औपचारिक एवं अनौपचारिक पत्रों में अन्तर बताइए। Differentiate between formal and informal letters.

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औपचारिक पत्र, साथ ही व्यावहारिक पत्र भी अनेक मर्यादाओं और औपचारिकताओं से बँधे होते हैं, किन्तु अनौपचारिक पत्र में अपनापन और हृदय की बात कहने की ओर झुकाव रहता है। ये औपचारिक पत्रों की अनेक मर्यादाओं व औपचारिकताओं से बँधे नहीं रहते। औपचारिक पत्रों के अन्तर्गत सरकारी तथा व्यावसायिक पत्र आते हैं। इनकी भाषा नपी-तुली, स्पष्ट और निर्विवाद रहती है। इनमें मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए विषय-वस्तु व शैली की औपचारिकताओं का निर्वाह होता है। ‘अनौपचारिक पत्र सामाजिक व निजी पत्र होते हैं। ये पत्र कलात्मक रचनाएँ होती हैं। इनके

अन्तर्गत सामाजिक व निजी पत्र, बधाई पत्र, निमन्त्रण पत्र, आमन्त्रण पत्र, परिचय पत्र और अन्य कार्यों से सम्बन्धित, सगे सम्बन्धी, प्रियजनों, मित्रों को लिखे जाने वाले पत्र शामिल रहते हैं। ये पत्र भावना एवं विचार प्रधान होते हैं। इनमें आत्मीयता झलकती है। इनमें पत्र-लेखक का व्यक्तित्व प्रतिबिम्बित होता है। ये पत्र मानवीय उद्गारों का भण्डार होते हैं। इनमें सौजन्यता, सहृदयता और विशिष्टता होती है। मान व मन के मनोविकार, भावों का आवेश, सब कुछ कहने की आकांक्षा, आदर, सम्मान, स्नेह, वात्सल्य, दया, करुणा, क्षमा, सन्तोष, असन्तोष सभी कुछ इसमें अभिव्यक्ति का माध्यम सहज रूप में बनते हैं। इनमें बड़ों के प्रति आदर भाव, छोटों के प्रति वात्सल्य और सम-वयस्कों के प्रति प्रेम भरा सम्बोधन व अभिवादन होता है।


Formal letters, as well as practical letters, are bound by many limitations and formalities, but in informal letters, there is an inclination towards speaking from the heart. They are not bound by the many limitations and formalities of formal letters. Official and business letters come under formal letters. Their language is measured, clear and undisputed. Keeping in mind the limitations, formalities of subject matter and style are fulfilled. Informal letters are social and private letters. These letters are artistic creations. of their

Under this, social and personal letters, congratulatory letters, invitation letters, letters of invitation, letter of identity and other works, letters written to relatives, loved ones, friends are included. These letters are emotion and thought-oriented. There is intimacy in them. It reflects the personality of the letter writer. These letters are a storehouse of human words. They have courtesy, kindness and uniqueness. The mood of the mind and the mind, the passion of the feelings, the desire to say everything, respect, respect, affection, affection, kindness, compassion, forgiveness, contentment, dissatisfaction, all these easily become the medium of expression in it. In these there is respect towards elders, affection towards younger and loving address and greetings towards equal adults.

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