8. प्रबन्ध प्रक्रिया से क्या आशय है ? प्रबन्ध प्रक्रिया की सार्वभौमिक अवधारणा को संक्षेप में समझाइए | 8. What is meant by management process? Briefly explain the universal concept of management process.

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प्रबन्ध प्रक्रिया से आशय व परिभाषा (Meaning and Definition of Management  process)

प्रत्येक व्यावसायेको संस्था के कुछ निश्चित लक्ष्य होते हैं और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रबन्धक द्वारा प्रयुक्त प्रक्रिया ही प्रवन्ध प्रक्रिया है। प्रबन्ध वह व्यक्ति होते हैं जो अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर कार्य करते हैं और कार्य लेते हैं, जिससे कि किसी संस्था के लक्ष्यों की पूर्ति आसानी के साथ कर सके कार्य का बँटवारा, कर्मचारियों की क्रियाओं में समन्वय, उनके कार्यों पर नियन्त्रण रखना एवं उन्हें अधिक श्रेष्ठ कार्य करने के लिए अभिप्रेरित करना आदि प्रबन्धक के महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। प्रबन्धक के इन सब कार्यों को ही सामूहिक रूप से प्रबन्ध प्रक्रिया कहते हैं। अंतः प्रबन्ध प्रक्रिया से आशय संस्था के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए नियोजन, समन्वय, संगठन, अभिप्रेरणा, नियन्त्रण, निर्देशन, निर्णयन आदि कार्यों को करने से है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि प्रबन्धक अपने कार्यों को जिस विधि एवं पद्धति से करते हैं, वह विधि व पद्धति ही प्रबन्ध प्रक्रिया कहलाती है।

विलियम एच. न्यूमैन (William H. New man) के अनुसार, “प्रबन्ध-प्रक्रिया में संगठन, नियोजन, नेतृत्व मापन व नियन्त्रण आदि को सम्मिलित किया जाता है।

” कूण्टज एवं ओ डोनेल (Koontz and O’Donnel) के अनुसार, “प्रबन्ध एक प्रक्रिया है। जिसका सम्बन्ध निर्माण, नियोजन, संगठन, स्टाफिंग, निर्देशन, नियन्त्रण से है।”

प्रबन्ध प्रक्रिया के तत्व या अंग (Elements of Management Process)

प्रबन्ध प्रक्रिया के निम्नलिखित मुख्य तत्व हैं

(1) नियोजन (Planning) –नियोजन प्रबन्ध प्रक्रिया का प्रथम और महत्वपूर्ण अंग है। इसके अन्तर्गत संस्था के उद्देश्य निर्धारित किये जाते हैं तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए नीतियाँ, कार्यक्रमों, विधियों एवं व्यूह रचना का निर्माण किया जाता है। दूसरे शब्दों में, नियोजन, एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके द्वारा हम यह निश्चित करते हैं कि क्या करना है, कब करना है, कहाँ पर करना है, कैसे करना है, क्यों करना है तथा परिणामों का मूल्यांकन कैसे किया जायेगा। नियोजन के अन्तर्गत निम्न तत्वों को सम्मिलित किया जाता है

(i) लक्ष्य एवं उद्देश्य निश्चित करना, (ii) नीतियों का निर्माण करना, (iii) कार्यविधि निश्चित करना, (iv) नियम व उपनियमों का निर्माण करना, (v) बजट बनाना, (vi) कार्यक्रम निश्चित करना, (vii) मोर्चाबन्दी या व्यूह रचना का निर्माण करना।

(2) संगठन (Organisation)-नियोजन जिन उद्देश्यों व कार्यक्रमों को निर्धारित करता है, उनके क्रियान्वयन के लिए संगठन एक साधन या उपकरण है। प्रबन्धक इस कार्य के अन्तर्गत मानव, माल, मशीन एवं अन्य प्रसाधनों में परस्पर सम्बन्ध स्थापित करता है, जिससे कि न्यूनतम लागत पर निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सके।

(3) निर्णयन (Decision making)-प्रक्रिया के इस अंग में प्रबन्ध अनेक बातों के सम्बन्ध में यह निर्णय लेता है कि कोई कार्य कैसे सम्पन्न किया जाये, कर्मचारियों व अधिकारियों में मधुर समन्वय कैसे किया जाए, मानवीय और भौतिक साधनों पर किस प्रकार नियन्त्रण रखा जाए, कच्चे माल की प्राप्ति कहाँ से सस्ती, अच्छी व निरन्तर हो सकती है, बाजार विस्तार के लिए क्या कार्य किये जायें, आदि जिससे उपक्रम में पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुचारू रूप से हो सके।

(4) अभिप्रेरणा (Motivation)-इसके अन्तर्गत कर्मचारियों को खुश करने के लिए अनेक प्रेरणात्मक योजनाएँ बनायी जाती हैं। प्रलोभन दिए जाते हैं जिससे वे पूर्ण लगन, क्षमता व ईमानदारी से अपने कार्य को समय एवं न्यूनतम लागत पर सम्पन्न कर सकें।

(5) नियन्त्रण शक्ति (Controlling Power)- इसके अन्तर्गत प्रगति रिपोर्ट, सुधारात्मक कार्यवाही करके समूचे कार्य की समीक्षा किए जाने की व्यवस्था की जाती है जिससे व्यक्ति जो कार्य कर रहे हैं, उसकी जाँच का निरीक्षण होता रहे अर्थात् यह जानकारी प्राप्त हो सके कि वे अपने कार्यों को सन्तोषजनक ढंग से सम्पन्न कर रहे हैं या नहीं। साथ ही समय, श्रम, पूँजी, यन्त्र, कच्चे माल आदि की बर्बादी न हो यह जानकारी भी प्राप्त की जाती है।

  •           प्रबन्ध एक सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में

    (Management as an Universal Process)

प्रबन्ध को एक सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में व्यक्त किया गया है। कोई भी संस्था चाहे वह सामाजिक अथवा धार्मिक हो या राजनैतिक अथवा व्यावसायिक हो, को प्रबन्ध के सामान्य सिद्धान्तों का पालन करना पड़ता है। प्रबन्ध के सिद्धान्त यह बताते हैं कि किस प्रकार सामूहिक प्रयत्नों द्वारा लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। इसीलिए प्रबन्ध को एक सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में व्यक्त किया गया है।

प्रबन्ध की सार्वभौमिकता को मान्यता देने वाले प्रमुख प्रबन्धशास्त्रियों में ऐलन, लारेंस ए. एप्पले थियो हैमन, कूण्ट्ज एवं ओ’ डोनेल प्रमुख हैं। इनका मानना है कि प्रबन्ध सभी जगह व्याप्त है, चाहे व्यवसाय छोटा हो या बड़ा, एकाकी व्यापार हो, साझेदारी या कम्पनी, सभी में प्रवन्ध की अस्तित्व अवश्य मिलेगा। सरकार हो या किसी तहसील की नगरपालिका, स्कूल हो या विश्वविद्यालय सभी जगह प्रबन्ध विराजमान है। प्रबन्ध सर्वव्यापी है, क्योंकि इसका कार्य व क्षेत्र व्यापक है। टेलर ने प्रबन्ध की सार्वभौमिकता को स्पष्ट करते हुए कहा है-“वैज्ञानिक प्रबन्ध के प्राथमिक सिद्धान्त सभी -मानवीय क्रियाओं अर्थात् एक साधारण व्यक्ति की क्रियाओं से लेकर बड़े निगमों की क्रियाओं तक में लागू होते हैं।”


Meaning and Definition of Management Process

Every business organization has certain goals and the process used by the manager to achieve these goals is the management process. Management is the person who works and takes work in collaboration with other people, so that the goals of an organization can be easily accomplished, distribution of work, co-ordinating the actions of the employees, controlling their work and making them more Motivation to do the best work etc. are important functions of the manager. All these functions of the manager are collectively called management process. Inter-management process refers to planning, coordinating, organizing, motivating, controlling, directing, making decisions, etc. In this way we can say that the method and method by which the manager does his work, that method and method is called management process.

According to William H. Newman, “Organization, planning, leadership, measurement and control etc. are included in the management process.

According to Koontz and O’Donnel, “Management is a process. Which is concerned with construction, planning, organization, staffing, directing, controlling.

Elements of Management Process

Following are the main elements of the management process

(1) Planning – Planning is the first and most important part of the management process. Under this, the objectives of the organization are determined and policies, programs, methods and strategies are formulated to achieve them. In other words, planning is a program by which we decide what to do, when to do it, where to do it, how to do it, why to do it and how the results will be evaluated. The following elements are included in planning

(i) Determining goals and objectives, (ii) Formulation of policies, (iii) Determining procedure, (iv) Formulation of rules and bye-laws, (v) Budgeting, (vi) Programming, (vii) Build a barricade or an array.

(2) Organization – Organization is a means or tool for the implementation of the objectives and programs which are set by the planning. Under this work, the manager establishes a relationship between human, material, machine and other toiletries, so that the set goals can be achieved at the lowest cost.

(3) Decision making – In this part of the process, the management decides in relation to many things, how to complete a work, how to have a good coordination between the employees and the officers, how to control the human and material resources. Where can the raw material be available cheap, good and continuous, what should be done for the expansion of the market, etc., so that the pre-determined goals can be achieved smoothly in the enterprise.

(4) Motivation – Under this, many motivational plans are made to make the employees happy. Temptations are given so that they can complete their work with full dedication, ability and honesty on time and at minimum cost.

(5) Controlling Power – Under this, arrangements are made to review the entire work by taking progress report, corrective action, so that the investigation of the work that the person is doing can be monitored, that is, information can be received that Whether they are completing their tasks satisfactorily or not. Along with this, information is also obtained that there is no wastage of time, labour, capital, machinery, raw material etc.

Management as a Universal Process

(MANAGEMENT AS AN UNIVERSAL PROCESS)

Management is expressed as a universal process. Any organization whether social or religious or political or commercial has to follow the general principles of management. The principles of management describe how goals are achieved through collective efforts. That is why management has been expressed as a universal process.

The leading managers who recognized the universality of management include Allen, Lawrence A. Apple, Theo Hyman, Koontz and O’Donnell are prominent. They believe that management is pervasive everywhere, whether business is small or big, sole business, partnership or company, the existence of management will definitely be found in all. Be it the government or the municipality of any tehsil, school or university, management is present everywhere. Management is omnipresent because its function and scope are wide. Explaining the universality of management, Taylor said, “The primary principles of scientific management are applicable to all human activities, from the actions of an ordinary person to the actions of large corporations.”

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