the company, either himself or through his authorized representative, shall attend the general meeting of the company. It is necessary to submit the information of your candidature to the company’s office at least 14 days in advance. If any person does not give such notice in due time, then that person cannot be appointed to the post of Director.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here