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धनपुर दर्शन गौरेला पेंड्रा मरवाही

धनपुर: धनपुर अपने आप में ही एक रहस्मई जगह है, इस जगह में हमें कई प्रकार के सक्छ देखने को मिला है तो चलिए हम आज जानते है गौरेला पेंड्रा मरवाही के धनपुर ग्राम के बारे में

दुर्गा मंदिर  

धनपुर जैन धर्मावलम्बियों का अंचल का सबसे बड़ा प्राचीन व्यवसायिक केन्द्र था। पेंड्रा से सिवनी मार्ग में 23 किमी दूरी पर स्थिति मां आदिशक्ति मां दुर्गा माता पूरब दिशा की ओर एक अरिया में माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है

यहाँ की मान्यता है कि, इस स्थान में पाण्डव अज्ञातवास के दौरान इस जगह पर 360 दिन के करीब रूके थे। द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के समय भीम के द्वारा निर्माण किया हुआ 360 बहुत ही ऐतिहासिक तालाब है धनपुर में आपको आज भी जीवित अवस्था में देखने को मिलने वाला है।

धनुपर ग्राम में ऋषभनाथ तालाब स्थित है, और इस स्थान में द्वापर युग में हमारे पूर्वज के दूर बनाये गए प्राचीन कलाकृति देखने को मिलने वाला है जो की लोगो का आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। प्राचीनकाल में प्रमुख व्यापारिक पथ होने के कारण धनपुर जैन धर्मावलम्बियों के वैभवशाली नगर के रूप में प्रसिद्ध था । धनपुर में जैन धर्म के अलावा शैव धर्म से संबंधित अवशेष भी प्राप्त हुये है ।

बेनीबाई की प्रतिमा

मंदिर परिसर में जैन धर्म से संबंधित अनेक प्रतिमाएं रखी हुयी है । गांव से तीन किमी दूर एक विशाल काली किन्तु बलुई प्राकृतिक चट्टान में जैनधर्म से संबंधित एक विशाल प्रतिमा अर्द्धगठित स्थिति में खुदी हुयी है जिसे यहां के निवासी बेनी बाई के नाम से जानते है । कार्योत्सर्ग मुद्रा में उत्कीर्णित तीर्थकर प्रतिमा लगभग 25 फुट उंची है, छत्तीसगढ़ अंचल में यही एकमात्र शैलोत्कीर्णित जैन मूर्तिकला का उदाहरण है।

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