एक प्राइवेट कम्पनी की परिभाषा दीजिए। प्राइवेट और पब्लिक कम्पनी में भेद बताइए। Define a private company. Differentiate between private and public company.

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निजी या अलोक कम्पनी का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Private Company)

निजी कम्पनी से आशय ऐसी कम्पनी से है जो कम्पनी अधिनियम 2013 के अन्तर्गत मामेलित होती है, सदस्यों की संख्या कम-से-कम 2 एवं अधिकतम 200 होती है, अपने अंशों एवं ऋण-पत्रों को खरीदने के लिए जनता को आमन्त्रित नहीं करती तथा अपने अंशों के हस्तान्तरण पर तिबन्ध लगाती है। इसकी प्रदत्त पूँजी कम-से-कम एक लाख या इससे अधिक होती है। इसके अतिरिक्त निजी कम्पनियाँ अपने नाम के आगे ‘प्राइवेट लि.’ (Private Ltd.) शब्द अनिवार्य रूप से गाती हैं।

कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (68) के अनुसार निजी कम्पनी से तात्पर्य ऐसी कम्पनी से है जिसकी प्रदत्त पूँजी कम से कम ₹ एक लाख या इससे अधिक निर्धारित की गई राशि की है तथा जो नपने अन्तर्नियमों द्वारा ;

(i) अपने अंशों, यदि हों तो, के अन्तरण पर प्रतिबन्ध लगाती है।

(ii) अपने सदस्यों की संख्या (एक व्यक्ति कम्पनी को छोड़कर) को 200 तक सीमित रखती है। इन सदस्यों में अग्रलिखित सदस्य सम्मिलित नहीं होते हैं–

(a) ऐसे व्यक्ति जो कम्पनी के कर्मचारी हैं एवं कम्पनी के सदस्य / अंशधारी भी हैं; तथा

(b) ऐसे व्यक्ति जो पहले कम्पनी के कर्मचारी होते हुए कम्पनी के सदस्य थे और अब कर्मचारी न होते हुए भी कम्पनी के सदस्य बने हुए हैं।

इनके अतिरिक्त, यदि 2 या अधिक व्यक्ति संयुक्त रूप से कम्पनी के अंशधारी हैं तो सदस्यों की गणना करते समय उन संयुक्त अंशधारियों को एक सदस्य ही गिना जायेगा।

(iii) अपने प्रतिभूतियों के क्रय के लिए जनता को निमन्त्रण देने पर निषेध लगाती है। इस प्रकार एक निजी कम्पनी से आशय ऐसी कम्पनी से है जिसकी न्यूनतम चुकता पूँजी ₹1 लाख या इससे अधिक निर्धारित हो, जिसके अंशों (यदि कोई हॉ) के हस्तान्तरण पर प्रतिबन्ध होता है, सदस्यों की अधिकतम संख्या 200 तक सीमित रहती है तथा जो अपने अंशों एवं ऋणपत्रों को क्रय करने के लिए जनता को निमन्त्रण देने का निषेध करती है। ऐसी कम्पनी अपने सदस्यों, संचालकों एवं उनके रिश्तेदारों के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों से जमाएँ आमन्त्रित करने या स्वीकार करने को भी निषिद्ध करती है। निजी कम्पनी के सदस्यों का दायित्व सीमित होता है।

निजी कम्पनी के लक्षण अथवा विशेषताएँ (Characteristics or Essentials of a Private Company)

निजी कम्पनी की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित है–

1. न्यूनतम प्रदत्त अश पूँजी कम्पनी अधिनियम, 2013 के अनुसर एक निजी कम्पी की कम से कम ₹ एक लाख की प्रदत्त अंश पूंजी होनी चाहिए। किन्तु यदि सरकार प्रदत्त अंश पूँजी की इस ब्यूनतम राशि को बढ़ाकर कोई नई राशि निर्धारित करती है तो निजी कम्पनी में भी उतनी ही प्रदत्त अंश पूँजी होनी आवश्यक है।

2. अश अन्तरण पर प्रतिबन्ध-निजी कम्पनी की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह अपने अंशधारियों के अंशों के अन्तरण के अधिकार पर प्रतिबन्ध लगा देती है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि एक निजी कम्पनी के अंशधारी अपने अंशों का अन्तरण कभी कर ही नहीं सकते।

3. सदस्यों की संख्या पर प्रतिबन्ध-निजी कम्पनी के न्यूनतम एवं अधिकतम सदस्यों की संख्या का उल्लेख कम्पनी अधिनियम में किया गया है। परन्तु सदस्यों की संख्या का यह प्रावधान उन निजी कम्पनियों पर लागू नहीं होता है जो एक व्यक्ति कम्पनी के रूप में पंजीकृत करवायी जाती है। एक व्यक्ति कम्पनी (निजी कम्पनी) में तो न्यूनतम एवं अधिकतम सदस्य संख्या केवल एक ही रहती है।

एक व्यक्ति कम्पनी के अतिरिक्त सभी निजी कम्पनियों में न्यूनतम 2 सदस्य होने आवश्यक हैं। इनमें सदस्यों की अधिकतम संख्या 200 तक सीमित रखनी पड़ती है। किन्तु 200 सदस्यों की इस संख्या की गिनती करते समय निम्न सदस्यों को शामिल नहीं किया जायेगा

(i) कम्प के वर्तमान कर्मचारी जो कम्पनी के सदस्य (अंशधारी) भी हैं।

(ii) कम्पनी के भूतपूर्व कर्मचारी जो कम्पनी में कार्य करते समय भी कम्पनी के सदस्य(अंशधारी) दे तथा जब नौकरी छोड़ने के बाद भी कम्पनी के सदस्य (अंशधारी) बने हुए हैं।

यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि यदि 2 या अधिक व्यक्तियों ने मिलकर संयुक्त नाम में किसी कम्पनी के अंश खरीदे है तो यहाँ सदस्यों की गणना करते समय उन संयुक्त अंशधारियों को एक ही सदस्य (प्रथम संयुक्त अंशधारी को) माना जाएगा। यह भी उल्लेखनीय है कि कम्पनी के संचालक कम्पनी के कर्मचारी नहीं होते हैं। अतः सभी संचालक अंशधारियों को कम्पनी सदस्य संख्या की गिनती में शामिल किया जायेगा।

4. अशो तथा ऋण-पत्रों के लिए जनता को निमन्त्रण देने पर निषेध-निजी कम्पनी की तीसरी | महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि निजी कम्पनी अपने अंशों तथा ऋण-पत्रों के अभिदान के लिए जनता को आमन्त्रित नहीं कर सकती। एक निजी कम्पनी निम्न स्रोतों से ही पूँजी प्राप्त कर सकती है

(i) अपने विद्यमान अंशधारियों को अधिकार अंशों का निर्गमन करके। बोनस अंश जारी करके।

(ii) बोनस अंश जारी करके।

(iii) अधिकतम 200 लोगों को निजी आधार पर अंशी का प्रस्ताव जारी करके ऐसे प्रस्ताव-पत्र प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 200 व्यक्तियों से अधिक को नहीं दिया जा सकता है।

5. सार्वजनिक जमाओं पर निषेध-निजी कम्पनियों पर विज्ञापन द्वारा सार्वजनिक जमाई स्वीकार करने तथा उनका नवीनीकरण करने पर भी निषेध दिया गया है। निजी कम्पनियों केवल अपने सदस्यों, संचालको अथवा उनके सम्बन्धियों से ही जारी स्वीकार कर सकती है।है

6. प्रविवरण जारी न करना–निजी कम्पनी को प्रविन जारी करने का अधिकार नहीं होता है |

7. नाम के साथ प्राइवेट लिमिटेड शब्द का प्रयोग-निजी कम्पनी को अपने नाम के साथ है प्राइवेट लिमिटेड शब्द भी जोड़ते हैं। ये शब्द संक्षिप्त रूप में भी लिखे जा सकते हैं।

8. अन्तयम-प्रत्येक निजी कम्पनी को अपने स्वयं के अन्तर्जियम बनाने पड़ते हैं। ऐसा इसलिए कि प्रत्येक निजी कम्पनी को कुछ प्रतिबन्ध सीनाएँ तथा निषेध अपने अन्तनियमों में अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने पड़ते हैं।

9. न्यूनतम संख्या में सदस्य-किसी भी निजी कम्पनी (एक व्यक्ति कम्पनी को छोड़कर) समामेलन हेतु कम-से-कम 2 व्यक्तियों द्वारा सीमानियन पर हस्ताक्षर करने अनिवार्य है। कम्प के समामेलन के उपरान्त ये दोनों अभिदाता ही कम्पनी के प्रथम सदस्य बनते हैं। एक व्यक्ि कम्पनी की दशा में केवल एक ही व्यक्ति सीमानियम पर हस्ताक्षर करता है। समामेलन के बाद अ एक व्यक्ति कम्पनी का वही अभिदाता ही अकेला सदस्य माना जायेगा।

10. न्यूनतम एवं अधिकतम संचालक प्रत्येक निजी कम्पनी (एक व्यक्ति कम्पनी छोड़कर) के न्यूजतन 2 संचालक होने अभिवार्य है। एक व्यक्ति कम्पनी की दशा में न्यूनतम ए संचालक होना अनिवार्य है। किन्तु सभी प्रकार की निजी कम्पनियों में (एक व्यक्ति कम्पनी सहि अधिकतम 15 संचालक हो सकते हैं।

प्राइवेट कम्पनी को प्राप्त विशेषाधिकार एवं छूटे (Privilege and Exemption Enjoyed by a Private Company)

कम्पनी अधिनियम 2013 के अन्तर्गत एक प्राइवेट कम्पनी को पब्लिक कम्पनी की अपेक्षा कुछ विशेषाधिकार एवं छूट प्राप्त हैं जो निम्न प्रकार है–

1. अंश पूँजी-एक निजी कम्पनी की प्रदत्त अंश पूँजी कम से कम ₹ एक लाख की होनी आवश्यक है जबकि सार्वजनिक कम्पनी की प्रदत्त अंश पूँजी कम से कम ₹ पाँच लाख होनी अनिवार्य है।

2. न्यूनतम सदस्य संख्या-इसके निर्माण के लिए कम से कम 2 सदस्यों की ही आवश्यकता पड़ती है जबकि एक सार्वजनिक कम्पनी को कम से कम 7 सदस्यों की आवश्यकता पड़ती है।

3. प्रविवरण- एक निजी कम्पनी प्रविवरण जारी नहीं कर सकती है तथा आवश्यकता भी नहीं पड़ती है जबकि कोई भी सार्वजनिक कम्पनी यदि अपनी प्रतिभूतियों के क्रय के लिए जनता को आमन्त्रित करती है तो उसे प्रविवरण का निर्गमन करना पड़ता है।

4. न्यूनतम अभिदान-एक निजी कम्पनी न्यूनतम अभिदान प्राप्त किये बिना ही प्रतिभूतियों का आवंटन कर सकती है, जबकि सार्वजनिक कम्पनी तब तक जनता को प्रतिभूतियों का आवण्टन नहीं कर सकती है जब तक वह न्यूनतम अभिदान की राशि प्राप्त नहीं कर लेती है।

5. संचालकों की न्यूनतम संख्या एक व्यक्ति कम्पनी को छोड़कर, प्रत्येक निजी कम्पनी में कम से कम 2 संचालक होने आवश्यक है, किन्तु सार्वजनिक कम्पनी की दशा में कम से कम 3 संचालक आवश्यक है। एक व्यक्ति कम्पनी की दशा में कम से कम 1 संचालक होना आवश्यक है।

6. स्वतन्त्र संचालक प्रत्येक सूचीबद्ध कम्पनी तथा सरकार द्वारा निर्धारित वर्ग या वर्गों की सार्वजनिक कम्पनियों के संचालक मण्डल के कुल संचालकों में से कम से कम एक-तिहाई संचालक स्वतन्त्र संचालक होने चाहिये किन्तु निजी कम्पनियों के संचालक मण्डल में स्वतन्त्र संचालक होने अनिवार्य नहीं है।

7. लघु अशधारियों का संचालक-किसी भी निजी कम्पनी के लिए लघु अंशधारियों में से कोई नियुक्त करना आवश्यक नहीं है किन्तु सभी सूचीबद्ध कम्पनियों को लघु अंशधारियों में से एक संयुक्त करना आवश्यक होता है, यदि कम से कम 1000 लघु अंशधारी अथवा कुल लघु पारियों में से कम से कम 10% अंशधारी उनमें से संचालक नियुक्त करने का नोटिस देते हैं।

8. अपने ही अशों के क्रय के लिए वित्तीय सहायता-कोई भी निजी कम्पनी अपने ही अंशों के के लिए किसी को भी कितनी ही वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है किन्तु सार्वजनिक कम्पनी अधिनियम के अधीन निर्धारित सीमा के भीतर ही ऐसा वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है।

9. कार्यवाहक संख्या यदि जी कम्पनी के अन्तनियमों में कोई अन्यथा प्रावधान नहीं है तो कम्पनी की सभा में यदि कम्पनी के 2 सदस्य व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होते हैं तो उस सभा की कार्यवाहक संख्या की पूर्ति मानी जाती है किन्तु सार्वजनिक कम्पनी की सभा के लिए कार्यवाहक संख्या की पूर्ति हेतु सभा में उपस्थित होने वाले सदस्यों की संख्या कम्पनी की कुल सदस्य संख्या के अनुरूप निर्धारित होती हैं। सार्वजनिक कम्पनी की सभा की दशा में कार्यवाहक संख्या निम्न होगी |

10. वार्षिक साधारण सभा का प्रतिवेदन प्रत्येक सूची सार्वजनिक कम्पनीको अ प्रत्येक सभा के सम्बन्ध में रीति से एक प्रतिवेदन तैयार कर उसे रजिस् के पास फाइल करना होता है किन्तु किसी भी निजी कम्पनी को ऐसा नहीं पड़ता है।

11. बारी से निवृत्त होने वाले संचालक-किसी भी निजी कम्पनी में बारी से (Retiria by rotuation) होने वाले संचालकों की नियुक्ति करना अनिवार्य नहीं है, किन्तु प्रत्येक सार्वज कम्पनी के कुल संचालकों में से कम से कम दो-तिहाई संचालक बारी से होने वाले अवश्य चाहिये। ऐसे संचालकों में से एक-तिहाई संचालक प्रतिवर्ष वार्षिक साधारण सभा के समय निवृत्त होते हैं

12. संचालकों की अयोग्यताएँ-कोई भी निजी कम्पनी अपने अन्तनियमों में संचालकों लिए कुछ अतिरिक्त अयोग्यताओं को भी जोड़ सकती है जबकि कोई भी सार्वजनिक कम्पनी ऐसा कर सकती है। सार्वजनिक कम्पनी केवल उन्ही अयोग्यताओं के आधार पर संचालकों को हटा सक है जिन्हें कम्पनी अधिनियम में दर्शाया गया है।

निजी कम्पनी के सार्वजनिक कम्पनी में परिवर्तन की विधि (Conversion of a Private Company into a Public Company)

एक निजी कम्पनी का सार्वजनिक कम्पनी के रूप में परिवर्तन की कानूनी विधि निम्नलिखित है–

1. संचालक मण्डल की सभा बुलाना एवं आयोजित करना- एक निजी कम्पनी को सार्वजि कम्पनी में परिवर्तित करने के लिए सर्वप्रथम संचालक मण्डल की सभा बुलायी जाती है का निम्नलिखित निर्णय लिये जाते हैं

(a) कम्पनी को सार्वजनिक कम्पनी में परिवर्तित करने का निर्णय।

(b) ऐसे परिवर्तन के कारण धारा 2(68) की शर्तों को अन्तनियमों से हटाने का निर्णय |

(c) कम्पनी की प्रदत्त अंश पूँजी यदि ₹5 लाख से कम है तो उसे कम से कम ₹5 लाख का का निर्णय।

(d) यदि कम्पनी में संचालकों की संख्या 3 से कम है तो कम से कम एक संचालक अनियुक्त करने का संकल्प पारित करने का साधारण सभा को सुझाव देना |

(e) कम्पनी की साधारण सभा या असामान्य साधारण सभा) बुलाने का निर्णय।

5. अधिकरण से अनुमोदन-तत्पश्चात् कम्पनी विशेष संकल्प को अधिकरण के अनुमोदन है भेजेगी। वह उल्लेखनीय है कि अन्तनियमों में परिवर्तन हेतु पारित विशेष संकल्प तब तक प्रभावही रहेगा जब तक कि अधिकरण ऐसे परिवर्तन के विशेष संकल्प का अनुमोदन नहीं कर देता। अधिकरण उचित समझेगा तो ऐसे परिवर्तन के विशेष संकल्प का अनुमोदन कर देगा।

6. सार्वजनिक कम्पनी का अस्तित्व समाप्त-जब अधिकरण अन्तनियमों के ऐसे परिवर्तन संकल्प का अनुमोदन कर देगा तब सार्वजनिक कम्पनी के अस्तित्व का अन्त हो जायेगा तथा नि कम्पनी अस्तित्व में आ जायेगी।

7. अन्तनियमों में परिवर्तन-अधिकरण के अनुमोदन के उपरान्त कम्पनी अपने में परिवर्तन कर धारा 2168 की अनुपालना के लिए सभी आवश्यक प्रतिबन्ध सीमाओं तथाषेध को जोड़ देगी। अन्त में जहाँ भी आवश्यक होगा वहीं पास को भी जोड़ेगी तत्पश्चात् कम्पनी अपने परिवर्तित अन्तनियमों को नये सिरे से मुद्रित करायेगी।

8. रजिस्ट्रार को प्रलेख प्रस्तुत करना तत्पश्चात् कम्पनी अधिकरण सेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर कम्पनी के परिवर्तित नियमों की एक मुद्रित प्रति तथा अधिकरण के आदेश की एक प्रति रजिस्ट्रार को फाइल करेगी। रजिस्ट्रार इनका पंजीयन कर लेगा और यह एक गया समान प्रमाण पत्र करेगा जिसमें इस बात का उल्लेख होगा कि एक निजी कम्पनी है।

9. प्राइवेट शब्द जोड़ना कम्पनी का नाम नहीं भी लिखित, मुद्रित एवं वहाँ नाम के साथ “प्रा.’ शब्द जोड़ना पड़ेगा तथा कम्पनी के नाम में परिवर्तन की सार्वजनिक सूचना का प्रकाशनका होगा।

10. स्कन्ध विनिमय केन्द्र को सूचित करना-यदि कम्पनी सूचीबद्ध है तो सभी सम्बन्धित स्कन्ध विनिमय केन्द्रों को सूचित करना होगा तथा कम्पनी के अंशों को असूच करने की कार्यवाही करनी होगी।

सार्वजनिक कम्पनी का निजी कम्पनी में परिवर्तन (Conversion of a Public Company into Private Company)

एक सार्वजनिक कम्पनीका कम्पनी में निम्नलिखित ढंग से परिवर्तन कर सकते हैं–

(1) संचालक मण्डल द्वारा निर्णय लेना-सर्वप्रथम कम्पनी का संचालक मण्डल यह निर्णय लेगा कि कम्पनी को सार्वजनिक कम्पनी से निजी कम्पनी में परिवर्तन कर लिया जाये तथा कम्पनी की सभा में इस निर्णय को विशेष प्रस्ताव के रूप में रखा जाये।

(2) सभा की सूचना भेजना-इसके पश्चात् कम्पनी के सदस्यों की सभा आयोजित करने हेतु प्रत्येक सदस्य को सभा की विधिवत् सूचना भेजी जाती है। इसके साथ सभा का कार्यक्रम भी भेजा जाता है।

(3) विशेष प्रस्ताव पारित करना- कम्पनी की साधारण सभा में कम्पनी परिवर्तित करने का निर्णय एक विशेष प्रस्ताव के रूप में रखा जाता है। साथ ही इस सभा में कम्पनी के अन्तनियमों में परिवर्तन की सदस्यों से आज्ञा प्राप्त कर ली जाती है। इसके अतिरिक्त कम्पनी के नाम के साथ प्राइवेट शब्द जोड़ने हेतु भी विशेष प्रस्ताव पारित किया जाता है।

(4) अन्तनियमों में परिवर्तन करना-विशेष प्रस्ताव पारित करने के बाद कम्पनी के अन्तनियमों में विशेष प्रस्ताव के अनुरूप परिवर्तन कर दिया जाता है।

(5) स्कन्ध विनिमय केन्द्रको अन्तनियम में संशोधन की प्रतियाँ भेजना-अन्तनियमों में संशोधन का प्रस्ताव पारित होने के बाद उस संशोधन प्रस्ताव की 6 प्रतियाँ उस स्कन्ध विनिमय केन्द्र के पास भेजनी पड़ती है जहाँ पर कम्पनी के अंश सूचीबद्ध है। इनमें एक प्रति प्रमाणित की हुई होती है।

(6) केन्द्रीय सरकार की स्वीकृति प्राप्त करना-निजी कम्पनी के अन्तनियम में परिवर्तन होने पर एक सार्वजनिक कम्पनी निजी कम्पनी में परिवर्तित हो जाती है, परन्तु इसके लिए केन्द्रीय सरकार से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

(7) प्रतिलिपि रजिस्ट्रार को भेजना सार्वजनिक कम्पनी द्वारा निजी कम्पनी में परिवर्तन की सूचना केन्द्रीय सरकार की अनुमति प्राप्त करने के 1 माह की अवधि में परिवर्तित अन्तनियम की छपी हुई एक प्रतिलिपि के साथ रजिस्ट्रार को भेजना आवश्यक होगा।

(8) समामेलन का नया प्रमाण पत्र प्राप्त करना सभी परिवर्तित प्रलेख प्रस्तुत करने के बाद कम्पनी द्वारा समामेलन के नये प्रमाणपत्र के लिए रजिस्ट्रार को आवेदन पत्र भेजा जाता है। रजिस्ट्रार परिवर्तित अन्तनियमों का पंजीयन एवं कम्पनी के नाम में आवश्यक परिवर्तन करेगा। अन्त में, कम्पनी के समामेलन का नया प्रमाण पत्र निर्गमित कर देगा।


Meaning and Definition of Private Company

Private company means a company which is incorporated under the Companies Act 2013, the number of members is not less than 2 and maximum 200, does not invite the public to buy its shares and debentures and its Puts restrictions on transfer of shares. Its paid-up capital is at least one lakh or more. Apart from this, private companies have ‘Private Ltd.’ in front of their name. (Private Ltd.) The words essentially sing.

According to section 2 (68) of the Companies Act, 2013, private company means a company having a paid-up capital of not less than one lakh rupees or more of such amount as may be prescribed by this Article;

(i) prohibits the transfer of its shares, if any.

(ii) limits the number of its members (other than a one person company) to 200. These members do not include the following members-

(a) persons who are employees of the company and are also members/shareholders of the company; And

(b) Persons who were earlier members of the company, being employees of the company and now being members of the company, not being employees.

In addition to these, if 2 or more persons are jointly shareholders of the company, then while computing the members, those joint shareholders shall be counted as one member only.

(iii) Prohibits the invitation to the public for the purchase of its securities. Thus a private company means a company whose minimum paid-up capital is fixed at ₹ 1 lakh or more, the transfer of shares (if any) is prohibited, the maximum number of members is limited to 200 and which Prohibits the invitation to the public to purchase shares and debentures. Such company also prohibits to invite or accept deposits from persons other than its members, directors and their relatives. The liability of the members of a private company is limited.

Characteristics or Essentials of a Private Company

Following are the important features of a private company-

1. Minimum Paid-up Share Capital As per the Companies Act, 2013, a private company should have a paid-up share capital of at least ₹ one lakh. But if the government decides a new amount by increasing this minimum amount of paid-up share capital, then it is necessary to have the same paid-up share capital in the private company.

2. Restrictions on Transfer of Shares – One of the main features of a private company is that it imposes restrictions on the right of its shareholders to transfer shares. This does not mean that the shareholders of a private company can never transfer their shares.

3. Restriction on the number of members – The minimum and maximum number of members of a private company has been mentioned in the Companies Act. But this provision of number of members does not apply to those private companies which are registered as one person company. In a one person company (private company), the minimum and maximum number of members remains only one.

Except for one person company, all private companies are required to have minimum 2 members. In these, the maximum number of members has to be limited to 200. But while counting this number of 200 members, the following members will not be included

(i) Existing employees of the company who are also members (shareholders) of the company.

(ii) Ex-employees of the company who have been members (shareholders) of the company while serving in the company and when they continue to be members (shareholders) of the company even after leaving their jobs.

It is to be mentioned here that if 2 or more persons together have bought shares of a company in joint name, then while computing the members, those joint shareholders will be considered as one member (the first joint shareholder). It should also be noted that the directors of the company are not the employees of the company. Therefore, all the directors’ shareholders will be included in the counting of the company’s members.

4. Prohibition on inviting public for cash and debentures – Third of private company. The important feature is that the private company cannot invite the public to subscribe its shares and debentures. A private company can get capital only from the following sources

(i) by issue of rights shares to its existing shareholders. By issuing bonus shares.

(ii) By issuing bonus shares.

(iii) By issuing share offer on private basis to a maximum of 200 persons, such offer cannot be given to more than 200 persons in each financial year.

5. Prohibition on public deposits – Prohibition has also been given on private companies to accept and renew public deposits through advertisements. Private companies can accept issuance only from their members, directors or their relatives.

6. Non-issuance of return – The private company does not have the right to issue a return.

7. Use of the word Private Limited with the name – The word Private Limited is also added to the name of the private company. These words can also be written in abbreviated form.

8. Antyam – Every private company has to make its own intermediary. This is because every private company has to compulsorily include some restrictions and prohibitions in its articles.

9. Minimum number of members-any private company (one person company) For amalgamation, at least 2 persons must sign the semenion. After the amalgamation of the company, both these subscribers become the first members of the company. In the case of a one person company, only one person signs the memorandum. After amalgamation, the same subscriber of a one person company shall be deemed to be the sole member.

10. Minimum and maximum number of directors Every private company (except one person company) must have at least 2 directors. In case of a one person company, it is mandatory to have at least A director. But in all types of private companies (including one person company there can be maximum 15 directors.

Privilege and Exemption Enjoyed by a Private Company

Under the Companies Act 2013, a private company has certain privileges and exemptions over a public company, which are as follows-

1. Share Capital – The paid-up share capital of a private company must be at least ₹ one lakh, while the paid-up share capital of a public company must be at least ₹ five lakh.

2. Minimum number of members- At least 2 members are required for its formation whereas a public company needs at least 7 members.

3. Prospectus- A private company cannot and is not required to issue a prospectus whereas any public company, if it invites the public to purchase its securities, has to issue a prospectus.

4. Minimum subscription – A private company can allot securities without receiving the minimum subscription, whereas a public company cannot allot securities to the public until it receives the minimum subscription amount.

5. Minimum number of directors Every private company, except a one person company, must have at least 2 directors, but in the case of a public company, at least 3 directors are necessary. In case of one person company, it is necessary to have at least 1 director.

6. Independent Directors At least one-third of the total directors of the board of directors of every listed company and public companies of the class or classes determined by the government should be independent directors, but it is not mandatory for private companies to have independent directors.

7. Operator of small shareholders – It is not necessary for any private company to appoint any of the small shareholders, but all the listed companies are required to combine one of the small shareholders, if there are at least 1000 small shareholders or total small shifts. At least 10% of the shareholders give notice to appoint directors among them.

8. Financial assistance for the purchase of its own shares – Any private company can provide financial assistance to anyone for its own shares, but the public company can provide such financial assistance only within the limits prescribed under the Act. Is.

9. Acting number If there is no other provision in the Articles of the Company, then if 2 members of the company are personally present in the meeting of the company, then the acting number of that meeting is considered to be fulfilled but for the meeting of the public company, the acting number The number of members present in the meeting is determined according to the total number of members of the company. In the case of a meeting of a public company, the acting number will be as follows:

10. Report of the Annual General Meeting Every public company has to prepare a report in respect of each meeting in the manner and file it with the Registry, but no private company has to do so.

11. Directors retiring out of turn- It is not mandatory to appoint directors who are retiria by rotuation in any private company, but at least two-third of the total directors of every public company should be from turn. Must have. One-third of such directors retire every year at the time of annual general meeting.

12. Disqualifications of Directors – Any private company can also add some additional disqualifications for operators in its Articles whereas any public company can do so. A public company can remove directors only on the grounds of such disqualifications which are specified in the Companies Act.

Method of Conversion of a Private Company into a Public Company

The following is the legal method for conversion of a private company into a public company-

1. To convene and organize a meeting of the Board of Directors- In order to convert a private company into a public company, first the meeting of the Board of Directors is called, the following decisions are taken

(a) The decision to convert the company into a public company.

(b) the decision to omit from the provisions of the provisions of section 2(68) by reason of such change.

(c) If the paid-up share capital of the company is less than ₹ 5 lakh, then it should be decided to at least ₹ 5 lakh.

(d) If the number of directors in the company is less than 3, then to suggest to the general assembly to pass a resolution to appoint at least one director.

(e) Decision to convene a general meeting or unusual general meeting of the company.

5. Approval from the Tribunal – Thereafter the company shall send the special resolution with the approval of the Tribunal. It is worth mentioning that the special resolution passed for the change in the provisions of the Articles will be effective till then.

shall remain the same until the Tribunal approves a special resolution for such alteration. The Tribunal may, if it thinks fit, approve the special resolution for such alteration.

6. Existence of public company – When the Tribunal approves the resolution of such alteration of the Articles, then the existence of the public company will cease to exist and the company will come into existence.

7. Changes in Articles – After the approval of the Tribunal, the company shall make changes in itself and add all necessary restrictions, limits and prohibitions for compliance of section 2168. In the end, wherever necessary, the pass will also be added, after which the company will get its changed Articles printed afresh.

8. Submission of documents to the Registrar Thereafter, the Companies Tribunal shall file a printed copy of the changed rules of the company and a copy of the order of the Tribunal to the Registrar within 15 days of the receipt of the application. The registrar will register them and it will issue a similar certificate stating that it is a private company.

9. Adding the word PRIVATE Not even the name of the company in writing, printed and therein with the name “Pvt.’ The word will have to be added and the public notice of change in the name of the company will be published.

10. Inform the Inventory Exchange Center – If the company is listed, then all the concerned Inventory Exchange Centers will have to be informed and action will be taken to delist the shares of the company.

Conversion of a Public Company into Private Company

A public company can be converted into a company in the following manner-

(1) Decision to be taken by the Board of Directors – First of all, the Board of Directors of the company will decide that the company should be changed from a public company to a private company and this decision should be placed in the company’s meeting as a special resolution.

(2) Sending notice of the meeting – After this, a duly notice of the meeting is sent to each member for holding the meeting of the members of the company. Along with this the program of the meeting is also sent.

(3) Passing of special resolution – In the general meeting of the company, the decision to convert the company is placed in the form of a special resolution. Along with this, permission is obtained from the members to change the Articles of the Company in this meeting. Apart from this, a special resolution is also passed to add the word private with the name of the company.

(4) Making changes in Articles- After passing a special resolution, changes are made in the Articles of the company according to the special resolution.

(5) Sending copies of amendments to the Articles to the Stock Exchange Center – After the proposal to amend the Articles is passed, 6 copies of that amendment proposal have to be sent to the Stock Exchange Center where the shares of the company are listed. One copy of these is attested.

(6) Obtaining the approval of the Central Government- A public company is converted into a private company when there is a change in the Articles of Association of a private company, but for this permission from the Central Government has to be obtained.

(7) Copy to Registrar It shall be necessary to send a notice of change of public company into a private company to the Registrar along with a printed copy of the amended Articles within a period of one month from the date of obtaining the permission of the Central Government.

(8) Obtaining a fresh certificate of amalgamation After the submission of all the changed documents, an application is sent by the company to the Registrar for a fresh certificate of amalgamation. The Registrar shall register the changed Articles and make necessary changes in the name of the company. Finally, the company will issue a fresh certificate of amalgamation.

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