नियन्त्रण को परिभाषित कीजिए। नियन्त्रण की आवश्यकता एवं तकनीक का वर्णन कीजिए। Define control. Describe the need and technique of control.

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नियन्त्रण का आशय एवं परिभाषा (Meaning and Definigion of Control)

नियन्त्रण शब्द के कई अर्थ है जिसका विभिन्न सन्दर्भों में उपयोग होता है। जहाँ एक अर्थ में नियन्त्रण को एक अधिशासी का कार्य माना गया है, वहीं दूसरे अर्थ में इसे अधिशासी के नियोजन कार्य से सह-सम्बन्धित किया गया है। तीसरे अर्थ में नियन्त्रण को किसी विशेष प्रवन्ध पद्धति के अन्दर ही विद्यमान दशा के रूप में व्यक्त किया गया है। इस प्रकार नियन्त्रण से आशय यह पता लगाना है कि किसी उपक्रम अथवा विभाग के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपनायी गयी योजनाएँ नियमित रूप में चल रही है या नहीं, यह जानने के लिए अधीनस्थों की जाँच-पड़ताल करने एवं आवश्यक सुधार करने को ही नियन्त्रण कहते हैं।

बिली ई. गोट्ज (Billy E. Goetz) अनुसार, “प्रबन्धकीय नियन्त्रण का अभिप्राय व्यावसायिक

घटनाओं को योजना के अनुरूप बनाना है।

” जार्ज आर. टैटरी के अनुसार, “नियन्त्रण से तात्पर्य यह तय करना है कि क्या किया जा रहा है अर्थात् कार्यों का मूल्यांकन करना तथा आवश्यकता पड़ने पर उनमें सुधार करना है, जिससे कि कार्यों का योजनाबद्ध निष्पादन हो सके।”

नियन्त्रण की आवश्यकता क्या भूमिका (Nesesssity of Role Of Centrol)

व्यवसाय में नियन्त्रण की आवश्यकता पर जितना भी बल दिया जाय कम होगा एक प्रभावशाली नियन्त्रण व्यवस्था सफल प्रबन्ध की पहली आवश्यकता है। यही कारण है कि आजकल प्रबन्धकीय शिक्षा में सबसे अधिक ध्यान विभिन्न प्रकार की नियन्त्रण तकनीकों के अध्ययन-अध्यापन पर ही दिया जाता है। नियन्त्रण का महत्व निम्न बातों से स्पष्ट हो जाता है

(1) समन्वय में सहायता समन्वय जो प्रबन्ध क्रिया का सार है, भी नियन्त्रण की सहायता से सुगम बन जाता है। पूर्व निर्धारित उद्देश्यों और लक्ष्यों की सहायता से नियन्त्रण पूरे ही संगठन को एक समन्धित रूप से काम करते हुए उन लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में ले जाता है।

(2) विकेन्द्रीकरण में सहायता नियन्त्रण की आधुनिक प्रणालियों ने प्रबन्ध को विकेन्द्रीयकरण की सीमा बढ़ाने में भी काभी सहायता दी है। नियन्त्रण से ही अधिकतम कार्य विभाजन सम्भव होता है, निम्न स्तरों पर अधिकारों का अन्तरण सम्भव होता है और प्रबन्ध के अपवाद सिद्धान्त को सफलता मिलती है। यह सम्प्रेषण को भी सुहृद करता है और प्रबन्ध की सम्पूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाता है।

(3) नियन्त्रण नियोजन का आधार है-नियन्त्रण वह प्रक्रिया है जो काम को पूर्व निर्धारित प्रमापों के अनुसार ही करने को प्रेरित करती है। नियन्त्रण व्यवस्था का अस्तित्व ही प्रभावशाली नियोजन का आधार है। यह दीर्घकालीन नियोजन का भी आधार है। यदि नियन्त्रण प्रक्रिया से प्रबन्धकों को वास्तविक निष्पादन के बारे में सूचनाएँ और आँकड़े न मिलें तो वे भावी नियोजन कैसे कर सकेंगे।

(4) अनुशासन की स्थापना व्यवसाय में अनुशासन स्थापित करने के लिए नियन्त्रण प्रक्रिया अमोघ अस्त्र का कार्य करती है। कुशल नियन्त्रण द्वारा कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली बेईमानी, चोरी, भ्रष्टाचार, अनुचित व्यवहार आदि के अवसर कम हो जाते हैं फलतः अनुशासन का वातावरण उत्पन्न होता है।

(5) जोखिम से सुरक्षा नियन्त्रण के अन्तर्गत संगठन के प्रत्येक कार्य की भली प्रकार जाँच की जा सकती है तथा त्रुटि बिन्दुओं का पता लगाकर उनमें सुधार करने एवं भविष्य में पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रयत्न किये जाते हैं। फलतः भविष्य में होने वाली त्रुटियों की जोखिम से सुरक्षा प्राप्त होती है।

(6) निष्पादन का मूल्यांकन-निष्पादन सम्बन्धी ये प्रमाप भावी निष्पादन को ध्यान में रखकर ही नियोजन की प्रक्रिया द्वारा निश्चित किये जाते हैं। नियन्त्रण की प्रक्रिया वास्तविक निष्पादन को इन प्रभावों के अनुसार चलने को विवश करती है।

(7) प्रबन्ध के अन्य कार्यों पर नियन्त्रण नियन्त्रण की प्रक्रिया प्रबन्ध के अन्य कार्यों पर भी रखती है। नियन्त्रण ही नियोजन और निष्पादन के बीच पुल का काम करता है। यह काम वास्तविक निष्पादन में आने वाली कठिनाइयों को उजागर करता है और भविष्य में उनके सुधार के लिए आवश्यक उपाय भी सुझाता है।

• नियन्त्रण की विधियाँ, तकनीकें, साधन अथवा उपकरण (Methods, Techniques, Means (Aids) or Tools of Controll

नियन्त्रण की विधियों अथवा तकनीकों से आशय उन माध्यमों से है जिनके द्वारा नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। आधुनिक प्रबन्धक अपने उपक्रम की क्रियाओं पर प्रभावी नियन्त्रण स्थापित करने के लिए नियन्त्रण की विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हैं। अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन तकनीकों को अग्र प्रकार से समझा जा सकता है

(A) नियन्त्रण की सामान्य विधियाँ (General Methods of Control)

नियन्त्रण की सामान्य विधियों या परम्परागत तकनीकों में निम्न को शामिल किया जा सकता है–

(1) अवलोकन द्वारा नियन्त्रण (Control by Observation)-संस्था में कार्यरत व्यक्तियों के कार्यों का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन कर उन पर नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। इसके अन्तर्गत अधिकारी अपने कर्मचारियों से प्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क रखकर उनकी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करते हैं। चियो हैमन (Theo Haimann) के शब्दों में, “व्यक्तिगत अवलोकन करने में समय लगता है और ऊपरी तौर से यह एक अकुशल पद्धति दिखलाई देती है किन्तु अधीनस्थों की क्रियाओं के नियन्त्रण की कोई अन्य विधि इसके स्थान पर प्रयुक्त नहीं की जा सकती है। ”

(2) अपवाद द्वारा नियन्त्रण (Control by Exception) -यह नियन्त्रण की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके अन्तर्गत केवल उच्च प्रबन्ध का ध्यान उन्हीं बातों की ओर आकृष्ट किया जाता है जो कि योजना के अनुसार नहीं हो रही है अर्थात् यह विधि केवल अपवादजनक स्थिति में ही प्रबन्धकों का ध्यान आकर्षित करने पर बल देती है। इस विधि को स्थायी आदेश या नियम की विधि भी कहा जाता है।

(3) नीतियों द्वारा नियन्त्रण (Control by Policies)-नीतियाँ भी नियन्त्रण की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं। नीतियाँ वे सामान्य विवरण हैं जो एक संस्था के दैनिक कार्यों के निष्पादन में मार्गदर्शक तत्वों के रूप में काम में लायी जाती हैं। इनके आधार पर भविष्य में क्या करना है, इसका पहले सेही निर्धारण करना सम्भव हो जाता है। इसलिए इन्हें नियन्त्रण का एक साधन माना जाता है।

(4) उदाहरण द्वारा नियन्त्रण (Control by Example) – नियन्त्रण की इस तकनीक के अनुसार यदि एक उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थों की क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करना चाहता है तो उसे अपने आचरण एवं व्यवहार को आदर्श उदाहरण के रूप में अपने कर्मचारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उनका आचरण एवं व्यवहार अधीनस्थों के लिए आदर्श बन जाता है जिसका अनुकरण कर सकते हैं।

(5) अभिलेखों एवं प्रतिवेदनों द्वारा नियन्त्रण (Control by Records and Reports) – अधीनस्थों के कार्यों के अभिलेखों एवं उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रतिवेदनों की जाँच-पड़ताल करने से भी उनकी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। ये अभिलेख एवं प्रतिवेदन नियन्त्रण की एक अच्छी तकनीक के रूप में प्रयोग में लाये जाते हैं जबकि वे सरल हों।

(6) अंकेक्षण द्वारा नियन्त्रण (Control by Audit) अंकेक्षण नियन्त्रण की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। यह कभी-कभी आन्तरिक व्यक्तियों द्वारा और कभी-कभी बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी करवाया जा सकता है। इससे संस्था के कार्य-कलापों में होने वाली भूल-चूक, कपट तथा धन या माल का गबन आदि का तुरन्त पता लगाया जा सकता है।

(7) अभिप्रेरणा द्वारा नियन्त्रण (Control by Motivation)-संस्था में कर्मचारियों को अभिप्रेरित करके भी उनकी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। यह एक प्रकार से स्व-नियन्त्रण की तकनीक है अर्थात् कर्मचारियों को प्रेरणाएँ प्रदान करना और उनका ऐच्छिक सहयोग प्राप्त करना वस्तुतः स्व-नियन्त्रण को जन्म देना है। इसलिए अभिप्रेरणा द्वारा नियन्त्रण की विधि पर आजकल सर्वाधिक ध्यान दिया जाने लगा है।

(8) अनुशासनात्मक कार्यवाही द्वारा नियन्त्रण (Control by Disciplinary Action) नियन्त्रण की इस विधि के अन्तर्गत संस्था में कार्य करने वाले कर्मचारी ठीक ढंग से कार्य नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करके उन पर नियन्त्रण स्थापित किया जाता है। नियन्त्रण की यह एक ऋणात्मक विधि है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को गलत कार्य करने से रोकना है।

(9) स्थायी सीमाओं के निर्धारण द्वारा नियन्त्रण यह भी नियन्त्रण की एक विधि है जिससे अधीनस्थों के अधिकार क्षेत्र को सीमित किया जाता है। उदाहरणार्थ, क्रय प्रबन्धक को माल क्रय करने का अधिकार है किन्तु यह वह एक लाख रुपये तक का ही माल क्रय कर सकता है और इससे अधिक राशि का क्रय करने पर महाप्रबन्धक की अनुमति आवश्यक है, तो यह नियन्त्रण स्थायी सीमाओं के निर्धारण द्वारा नियन्त्रण कहा जायेगा।

(B) नियन्त्रण की विशिष्ट विधियाँ (Specific Methods of Control)

नियन्त्रण की विशिष्ट विधियों या आधुनिक तकनीकों के अन्तर्गत निम्न को शामिल किया जाता है–

(1) बजटरी नियन्त्रण (Budgetary Control) इस तकनीक के माध्यम से बजट के अनुमानों तथा वास्तविक परिणामों की तुलना की जाती है। संस्था के आय तथा व्यय पर नियन्त्रण रखने का बजट एक अत्यन्त प्रभावशाली तरीका है। प्रवन्धकों के लिए यह नियन्त्रण करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।

(2) वित्त नियन्त्रण वित्तीय योजनाओं का निर्माण, नियन्त्रण तथा आय का प्रवन्ध इस तकनीक में आता है।

(3) उत्पादन नियन्त्रण (Production Control)-इस प्रकार के नियन्त्रण का उद्देश्य उत्पादन क्रियाओं का संचालन तथा प्रबन्ध इस प्रकार से करने से है कि निर्धारित मात्रा में निर्धारित कीमत पर निर्धारित किस्म का माल उत्पन्न किया जा सके। इस तकनीक में उत्पादन क्रियाओं के नियोजन, मार्ग निर्धारण, समय निर्धारण, निर्गमन तथा अनुगमन की क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं।

(4) किस्म नियन्त्रण (Quality Control)-इस तकनीक में उत्पादित किये जाने वाले माल या वस्तुओं की फिल्म को नियंत्रित करने का प्रयत्न किया जाता है। इस विधि में वस्तु के रंग, रूप, आकार, डिलाइन परिधि आदि के प्रभाव निश्चित करके प्रमाणों के अनुसार ही वस्तु तैयार करने पर बल दिया जाता है।

(5) लागत नियन्त्रण (Cost Control)-लागत, नियन्त्रण भी प्रमुख तकनीक है जिसका उद्देश्य लागत को कम से कम करना होता है। इस दृष्टि से विभिन्न लागतों का विश्लेषण करके उनके प्रमाप तथा मानक निश्चित किये जाते हैं एवं तत्पश्चात् वास्तविक लागते मालूम करके प्रमापित एवं विचलन लेकर विचलन के कारणों को मालूम किया जाता है। उन्हें भविष्य में दूर करने का प्रयत्न किया जाता है।

(6) सामग्री नियन्त्रण (Material Control)-इस तकनीक के माध्यम से कच्चे माल आदि की पूर्ति को आवश्यकतानुसार बनाये रखा जाता है। सामग्री अधिक भी नहीं रखी जानी चाहिए और न कम ही, दोनों ही दशाओं में नुकसान होता है। इसलिए इस विधि के द्वारा स्टॉक को पर्याप्त मात्रा में रखा जाता है जिससे कि न तो पूँजी फँसी रहे और न कार्य बन्द रह सके।

(7) सम-विच्छेद बिन्दु विश्लेषण द्वारा नियन्त्रण (Control by Break-even Point Analysis)- प्रबन्धकों के लिए नियन्त्रण करने की अन्य तकनीक ‘सम-विच्छेद बिन्दु’ विश्लेषण है। इस तकनीक का नियन्त्रण में महत्व इसलिए है कि यह उत्पादन की विभिन्न मात्राओं एवं लागतों में सम्बन्ध बताता है, मूल्य निर्धारित करता है तथा विक्रय की मात्राओं एवं लाभ में सम्बन्ध स्पष्ट करता है।

(1) अवलोकन द्वारा नियन्त्रण (Control by Observation)- संस्था में कार्यरत व्यक्तियों के कार्यों का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन कर उन पर नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। इसके अन्तर्गत अधिकारी अपने कर्मचारियों से प्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क रखकर उनकी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करते हैं। थियो हैमन (Theo Haimann) के शब्दों में, “व्यक्तिगत अवलोकन करने में समय लगता है और ऊपरी तौर से यह एक अकुशल पद्धति दिखलाई देती है किन्तु अधीनस्थों की क्रियाओं के नियन्त्रण की कोई अन्य विधि इसके स्थान पर प्रयुक्त नहीं की जा सकती है।”

(2) अपवाद द्वारा नियन्त्रण (Control by Exception) यह नियन्त्रण की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके अन्तर्गत केवल उच्च प्रबन्ध का ध्यान उन्हीं बातों की ओर आकृष्ट किया जाता है जो कि योजना के अनुसार नहीं हो रही हैं अर्थात् यह विधि केवल अपवादजनक स्थिति में ही प्रबन्धकों का ध्यान आकर्षित करने पर बल देती है। इस विधि को स्थायी आदेश या नियम की विधि भी कहा जाता है।

(3) नीतियों द्वारा नियन्त्रण (Control by Policies)-नीतियाँ भी नियन्त्रण की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं। नीतियाँ वे सामान्य विवरण है जो एक संस्था के दैनिक कार्यों के निष्पादन में मार्गदर्शक तत्वों के रूप में काम में लायी जाती हैं। इनके आधार पर भविष्य में क्या करना है, इसका पहले से ही निर्धारण करना सम्भव हो जाता है। इसलिए इन्हें नियन्त्रण का एक साधन माना जाता है।

(4) उदाहरण द्वारा नियन्त्रण (Control by Example)- नियन्त्रण की इस तकनीक के अनुसार यदि एक उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थों की क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित करना चाहता है तो उसे अपने आचरण एवं व्यवहार को आदर्श उदाहरण के रूप में अपने कर्मचारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उनका आचरण एवं व्यवहार अधीनस्थों के लिए आदर्श बन जाता है जिसका अनुकरण वे कर सकते हैं।

(5) अभिलेखों एवं प्रतिवेदनों द्वारा नियन्त्रण (Control by Records and Reports) – अधीनस्थों के कार्यों के अभिलेखों एवं उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रतिवेदनों की जाँच-पड़ताल करने से भी उनकी क्रियाओं पर नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है। ये अभिलेख एवं प्रतिवेदन नियन्त्रण की एक अच्छी तकनीक के रूप में प्रयोग में लाये जाते हैं जबकि वे सरल हों।

(6) अंकेक्षण द्वारा नियन्त्रण (Control by Audit)- अंकेक्षण नियन्त्रण की एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है। यह कभी-कभी आन्तरिक व्यक्तियों द्वारा और कभी-कभी बाहरी व्यक्तियों द्वारा भी करवाया जा सकता है। इससे संस्था के कार्य-कलापों में होने वाली भूल-चूक, कपट तथा धन या माल का गवन आदि का तुरन्त पता लगाया जा सकता है।


Meaning and Definition of Control

The word control has many meanings which are used in different contexts. Where in one sense control has been considered as the function of an executive, in another sense it has been correlated with the planning function of the executive. In the third sense, control is expressed as the condition existing within a particular management system. In this way, the meaning of control is to find out whether the plans adopted for the fulfillment of the objectives of any undertaking or department are going on regularly or not, to know whether the subordinates are investigated and necessary improvements are called control. Huh.

According to Billy E. Goetz, “Managerial control means business

Events have to be made according to plan.

“According to George R. Tattery, “Controlling means deciding what is being done, that is, evaluating the works and making improvements when necessary, so that the tasks can be planned for execution.”

Necessity of Role Of Centrol

The more emphasis is laid on the need for control in business, the less it will be, an effective control system is the first requirement of successful management. This is the reason that nowadays most of the attention is given to the study and teaching of different types of control techniques in managerial education. The importance of control becomes clear from the following points

(1) Help in Coordination Coordination which is the essence of management action also becomes easy with the help of control. Controlling with the help of predetermined objectives and goals leads the entire organization to work in a coordinated manner towards the attainment of those goals.

(2) Help in Decentralization Modern systems of control have also helped in increasing the extent of decentralization to the management. It is only through control that maximum division of work is possible, devolution of authority is possible at lower levels and the exception principle of management gets success. It also enhances communication and makes the entire process of management successful.

(3) Control is the basis of planning – Control is the process which motivates to do the work according to the predetermined standards. The existence of a control system is the basis of effective planning. It is also the basis of long term planning. If the control process does not provide information and data about the actual performance to the managers, then how will they be able to do future planning.

(4) Establishment of Discipline To establish discipline in business, the control process acts as an infallible weapon. By efficient control, the opportunities for dishonesty, theft, corruption, unfair behavior etc. by the employees are reduced, as a result of which an environment of discipline arises.

(5) Under risk protection control, every work of the organization can be thoroughly checked and efforts are made to detect error points and rectify them and prevent recurrence in future. As a result, the risk of future errors is protected.

(6) Evaluation of performance – These parameters of performance are determined by the process of planning keeping in mind the future performance. The process of control compels the actual performance to follow these influences.

(7) The process of control over other functions of management also keeps control over other functions of management. Control is the bridge between planning and execution. This work highlights the difficulties faced in actual execution and also suggests necessary measures for their improvement in future.

• Methods, Techniques, Means (Aids) or Tools of Controll

Methods or techniques of control refer to the means by which control can be established. Modern managers use various techniques of control to establish effective control over the activities of their enterprise. From the point of view of convenience of study, these techniques can be understood in the following way

(A) General Methods of Control

Common methods or traditional techniques of control may include:

(1) Control by Observation – Control can be established by directly observing the actions of the people working in the organization. Under this, the officers establish control over their actions by keeping in direct contact with their employees. In the words of Theo Haimann, “Personal observation takes time and appears to be an inefficient method on the surface, but no other method of controlling the actions of subordinates can be used in its place.”

(2) Control by Exception – This is an important technique of control. Under this, only the attention of the top management is drawn towards those things which are not happening according to the plan, that is, this method emphasizes on attracting the attention of the managers only in exceptional situation. This method is also called the method of standing order or rule.

(3) Control by Policies – Policies are also important techniques of control. Policies are general statements that They are used as guiding elements in the performance of the day-to-day functions of the establishment. Based on these, it becomes possible to determine in advance what to do in future. Therefore, they are considered as a means of control.

(4) Control by Example – According to this technique of control, if a higher officer wants to establish control over the actions of his subordinates, then he should present his conduct and behavior in front of his employees as an ideal example. needed. His conduct and behavior become a role model for the subordinates to imitate.

(5) Control by Records and Reports – By checking the records of the work of subordinates and the reports submitted by them, control can be established on their actions. These records and reports are used as a good technique of control while they are simple.

(6) Control by Audit is an important technique of audit control. This can sometimes be done by internal people and sometimes by outsiders also. With this, mistakes and omissions in the activities of the organization, fraud and embezzlement of money or goods etc. can be detected immediately.

(7) Control by Motivation – By motivating the employees in the organization, control can be established on their actions. It is in a way a technique of self-control, that is, providing motivation to the employees and getting their voluntary cooperation is in fact giving rise to self-control. Therefore, the method of control by motivation is getting the most attention nowadays.

(8) Control by Disciplinary Action Under this method of control, if the employees working in the organization do not work properly, then control is established on them by taking disciplinary action against them. This is a negative method of control. Its purpose is to prevent employees from committing wrongdoing.

(9) Control by fixation of permanent boundaries This is also a method of control by which the jurisdiction of subordinates is limited. For example, the purchase manager has the right to purchase goods, but he can buy goods only up to one lakh rupees and on purchasing more than this, the permission of the general manager is necessary, then this control will be called control by fixation of permanent limits. .

(B) Specific Methods of Control

Under the specific methods of control or modern techniques, the following are included-

(1) Budgetary Control: Through this technique, the estimates of the budget and the actual results are compared. Budgeting is a very effective way to keep a check on the income and expenditure of the organization. For managers it is an important means of control.

(2) Finance Control The formulation of financial plans, control and management of income comes in this technique.

(3) Production Control – The purpose of this type of control is to conduct and manage the production activities in such a way that the specified type of goods can be produced in the prescribed quantity at the specified price. This technique includes the activities of planning, routing, scheduling, issuing and tracking production activities.

(4) Quality Control – In this technique an attempt is made to control the film of the goods or goods to be produced. In this method, emphasis is laid on preparing the object according to the evidence by determining the effect of color, form, shape, deline circumference etc.

(5) Cost Control – Cost control is also the main technique whose purpose is to minimize the cost. In this view, after analyzing the various costs, their standards and standards are fixed and after that, after finding the actual cost, the reasons for the deviation are ascertained by taking the metrics and deviations. Efforts are made to remove them in future.

(6) Material Control – Through this technique the supply of raw materials etc. is maintained as per the requirement. The material should not be kept too much and neither
Rarely, damage is done in both cases. Therefore, by this method the stock is kept in sufficient quantity so that neither the capital is trapped nor the work can be stopped.

(7) Control by Break-even Point Analysis – Another technique of controlling for the managers is ‘break-even point’ analysis. The importance of this technique in control is because it tells the relationship between different quantities and costs of production, determines the price and clarifies the relationship between sales volume and profit.

(1) Control by Observation – Control can be established by directly observing the work of the people working in the organization. Under this, the officers establish control over their actions by keeping in direct contact with their employees. In the words of Theo Haimann, “Personal observation takes time and appears on the surface to be an inefficient method”.

but no other method of controlling the actions of subordinates can be used in its place.”

(2) Control by Exception This is an important technique of control. Under this, only the attention of the top management is drawn towards those things which are not happening according to the plan, that is, this method emphasizes on attracting the attention of the managers only in exceptional situation. This method is also called the method of standing order or rule.

(3) Control by Policies – Policies are also important techniques of control. Policies are those general statements that are used as guiding elements in the performance of the day-to-day operations of an organization. Based on these, it becomes possible to determine in advance what to do in future. Therefore, they are considered as a means of control.

(4) Control by Example – According to this technique of control, if a higher officer wants to establish control over the actions of his subordinates, then he should present his conduct and behavior in front of his employees as an ideal example. needed. Their conduct and behavior becomes a role model for the subordinates which they can imitate.

(5) Control by Records and Reports – By checking the records of the work of subordinates and the reports submitted by them, control can be established on their actions. These records and reports are used as a good technique of control while they are simple.

(6) Control by Audit – Audit is an important technique of control. This can sometimes be done by internal people and sometimes by outsiders also. With this, mistakes and omissions, frauds and loss of money or goods etc. can be detected immediately in the activities of the organization.

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