कार्यक्रम में सर्वप्रथम प्राचार्य एवं प्राध्यापकों द्वारा आमन्त्रित अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अध्यक्ष एवं प्राचार्य के उद्बोधन के बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत हुई। महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा ‘वर दे वीणा वादिनी वर दे’ सरस्वती गीत प्रस्तुत किया, जिसकी आमन्त्रित अतिथियों एवं उपस्थित अभिभावकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। तदुपरान्त प्रेमचन्द की कहानी ‘कफन’ पर आधारित नाटक छात्रों की ओर से प्रस्तुत किया गया। ‘घीसू’ ‘माधव’ का सहज सटीक अभिनय ने छात्रों को मन्त्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य ‘पंथी’ ने भी समाँ बाँध दिया। ताल पर नृत्य, मांदर का वादन, पात्रों का श्रृंगार सभी कुछ मोहक था एकल गान मेरे वतन के लोगों ने प्रेक्षकों में राष्ट्रीयता की भावना संचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ‘रीढ़ की हड्डी” एकांकी की प्रस्तुति जिसमें छात्र/छात्राओं की सामूहिक भागीदारी थी, की सबने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम के अगले चरण में भारतेन्दु जी का नाटक ‘अन्धेर नगरी’ भी प्रस्तुत किया गया। अन्त में ‘हम होंगे कामयाब’ गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आमन्त्रित अतिथियों एवं दर्शकों के प्रति आभार प्रदर्शन प्रोफेसर दिनेश राठौर ने किया।

अन्त में इतना कहना होगा कि कार्यक्रम के प्रेक्षक कुशल रसज्ञ थे। कार्यक्रम के प्रारम्भ से अन्त तक दर्शकों की उपस्थिति सराहनीय रही।


In the program, the invited guests were first welcomed by the Principal and Professors. After the speech of the chief guest of the program, the president and the principal, a colorful cultural program started. The students of the college presented Saraswati song ‘Var De Veena Vadini Vaar De’, which was praised by the invited guests and the parents present. After that a play based on Premchand’s story ‘Kafan’ was presented by the students. The effortless precise acting of ‘Ghisu’ ‘Madhav’ mesmerized the students. Chhattisgarhi folk dance ‘Panthi’ also tied the knot. The dance on the beat, the playing of the temple, the make-up of the characters were all enticing, the single anthem, the people of Mere Watan left no stone unturned to instil the feeling of nationalism among the audience. The performance of the one-acted “Spine bone” in which there was a collective participation of the students, was praised by all with a free voice. In the next phase of the program, Bharatendu ji’s play ‘Andher Nagri’ was also presented. In the end ‘Hum Honge Kamyaab’. The program ended with the song, Prof. Dinesh Rathore showed gratitude to the invited guests and the audience.

In the end it has to be said that the observers of the program were skilled chemists. The attendance of the audience from the beginning to the end of the program was commendable.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here