अंशों के हस्तान्तरण और हस्ताकन में भेद बताइए। अंशों के हस्तांकन की कार्य विधि समझाइए। Differentiate between transfer and transfer of shares. Explain the working method of handing over of shares.

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अंशों के हस्तांकन से आशय (Meaning of Transmission of Shares)

अंशों के कानूनी ढंग से हस्तान्तरण को अंशों का हस्तांकन कहते हैं। जब किसी सदस्य की मृत्यु हो जाय या वह पागल या दिवालिया हो जाये तो उसके प्रतिनिधि को अंशों के सम्बन्ध में व्यवहार करने के अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। यह अधिकार मृत्यु होने की दशा में उसके उत्तराधिकारी या प्रतिनिधि पागल होने पर समिति तथा दिवालिया होने पर राजकीय निस्तारक को प्राप्त हो जाते हैं।

चार्टर्ड इन्स्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटरीज के अनुसार, “वैधानिक व्यक्तिगत प्रतिनिधि के अंशों से सम्बद्ध अधिकार का हस्तान्तरण ही हस्तांकन कहलाता है।”

जी. के. बकनाल के अनुसार, “अंशों के हस्तांकन से आशय राजनियम के प्रचलन के द्वारा एक व्यक्ति के अंशों से सम्बद्ध अधिकारों का दूसरे व्यक्ति को हस्तान्तरण से है। ”

इस प्रकार स्पष्ट है कि जब किसी अंशधारी की मृत्यु, पागलपन या दिवालिया होने पर उसके अंशों का हस्तान्तरण राजनियम के प्रचलन के कारण उसके उत्तराधिकारी, प्रतिनिधि या सरकारी प्रापक को हो जाता है, तो ऐसे हस्तान्तरण को अंशों का पारेषण या हस्तांकन कहते हैं।

अंश हस्तांकन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है–

(1) अंशों का हस्तांकन राजनियम के कार्यशील होने पर होता है। (2) हस्तांकन बिना प्रतिफल के होता है। (3) हस्तांकन अंश के स्वामी के वैध उत्तराधिकारी को होता है। (4) हस्तांकन में दो पक्ष होते हैं-हस्तांकन का आवेदक व कम्पनी (5) हस्तांकन में स्टाम्प व अन्य शुल्क की आवश्यकता नहीं होती है। (6) हस्तांकन में उत्तराधिकारी को केवल सादा आवेदन देना होता है।

अंश हस्तांकन की विधि (Procedure for the Transmission of Share)

अंशों का हस्तांकन किसी व्यक्ति की अन्य दशाओं में स्वतः ही हो जाता है। अंशों के हस्तांकन की विधि अग्र प्रकार है–

(i) प्रतिनिधित्व – किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसके अंशों का अधिकारी उसका वैध प्रतिनिधि होता है। प्रत्येक वैध प्रतिनिधि को प्रमाण पत्र के द्वारा यह सिद्ध करना होता है कि मृतक का वैद्य उत्तराधिकारी है।

(ii) लिखित नोटिस देना-यदि वैध प्रतिनिधि अंशों के धारक की तरह रजिस्टर्ड होना चाहता है तो उसे इस इच्छा का विवरण देते हुए कि एक लिखित नोटिस कम्पनी के पास भेजना चाहिए।

(iii) अंशों का हस्तान्तरण करना यदि वैद्य प्रतिनिधि अंशों को नहीं लेना चाहता है तो वह इसकी सूचना कम्पनी को भेजे।

हस्तांकन में कोई उचित मुद्रांक की आवश्यकता नहीं रहती और साथ ही ये चाहे भले ही कम्पनी के सदस्य नहीं रहते, किन्तु फिर भी वैधानिक उत्तराधिकारी होने के नाते स्वामी की मृत्यु हो जाने पर इन्हें अंश का अधिकार प्राप्त हो जाता है।

अंशों के हस्तांकन से सम्बन्धित वैधानिक प्रावधान (Statutory Provision Regarding the Transmission of Shares)

(i) उत्तराधिकारी-कम्पनी के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर निम्नलिखित व्यक्ति ही अंशों के स्वामी माने जाते हैं–

1. उस सदस्य के संयुक्त अंशधारी होने की दशा में शेष जीवित अंशधारी एवं

2. उस सदस्य के एकाकी अंशचारी होने की दशा में उसके वैध उत्तराधिकारी।

(ii) उत्तराधिकारी सिद्ध करने के लिए प्रमाण प्रस्तुत करना कम्पनी के किसी सदस्य की मृत्यु दिवालिया होने की दशा में वैध प्रतिनिधि को अपना उत्तराधिकारी सिद्ध करने के लिए आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

(iii) उत्तराधिकारी द्वारा अंशो का धारक बनाना या ऐसे अंशों का हस्तान्तरण करना-वैद्य उत्तराधिकारी उन अंशों को अपने नाम में रजिस्टर्ड करा सकता है अथवा अंशों को हस्तान्तरित कर सकता है।

(iv) अंशों के हस्तान्तरण से सम्बन्धित सभी नियमों एवं प्रतिबन्धों का लागू होना-यदि अंशों का वैध उत्तराधिकारी ऐसे अंशों को हस्तान्तरित करना चाहता है तो उस पर अंश के हस्तान्तरण सम्बन्धित सभी नियम एवं प्रतिबन्ध लागू होंगे।

(v) वैध उत्तराधिकारी के अधिकार-अंशों के हस्तान्तरण के परिणामस्वरूप एक वैद्य उत्तराधिकारी को लाभांश और अन्य लाभ उसी प्रकार मिलेंगे जैसे कि यह कम्पनी का रजिस्टर्ड अंशधारी हो।

(vi) निर्णय करने के लिए 30 दिन की अवधि-वैधानिक उत्तराधिकारी को कम्पनी से नोटिस मिल जाने पर 30 दिन के अन्दर कम्पनी को यह सूचित करना होगा कि वह अंशों को अपने नाम से रजिस्टर्ड करायेगा अथवा उनका हस्तान्तरण करेगा। ऐसे नोटिस का पालन करने तक कम्पनी ऐसे अंशों पर देय लाभांश तथा बोनस आदि की राशि रोक सकती है।

अंशों के हस्तांकन से प्राप्त अंशों का हस्तान्तरण

यदि कोई व्यक्ति अंशों के हस्तांकन के फलस्वरूप अंशों को प्राप्त करता है तो वह इन अंशों को दूसरों को हस्तान्तरित कर सकते हैं।


Meaning of Transmission of Shares

Transfer of shares in a legal manner is called handing over of shares. When a member dies or becomes insane or insolvent, his representative gets the right to deal with the shares. In case of death, his successor or representative becomes insane, the committee gets it and in case of bankruptcy, the state liquidator gets it.

According to the Chartered Institute of Secretaries, “the transfer of the right relating to the shares of the statutory personal representative is called assent.”

Yes. Of. According to Bucknell, “The transfer of shares means the transfer of the rights relating to shares of one person to another by the operation of law.”

It is thus clear that when the transfer of shares of a shareholder occurs due to the operation of the law to his successor, representative or Government receiver on the death, insanity or insolvency, then such transfer is called transmission or transfer of shares.

Following are the main features of share handing-

(1) The transfer of shares takes place when the law is in operation. (2) Handing takes place without consideration. (3) The handover is to the legal heir of the owner of the share. (4) There are two parties in the handing – the applicant and the company of the handing (5) Stamp and other fees are not required in the handing. (6) In handwriting, only a simple application has to be made to the successor.

Procedure for the Transmission of Share

The handing over of shares is done automatically in other cases of a person. The method of handing over shares is as follows-

(i) Representation – After the death of a member, the right to his shares is his legitimate representative. Every legitimate representative has to prove by means of a certificate that the deceased has a legal heir.

(ii) giving written notice- If the lawful representative wishes to be registered as a holder of shares, he should send a written notice to the company giving details of his desire.

(iii) Transfer of Shares If the legal representative does not want to take the shares, then he should inform the company about it.

No proper stamp is required in the handing and at the same time, even though he may not remain a member of the company, but still being the legal heir, he gets the right of share on the death of the owner.

Statutory Provision Regarding the Transmission of Shares

(i) Successor – In the event of the death of any member of the company, the following persons are deemed to be the owners of the shares-

1. In case of that member being a joint shareholder, the remaining surviving shareholder and

2. In the case of that member being a sole shareholder, his legal heir.

(ii) Production of evidence to prove heirs In the event of the death of a member of the company, insolvency, the legal representative shall produce the necessary proofs to prove his successor.

(iii) To become holder of shares or to transfer such shares by heir – The legitimate heir may get those shares registered in his name or transfer the shares.

(iv) Application of all the rules and restrictions related to the transfer of shares – If the legal heir of the shares wants to transfer such shares, then all the rules and restrictions related to the transfer of shares will be applicable to him.

(v) Rights of legal heirs – A legal heir shall, as a result of transfer of shares, receive dividends and other benefits in the same manner as if he were a registered shareholder of the company.

(vi) 30 days to decide – The legal heir shall, on receipt of notice from the company, inform the company within 30 days that he will get the shares registered in his own name or transfer them. Till such notice is complied with, the company may withhold the amount of dividends and bonus etc. payable on such shares.

Transfer of shares received by handing over of shares

If a person receives shares as a result of handing over shares, he can transfer these shares to others.

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