एक अच्छे अनुवादक को किस तरह की ‘अनुवाद प्रक्रिया अपनानी चाहिए ? What kind of ‘translation’ process should a good translator follow?

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एक श्रेष्ठ अनुवादक को अनुवाद प्रक्रिया का ध्यान रखना जरूरी है। अच्छे अनुवादक को यह प्रयत्न करना चाहिए कि मूल रचना की शैली सुरक्षित रहे। मूल रचना को शैली सुरक्षित रखने का तात्पर्य यह नहीं है कि केवल शाब्दिक अनुवाद कर दिया जाए। अनुवाद की भाषा, स्रोत भाषा की प्रकृति के अनुरूप हो। यदि स्रोत भाषा में कोई मुहावरा है तो उस मुहावरे की प्रकृति से मिलता हुआ मुहावरा लक्ष्य भाषा का भी अनुवाद में प्रयुक्त किया जाना चाहिए। इससे स्वाभाविक प्रवाह रहता है। एक अच्छे अनुवादक के लिए दो बातें ध्यान रखनी आवश्यक है-1. अनुवाद की जाने वाली

सामग्री की विषय-वस्तु का ज्ञान हो सामग्री की ज्ञानात्मक चेतना हो। 2. स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा पर पूरा अधिकार हो। दोनों भाषाओं की संरचनात्मक बनावट, पदबन्ध प्रयोग, वाक्य गठन आदि की पूरी समझ हो । अनुवाद प्रक्रिया की मूलभूत समस्या लक्ष्य भाषा में अनुवाद समानार्थी खोजने की है। अतः स्रोतभाषा की पाठ-सामग्री को पूरी तरह समझे बिना अनुवादक लक्ष्य भाषा के समानार्थी शब्दों के द्वारा उसे प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। साथ ही लक्ष्य भाषा के बाक्यों तथा संरचनात्मक तत्वों को भी अत्यन्त सावधानीपूर्वक प्रयुक्त करना चाहिए। एक शब्द अनेक सन्दर्भों में प्रयुक्त होकर अनेक अर्थ देता है, इसलिए मूल पाठ के सन्दर्भ और प्रयोग परिवेश को समझकर ही समानार्थी शब्दों का चयन किया जाना चाहिए। प्रत्येक भाषा में अभिव्यक्ति का अपना एक विशेष मुहावरा होता है। इसका लक्ष्य भाषा में अनुवाद कठिन होता है, अतः इसका अनुवाद लक्ष्य भाषा की प्रकृति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अनुवाद करते समय सांस्कृतिक परम्पराओं का ध्यान भी रखा जाना चाहिए। वाक्य में पदों का अनुक्रम भी लक्ष्य भाषा की अनुक्रम व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। लक्ष्य भाषा स्रोत भाषा से अनुवाद करते समय शब्दों के लिंग, वचन और व्याकरणिक रूपों की संगति ध्यान में रखना चाहिए। वाक्यांश और लोकोक्तियों के अनुवाद से लक्ष्य भाषा को अस्पष्ट एवं जटिल नहीं बनाना चाहिए।

अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यान्त्रिक या निर्जीव न लगे अनुवाद प्रक्रिया के अन्तर्गत व्यावहारिक ज्ञान का होना भी आवश्यक है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी भाषा के निम्नलिखित वाक्य का अनुदान लिया जा सकता है

Soharab was killed by his own father Rustam.

इसका सीधा-सादा अनुवाद है-सोहराब मार दिया गया था अपने पिता रुस्तम के द्वारा जो

उचित नहीं है हिन्दी में इसकी अपेक्षा उक्त वाक्य का “सोहराब अपने पिता रुस्तम के ही हाथों मारा गया।” यह अनुवाद अधिक ठीक रहेगा। अतः लक्ष्य भाषा के वाक्य-विन्यास को ध्यान में रखकर ही अनुवाद किया जाना चाहिए। जैसा कि कहा गया है कि प्रत्येक भाषा में अभिव्यक्ति का एक अपना विशेष मुहावरा होता है, इसका लक्ष्य भाषा में यथावत् अनुवाद कठिन होता है। इसका अनुवाद लक्ष्य भाषा की प्रकृति के अनुरूप ही होना चाहिए। देखिए

स्रोत भाषा अंग्रेजी में वाक्य है- There is no room in the car. लक्ष्य भाषा हिन्दी में शब्दशः अनुवाद होगा-कार में कोई कमरा नहीं है।

• लेकिन भाषा की प्रकृति से इसका सही अनुवाद होगा-“कार में कोई स्थान नहीं है।” इसलिए अनुवादक को अनुवाद प्रक्रिया का ध्यान रखना आवश्यक है।


A good translator needs to take care of the translation process. A good translator should try to preserve the style of the original composition. Preserving the style of the original does not mean that only literal translation should be done. The language of translation should be consistent with the nature of the source language. If there is an idiom in the source language, the phrase matching the nature of that idiom should also be used in the translation of the target language. This leads to a natural flow. For a good translator it is necessary to keep two things in mind- 1. to be translated

The knowledge of the subject matter of the material should be the cognitive consciousness of the material. 2. Have complete control over the source language and the target language. Have a complete understanding of the structural structure, phrase usage, sentence formation etc. of both the languages. The fundamental problem of the translation process is to find translation synonyms in the target language. Therefore, without fully understanding the text content of the source language, the translator cannot replace it with synonyms of the target language. At the same time, the sentences and structural elements of the target language should also be used very carefully. One word gives many meanings when used in many contexts, so synonyms should be selected only after understanding the context and usage environment of the original text. Each language has its own special idiom of expression. Its translation in the target language is difficult, so it should be translated keeping in mind the nature of the target language. Cultural traditions should also be taken into account while translating. The sequence of words in the sentence should also be consistent with the sequence arrangement of the target language. When translating from the target language source language, gender, lexical and grammatical forms of words must be taken into account. Translation of phrases and proverbs should not make the target language ambiguous and complicated.

Translation should be such that it does not seem mechanical or inanimate, it is also necessary to have practical knowledge under the translation process. For example, the granting of the following sentence in the English language can be taken

Soharab was killed by his own father Rustam.

Its simply translation is – Sohrab was killed by his father Rustam who

It is not proper in Hindi instead of the above sentence “Sohrab was killed by his father Rustam.” This translation would be better. Therefore, translation should be done keeping in mind the syntax of the target language. As it has been said that each language has its own particular idiom of expression, its translation in the target language is difficult. Its translation should be in accordance with the nature of the target language. See

The sentence in the source language English is- There is no room in the car. The target language will translate verbatim into Hindi – there is no room in the car.

• But by the nature of the language, the correct translation would be – “There is no room in the car.” Therefore it is necessary for the translator to take care of the translation process.

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