‘भारत अपने घर में ही हार गया है।” से कवि का आशय स्पष्ट कीजिए। Explain the meaning of the poet by ‘India is lost in its own home’.

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कविवर सुमित्रानन्दन पंत ने अपनी कविता भारत माता में अंग्रेजों की पराधीनता की जंजीरों में जकड़े हुए भारतवासियों की मार्मिक दशा का चित्रण किया है।

पन्त जी कहते हैं कि मातृशक्ति भारतवर्ष के गाँवों में निवास करती है। दूर-दूर तक फैले हुए खेतों की मखमल जैसी हरियाली ही भारत माता का धूल-धूसरित आंचल है। वह पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ी हुई अपनी सन्तानों की दयनीय दशा को देखकर रुदन कर रही है। दीनता के कारण वह जड़वत-सी हो गयी है। वह बिना पलक झपकाये नीचे की ओर निहारती हुई ऐसी लग रही है, जैसे आवाजरहित करुण क्रन्दन उसके अधरों में समा गया हो। इस प्रकार युगों-युगों से आन रूपी अन्धकार में डूबे हुए भारतवासियों को देखकर उसका हृदय अवसाद, निराशा और उदासी से भर गया हो। ऐसा प्रतीत होता है कि वह अपने ही घर में रहते हुए भी परदेशी की तरह जी रही हो। उसकी स्वर्णिम धान्य सम्पदा को पैरों तले रौंदा जा रहा है, जिससे उसके सहनशील और उदार मन में भी कुण्ठा का भाव व्याप्त हो गया है। उसके कारण क्रन्दन से कांपते हुए होठों की मुस्कान लुप्त हो गयी है। जैसे मानो राहू ने उसे ग्रास ले लिया हो। क्षितिज तल में व्याप्त अन्धकार उसकी चिह्नित भौहों के रूप में और बादलों से आह्लादित आकाश की नीलिमा उसके झुके हुए नेत्रों की नीलिमा के रूप में दिखाई दे रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि श्रीमद्भागवतगीता के ज्ञान रूपी प्रकाश को बिखेरने वाली भारत माता के मुख-मण्डल का सौन्दर्य कालिमायुक्त चन्द्रमा की तरह मलिन पड़ गया है।

लेकिन भारत माता उत्साहित भी है क्योंकि उसके पुत्रों को यह अहसास हो गया है कि उसके दुःख का कारण क्या है ? वे अब दुःख की बेड़ियों को तोड़ने के लिए प्रयत्नरत हो गये हैं। उसे विश्वास हो गया है कि विपन्नता, दीनता, जड़ता, कुण्ठा, मलिनता एवं दुःख के दिन अब शीघ्र ही समाप्त हो जायेंगे।

आशय यह है कि कवि ने भारत माता की विपन्नता, दीनता, जड़ता, कुण्ठा, मलिनता एवं विषादपूर्ण दशा का चित्रण कर एक ओर पराधीनता के युग में उसके अभिचित्रित किया है, तो दूसरी और उसके मातृ स्नेह एवं मातृत्व को अभिव्यंजित करने का सफल प्रयास किया है।


Poet Sumitranandan Pant, in his poem Bharat Mata, has depicted the poignant condition of the Indians trapped in the chains of British independence.

Pant ji says that the mother power resides in the villages of India. The velvet-like greenery of the fields spread far and wide is the dusty zenith of Mother India. She is weeping on seeing the pitiable condition of her children who are fettered in the shackles of independence. Due to humility, she has become dead. She looks down without blinking an eye, as if a voiceless cry of compassion has engulfed her lips. Seeing the people of India, who have been immersed in such darkness since ages, his heart is filled with depression, despair and sadness. It seems that she is living like a foreigner even though she is living in her own house. His golden grain wealth is being trampled under his feet, causing frustration even in his tolerant and generous mind. Because of that the smile of lips trembling with cry has vanished. It was as if Rahu had taken hold of him. The darkness in the horizon plane is visible in the form of his marked eyebrows and the blueness of the sky filled with clouds is visible in the form of the blue of his bowed eyes. It seems that the beauty of the face of Mother India, which spreads the light of knowledge of Shrimad Bhagwat Geeta, has become discolored like a black moon.

But Mother India is also excited because her sons have realized what is the reason for her sorrow. They are now trying to break the shackles of sorrow. He has been convinced that the days of poverty, humility, inertia, frustration, filthiness and sorrow will soon end.

The intention is that the poet has depicted the poverty, humility, inertia, frustration, defilement and sad condition of Mother India and depicted her in the era of independence on the one hand, and on the other hand she tried to express her maternal affection and motherhood. Is.

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