भारत माता कविता के आधार पर पंतजी की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए। Throw light on the language style of Pantji on the basis of Bharat Mata poem.

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उत्तर कवि सुमित्रानन्दन पंत छायावाद के प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं तथा उनकी गणना छायावादी कवि चतुष्टय के अन्तर्गत की जाती है। इन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है। खड़ी बोली कविता के लोकप्रिय कवि हैं।

भाषा के क्षेत्र में पन्तजी ने अधिक बारीकी से काम किया है। पन्तजी की भाषा में सम्प्रेषण की क्षमता विद्यमान है। उसमें कोमलकान्त मधुर पदावली का प्रयोग है। भारत माता कविता शान्त रस प्रधानता वाली, राष्ट्र भक्ति की व्यक्त करती रचना है। संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ तद्भव शब्दों के प्रयोग भी मृदुल भावों से किये है भारत माता कविता में ग्राम्य जीवन की शब्दावली का प्रयोग हुआ है। कहीं-कहीं जनप्रचलित उर्दू-फारसी के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है।

कोमलकान्त पदावली में संगीतात्मकता और गेयता है।


Answer: Poet Sumitranandan Pant is one of the main pillars of Chhayavad and he is counted under Chhayavadi poet Chatushtay. He is called the sweet poet of nature. He is a popular poet of Khari Boli poetry.

In the field of language, Pantji has worked more closely. The ability of communication exists in Pantji’s language. There is the use of soft melodious words in it. Bharat Mata poem is a composition expressing patriotism, with a calm rasa predominance. Along with the similar words of Sanskrit, Tadbhav words have also been used with soft expressions, in the Bharat Mata poem, the terminology of rural life has been used. At some places, popular Urdu-Persian words have also been used.

There is musicality and lyricism in the Komalkant Padavali.

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