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छत्तीसगढ़ के अजीत जोगी कौन है?

आज हम बात करेंगे अजित जोगी के बारे में

अजित जोगी: मध्यप्रदेश के विभाजन के समय एक नया राज्य छत्तीसगढ़ के नाम पर बनाया जा रहा था 1 नवम्बर 2000 को तब नए राज्य को संभालने के लिए अजित जोगी जी का चयन किया गया और जोगी जी 2000 से 2003 तक नए राज्य छत्तीसगढ़ को संभाला। राज्य विधायिका के लिए निर्वाचित होने के अलावा संसद के दो (2) बार सदन के सदस्य भी रह चुके है वर्ष 2016 में। अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को कांग्रेस विरोधी गतिविधियों के लिए कांग्रेस से हटाने के साथ ही छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में उप-चुनावों को खत्म कर दिया गया था। अमीत जोगी को तो 6 साल के लिए कांग्रेस से हटाया गया था। वर्ष 2004 में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में जोगी बुरी तरह घायल होकर आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गए और तब से वे व्हीलचेयर पर ही थे लेकिन एक नेता के रूप में उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी। 9 मई 2020 को दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित रायपुर के श्री नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वे निरंतर कोमा में थे और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। 20 दिनों तक अनेक हृदयघात से जूझने के बाद 29 मई 2020 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

अजित जोगी के कुछ रोचक तथ्‍य के बारे में……..!

अजित जोगी ‘रोचक तथ्‍य’ एक राजनेता के आलावा जोगी जी ने अपना एक अलग छवि बनाते हुए अजीत जोगी ने अपनी पहचान लेखक के तौर पर ‘दा रोल ऑफ़ डिस्ट्रीक कलेक्टर’ और ‘एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर पेरीफेरल एरियाज’ जैसी किताबें भी लिख चुके है। इतना ही नहीं यह भोपाल के मौलाना आजाद कॉलेज में मैकनिकल इंजिनियरिंग में गोल्ड मेडेलिस्ट रह चुके है। साथ ही आईएएस के तौर पर इन्होंने 1981-85 तक इंदौर के जिला कलेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दी है।

जाति का विवाद

भाषण देने की कला में माहिर माने जाने वाले अजीत जोगी अपनी जाति को लेकर भी विवादों में रहे। कुछ लोगों ने दावा किया कि अजीत जोगी अनुसूचित जनजाति से नहीं हैं। मामला अनुसूचित जनजाति आयोग से होते हुए हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लेकिन अजीत जोगी कहते रहे हैं कि हाईकोर्ट ने दो बार उनके पक्ष में फैसला दिया है। मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच करने की बात कही। यह जांच छत्तीसगढ़ सरकार के पास है।

नंगे पैर जाते थे स्कूल

छत्तीसगढ़ में वर्ष 1946 में अजीत जोगी का जन्म हुआ। वह उन दिनों नंगे पैर स्कूल जाया करते थे। उनके पिता ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था, इसलिए उन्हें मिशन की मदद मिली थी। अजीत जोगी जितने प्रतिभावान रहे हैं, उतने ही उनमें नेतृत्व के गुण भी रहे हैं, इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर मसूरी में प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान तक सब जगह वे अव्वल आने वालों में भी शामिल रहे और राजनीति करने वालों में भी।

राजनीतिक घटनाओं के बारे में…….!

राजनीतिक घटनाक्रम 2018 अजीत जोगी ने घोषणा की वह राजनंदगांव और मारवाही सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इसका मतलब है कि वह सीधे डॉ. रमन सिंह को चुनौती देंगे। 2016 जून 2016 में, अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नामक एक नए राजनीतिक संगठन की स्थापना की। 2009 2009 के लोकसभा चुनावों में चुने जाने के बाद जोगी ने लोकसभा सदस्य छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र के रूप में काम किया। हालांकि, जोगी 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखने में असफल रहे और बीजेपी के चंदू लाल साहू से 133 मतों से हार गए। 2008 छत्तीसगढ़ की विधान सभा के सदस्य के रूप में जोगी चुने गए, यह मारवाही निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। 2004 यह 14 वीं लोकसभा में महासामुंड, छत्तीसगढ़ के लिए सांसद के रूप में चुने गए।

पूर्व इतिहास 1974 अजीत जोगी भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुने गए। 1974 से 1986 तक मध्य प्रदेश के सिधी, शाहडोल, रायपुर और इंदौर जिलों में 12 वर्षों से जोगी ने सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट का रिकॉर्ड स्थापित किया। 1968 उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। कॉलेज के दिनों में जोगी अपने विभाग में छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने जा चुके है। 1967 अजीत जोगी ने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक व्याख्याता (1967-68) के रूप में भी काम किया।

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