“निर्णय लेना एक विवेकपूर्ण कार्य है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? विवेकपूर्ण निर्णय की सीमाओं का वर्णन कीजिए।

2
79

वास्तव में यह कवन कि “निर्णय लेना एक विवेकपूर्ण कार्य है” सत्य है। इस सम्बन्ध में कूण्टज एवं ओ’ होनेल (Koontz and o Donnel) ने कहा है कि निर्णय लेने के लिए प्रबन्ध को कदम-कदम पर विवेक का उपयोग करना पड़ता है। अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि विवेक क्या है ? कब कोई विवेकपूर्ण विचार करता है अथवा निर्णय लेता है ? यह तो प्रायः किसी समस्या के समाधान की प्रक्रिया के रूप में सोचा जाता है और एक समस्या की परिभाषा कभी-कभी उलझन, अनिश्चितता अथवा अस्त-व्यस्तता कही जाती है। यदि एक व्यक्ति का लक्ष्य उलझन अनिश्चितता अथवा अस्त-व्यस्तता की स्थिति है तो कोई भी समस्या नहीं रहती। यदि कोई समस्या ही नहीं है तो फिर कोई निर्णय लेने का प्रश्न ही नहीं उठता। विवेक क्या है ? इस सम्बन्ध में हरबर्ट ए. साइमन (Herbert A. Simon) ने विभिन्न प्रकार के विवेकों का उल्लेख किया है। सामान्यतः विवेक की अवधारणा को उद्देश्यपूर्ण एवं बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। प्रायः इसे साधन एवं साध्य (Means and End) के बीच एक निर्धारित व्यवहार के रूप में बताया जाता है। यदि किसी साधन का चयन लक्ष्यों अथवा सायों (Targets or Ends) की प्राप्ति करने के लिए किया जाता है तो हम इस निर्णय को विवेकपूर्ण निर्णय कहते हैं।

 

एक व्यक्ति विवेकपूर्ण कार्य कर रहा है, इस सम्बन्ध में पहली बात होती है लक्ष्य की प्रयास निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किये जाने चाहिए। दूसरी बात है वैकल्पिक उपायों की पूरी समझदारी। इनमें से किसी एक को अपनाकर वह निश्चित स्थान पर पहुँच सके। इस सम्बन्ध में तीसरी बात होती है विकल्पों का विश्लेषण तथा मूल्यांकन अपने उद्देश्य के सन्दर्भ में करने की योग्यता इस सम्बन्ध में अन्तिम किन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात उन विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ विकल्प चुनने की है ताकि हम अपने निर्धारित लक्ष्य को सर्वश्रेष्ठ ढंग से प्राप्त कर सकें। इस प्रकार यदि कोई निर्णय लिया जाता है तो हम इसे “विवेकपूर्ण निर्णय’ (Rational Decision) कहेंगे। हरबर्ट ए. साइमन (Herbert A. Simon) के अनुसार, “एक निर्णय को संगठनात्मक रूप से विवेकपूर्ण निर्णय कहेंगे, यदि वह संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से लिया गया है और इसे व्यक्तिगत रूप से विवेकपूर्ण कहेंगे, यदि इसे व्यक्तिगत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए लिया गया है। ”

 

विवेकपूर्ण निर्णय की सीमाएँ (Limitations of Rational Decision) – विवेकपूर्ण निर्णय की सीमाओं से आशय उन घटकों से है जो कि निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में रुकावटें उत्पन्न करते हैं। जिस प्रकार कि एक चिकित्सक का प्राथमिक कार्य रोग के मूल कारणों का पता लगाकर उसका उपचार प्रारम्भ करना है, उसी प्रकार एक प्रबन्धक का मूलभूत कार्य उन घटकों का पता लगाना एवं उनका विश्लेषण करना है जो कि किसी समस्या के लिए महत्वपूर्ण है और उसके समाधान के अवसरों को सीमित अथवा प्रतिबन्धित करते हैं। यदि ऐसे घटक न हो तो सम्भतवः कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी। अध्ययन में सुविधा की दृष्टि से विवेकपूर्ण निर्णयन की सीमाएँ निर्धारित करने वाले घटकों को निम्न दो भागों में बाँट सकते हैं

 

(1) निर्णयन यन्त्र (Decision Making Mechanism) निर्णयन तन्त्र की कुछ महत्वपूर्ण मान्यताएँ हैं। निर्णयन तन्त्र यह मानकर चलता है कि

(i) चुनाव (Choice) के समस्त विकल्प ज्ञात हैं, (ii) चुनाव के सभी परिणाम ज्ञात है तथा (iii) निर्णयकर्ता की पूर्ण उपयोगिता है किन्तु व्यवहार में ऐसी मान्यताएँ शायद ही पूरी होती हों। उदाहरण के लिए, निर्णयकर्ता को न तो सम्पूर्ण विकल्पों की जानकारी होती है और न उनके परिणामों की ही। अतएव वह उतना विवेकपूर्ण नहीं ले सकता जितनी कि उससे आशा की जाती है। ऐसी स्थिति में निर्णयकर्ता विभिन्न विकल्पों का चयन करते समय उसे कई-कई सीमाओं में होकर गुजरना पड़ता है, जैसे (1) अधिकार क्षेत्र की सीमा, (ii) क्षेत्र सीमा, (iii) मापदण्डों की सीमा, (iv) वित्तीय सीमा, (v) समय सीमा, (vi) वांछित व्यवहार सीमा, (vii) बाहरी समूहों के प्रभाव की सीमा, जैसे-(अ) सरकार की सीमा-केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय सरकार, (ब) प्रबन्ध से अनुबन्ध करने वाले दलों सम्बन्धी सीमा, (स) आर्थिक समूहों द्वारा लगाये गये प्रतिबन्धों सम्बन्धी सीमा, जैसे-व्यावसायिक संघ, व्यापारिक संघ द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, आदि।

मान लीजिए कि सम्भावित विकल्पों का चयन कर लिया गया है, उनकी प्राथमिकता का क्रम भी निर्धारित कर दिया है तथा उनकी दृष्टि में सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन भी कर लिया गया है तत्पश्चात् इन विभिन्न विकल्पों के परिणामों के ज्ञात करने की समस्या उत्पन्न होगी। किसी निर्णय के परिणाम को प्रभावित करने वाले कई घटक होते हैं। इनमें से कुछ पर तो नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है और कुछ पर नियन्त्रण स्थापित करना सम्भव नहीं है। इस प्रकार के सभी निर्णयों का परिणाम ज्ञात करने के उपरान्त ही ज्ञात किया जा सकता है। अतएव भावी घटनाओं के बारे में भविष्यवाणी करना भी विवेकपूर्ण निर्णयन की एक महत्वपूर्ण सीमा है।

 

(II) निर्णयन में मानवीय घटक (Human Factor in Decision-making) मानवीय घटक भी महत्त्वपूर्ण निर्णयन की प्रमुख सीमा है क्योंकि प्रत्येक निर्णयन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में कई मानवीय घटकों से प्रभावित होता है, जैसे-व्यक्तिगत मूल्य एवं मान्यताएँ, प्रत्यक्ष ज्ञान, सामाजिक घटक, राजनैतिक शक्ति तथा सत्ता व्यवहार आदि। ये सभी घटक निर्णयन को सीमित करते हैं। इनमें प्रमुख घटक निम्न है विवेकपूर्ण

(1) व्यक्तिगत मान्यताएँ, प्रवृत्तियाँ मूल्य आदि (Personal Assumptions, Attitudes, Value etc.)-चूँकि निर्णय मानव द्वारा लिये जाते हैं। अतएव उसका मानवीय व्यवहार की सीमाओं से प्रभावित होना स्वाभाविक है। प्रत्येक निर्णयकर्ता अपनी प्रवृत्तियों, मान्यताओं, पूर्वाग्रहों तथा मूल्यों से निश्चयात्मक रूप में प्रभावित होता है। एक व्यक्ति किसी समस्या को महत्व देता है तो दूसरा व्यक्ति किसी दूसरी समस्या को महत्व देता है। वह मिथ्यापूर्वक यह मान बैठता है कि प्रमुख समूह वही सोचता है कि जो कि वह स्वयं सोचता है। व्यक्तियों की ये भिन्नताएँ, मान्यताएँ, मूल्य आदि निर्णयन के क्षेत्र को सीमित कर देती हैं।

(2) प्रत्यक्ष ज्ञान (Preception)-किसी समस्या और उसके समाधान के सम्बन्ध में व्यक्तिगत प्रत्यक्ष ज्ञान भी भिन्न होगा और फलस्वरूप समस्या का सामना करने का ढंग भी अलग-अलग होगा। इसका कारण यह है कि लोग वही करते हैं जो कि वे देखते हैं। प्रत्यक्ष ज्ञान कई चरों से प्रभावित होता है जिनमें से अधिकांश किसी व्यक्ति के चरित्र से प्रभावित होते हैं। उदाहरण के लिए, मनोवैज्ञानिक संगठनात्मक समस्याओं का समाधान व्यक्तिगत व्यवहार को ध्यान में रखकर करते हैं और इन्जीनियर्स मशीनों और उन पर कार्यरत व्यक्तियों को ध्यान में रखकर करते हैं। प्रत्यक्ष ज्ञान की ये भिन्नताएँ निर्णयन को सीमित करती है।

(3) राजनीतिक दशाएँ तथा सत्ता व्यवहार (Political Condition and Authority Behaviour)- विवेकपूर्ण निर्णयन देश की राजनीतिक दशाओं तथा सत्ता व्यवहार से भी प्रभावित होता है जहाँ एक ओर प्रजातन्त्र वाले देश में व्यक्ति निर्णय लेने में अधिक स्वतन्त्र होता है, वहाँ दूसरी ओर साम्यवादी व्यवस्था वाले देश में व्यक्ति निर्णय लेने में उतना ही अधिक प्रतिबन्धित होता है। इसी प्रकार से सत्ता का व्यवहार भी निर्णयन को सीमित करता है। उदाहरण के लिए, किसी भी समस्या के समाधान के सम्बन्ध में निर्णयन लेने से पूर्व सम्बन्धित अधिकारी को उक्त समस्या के समाधान में उच्च अधिकारियों का रुख भी देखना पड़ता है अर्थात् सत्ता क्या चाहती है क्योंकि उसे उसकी के अनुरूप निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ता है। इस सम्बन्ध में ऐसे सैकड़ों उदाहरण प्रस्तुत किये जा सकते हैं जिनमें यदि किसी अधिकारी ने देश की राजनीतिक शासन व्यवस्था के प्रतिकूल निर्णय लिया है अथवा उच्च सत्ता के रुख, विचार, स्वीकृति के विरुद्ध निर्णय लिया है तो वह ऐसे दबाव की स्थिति में आ जाता है कि सिवाय त्याग-पत्र देने के दूसरा रास्ता ही नहीं बचता है। इस प्रकार राजनीतिक दशाएँ तथा सत्ता व्यवहार भी हमारे निर्णयन को सीमित करता है।

(4) सूचनाएँ एकत्र करने की सीमाएँ (Limitations of Gathering Informations)-सूचनाएँ एकत्र करने की मानवीय सीमाएँ भी निर्णयन को सीमित करती हैं। इसके लिए प्रथम तो लिये जाने वाले किसी निर्णय से सम्बन्धित हमारे लिए ऐसी समस्त सूचनाओं का संकलन करना सम्भव नहीं है जो कि उसे प्रभावित कर सकती हॉ। निर्णय सीमित विवेक के वातावरण में लिये जाते हैं। निर्णयकर्ता अपने तरीके से सूचनाओं को एकत्र करता है और इस प्रकार चुनाव का क्षेत्र सीमित अथवा प्रतिबन्धित रहता है। ये प्रतिबन्ध कई प्रकार से लगाये जा सकते हैं, जैसे-वैधानिक प्रतिबन्ध, नैतिक प्रतिबन्ध, औपचारिक नीतियाँ तथा नियम, अनौपचारिक सामाजिक मानक, परम्परागत रीतियाँ आदि।

  • (5) समय सीमा (Time Limit)-समय सीमा भी निर्णयकर्ता को विवेकपूर्ण निर्णय लेने में बाधाएँ उत्पन्न करती है। इसका कारण यह है कि कई बार सत्ता द्वारा निर्णयकर्ता को यह निर्देश दिया जाता है कि वह एक निश्चित अवधि में निर्णय ले। यह समय इतना कम होता है कि निर्णयकर्ता के लिए यह बिल्कुल सम्भव नहीं हो पाता है कि वह समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर सके, आवश्यक आँकड़े एकत्र कर सके तथा यदि आवश्यक हो तो विशेषज्ञों से भी परामर्श ले सके। समय की सीमा निर्णयकर्ता को आंशिक सूचनाओं, आंशिक आँकड़ों आदि पर भी अधिकांश निर्णय लेने के लिए बाध्य करती है।

2 COMMENTS

  1. Id prefer to thank you for that efforts youve made in writing this post.
    I am hoping the exact same very best function from
    you inside the future also. In reality your creative writing skills
    has inspired me to start my own BlogEngine weblog now.

    Feel free to visit my web page … News World

  2. Hi! This is kind of off topic but I need some help from an established blog.
    Is it very hard to set up your own blog? I’m not very techincal
    but I can figure things out pretty fast.
    I’m thinking about setting up my own but I’m not sure where to begin. Do
    you have any points or suggestions? Cheers

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here