बाँध निर्माण के लाभों तथा समस्याओं की व्याख्या कीजिये।8

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बाँध निर्माण के लाभ तथा समस्याएँ (Benefit and Problems of Dam Construction)

बाँध वे स्थान है जहाँ पर किसी नदी या चलायमान जल स्रोत के मार्ग में बाँध बनाकर जलबहाव को रोककर जल संग्रह किया जाता है। बाँध निर्माण के उद्देश्य एवं लाभ-बाँध बनाने के प्रमुख उद्देश्य एवं लाभ निम्नानुसार है

(1) सिंचाई हेतु जल का संग्रह तथा वर्षभर जल की उपलब्धता बनाये रखना।

(2) पेय जल उपलब्ध कराना।

(3) जल को रोककर भूमिगत जल के स्तर को बढ़ाना।

(4) जंगली क्षेत्रों में जंगली जानवरों के लिए पेय जल उपलब्ध कराना।

(5) मृदा अपरदन को रोकना।

(6) बाढ़ के प्रकोप से सुरक्षा करना।

(7) जल विद्युत् उत्पादन करना।

(8) औद्योगिक इकाइयों को जलापूर्ति करना।

(9) दृश्यावलोकन के लिए प्राकृतिक सौन्दर्य आदि।

भारतवर्ष के प्रमुख बाँध-

1. भाखरा नांगल बाँध, पंजाब 2. हीराकुंड बाँध, उड़ीसा

3. तवा बाँध, मध्य प्रदेश 4. ककरापार बाँध, गुजरात 5. गंगरेल बाँध, बाँध परियोजनाओं से सम्बन्धित प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ छत्तीसगढ़

वृहद् जल विद्युत परियोजनाओं में बाँध निर्माण से पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभावों में निम्न पर्यावरणीय प्रभाव उल्लेखनीय हैं-

(1) बाँध के पीछे निर्मित जलाशय का एक बड़ा भू-भाग जल में डूब जाता है, जिससे डूबे क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या तो विस्थापित होती ही है, साथ ही जंगली जीव-जन्तुओं के प्राकृतिक निवास नष्ट हो जाते हैं तथा उस क्षेत्र में मिलने वाली कुछ विशिष्ट पादप प्रजातियाँ के लिये लुप्त हो जाती है।

(2) बाँध के नीचे की ओर स्थित नदी घाटी क्षेत्र की कृषि भूमि को प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाली उर्वरकता में कमी आ जाती है तथा उस क्षेत्र में होने वाले मत्स्य उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

(3) समुचित भूमि प्रबन्धन के अभाव में वृहद् स्तरीय जल विद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन से नदी अपवाह क्षेत्र में मृदा अपरदन में तेजी से वृद्धि होती है, जिससे नदी द्वारा भारी मात्रा में अवसाद जलाशय में जमा कर दिये जाते हैं। जलाशय में अवसादीकरण से जलाशय की प्रस्तावित आयु में कमी आने लगती है।

(4) बाँधों को निर्मित करने से नदी के पानी के वेग, मात्रा तथा तापमान में परिवर्तन होता है। इसका प्रतिकूल प्रभाव नदी में स्वच्छंद विचरण करने वाले जीव-जन्तुओं पर पड़ता है। जलाशय की निचली सतह में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण मछलियों तथा अन्य छोटे जलीय जीवों के लिये संकट उत्पन्न हो जाता है।

(5) बाँधों से सिंचाई के लिये नहरें निकाली जाती हैं। नहरों द्वारा लगातार सिंचाई करने से मिट्टी के क्षारीय लवण मिट्टी के ऊपर आ जाते हैं, जिससे नहर सिंचित मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता तथा उर्वरकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार की समस्या इन्दिरा गाँधी नहर द्वारा सिंचित राजस्थान राज्य में उत्पन्न हो रही है।

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