मानव अधिकार के प्रकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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ऐतिहासिक रूप में मानवाधिकारों के संघर्ष का प्रमाण 15 जून 1215 से मिलता है, उस समय ब्रिटेन के तत्कालीन राजा द्वारा मानव अधिकारों के सम्बन्ध में एक दस्तावेज जारी किया गया, जिसे मैग्नाकार्टा (Magna Carta) कहा जाता है। इसके पश्चात् 1628 के अधिकार पायना पत्र तथा 1689 के अधिकार पत्र (Bill of Rights) मानवाधिकारों से सम्बन्धित दस्तावेज जारी किये गए। फ्रांस की क्रांति के बाद 1789 से संविधानों में मानव अधिकारों को शामिल किए जाने की प्रथा प्रारम्भ हुई। 1791 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रथम 10 संशोधनों के द्वारा नागरिकों को मूलभूत अधिकार प्रदान किये। मानव अधिकारों के पद का प्रयोग सर्वप्रथम अमरीकन राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने जनवरी 16 1941 में कांग्रेस को सम्बोधित अपने प्रसिद्ध संदेश में किया था जिसमें उन्होंने चार मूलभूत स्वतंत्रताओं पर आधारित विश्व की घोषणा की थी। इनको उन्होंने इस प्रकार सूचीबद्ध किया या – 1. वाक स्वातंत्र्य, 2. धर्म स्वातंत्र्य, 3. गरीबी से मुक्ति और 4. भय से स्वतंत्र, चार स्वतंत्रता, संदेश के अनुक्रम में राष्ट्रपति ने घोषणा की “स्वातंत्र्य से हर जगह मानव अधिकारों की सर्वोच्चता अभिप्रेत हैं। हमारा समर्थन उन्हीं को है, जो इन अधिकारों को पाने के लिए या बनाये रखने के लिये संघर्ष करते हैं।” “मानव अधिकारों के पद का प्रयोग फिर अटलांटिक चार्टर में किया गया था। तदनुरूप मानव अधिकारों के पद का लिखित प्रयोग संयुक्त राष्ट्र चार्टर में पाया जाता है, जिसको द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् सैन फ्रांसिस्को में 25 जून 1945 को अंगीकृत किया गया था। उसी वर्ष के अक्टूबर माह में बहुसंख्या में हस्ताक्षरकर्ताओं ने इसका अनुसमर्थन कर दिया। संयुक्त राष्ट्र चार्टर की उद्देशिका में घोषणा की गयी कि अन्य बातों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य “मूल मानव अधिकारों के प्रति निष्ठा को पुनः अभिपुष्ट करना होगा। तदुपरांत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र के ‘प्रयोजन’ मूलवंश, लिंग, भाषा या धर्म के आधार पर विभेद किये बिना मानव अधिकारों और मूल स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान की अभिवृद्धि करने और उसे प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने होंगे।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के सम्बन्ध में सर्वप्रथम ‘शांति स्थापना लीग’ नामक संस्था का गठन किया गया। इसी क्रम में 1920 में राष्ट्रसंघ (League of Nations) का गठन किया गया, परन्तु ये प्रक्रियायें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्थक साबित हुई।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने 1941 में मानवाधिकारों के सम्बन्ध में जबरदस्त वकालत की तथा उन्होंने मानव की चार मूलभूत स्वतंत्रताओं का उल्लेख किया। 1945 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के गठन के प्रारूप की चर्चा में मानवाधिकारों पर भी व्यापक बहस हुई। 1946 में रूजवेल्ट की अध्यक्षता में प्रथम मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई। उसके द्वारा

मानवाधिकार पर विश्वव्यापी घोषणा तैयार की गयी, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसम्बर 1948 को स्वीकार किया तथा बाद में 20 दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस घोषित किया गया। इस प्रस्ताव को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का नाम दिया गया। इस सम्बन्ध में 1945 तक दो प्रसंविदायें तैयार की गई 1. नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार प्रसंविदायें।

2. आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकार प्रसंविदायें । इन प्रसंविदाओं को 3 जनवरी तथा 23 मार्च 1976 से लागू किया गया। वर्तमान में मानवाधिकारों के सम्बन्ध में 43 सदस्यीय मानवाधिकार आयोग तथा 26 सदस्यीय उप आयोग का गठन किया गया। था जिसमें एक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के पद का सृजन किया गया ।

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